किसान आंदोलन को लेकर पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और राज्यपाल में छिड़ी जुबानी जंग

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पंजाब के किसान जहां एक तरफ सिंधु बॉर्डर पर केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ आंदोलनरत हैं तो वहीं पंजाब में रिलायंस ग्रुप के मोबाइल टावरों का बहिष्कार किया जा रहा है। जिस मामले में प्रदेश की कांग्रेस सरकार और राज्यपाल में जुबानी जंग छिड़ गई है।

माना जा रहा है कि किसान आंदोलन के बीच पंजाब में 1300 से 1500 के बीच मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाया गया है। इस पूरे मामले को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब में इतने सारे मोबाइल टावरों के क्षतिग्रस्त होने के बाद राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर ने पंजाब के कुछ अधिकारियों को समन भेजकर जवाब मांगा है।

जिसपर अब सीएम अमरिंदर सिंह ने राज्यपाल को जवाब दिया है। अमरिंदर सिंह ने कहा है, अगर आपको (राज्यपाल) कोई स्पष्टीकरण चाहिए तो मुझे नोटिस भेजिए, मुझे बुलाइए, मेरे अफसरों को नहीं।”

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी पर संवैधानिक कार्यालय को अपने “अनचाहे एजेंडे” में शामिल करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा है कि राज्यपाल ने राज्य की कानून व्यवस्था पर पार्टी के प्रचार को ज्यादा महत्व दिया है।

पंजाब सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा कि बीजेपी राज्य के कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाकर, तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।

एक रिपोर्ट के अनुसार किसान आंदोलन की वजह से पंजाब में मोबाइल टावर को नुकसान पहुंचाया गया। पिछले महीने दिसंबर 2020 में तकरीबन 1500 से ज्यादा मोबाइल टावर को नुकसान पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा बहुत से मोबाइल टावरों की बिजली काट दी गई है और कई जगह तो तार के बंडल भी जला दिए गए हैं।

हालांकि पिछले महीने इस मामले पर बात करते हुए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि राज्य में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने पर रोक नहीं है, लेकिन संपत्ति के नुकसान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि उनकी सरकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का आदेश दिया है।

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