PM के ऐलान के बाद राहुल गांधी ने टीकाकरण को लेकर फिर पूछा सवाल

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कोरोना महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे हैं वैक्सीनेशन को सभी देशवासियों के लिए मुफ्त किए जाने की लगातार मांग कर रहे राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री द्वारा किए गए ऐलान के बाद फिर एक बार प्रधानमंत्री से सवाल किया है।

राहुल गांधी ने सभी नागरिकों के वैक्सीनेशन के लिए राज्यों को मुफ्त टीका मुहैया कराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद सवाल किया कि अगर टीके सभी के लिए मुफ्त हैं तो फिर निजी अस्पतालों को पैसा क्यों लेना चाहिए ?

राहुल ने ट्वीट किया, ”एक साधारण सवाल: अगर टीके सभी के लिए मुफ्त हैं तो फिर निजी अस्पतालों को पैसे क्यों लेने चाहिए।”

गौरतलब है कि राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
, कई राज्यों के मुख्यमंत्री एवं विपक्षी पार्टी के कई नेता लगातार सभी देशवासियों को वैक्सीन केंद्र सरकार द्वारा मुफ्त दिए जाने की मांग लगातार कर रहे थे।

वहीं कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा पर कहा कि यह देर आए, लेकिन पूरी तरह दुरुस्त नहीं आए की तरह है क्योंकि मुफ्त वैक्सीनेशन की मांग को सरकार ने आंशिक रूप से स्वीकार किया है।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री ने देश में पहले के वैक्सीनेशन के कार्यक्रमों के बारे में टिप्पणी करके अतीत की चुनी हुई सरकारों और वैज्ञानिकों का अपमान किया है।

रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ”मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पिछले कई महीनों में बार बार यह मांग रखी कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को मुफ्त टीका लगना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार ने इसे इनकार कर दिया। फिर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी जी और उनकी सरकार को कटघरे में खड़ा किया।” कांग्रेस महासचिव ने कहा, ”फिलहाल खुशी है कि हर नागरिक को मुफ्त टीका मुहैया कराने की मांग सरकार ने आंशिक रूप से मान ली है। प्रधानमंत्री आज भी अपने मुंह मियां मिट्ठू बने। देर आए, लेकिन पूरी तरह दुरुस्त नहीं आए।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि 18 साल से अधिक उम्र के सभी नागरिकों के वैक्सीनेशन के लिए राज्यों को 21 जून से मुफ्त टीका उपलब्ध कराया जाएगा और आने वाले दिनों में टीकों की आपूर्ति में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में यह ऐलान भी किया कि कुल टीके में 75 प्रतिशत की खरीद सरकार करेगी और 25 फीसदी अब भी निजी अस्पतालों को मिलेंगे, लेकिन वे प्रति खुराक 150 रुपये से ज्यादा सेवा शुल्क नहीं ले सकेंगे।

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