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राहुल गांधी ने सिंगापुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया कार्यक्रम को लेकर उन पर कटाक्ष किया और कहा कि अच्छा है कि उनके कार्यक्रम के सवाल-जवाब पहले से तय होते हैं क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो ‘हम सभी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा हो जाती। ’’

राहुल ने मोदी के इस कार्यक्रम का एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट करते हुए कहा

‘(मोदी) ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जो बिना पहले से तैयारी किए सवालों का जवाब देते हैं, लेकिन उनके ट्रांसलेटर के पास वो सवाल और उनके जवाब पहले से मौजूद होते हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अच्छा है कि वो वास्तविक प्रश्नों का सामना नहीं करते. अगर ऐसा होता तो हम सभी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा हो जाती.’’

राहुल गांधी ने जो ट्वीट किया है उसमें मोदी की ट्रांसलेटर मोदी के जवाब को अंग्रेजी में बता रही हैं. लेकिन वो ऐसी जानकारी देती हैं जो मोदी ने जवाब में नहीं बोली थीं. दावा किया जा रहा है कि एक प्रश्न के जवाब में प्रधानमंत्री ने जो जवाब दिया और उनकी ट्रांसलेटर ने वहां मौजूद दर्शकों के सामने जो कहा, उनमें अंतर था. पीएम मोदी के जवाब की तुलना में ट्रांसलेटर का जवाब काफी लंबा था. कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री का जो वीडियो पोस्ट किया है वो सिंगापुर के नानयांग टेक्नॉलजी यूनिवर्सिटी (एनटीयू) में हुई बातचीत के कार्यक्रम का है।

दावा किया जा रहा है कि एक प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री ने जो जवाब दिया और वो उनकी ट्रांसलेटर ने वहां मौजूद दर्शकों के सामने जो कहा, उससे अलग था। दरअसल, राहुल गांधी पिछले दिनों पीएम मोदी की सिंगापुर यात्रा के दौरान वहां की नान्यांग टेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट और छात्रों से हुए उनकी बातचीत की तरफ इशारा कर रहे थे। बातचीत में पीएम मोदी सवालों के जवाब हिंदी में दे रहे थे और एक महिला अनुवादक उनके जवाबों का अनुवाद कर रही थी। राहुल गांधी ने उसी का वीडियो शेयर किया है। जिसमे मोदी ने इस कार्यक्रम में एक सवाल के जवाब में जो कहा और उसके बाद अनुवादक ने उसका जो अनुवाद किया, उसे सुनकर ज्यादातर लोगों का कहना है कि सवाल-जवाब पहले से तय थे।

पीएम मोदी ने एक सवाल का संक्षिप्त जवाब दिया था, लेकिन अनुवादक ने उस जवाब का लंबा अनुवाद कर दिया और कई ऐसी चीजें भी कह डालीं जो पीएम मोदी ने कहा भी नहीं था।
जिस तरह से अनुवादक ने जवाब दिया, उसे देखकर ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने ऐसा भूलवश किया था। सबसे दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी ने अनुवादक को रोका तक नहीं।
एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि भारतीय प्रधानमंत्री के वक्तव्य का इतने अलग तरीके से अनुवाद होने पर भी भारतीय दल ने ना कोई स्पष्टीकरण दिया और न ही कोई कार्रवाई की।

✍ शिल्पी सिंह

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