‘बूथ जीता-चुनाव जीता’ नारा रहा फ्लॉप, अमित शाह और राकेश सिंह को सुनने 1200 के बदले पहुंचे 250 कार्यकर्ता

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चुनाव से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जबलपुर मध्य विधानसभा क्षेत्र में बूथ लेवल कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. हालांकि, यह कार्यक्रम उस हिसाब से सफल होता नहीं दिखा, जैसा पार्टी को अंदाजा था. कार्यक्रम में 1200 की बजाय महज 250 कार्यकर्ता ही पहुंचे. इस कार्यक्रम में एलईडी के जरिये कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया था.

‘बूथ जीता-चुनाव जीता’ नारे के साथ अमित शाह ने प्रदेश विधानसभा चुनावों का आगाज किया था. बूथ लेवल कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाएं घर-घर तक पहुंचाने के लक्ष्य से हर बूथ से पांच लोगों को आमंत्रित किया गया था. जबलपुर की मध्य विधानसभा सीट के इस कार्यक्रम में लगभग 1200 कार्यकर्ताओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा था. इसके हिसाब से इंतजाम भी किए गए थे. लेकिन, शाह का भाषण सुनने महज 250 लोग ही पहुंचे, जिसमें ज्यादातर बड़े नेता थे. कार्यक्रम में करीब एक तिहाई कुर्सियां खाली पड़ी रहीं.

अमित शाह अपने हाईटेक भाषण के दौरान कार्यकर्ताओं को सरकारी योजनाएं घर-घर पहुंचाने की बात कर रहे थे. इस दौरान कार्यकर्ताओं का मन भाषण सुनने की बजाय मोबाइल चलाने में लगा था. हालांकि, बीजेपी प्रत्याशी शरद जैन इस घटना को नकारते हुए नजर आए. उनका कहना है कि अमित शाह का यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा. सभी आमंत्रित कार्यकर्ता भाषण सुनने मौजूद रहे।
जबकि सच ये है भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह की जनसभा में 200 रु देकर महिलाओं को लाया गया।

उधर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह जब प्रचार के लिए जब मंडला पहुंचे तो सभा स्थल पहुंचते उनकी पेशानियों पर बल पड़ गए और वे अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर भड़क गए. राकेश सिंह की इस झल्लाहट का कारण चुनावी भाग-दौड़ की थकान नहीं, बल्कि उनकी सभा में मौजूद मुठ्ठीभर लोग हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की सभा का ये हाल मंडला के सिंगापुर गांव में हुआ.
खाली मैदान और कुर्सियां देख राकेश सिंह ने महज दो मिनट में अपना भाषण पूरा कर दिया. खाली मैदान देख राकेश सिंह का गुस्सा इस कदर भड़का कि जब उनके स्वागत में एक कार्यकर्ता ने माला पहनाई तो उन्होंने उसे भी उतार फेंका. इसके बावजूद राज्यसभा सांसद संपतिया उईके, प्रदेश अध्यक्ष के इस दौरे को प्रभावशाली मानती हैं, मानें भी क्यों न आखिर पार्टी के अध्यक्ष जो हैं. हालांकि उन्होंने लोगों के आने की एक वजह हेलिकॉप्टर को बताकर राकेश सिंह के प्रभाव को खुद ही कम कर दिया।

संपतिया उईके की मानें तो यहां आए लोग राकेश सिंह के साथ ही हेलिकॉप्टर देखने भी आए थे. अब ये वही बता सकती हैं कि 30 से 40 लोगों की भीड़ में कितने लोग राकेश सिंह के प्रभाव से आए और कितने हेलिकॉप्टर देखने।

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