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कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर शनिवार (19 मई) को कर्नाटक विधानसभा में बहुमत परिक्षण कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने फैसले के मुताबिक बीजेपी की येदुरप्पा सरकार को 28 घंटों के भीतर 111 विधायकों के समर्थन का जुगाड़ करना होगा।
बीजेपी के पास अभी 104 विधायकों की संख्या है। सदन में बहुमत साबित करने के लिए बीजेपी को 7 और विधायकों की ज़रूरत है। ऐसे में यह अटकलें अब तेज़ हो गई हैं कि बीजेपी विधायकों को खरीदने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। एक पार्टी देश के लोकतंत्र को लगातार कमजोर करने का काम कर रही है। सभी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी तरह से इस्तेमाल कर रही है और कोई अफसोस, कोई सफाई भी नहीं दे रही। दरअसल, उसे सफाई देने की जरूरत ही नहीं पड़ रही क्योंकि उसका काम करने के लिए बहुत लोग हैं जो बिना कहे सफाई दिए जा रहे हैं। इनमें सिर्फ उसके समर्थक नहीं बल्कि बड़े पत्रकार, बैंकर, बुद्धिजीवी और युवा शामिल हैं जिन्हें कोई मतलब नहीं कि सरकार रोजगार क्यों पैदा नहीं कर पा रही? उन्हें नीरव, माल्या, मेहुल चौकसी, राफेल या व्यापम से भी कोई मतलब नहीं। यह वर्ग बस किसी भी कीमत पर अपनी पार्टी को जीतते हुए देखना चाहता है क्योंकि उसे समझाया दिया गया है कि ‘हम ही तुम्हारी आखिरी उम्मीद हैं।’ भाजपा का यह नया समर्थक वर्ग उसके हर गलत काम का बचाव करता नजर आता है। जैसे ही कोई सवाल करता है यह तुरंत उसे याद दिलाता है कि जैसा कांग्रेस ने किया वैसा उसके साथ हो रहा है; जो कांग्रेस ने बोया उसी को काट रही है! अरे भाई, कांग्रेस के साथ जो हो रहा है वह ठीक है पर आप यह तो देखिए कि आपके साथ क्या हो रहा है? आपके लोकतंत्र का आपकी सहमति से गला घोंटा जा रहा है और आप खुश हो रहे हैं, समर्थन में दलीलें दे रहे हैं। कल को अगर भाजपा इमरजेंसी लगा दे तब भी आप यही कहेंगे कि कांग्रेस ने भी तो लगाई थी, अब भाजपा ने लगा दी तो क्या गलत किया? कुछ गलत नहीं किया, लेकिन जिस तरह एक आदमी को इतना ताकतवर बना दिया गया है कि चुनाव के बाद अगर पार्टी को बहुमत न मिले तो कहा जाता है कि ‘अमित शाह हैं न, सरकार बना ही लेंगे!’ लोग सोचते हैं कि अमित शाह ताकतवर बन रहे हैं तो इससे हमें क्या नुकसान है! वे यह भूल रहे हैं कि जो आदमी ताकत पाने के लिए आप से हाथ मिलाएगा वह ताकत पाने के बाद पलट कर जरूर आएगा। और फिर वह अपने ‘मन की बात’ करेगा जो आपको सुननी ही पड़ेगी। भाजपा ने गोवा, मेघालय, मणिपुर और अब कर्नाटक में जिस तरह सरकार बनाई है उसने दिखा दिया कि सत्ताधारी पार्टी जब चुनावों में खेलती है तो वह सिर्फ ग्यारह खिलाड़ियों के साथ नहीं खेलती बल्कि दो अंपायरों के साथ भी खेलती है!
एक चीज याद रखिए जस्टिज काटजू ने कहा था की 90% भारतीय मूर्ख हैं, और ये बात सच भी है ।
हमारी मूर्खता का पैमाना ये है की एक आदमी लाखों का सूट बूट पहनकर कहता है की मैं गरीब हूं और हम उसे गरीब मान लेते हैं ।
सीबीआई, एन आइ ए जैसी एजेंसियां जिस आदमी के हाथों की कठपुतली हैं वह आदमी कह रहा है की मुझे सताया जा रहा है और हम मान लेते हैं ।
जो संसद मे पूर्ण बहुमत मे है बीस से ज्यादा राज्यों मे सरकार है वह कहता है मुझे काम नही करने दिया जा रहा है और हम मान लेते हैं ।
जो भ्रष्टाचार मे जेल मे रह चुके लोगों को टिकट देता है फिर कहता है मै भ्रषटाचार के खिलाफ लड़ रहा हूं और हम मान लेते हैं ।
जिसके शासन मे सबसे ज्यादा हमारे सैनिक शहीद हुए हैं वह कहता है दुश्मन हमसे कांप रहा है और हम मान लेते हैं ।
जिसके समय मे सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है और वह कहता है हमने किसानों की आय दुगुना कर दी है और हम मान लेते हैं ।
जिसके समय मे पकौड़ा तलने के लिए कहा जाता है और हम.उसे रोजगार मान लेते हैं ।
जिसके राज्य मे सबसे ज्यादा बलात्कार हो रहे हैं और वह कहता है हम बेटी बचाव अभियान.चला रहे हैं और हम मान लेते हैं ।
जो सुंदर भविष्य का सपना दिखाकर सत्ता मे आया हो और चार सौ साल पहले के भूतकाल मे हमे घुमा रहा हो और फिर भी हम खुश हैं ।
मित्रों ये सब हमारी मूर्खता की वजह से हो रहा है ।
पर भक़्त को ये सब गलत ही लगेगा।

✍ शिल्पी सिंह

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