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2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने समाज के तमाम तबकों से चर्चाओं सिलसिला शुरू कर दिया है. इसी के तहत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश के तमाम शिक्षाविदों से चर्चा कर रहे हैं.

शनिवार को दिल्ली के सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में देश के तमाम हिस्सों से आए कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से आए लगभग दो से ढाई हजार लेक्चरर और प्रोफेसरों ने भाग लिया है.

राहुल गांधी ने यहां शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य शिक्षकों के हाथ में ही है. इसलिए शिक्षा व्यवस्था की अपनी एक आवाज होनी चाहिए और अपनी एक विचारधारा होनी चाहिए.

कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने आज प्रोफेसरो से मुलाकात कर संवाद किया जिसमे उनके भाषण के प्रमुख अंश –

– मैं यहां शिक्षक के तौर पर नहीं आया हूं, बल्कि छात्र के रूप में आया हूं ताकि आपके विचारों को सुन सकूं

– देश की शिक्षा प्रणाली के संबंध में मेरी भी सोच है, लेकिन मैं शिक्षा प्रणाली के संबंध में आपके विचारों को जानना चाहता हूं, क्योंकि आप इस लड़ाई को लड़ रहे हैं

– जहां तक भारतीय शिक्षा प्रणाली का संबंध है, दो चीजें ऐसी हैं जिन पर समझौता नहीं हो सकता : शिक्षकों को अभिव्यक्त करने में सक्षम होना चाहिए और शिक्षकों को उनके अपने भविष्य के लिए दृष्टिकोण दिया जाना चाहिए

 

– हर कोई भारतीय शिक्षा प्रणाली की सफलता के बारे में बात करता है। जब श्री ओबामा ने कहा कि अमेरिका के लिए असली चुनौती भारत से आने वाले इंजीनियर / डॉक्टर / वकील हैं, तो वो यहाँ की बिल्डिंग की नहीं, बल्कि भारत के शिक्षकों की प्रशंसा कर रहे थे

– हमारी प्रणाली की नींव सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली है। इसका मतलब यह नहीं है कि निजी संस्थानों के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन पथप्रदर्शक निश्चित तौर पर सार्वजनिक संस्थान होने चाहिए

– सरकार को शिक्षा को रणनीतिक संसाधन के तौर पर देखना चाहिए और इसके लिए पर्याप्त पैसा देना चाहिए। आजादी के बाद से हर सरकार ने सफलता हासिल की है। आज शिक्षकों पर एक ख़ास विचारधारा थोपी जा रही है, और मैं इसे समझता हूं

– एक अरब से अधिक लोगों का देश शायद एक ख़ास सोच पर नहीं चलाया जा सकता है। दरअसल हम अपने लोगों को अभिव्यक्ति की इजाजत देते हैं, यही हमारे देश की ताकत है

– शिक्षक देश के बेहद महत्वपूर्ण संसाधन हैं, जो काफी कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं

– स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा ये दो ऐसी चीजें हैं, जो वास्तव में किसी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती हैं

– कोई यदि विश्वविद्यालय में पढ़ा रहा है तो उसको अपने भविष्य के प्रति स्थायित्व दिखना चाहिए। उसके दिल में ये नहीं होना चाहिए कि कल मुझे नौकरी से निकाला जा सकता है

– हमारा घोषणा पत्र बन रहा है। एक प्रतिनिधिमंडल लेकर आप घोषणा पत्र बनाने वालों को साफ तौर पर बताईए कि आपकी क्या उम्मीदें हैं, आप क्या चाहते हैं

– अमित शाह ने भारत के लिये कहा ‘ये सोने की चिड़िया है’, यानी वो भारत को एक प्रोडक्ट के तौर पर देखते हैं, ये आरएसएस और भाजपा का दृष्टिकोण है

– मेरे लिए भारत के साथ बातचीत किए बिना भारत का नेतृत्व करना असंभव है। सोच ये है कि, आपके दिल में जो कुछ भी है वो मुझमें प्रतिबिंबित होना चाहिए

– हम आरएसएस द्वारा ‘सोने की चिड़िया’ पर कब्ज़ा करने की कोशिश के खिलाफ लड़ रहे हैं। शिक्षण संस्थान, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग इन सभी पर धीरे-धीरे कब्जा किया जा रहा है

– अपने भाषण में मोहन भागवत ने कहा, “हम राष्ट्र को संगठित करने जा रहे हैं”। वो देश को संगठित करने वाले कौन होते हैं? देश खुद अपने को संगठित करेगा। अगले कुछ महीनों में उनका सपना चकनाचूर हो जाएगा

 

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