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केंद्र की बीजेपी सरकार के खिलाफ मध्यप्रदेश कांग्रेस ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और कहा कि केंद्र सरकार जानबूझकर मध्य प्रदेश का अनेक मदों का पैसा नहीं भेज रही है और साथ ही प्रदेश में आए बाढ़ जैसी आपदा को निपटने के लिए राहत कोष भी नहीं दे रही है जबकि यही सरकार कर्नाटका और बिहार जैसे बीजेपी शासित राज्यों को आपदा से निपटने के लिए राहत कोष जारी की है।

केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पर राज्य के अतिवर्षा और बाढ़ से पीड़ित किसानों और अन्य लोगों के लिए राहत राशि मुहैया नहीं कराने का आरोप लगाने वाली मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस संपूर्ण राज्य में केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन किया।

पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और विधायक प्रदेश भर के विभिन्न जिला मुख्यालयों में आंदोलन का नेतृत्व किया। आंदोलन के दौरान कांग्रेस पदाधिकारियों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं ने सभी जिला मुख्यालय में कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा। वहीं, मंत्री भी अपने प्रभार वाले जिलों में पहुंचकर मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार की करनी से आम जनता को अवगत कराया।

कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में मानसून के मौसम में इस बार अतिवृष्टि और बाढ़ आदि के कारण 52 जिलों में 39 जिलों की 284 तहसीलें प्रभावित हुयी हैं। लगभग 60.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 16 हजार 270 करोड़ रुपए मूल्य की फसलें बर्बाद हुई हैं।

इसके अलावा लगभग एक लाख 20 हजार घरों को क्षति पहुंची है। लगभग 674 नागरिकों को अपने प्राण गंवाने पड़े हैं। ग्यारह हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों नुकसान पहुंचा है। एक हजार से अधिक पुल-पुलियाएं क्षतिग्रस्त हुयी हैं। इसके साथ ही अन्य सरकारी और निजी संपत्ति को भी क्षति पहुंची है।

कांग्रेस की विज्ञप्ति के अनुसार इन स्थितियों के बीच केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से छह हजार छह सौ 21 करोड़ रुपयों की मांग विधिवत तरीके से की गयी है, लेकिन अभी तक एक भी रुपया इस राज्य को नहीं दिया गया है। इस संबंध में राज्य की ओर से विधिवत केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार के अन्य मदों की धनराशि भी केंद्र सरकार ने जारी नहीं की है।

विज्ञप्ति के अनुसार इसके बावजूद राज्य सरकार ने अपनी ओर से प्रदेश के ऐसे नागरिकों को अब तक दो सौ करोड़ रुपए वितरित किए हैं, जिनके जानमाल की हानि हुई है। साथ ही 270 करोड़ रुपए की राशि उन जिलों में तत्काल वितरित करायी गई, जहां किसानों की फसलें सर्वाधिक प्रभावित हुई हैं।

बीजेपी सरकार का यह रवैया कहीं न कहीं काफी अजीब है क्योंकि मध्य प्रदेश के कई नेता भारतीय जनता पार्टी के सांसद और मंत्री हैं इसके बावजूद भी वहां की जनता की समस्याओं से निपटने के लिए राहत कोष ना देना सरकार का भेदभाव पूर्ण रवैया को दिखाता है।

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