सहयोगियों को संभालना भाजपा के लिए मुसीबत बना 28 को अलग हो सकती है ये भी पार्टी

उत्तर प्रदेश: आगामी लोकसभा चुनाव मे अब ज़्यादा समय नहीं बचा है। लेकिन लोकसभा सीटों के लिहाज़ से सबसे महत्वपूर्ण राज्य मे बीजेपी अपने सहयोगी दलों को मनाने मे अब तक कामयाब नहीं हो हो पायी है। अपना दल की संरक्षिका केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल पिछले काफी समय से बीजेपी से नाराज़ चल रही हैं।लेकिन अब उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रदेश के शीर्ष भाजपा नेताओं पर हमले और तेज कर दिए हैं। उन्होंने एक बार फिर प्रदेश भाजपा पर उपेक्षापूर्ण रवैये का आरोप लगाया है।

साथ ही गठबंधन मे रहने या न रहने पर निर्णायक फैसला लेने के लिए आगामी 28 फरवरी को लखनऊ में राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकरियों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक मे यह तय किया जाएगा कि आम चुनाव में अपन दल, भाजपा के साथ रहेगा या नहीं। अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमएलसी आशीष पटेल का आरोप है कि गठबंधन में होने के बावजूद प्रदेश में उनकी बातें नहीं सुनी जा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि वह चाहते हैं कि 2019 के आम चुनाव में भी नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनें।

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा का एक धड़ा नहीं चाहता है कि अपना दल (एस) राजग गठबंधन का हिस्सा रहे। यह धड़ा प्रताड़ित कर उन्हें गठबंधन से दूर करना चाहता है।उल्लेखनीय है कि अपना दल पहले भी ऐसे आरोप लगाता रहा है।दरअसल अपना दल (एस) की नाराजगी मुख्य रूप से आयोगों और बोर्डों में पार्टी को जगह नहीं दिए जाने को लेकर है। इसके अलावा पार्टी की मांग है कि दलित और पिछड़ों को आउटसोर्सिंग, संविदा और निजी संस्थाओं में आरक्षण का लाभ दिया जाए।

भाजपा को अपने सहयोगियों को मनाने में जहाँ परेशानी महसूस हो रही है वहीँ इस पूरे खेल को विपक्ष बहुत ध्यान से देख रहा है. विपक्षी पार्टियों ने बड़े स्तर पर महागठबंधन बना लिया है और वो इसका और विस्तार करने में लगी हैं. विपक्ष इस बात को अच्छी तरह से समझता है कि भाजपा के सहयोगी दल भाजपा से नाराज़ हैं और इनमें से कुछ उसके पाले में आ सकते हैं. यही वजह है कि भाजपा अपने सहयोगियों को मनाने की पूरी कोशिश कर रही है. अब देखते हैं कि इस खींचतान में कौन कामयाब होगा.

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