बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आये परेशान शरणार्थियों को मदद करने में अपना पूरा पैसा बांट देते थे पंडित नेहरू

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आज कल पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता खासकर पीएम मोदी खूब बयान देते हैं। यही नहीं आज पंडित नेहरू अख़बारों और चैनलों की सुर्ख़ियों में भी बने रहते हैं।

लेकिन इस बार कांग्रेस नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी ने पंडित नेहरू का एक ऐसा किस्सा शेयर किया है जिसको लेकर अब चर्चा तेज़ हो गयी है। उनके अनुसार पंडित नेहरू को लोगों की मदद करना पसंद था और इसके लिए वह कभी कभी अपने सुरक्षा कर्मियों से भी उधार ले लिया करते थे।

प्रदीप कासनी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि जवाहरलाल नेहरु ने जब 3 सितंबर 1946 को अंतरिम सरकार में शामिल होने का फ़ैसला लिया तो उन्होंने इलाहाबादस्थित आनंदभवन को छोड़ अपनी सारी संपत्ति देश को दान कर दी।

उन्होंने पंडित नेहरू के सचिव की किताब का हवाला देते हुए लिखा कि नेहरु को पैसे से कोई खास लगाव नहीं था। उनके सचिव रहे एमओ मथाई अपनी किताब ‘रेमिनिसेंसेज़ ऑफ़ नेहरु एज़’ में लिखते हैं कि 1946 के शुरु में उनकी जेब में हमेशा 200 रुपये होते थे, लेकिन जल्द ही यह पैसे ख़त्म हो जाते थे क्योंकि नेहरु यह रुपये पाकिस्तान से आये परेशान शरणार्थियों में बांट देते थे।

उन्होंने आगे लिखा कि ख़त्म हो जाने पर वह और पैसे मांगते थे। इस सबसे परेशान होकर मथाई ने उनकी जेब में रुपये रखवाने ही बंद कर दिये। लेकिन नेहरु की भलमनसाहत इस पर भी नहीं रुकी। वह लोगों को देने के लिए अपने सुरक्षा अधिकारी से पैसे उधार लेने लगे।

आपको बता दें कि हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि आज एक चायवाला अगर देश का प्रधानमंत्री बना है तो पंडित नेहरु की वजह से। अगर आज एक चायवाला प्रधानमंत्री है तो ये इसलिए संभव हुआ क्योंकि नेहरू ने देश की संस्थाओं को इस प्रकार आकार दिया कि आज एक आम भारतीय भी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने का सपना देख सकता है।

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