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एक फर्जी सेक्स सीडी बनाने का गिरोह मंत्री मूणत की एडिटेड सीडी लेकर बाजार में घूम रहक था, इसमें एक मृत आरोपी के दो भाई, बीजेपी नेता संजय मुरारका शामिल थे।

यह सीडी किसी माध्यम से सरकार तक पहुंचानी थी और सीडी का डर दिखाकर पैसे उगाही करने थे यह काम करने को कोई तैयार नहीं हो रहा था। सीडी बनाने वालों ने निजी चैनल को सीडी बेचनी चाही, चैनल ने इनकार कर दिया। फिर चैनल के मालिक ने यह बात सरकार को बताई की एक सीडी है जिससे सरकार बदनाम होगी।

सीडी की सत्यता जानने सीएम के निजी सचिव मुम्बई फ़िल्म स्टूडियो गए। वहां देखी की मंत्री मूणत की सीडी है

यह बात किसी तरह पत्रकार वर्मा को पता चली तो वह वीडियो उन्हें मिल गई। वे सीडी पर इन्वेस्टिगेशन करने लगे।

ईधर सरकार को भनक लगी कि पत्रकार वर्मा के पास किसी की सीडी है तो सरकार को लगा कि यह सीडी सत्ता पुत्र की हो सकती है, या मूणत की भी । आनन फानन में एक प्यादे प्रकाश बजाज ने ब्लैकमेलिंग की पंडरी में रिपोर्ट लिखाई।

धूमकेतू बनकर पुलिस दिल्ली पहुंची और विनोद वर्मा को आधीरात गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी की खबर रायपुर पहुंची तो भूपेश बघेल ने पत्रकारों को अपने घर पर प्रतिक्रिया देने बुलवाया। पत्रकारों को बघेल ने सीडी दिखाते हुए कहा कि, देखो जिस सीडी के लिए गिरफ्तार किया गया है वह सीडी पहले से बाजार में व्हाट्सएप्प में घूम रही है इसलिए विनोद वर्मा को गिरफ्तार करना सरकारी ज्यादती है।

इस मामले में मंत्री मूणत की प्रतिष्ठा धूमिल हुई। उन्होंने सीएम पर दबाव बनाकर सीबीआई जांच की मांग की। सीएम जानते थे इसमे आखिर में बीजेपी के नेता ही फंसेंगे, लेकिन उन्हें लगा पोलिटिकल माइलेज लेने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है सो सीबीआई जांच स्वीकार कर ली

सीबीआई अपनी जांच करती रही और इसी बीच मुख्य गवाह रिंकू खनूजा ने आत्महत्या की या उसकी हत्या कर दी गई,( इसकी जांच नहीं हुई है) सीबीआई की जांच धीमी पड़ गई

फिर 21 सितम्बर को अमित शाह रायपुर आए, उन्होंने कहा इन केन प्रकारेण किसी भी तरह चुनाव जीतना है, सीबीआई ने 25 को बीजेपी नेता कैलाश मुरारका , कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल समेत सभी को कोर्ट बुलाया जिसके बाद बघेल पहुंचे मगर मुरारका नहीं पहुंचे।

जिस FIR और विनोद वर्मा को गिरफ्तार किए जाने के खिलाफ बघेल ने सीडी हाथ मे लेकर बयान दिया था उस पर ब्लैकमेलिंग की उस धारा को सीबीआई ने झूठा पाया। वह धारा हटा ली गई।

कोर्ट ने सबको जमानत दे दी, विजय भाटिया को जमानत मिल गई। भूपेश बघेल ने वकील नहीं लिया, जमानत की अर्जी भी नहीं दी। अपने निर्दोष होने की बात कहकर उन्होंने सरकार के सामने झुकने की जगह जेल जाना पसंद किया।

सरकार को लगा कि बघेल बेल लें लेंगे, फिंर चुनाव भर उन्हें बेल पर है कहकर बदनाम करेंगे। भूपेश ने जेल जाना चुनकर उनकी मंशा पर पानी फेर दिया

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