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कर्नाटक में बहुमत परीक्षण में भाजपा की हुई किरकिरी अभी तक लोग भूले भी नहीं थे कि लग रहा है कि भाजपा को अब गोवा में क्रिकेट का सामना करना पड़ सकता है कर्नाटक हाथ से निकलने के बाद बीजेपी सरकार पर गोवा में खतरे के बादल मंडरा रहे है,राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल गोवा फारवर्ड ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द खनन मामले को नहीं सुलझाया गया तो पार्टी राज्य सरकार को समर्थन देने पर पुनर्विचार कर सकती है।

गोवा फारवर्ड के अध्यक्ष व शहरी व ग्रामीण नियोजन मंत्री विजय सरदेसाई ने यहां कहा कि उनसे जल्द से जल्द इस संकट को सुलझाने की गुजारिश करता हूं। अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो हम अपने समर्थन के बारे में दोबारा सोचेंगे।

40 सीटो वाली गोवा विधानसभा के लिए 2017 में हुए चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी जिसमें कांग्रेस ने 17 भाजपा ने 14 गोवा फॉरवर्ड ने 3 महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी ने 3 एनसीपी ने एक और निर्दलीय ने 2 सीट जीत दर्ज की थी जिसके बाद देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस्तीफा दे दिया और किसी तरह भाजपा ने जोड़-तोड़ कर सरकार बनाई जिसमें भाजपा के 14 विधायक गोवा फॉरवर्ड के तीन महाराष्ट्रवादी गोमांतक के तीन और एक एनसीपी के और दो निर्दलीय विधायकों ने समर्थन से सरकार बनाया। एनसीपी ने बीजेपी को समर्थन देने के कारण अपने विधायक को पार्टी से से निकाल दिया और वह भी निर्दलीय के रूप में सरकार को समर्थन दिया।

अब यदि गोवा फारवर्ड सरकार से समर्थन वापस लेती है फिर भाजपा को सरकार बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा क्योंकि भाजपा गठबंधन के 20 सीट ही रह जायेंगे और महाराष्ट्रवादी गोमांतक और भाजपा के रिश्ते में तल्खी हमेशा बनी रहती है।

अब यदि कांग्रेस इस मौके का फायदा उठाते हुए महाराष्ट्रवादी गोमांतक और गोवा फॉरवर्ड से गठबंधन कर और तीन निर्दलीय विधायकों से बातचीत कर सरकार बनाने की तरफ कदम बढ़ाती है तो निश्चित तौर पर भाजपा के लिए यह सबसे बड़ा झटका होगा क्योंकि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर भी बीमार चल रहे हैं और वह 2017 के तरह सक्रिय नहीं हैं इसलिए अगर बहुमत सिद्ध करने की बात गोवा में उठती है तो निश्चित तौर पर भाजपा को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ेगा और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो चुकी है कि कांग्रेस इस मौके का फायदा उठाने के लिए रणनीति बना रही है और कांग्रेस के हाईकमान इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषकों से चर्चा कर अन्य दलों के विधायकों से जुड़ने का कोशिश कर रहे हैं।

✍ शिल्पी सिंह

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