सोनिया गांधी से मिलने के बाद कमलनाथ ने नए प्रदेश अध्यक्ष और सिंधिया को लेकर दिया ये बयान

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मध्यप्रदेश में भले ही अभी कोई चुनाव नही हो मगर संगठनात्मक बदलाव को लेकर कांग्रेस के अंदर सियासी पारा गर्म है। जहां एक तरफ ज्योतिरादित्य के समर्थक हर हाल में उन्हें अध्यक्ष देखना चाहते हैं तो वही मुख्यमंत्री अपने पसन्द का अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं।

इन्ही वजहों से प्रदेश की राजनीति दिनों गर्म हो रही है। सियासी उबाल की वजह ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी और उनके समर्थकों द्वारा उन्हें प्रदेश अध्यक्ष नही बनाने पर सामूहिक इस्तीफा देने की धमाकी बताई जा रही है। इन सबसे प्रदेश की राजनीति में खलबली मच गई है। इस घमासान के बीच, मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की। इस बैठक के बाद पहली बार, कमलनाथ ने सिंधिया को अध्यक्ष पद देने पर चुप्पी तोड़ी।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर जमकर बवाल मचा है। मिली जानकारी के अनुसार सिंधिया ने सोनिया गांधी से भी इसको लेकर बात की है। उन्हें लगता है कि कांग्रेस ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी देकर राज्य की राजनीति से दूर कर दिया। इस कारण से, उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि उन्हें कांग्रेस मध्य प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए।

मध्य प्रदेश में, बड़े नेता अपने अध्यक्ष पद का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं। इनमें मध्य प्रदेश के दतिया जिले के कांग्रेस नेता अशोक दांगी भी शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सिंधिया को अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो वह कांग्रेस के 500 कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक इस्तीफा दे देंगे।

इन सब के बीच कमलनाथ ने सोनिया गांधी से मुलाकात की। उन्होंने सिंधिया पर पहली बार चुप्पी तोड़ी। कमलनाथ ने कहा कि वह खुद चाहते हैं कि राज्य को नया अध्यक्ष मिले। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोनिया को भी यही दोहराया। साथ ही उनसे पूछा गया कि क्या सिंधिया नाराज हैं, कमलनाथ ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वह नाराज हैं।

कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए सियासी उबाल होना बड़ी बात नही है। सिंधिया समर्थको का मानना है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जीत में सिंधिया का जबरदस्त योगदान है इसलिए उन्हें अध्यक्ष बनाया जाना चहिए जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ के समर्थक मानते हैं कि सिंधिया जैसे मजबूत छवि के नेता अध्यक्ष बनेंगे तो शक्ति का दो केंद्र बन जाएगा। जिससे सरकार और संगठन में मतभेद हो सकता है।

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