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वैसे तो इतिहास गवाह है आरएसएस और उसकी राजनितिक संगठन बीजेपी सदैव गाँधी परिवार के नेताओ पर तथ्यहीन हमला करने में आगे रही है और उनके खिलाफ एक लम्बी लड़ाई लड़ी है जिसमे अंततः सदैव उसे हार ही मिली है।

चाहे वो पंडित नेहरू के बारे में झूठ बोलकर, फेक फोटो डालकर या इतिहास को तोड़मरोड़ कर उनका चरित्रहनन करने की कोशिश हो।

या चाहे वो इंदिरा गाँधी के राजनीती में आने पर उन्हें गूंगी गुड़िया कहकर राजनीती में अपरिपक्व बताकर उनका विरोध करना हो या फिर राजीव गाँधी को राजनितिक तौर पर अज्ञानी कहना हो हर जगह आरएसएस ने अपना घिनौनापन दिखाया है।

आरएसएस का विरोध करने का सबसे घिनौना तरीका सोनिया गाँधी जी के खिलाफ रहा जब आरएसएस के लोगो ने फेक फोटोशॉप और झूठी कहानी की रचना करके लोगो में विद्वेष पैदा करने की कोशिश की।

जब से राहुल गाँधी ने राजनीती में कदम रखा है तब से ही आरएसएस उन्हें बच्चा कहकर तथ्यहीन चुटकुला, पप्पू जैसा शब्द दिया लेकिन उनपर कभी तथ्य के साथ कोई आरोप नही लगा पाई आरएसएस की राहुल के खिलाफ लड़ाई थोड़ी लंबी और मजबूती तौर पर है क्योंकि अन्य नेता जहाँ सिर्फ गरीबो का कल्याण और देश के विकास पर ही ध्यान देते थे।

वही राहुल गरीबो और किसानों के कल्याण तथा देश के विकास के साथ-साथ आरएसएस के जडो पर हमला करके आरएसएस को बेनकाब कर रहे हैं ।
जिस कारण आरएसएस बौखला गई है तभी तो प्रधानमंत्री जैसे पद पर रहने के बाबजूद भी मोदी दिन-रात सिर्फ राहुल गाँधी की मजाक उड़ाने और तथ्यहीन बात कर उनकी व्यक्तित्व को नीचा दिखाने में लगे रहते हैं।

✍ सिंह शिल्पी

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