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देश के इतिहास में ये पहली बार है कि किसी जांच एजेंसी ने अपनी जांच एजेंसी के खिलाफ छापेमारे शुरू कर दी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने राकेश अस्थाना और अलोक वर्मा को तलब किया मगर दोनों के बीच बढ़ चुकी दूरियां कम होंगी, इसकी उम्मीद कम ही नज़र आती है।
मोदी के जाने की आहट : टॉप ब्यूरोक्रेट्स ने मोदी को ठेंगा दिखाना शुरु कर दिया
3 करोड़ की घूसखोरी में फंसे सीबीआई के राकेश अस्थाना पीएम मोदी और भाजपा के तड़ीपार अमित शाह के बेहद करीबी हैं। मोदी जी के कहने पर ही सीबीआई में उन्हें नम्बर 2 यानी स्पेशल डायरेक्टर की पोस्ट दी गई उन्होंने ही गोधरा जांच से मोदी को बचाया तो अब एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पीएमओ के हस्तक्षेप से अस्थाना भी गिरफ्तारी से अभी तक बचे हुए हैं।

गुजरात के सूरत में पुलिस कमिश्नर रहने के समय से ही घूसखोर अस्थाना को मोदी वाला पीआर का चस्का लगा हुआ है और उसने बकायदा वीडियो बनवाकर अपनी तुलना सरदार पटेल और स्वामी विवेकानंद से की। लेकिन मोदी, अमित शाह और तमाम बड़े-बड़े नामों का तमगा लगाये भ्रष्टाचारी अस्थाना की मूर्ति को सीबीआई निदेशक ने एक झटके में जमींदोज कर दिया। आलोक वर्मा ने अचानक सौ सुनार की ओर एक लोहार की तर्ज पर चोट मारी।

हकबकाये मोदी ने तुरंत सीबीआई निदेशक को बुलावा भेजा लेकिन सीबीआई निदेशक वर्मा ने साफ कर दिया कि इस घूसखोर अस्थाना को अब सीबीआई में और बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। मोदी को जो उखाड़ना है उनका उखाड़ लें।

मोदी और शाह के ईशारों पर चलने वाले राकेश अस्थाना के निशाने पर सारे विपक्षी दल थे। अमित शाह के कहने पर ही अस्थाना ने मेडिकल कॉलेज घूसखोरी में रंगेहाथ 2 करोड़ की वसूली की रकम ऐंठते पकड़े गये इंडिया टीवी के बड़े पत्रकार दलाल का नाम एफआईआर से निकाल दिया और रंगेहाथ पकड़े जाने के बावजूद उसे छोड़ दिया।क्योंकि उसके पकड़े जाने पर जांच की आंच खुद अमित शाह तक पहुंच जाती और 200 करोड़ की वसूली का पूरा खेल खुल जाता।

हालांकि मोदी सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से बहुत नाराज हैं और चाहते हैं कि उनकी छुट्टी हो मगर प्रधानमंत्री उनको बर्खास्त नहीं कर सकते। उधर टॉप ब्यूरोक्रेट्स और आम नौकरशाही में फैली चर्चा की मानें तो अधिकारी जानते हैं कि 2019 में मोदी लौटकर सत्ता में नहीं आ रहे। इसलिये अब अफसरों ने मोदी को ठेंगा दिखाना शुरु कर दिया। सीबीआई निदेशक वर्मा ने भी मोदी को साफ कर दिया कि अब और नहीं चलेगा ये सब। घूसखोरों को सीबीआई से बाहर जाना ही होगा।

खैर, मोदी की गढ़ी हुई झूठ और झूठी ईमानदारी की मूर्तियां एक-एक कर गिरना शुरु हो चुकी हैं।अब तो तय है कि 2019 के चुनावों में मोदी ईमानदारी का ढोल कतई नहीं पीट पायेंगे और अंततः उनको बेआबरु होकर सत्ता छोड़नी ही होगी।

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