राजस्थान मे बीजेपी का दोहरा चरित्र उजागर, वंशवाद को समर्थन

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अक्सर बीजेपी वंशवाद का आरोप लगातार कांग्रेस पर लगाती है वो कहती है कि कांग्रेस मे मैरिट के आधार पर प्रत्याशियो का चयन नही होता है लेकिन राजस्थान मे अपनी बात पर विपरित तरीके से उपचुनावो मे जाने का फैसला राज्य ईकाई ने लिया है जो बीजेपी की कथनी और करनी पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा हैं

राजस्थान की दो सीटे मंडावा व खींवसर मे उपचुनाव होने है जहा दोनो सीटो पर बीजेपी ने अपने सहयोगी दल रालोपा से गठबंधन किया है खींवसर से रालोपा तो मंडावा से बीजेपी चुनाव लडेगी

कल देर शाम खींवसर के लिये हनुमान बेनीवाल ने अपने भाई नारायण बेनीवाल को मैदान मे उतारकर बीजेपी को भी वंशवाद पर घसीट दिया है इसके बाद से प्रदेश मे बीजेपी के लिये नकारात्मक माहौल बन रहा है

बीजेपी का चरित्र शुरुआत से दोहरा ऱहा है एक बार फिर से बीजेपी ने रालोपा को समर्थन देकर बता दिया कि उनके लिये सत्ता जरुरी है ना कि सिद्धांत या विचारधारा नारायण को चुनावी रण मे उतारते ही प्रदेश कांग्रेस भी बीजेपी पर हमलावर हो चुकी है

कांग्रेस के सोशल मीडिया पर कार्यकर्ता लिखते है कि क्या रालोपा मे हनुमान और उसके भाई नारायण के अलावा क्या कोई तीसरा कार्यकर्ता नही है?

आपको बता दे कि कांग्रेस की तरफ से खींवसर से पूर्व मंत्री हरेंद्र मिर्धा चुनाव लडेगे जो अपना नामांकन 30 सितंबर को करेगे जिस प्रकार से बीजेपी ने रालोपा के साथ गठबंधन किया है उससे उनके ही कार्यकर्ताओं मे काफी निराशा देखी जा रही हैं

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