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एक आदमी लाखों का सूट बूट पहनकर कहता है की मैं गरीब हूँ,और हम उसे गरीब मान लेते है। सीबीआई, एन आइ ए जैसी एजेंसियां जिस आदमी के हाथों की कठपुतली हैं वह आदमी कह रहा है की मुझे सताया जा रहा है। और हम मान लेते हैं जो संसद मे पूर्ण बहुमत मे है बीस से ज्यादा राज्यों मे सरकार है वह कहता है मुझे काम नही करने दिया जा रहा है
और हम मान लेते हैं। जो भ्रष्टाचार मे जेल मे रह चुके लोगों को टिकट देता है फिर कहता है मै भ्रषटाचार के खिलाफ लड़ रहा हूं। और हम मान लेते हैं जिसके शासन मे सबसे ज्यादा हमारे सैनिक शहीद हुए हैं वह कहता है दुश्मन हमसे कांप रहा है और हम मान लेते हैं। जिसके राज मे सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है और वह कहता है हमने किसानों की आय दुगुना कर दी है। और हम मान लेते हैं जो आदमी ग्रेजुएट युवाओं के पकौड़ा तलने को रोजगार कहता है और हम मान लेते हैं। जिसके राज्य मे सबसे ज्यादा बलात्कार हो रहे हैं और वह कहता है हम बेटी बचाव अभियान.चला रहे हैं और हम मान लेते हैं। जो सुंदर भविष्य का सपना दिखाकर सत्ता मे आया हो और चार सौ साल पहले के भूतकाल मे हमे घुमा रहा हो और हम उसकी बातों में फंस जाते हैं।

मोदीजी आप 15 मिनट भारतीय गणराज्य के प्रधान मंत्री की तरह बोल कर दिखाओ। जैसी सभ्य और शालीन भाषा में आपके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री बोला करते थे।
दरअसल आपके ये बचकाने चैलेंज उन गंभीर सवालों के जवाब हैं जो राहुल ने उठाए थे. राहुल गांधी ने कहा था कि मुझे 15 मिनट राफेल और नीरव पर बोलने दो तो प्रधानमंत्री सामने खड़े नहीं रह पाएंगे।
मगर आपने राफेल और नीरव को इग्नोर कर के 15 मिनट को पकड़ लिया। बैसे आपके भक्तों को आपकी यही अदा पसंद है। और आप भी जानते हो किन बेतुकी बातों पर भक्त ज्यादा तालियां बजाते हैं। अपने भक्तों की खुद से अपेक्षाओं को भगवन खूब समझते हैं। आपको पता है कि भक्तगण आपसे राहुल के सबालों का जबाब नहीं एंटरटेनमेंट चाहते हैं तो वही आप करते हैं।

राहुल गांधी कागज़ देखकर पढ़ते हैं या नहीं मुझे जानकारी नहीं है परन्तु मैं इतना कह सकती हूँ कि मोदीजी अगर आप कागज देख कर पढते तो भारत के प्रधानमंत्री के पद की गरिमा बनी रहती क्योंकि तब आप तक्षशिला को पाकिस्तान की जगह भारत में बताने से बच सकते थे, चंद्रगुप्त को मौर्य की जगह गुप्त वंश की वंशावली में जोड़ने से बच सकते थे ,श्यामा प्रसाद मुखर्जी को इंग्लैंड में मरवाने की बेवकूफी से बच सकते थे , उनकी अस्थियां न लाने का इल्जाम नेहरूजी पर लगाने से बच सकते थे। आज़ादी के वक्त डॉलर और रुपये की वैल्यू एक बताकर लोगों को गुमराह करने से भी बच सकते हैं। भारतीय मतदाताओं की संख्या 600 करोड़ बताने से बच सकते थे। एक हफ्ते में 8 लाख 50 हजार शौचालय बनाने से बच सकते थे। और तो और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मोहनलाल कहने से बच सकते थे।
खुद ही सोचिए मोदीजी, कागज़ में कुछ लिखकर लाने के कितने लाभ हैं!!
दरअसल जबसे गुजरात में 99 के फैरे में फंसे हैं तब से साहेब टेंशन में है ऊपर से गोरखपुर की हार ने हिला दिया है। मोदीजी अब हल्की फुल्की कॉमेडी करके भक्तों को बहलाए रखना ही आपके पास एकमात्र ऑप्शन है। सो करते रहिए।

मोदी जी,
कैसा भाषण है आपका ?
राहुल जी ऐसे है,वैसे है !
कॉंग्रेस ने यह किया,वो किया!
यह सब कहने के लिए 15 से 21
रैलियाँ बढ़ाईं ?
अपने MLAs के बारे मे भी कुछ कहो जो सब बलात्कारी,भ्रष्टाचारी है!
कभी अपनी भी कुछ उपलब्धियाँ गिनवाओ ?
विपक्ष की बुराइयाँ गिनवाने को ही आप भाषण कहते है ? आइए मोदी जी के डिजिटल इंडिया में घूमते हैं, जगह जगह देखते हैं!
बच्चे भुखमरी से परेशान हैं!
युवा रोजगार के लिए तड़प रहा है!
किसान भाव के लिए आत्महत्या कर रहा है!
मध्यमवर्गीय प्राणी का जीवन यापन दुर्लभ हो गया है!
दलित रोजाना मारा जा रहा है!
छोटा दुकानदार सबसे ज्यादा परेशान हैं! सरकार चलाने के लिये दिमाग चाहिये होता है, मुँह नही और मोदी जी के पास दिमाग हे नही सिर्फ़ मुँह है ! कोई शक ??

मोदी जी तो अब मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघने पर आमादा हैं.।
और तो और, अब तो वो सड़क छाप गुंडों की तरह उस कांग्रेस को धमकी देने पर आमादा हो गया जिसकी शालीनता के आगे अंग्रेज हमारे गुलाम देश को आज़ाद कर हिंदुस्तान से ही भागने पर मजबूर हुए।
होश में आइये मोदीजी, “कांग्रेस और कांग्रेसियों को धमकाना बंद करिये, जिनके पूर्वज अंग्रेजों के आगे मिमिया चुके हो आज उसका वंशज कांग्रेस को धमका रहा हैं ये बड़ी शर्म की बात हैं।

मोदी कहते है कि देश में सबसे ज्यादा युवा है लेकिन वो ये कभी नहीं कहते की सबसे ज्यादा युवा बेरोजगार हमारे देश में हीं है! जबरदस्ती कब तक कहलवाओगे अच्छे दिन का जुमला मोदीजी ..देश की जनता आप के जुमलो को समझ गयी ..भाजपा का असली चेहरा और नीयत दोनो को पहचान गयी अच्छे दिन कहाँ है।
मित्रों,
कर्नाटक में धुँआधार चुनाव प्रचार के दौरान…
क्या नरेन्द्र मोदी ने एक बार भी पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों का ज़िक्र किया?
नहीं…!
क्या मोदी ने एक बार भी ‘नोटबंदी’ और ‘जीएसटी’ का ज़िक्र किया?
नहीं…!
क्या एक बार भी हरेक को 15-15 लाख रुपये देने की बात की?
नहीं…!
क्या एक बार भी बताया कि चार साल में कितना काला धन वापस आ चुका है?
नहीं!
क्या एक बार भी बताया कि सालाना दो करोड़ रोज़गार का क्या हुआ?
नहीं…!
क्या एक बार भी बताया कि उनकी नीतियों की वजह से अर्थव्यवस्था का सत्यानाश हो चुका है?
नहीं…!

क्यों कुछ भी नहीं बताया भाई? इन सभी मोर्चों पर तो आपकी सरकार ने शानदार उपलब्धियाँ हासिल की हैं! फिर मुँह से बोल क्यों नहीं फूटे!
अरे, आपका तो सारा ध्यान ही राहुल गाँधी का चरित्रहनन करके उनका प्रचार करने पर था! क्या जनता ने आपको सिर्फ़ राहुल गाँधी के बारे में बात करने के लिए सत्ता तक पहुँचाया था? अंग्रेजो की गुलामी करने वालो संघियो तुम लोगो को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटना चाहिए।
नफरत तुम लोग फैलातें हो और भुगतना बेचारे गरीबो को पड़ता है,जो राजनीति से कोसों दूर होते है।राष्ट्र निर्माण नही तुम लोग राष्ट्र को खतरे में डाल रहे है।तुम सब अंग्रेजो के वफादार कुत्ते थे,और रहोगे।

✍ शिल्पी सिंह

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