तो कांग्रेस में शामिल होंगे प्रशांत किशोर ! राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई PK की भूमिका को लेकर चर्चा

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने को लेकर चर्चा काफी तेज है। इसी बीच ये खबर निकल कर सामने आई है कि PK के नाम मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को पार्टी में लेने और उनके भूमिका संबंधी प्रस्ताव को लेकर हाल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विचार-विमश किया है। जिसमें अधिकततर नेताओं का मानना था कि PK के आने से कांग्रेस को फायदा होगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार राहुल गांधी ने 22 जुलाई को यह बैठक बुलाई थी और इसका मुख्य एजेंडा पार्टी में शामिल होने की स्थिति में प्रशांत किशोर को दी जाने वाली भूमिका और इससे पार्टी को होने वाले हानि-लाभ पर चर्चा करना था।

राहुल गांधी के आवास पर हुई इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी, मल्लिकार्जुन खड़गे, कमलनाथ, अंबिका सोनी, हरीश रावत, केसी वेणुगोपाल और कुछ अन्य नेता शामिल हुए।

बैठक में शामिल अधिकततर नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रशांत किशोर का कांग्रेस में शामिल होना पार्टी के लिए फायदेमंद होगा।

मीडिया के खबरों के अनुसार , ”राहुल गांधी ने प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने के प्रस्ताव को लेकर वरिष्ठ नेताओं से उनकी राय जानी। ज्यादातर लोगों की यही राय थी कि उनके आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी।”

राहुल गांधी की कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की इस बैठक से पहले 13 जुलाई को प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उस बैठक में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। इस मुलाकात के बाद से प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर के पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव है। हालांकि प्रशांत किशोर की ओर से कुछ नहीं कहा गया है और और कांग्रेस ने भी इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है।

हाल ही में बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के जीत में अहम किरदार निभाने वाले प्रशांत किशोर। इससे पहले बिहार, दिल्ली, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं 2014 में प्रधानमंत्री मोदी और 2015 में लालू-नीतीश गठबंधन में नीतीश कुमार को जिताने में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं। इससे पहले प्रशांत किशोर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में भी शामिल हुए थे लेकिन जदयू के बीजेपी से बढ़ते नजदीकी और प्रशांत किशोर के बीजेपी विरोधी विचारधारा के कारण उन्हें जदयू से अलग होना पड़ा था। प्रशांत किशोर ने बंगाल चुनाव के बाद ऐलान किया था कि वह चुनावी रणनीतिकार के भूमिका से हटकर कुछ नया करेंगे।

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