राज्यसभा में PM मोदी के भाषण को कांग्रेस ने बताया “लफ्फाजी” और “जुमलेबाजी”

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देशभर में चल रहे किसान आंदोलन के बीच कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया अपने बातों से किसान आंदोलन और विपक्षी नेताओं पर जमकर तंज कसा.

इस दौरान उन्होंने किसानों ने आंदोलन खत्म करने की अपील की. उन्होंने कहा कि जब देश में सुधार होते हैं तो उसका विरोध होता है. कांग्रेस ने पीएम मोदी के भाषण पर निशाना साधा और कहा कि वे लफ्फाजी और जुमलेबाजी के अलावा राज्यसभा में वे कुछ ठोस नहीं कर पाए।

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए कहा, “लफ़्फ़ाज़ी और जुमलेबाजी के अलावा राज्यसभा में कुछ ठोस नहीं कह पाए मोदी जी. न 75 दिन से आंदोलनरत किसानों के लिए कोई ठोस आश्वासन और ना सीमा में घुसपैठ किए चीन पर एक शब्द. आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री वास्तव में पीएम नही, “प्रचारक” की भूमिका में नज़र आए. दुर्भाग्यपूर्ण सत्य.”

इसके साथ ही सुरजेवाला ने मोदी सरकार से कुछ सवाल भी पूछे हैं. उन्होंने कहा कि भारत की आंखे खोल देने वाले कुछ सवालों के जवाब दीजिये. वक्तव्यों और व्यवहार में ये अंतर क्यों है, ये जवाब दीजिये.

पीएम मोदी ने राज्यसभा में एक कविता का भी जिक्र किया. इस कालखंड में महाकवि मैथलीशरण गुप्त को लिखना होता तो मैं कल्पना करता हूं कि वो लिखते, “अवसर तेरे लिए खड़ा है, तू आत्मविश्वास से भरा पड़ा है. हर बाधा, हर बंदिश को तोड़. अरे भारत! आत्मनिर्भरता के पथ पर दौड़.”

सुरजेवाला ने इस पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मैथलीशरण गुप्त आज होते तो मोदी सरकार के लिये यूं कहते, “आपने अवसर सिर्फ़ पूंजीपतियों के लिए गढ़ा है…किसान तो चौराहे पर चुपचाप महीनों से अपने हक़…मांगता पड़ा है…आपका कर्मक्षेत्र सत्ता के स्वार्थों से भरा है…पल-पल है अनमोल, अरे भारत उठ, आँखें खोल.”

Pm मोदी के इस भाषण के बाद कांग्रेस ने कई सवाल पूछे हैं

क्या ये सही नहीं कि सत्ता संभालते ही 12 जून, 2014 को मोदी सरकार ने राज्यों द्वारा समर्थन मूल्य के ऊपर दिए जा रहे ₹150/क्विंटल बोनस बंद करवा दिया?

क्या ये सही नहीं कि मोदी सरकार ने दिसंबर 2014 में किसानों के हक़ के भूमि के ‘उचित मुआवज़ा कानून’ को एक के बाद एक तीन अध्यादेश लाकर पूंजीपतियों के हक़ में बदलने की षड्यंत्रकारी कोशिश की?

क्या ये सही नहीं कि आपने सुप्रीम कोर्ट में फरवरी 2015 में शपथ पत्र देकर कहा कि किसानों को अगर लागत +50% से ऊपर समर्थन मूल्य दिया तो बाज़ार ख़राब हो जाएगा अर्थात् आप पूंजीपतियों के पक्ष मे खड़े हो गए थे?

क्या ये सही नहीं कि खरीफ 2016 से प्रारंभ ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में साल 2019 तक ₹26,000 करोड़ का मुनाफ़ा ‘निजी कंपनियों’ को पहुँचाया गया, अन्यथा ये राशि भी किसानों के खाते में जाती?

क्या ये सही नहीं कि PM किसान निधि के नाम पर ₹6,000 सालाना किसानों के खाते में डालने के क़सीदे तो पढ़े जा रहे हैं पर दूसरी और पिछले 6 सालों में ₹15,000 प्रति हेक्टेयर खेती पर ‘टैक्स’ लगा दिया?

क्या ये सही नही कि 73 साल में पहली बार खेती पर GST लगाया – खाद पर 5%, कीटनाशक दवाईयों से लेकर कृषि यंत्रों पर 12% से 18 प्रतिशत तक? डीज़ल पर 820% एक्साइज क्यों बढ़ाई?

किसान आंदोलन को लेकर पक्ष और विपक्ष का ये बहस किस दौर में जाता है इस पर पूरी देश की नजर है।

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