इस कार्यक्रम के माध्यम से पार्टी को एकजुट करेंगी सोनिया

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कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद सोनिया गांधी के लिए सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस पार्टी को एकजुट करना है और ऐसे में सोनिया गांधी देश के पूर्व PM राजीव गांधी के जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी में एकजुटता और मजबूती प्रदान करने का प्रयास करेंगी।

लोकसभा में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस अब तक उससे ऊबर नहीं पायी है। राहुल रांधी के इस्तीफा प्रकरन ने मामले को और गंभीर बना दिया। काफी ऊहापोह की स्थिति के बाद पार्टी की कमान एक बार सोनिया गांधी के हाथों में चली गयी है। कांग्रेस राजीव गांधी के जन्मदिवस यानि 20 अगस्त को की अगुवाई में एक कार्यक्रम करने जा रही है। इसे हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है।

इसके लिए दिल्ली प्रदेश कार्यालय पर शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक बैठक भी आयोजित की गई।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, सोनिया गांधी इस कार्यक्रम के जरिये पार्टी को एक बार फिर से एकजुट करने की कोशिश करेंगी।

गौरतलब है कि इस वक्त हरियाणा और दिल्ली दोनों प्रदेशों के संगठन में आपसी तनातनी चरम पर है। शीला दीक्षित के निधन के बाद दिल्ली में जहां पार्टी की गतिविधियां शून्य हुई पड़ी हैं, वहीं हरियाणा में नेताओं की आपसी तनातनी से पार्टी के कामकाज पर असर पड़ रहा है। पार्टी को आशंका है कि इसका असर आगामी चुनाव परिणामों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इन राज्यों में पार्टी के प्रचार की कमान स्वयं सोनिया गांधी ने उठाने का फैसला कर लिया है। सोनिया गांधी के आगे आ जाने से पार्टी नेताओं की गुटबाजी पर पूरी तरह विराम लगने की संभावना है।

अब देखना होगा कि क्या सोनिया गांधी फिर एक बार 1998 के तरह करिश्माई परिवर्तन लाती हैं और राजीव गांधी के जयंती के बाद से कांग्रेस में एकजुटता नजर आती है

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