कुमारस्वामी के शपथ में दिखेगी विपक्ष की ताकत :

मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने जा रहे कुमारस्वामी अपने दिल्ली दौरे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर उनसे सरकार गठन की प्रक्रिया पर चर्चा की और उन्हें शपथ ग्रहण समारोह का न्योता दिया।

कर्नाटक में राहुल गांधी ने राजनीति की बिसात पर जो चालें चलीं, उससे न केवल उनकी पार्टी सत्ता में दोबारा लौटकर आयी, बल्कि प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के बड़े-बड़े सूरमा सहित वे सभी धराशायी हो गए, जो राहुल को हल्के में ले रहे थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने जेडीएस को अपने साथ जोड़कर ‘2019 का समीकरण’ भी अपने पक्ष में कर लिया है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान जेडीएस को कांग्रेस और राहुल गांधी बीजेपी की बी टीम कहकर कटघरे में खड़ा कर रहे थे। हो ना हो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के प्रति नरमी और कई सीटों पर जेडीएस उम्मीदवारों के खिलाफ कमजोर बीजेपी उम्मीदवार कुछ ऐसी तस्वीर पेश कर रहे थे कि बीजेपी और जेडीएस के बीच कांग्रेस को पराजित करने के लिए कोई अंदरूनी समझौता हो चुका है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा थी कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में बीजेपी जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बना लेगी। कुमारस्वामी पहले भी एक बार बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बन चुके थे, इसलिए इस कयास को बल मिल रहा था ।

एक तरफ मुख्यमंत्री पद की मुंहमांगी मुराद पूरी हो रही थी, तो दूसरी तरफ बीजेपी से दूर रहकर पार्टी की सेक्यूलर छवि भी सुरक्षित। जेडीएस की साझेदार बीएसपी की अध्यक्ष मायावती ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। कुमारस्वामी ने समर्थन स्वीकार कर लिया और सरकार बनाने को तैयार हो गए।

कर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस गठबंधन सरकार के नामित मुख्यमंत्री कुमारस्वामी बुधवार को शपथ लेगें. इस दौरान देश के प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं के भी शपथ समारोह में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में देश भर के पांच मुख्यमंत्री हिस्सा लेने पहुंचेगे. जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी, केरल के सीएम पिनाराई विजयन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव शामिल रहेंगे।

बीजेपी अब दोराहे पर खड़ी है। उसे समझ में ही नहीं आ रहा था कि करे तो क्या करे। सांप-छछूंदर की स्थिति। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह वाराणसी में दर्दनाक हादसे के बावजूद दिल्ली में कर्नाटक जीत का जश्न मना चुके थे। कर्नाटक की जीत को अभूतपूर्व जीत करार दे चुके थे। ऐसे में सरकार बनाने का दावा पेश न करना भी उनके लिए आत्महत्या करने के बराबर था। लिहाजा, उन्होंने कर्नाटक में उस खेल को हरी झंडी दिखा दी, जिसे राजनीति में ‘अनैतिक’ कहा जाता है। लेकिन इस बार कर्नाटक की पिच और कांग्रेस की टीम थोड़ी अलग निकली। राहुल ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अब कांग्रेस पहले वाली कांग्रेस नहीं है, बल्कि यह उनकी कांग्रेस है, जो मैदान से लेकर कानून के कटघरे तक खेलना और जीतना जानती है। यह संदेश बाकी विपक्षी दलों के लिए भी था, कि भाजपा से लड़ने और जीतने की क्षमता किसी दल में है, तो वह सिर्फ कांग्रेस ही है।

बहरहाल, राहुल के चक्रव्यूह में खुद को घिरता देख, बीजेपी ने अंतत: मैदान से हटने का निर्णय लिया। राहुल की कांग्रेस ने बीजेपी के विजयरथ को रोक दिया। लाख कोशिशों के बावजूद बीजेपी 112 की संख्या नहीं जुटा पायी और बीएस येदियुरप्पा को शपथ ग्रहण के दो दिन बाद ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

शिल्पी सिंह

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