विकास दुबे का सरेंडर होना क्या पहले से तय था? कांग्रेस ने किया गंभीर सवाल

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बीजेपी की लगातार अपराधियों से संपर्क देखने को मिलता आ रहा हैं पहले कुलदीप सेंगर जैसे बलात्कारियो के साथ अब विकास दुबे को भी अप्रत्यक्ष रुप से बीजेपी का समर्थन था जिस तरीके से मजाकिया अंदाज मे विकास दुबे ने सरेंडर किया है उससे साफ साबित होता है कि दाल मे कुछ काला नही बल्कि पूरी दाल ही काली हैं इस घटनाक्रम पर अब कांग्रेस ने सवाल किया हैं।

कानपुर शूटआउट का मुख्य आरोपी विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर में आज सुबह गिरफ्तार किया गया है। विकास दुबे की गिरफ्तारी पर राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता के सौजन्य से विकास दुबे ने प्रायोजित सरेंडर

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, “यह तो उत्तरप्रदेश पुलिस के एनकाउंटर से बचने के लिए प्रायोजित सरेंडर लग रहा है। मेरी सूचना है कि मध्य प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के सौजन्य से यह संभव हुआ है।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बयान को कोट करते हुए लिखा, “शिवराज जी आप बिना किसी कारण श्रेय ले रहे हैं। इसका श्रेय तो आपके गृह मंत्री जी को देना चाहिए।” शिवराज सिंह चौहान ने गिरफ्तारी के बाद कहा था कि जिनको लगता है महाकाल की शरण में पाप धुल जाएंगे उन्होंने महाकाल को जाना ही नहीं।

दिग्विजय सिंह ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “मैं शिवराज जी से विकास दुबे की गिरफ़्तारी या सरेंडर की न्यायिक जांच की मांग करता हूं। इस कुख्यात गैंगस्टर के किस किस नेता व पुलिसकर्मियों से सम्पर्क हैं जांच होना चाहिए। विकास दुबे को न्यायिक हिरासत में रखते हुए इसकी पुख़्ता सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए ताकि सारे राज़ सामने आ सकें।”

कुख्यात अपराधी विकास दुबे को मध्यप्रदेश के उज्जैन से ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाया जायेगा। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा कि दुबे को ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश लाया जायेगा और कानपुर कांड में शामिल दुबे के गिरोह के सभी सदस्यों को पकड़ने तक हमारा अभियान जारी रहेगा ।

उन्होंने कहा कि दुबे के खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी । जब उनसे यह पूछा गया कि दुबे के अलावा उज्जैन से और कौन पकड़ा गया है तो अधिकारी ने जवाब दिया कि हमें मीडिया के जरिये यह जानकारी मिली है और अभी इस बारे में कोई आधिकारिक पत्र नही मिला है ।

उनसे जब पूछा गया कि क्या यह उत्तर प्रदेश पुलिस और मध्य प्रदेश पुलिस का संयुक्त अभियान था तो उन्होंने जवाब दिया कि नहीं वहां हमारी टीम मौजूद नही थीं।

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