यूपी उपचुनाव में प्रियंका गांधी ने पार्टी के युवा ब्रिगेड को दिया टिकट , क्या पार्टी को होगा फायदा ?

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कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में कहा था कि पार्टी युवाओं को आगे आने का मौका देगी और युवाओं को ही उनके कार्य के अनुसार विधानसभा और लोकसभा का टिकट लेकर सदन तक की लड़ाई लड़ने के लिए मौका देगी। उनके साथ प्रियंका गांधी ने उनकी बातों को उत्तर प्रदेश के हर मीटिंग में कार्यकर्ताओं के के संग दोहराया था। कांग्रेस पार्टी युवाओं को मौका देने के इस पर काम करना शुरू कर दी है तभी उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव में अधिकांश सीटों पर युवाओं को ही टिकट दिया गया है

लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद कांग्रेस ने अपने ढांचे में बदलाव लाने की तैयारी अब शुरू कर दी है. उत्तर प्रदेश की पूरी कमान मिलने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अब उम्रदराज कांग्रेसियों को छोड़कर पार्टी में युवाओं को ज्यादा महत्व देने लगी हैं. उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने 11 में से 10 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं।

इनमें ज्यादातर उम्मीदवार 40 वर्ष से कम उम्र के हैं. प्रियंका अब खुद फैसले ले रही हैं. उन्होंने अपने तरीके से उम्मीदवारों का चयन किया है.

प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका चाहती हैं कि पार्टी में युवा नेतृत्व बढ़े और उदाहरण सामने है. कानपुर की गोविंद नगर सीट से प्रत्याशी करिश्मा ठाकुर और घोसी से उम्मीदवार राजमंगल यादव की उम्र 30 वर्ष से भी कम है. वहीं, हमीरपुर से हरदीपक निषाद, लखनऊ कैंट से दिलप्रीत सिंह, जैदपुर से तनुज पूनिया, इगलास से उमेश कुमार दिवाकर, मानिकपुर से रंजना पांडेय और प्रतापगढ़ से उम्मीदवार नीरज त्रिपाठी भी 40 वर्ष से कम उम्र के हैं.

2022 के विधानसभा चुनाव पर नजर
प्रियंका युवाओं पर भरोसा कर उपचुनाव की सियासी जंग जीतने का भरोसा तो रखती ही हैं, इसके अलावा उनकी नजर साल 2022 में होने वाली विधानसभा चुनाव पर भी है. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषको का कहना है कि सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के करीबियों के साथ अच्छा संबंध निभाया और उन्हें तरजीह देती रहीं. राहुल गांधी ने बहुत हद पुराने कांग्रेसियों को किनारे करने का प्रयास किया. हालांकि बाद में राहुल पर राजीव गांधी के करीबी रहे लोग फिर से हावी हो गए. चाहे सलमान खुर्शीद, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद हों या पी. चिदंबरम. बागडोर अब प्रियंका गांधी के हाथ में है. वह साल 2022 का लक्ष्य लेकर चल रही हैं.

उन्होंने कहा कि प्रियंका के तेवर से अनुमान लगाया जा सकता है कि वह इसमें कोई शिथिलता बर्दाश्त नहीं करेंगी. अब वह आगे किसी ऐसे नेता को ढोने पर विचार नहीं करेंगी जो पार्टी के लिए बोझ हों या किसी गुट से बंधे हों. वह नई टीम को खड़ा करना चाह रही हैं. वह उस नेता पर फोकस कर रही हैं, जो कार्यकर्ता है.

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि प्रियंका उत्तर प्रदेश में अपने आपको सशक्त रूप में स्थापित करना चाहती हैं. इसीलिए वह किसी नेता के साथ अपनी टैगिंग नहीं करना चाहती हैं. युवा प्रत्याशियों की घोषणा के पीछे उनके कई तर्क हैं. एक तो यह कि युवा प्रत्याशी जीतेंगे तो उनकी देखादेखी नई पीढ़ी कांग्रेस के साथ जुड़ेगी. यदि उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं भी मिलती है तो कम से कम युवाओं में यह भरोसा तो जिंदा होगा कि पार्टी युवाओं को तरजीह दे रही है. प्रियंका इसीलिए परिक्रमा से ज्यादा पराक्रम पर भरोसा कर रही हैं.

प्रदेश में अब 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है, इनमें फिरोजाबाद की टूंडला को छोड़कर बाकी सीटों पर उपचुनाव की तिथि घोषित हो गई है. इनमें रामपुर, सहारनपुर की गंगोह, अलीगढ़ की इगलास, लखनऊ कैंट, बाराबंकी की जैदपुर, चित्रकूट की मानिकपुर, बहराइच की बलहा, प्रतापगढ़, हमीरपुर, मऊ की घोसी सीट और अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट शामिल हैं. इन 12 विधानसभा सीटों में से रामपुर की सीट सपा और जलालपुर की सीट बसपा के पास थी और बाकी सीटों पर भाजपा का कब्जा था. कांग्रेस के पास कुछ नहीं था, सबसे पुरानी पार्टी को अब अपना दमखम दिखाना है।

अब राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान इस बात पर भी टिका हुआ है कि क्या प्रियंका द्वारा युवाओं को जिस प्रकार से तरजीह दी की गई है क्या उसके बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को संजीवनी मिल सकता है और क्या प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को इन सीटों पर जीत दिलवाकर 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले हुंकार भरेंगी और क्या इन विधानसभा चुनाव में योगी सरकार को प्रियंका गांधी झटका दे पाएंगी।

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