आनन-फानन में राष्ट्रीय संपत्ति बेचना देशहित में नहीं : सोनिया गांधी

देश की गिरती अर्थव्यवस्था , किसान आंदोलन और कृषि बिल को लेकर आलोचना झेल रही केंद्र सरकार पर कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने भी निशाना साधा है।

सोनिया ने भारत की गिरती अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर निशाना साधा है। सोनिया गांधी ने मोदी सरकार को आगाह किया है कि जिस तरह से नोटबंदी और जीएसटी का फैसला जल्‍दबाजी में लिया गया था। उसी तरह से अब सरकारी संपत्तियों को बेचने का कदम उठाया जा रहा है। सरकार को ऐसी जल्दबाजी से बचना चाहिए।

सोनिया गांधी ने एक आर्टिकल लिखते हुए मोदी सरकार को चेताया है। कांग्रेस अध्‍यक्ष ने लिखा “भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट की शुरुआत 8 नवंबर, 2016 की रात को हुई थी। डॉ मनमोहन सिंह ने दूरदर्शिता के साथ संसद में कहा था कि नोटबंदी से देश की जीडीपी में 2% की गिरावट होगी, लेकिन उनकी सलाह को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूरी तरह नकार दिया। आज नतीजा पूरा देश झेल रहा है। इसी तरह जीएसटी ने भी अर्थव्यवस्था को चौपट करने का काम किया है। जीएसटी की वजह से अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही है।”

सोनिया गांधी ने लिखा कि सरकार दशकों की मेहनत से खड़ी की गई सरकारी कंपनियों और जनता की संपत्ति को जल्दबाजी में बेचकर खजाना भरना चाहती है। सरकार ने ‘विनिवेश’ के बजाय ‘निजीकरण’ की नीति अपनाई है। सोनिया ने लिखा “क्या एलआईसी और इसके प्रस्तावित आईपीओ के जरिए सरकार की हिस्सेदारी बेचना भारत में बीमा क्षेत्र की इस शीर्ष कंपनी को निजी हाथों में सौंपने की तरफ कदम बढ़ाने का संकेत है? इन्हें प्राइवेटाइज करने पर ऐतिहासिक रूप से समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों के लिए आरक्षण और मौके खत्म हो जाएंगे।’

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