कार्यसमिति की बैठक में राहुल ने कहा देश के लोग चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी उनके हितों के लिए लड़ाई लड़े और आपस में नहीं लड़े

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में बोलते हुए पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश के लोग चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी उनके हितों के लिए लड़ाई लड़े और आपस में नहीं लड़े।

प्राप्त जानकारी के अनुसार राहुल गांधी ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि कौन किस पद पर है, बल्कि लोग चाहते हैं कि कांग्रेस एकजुट होकर लोकतंत्र एवं संविधान को बचाने, वंचित वर्गों के अधिकार की लड़ाई लड़े। गांधी ने चरणजीत सिंह चन्नी के पंजाब का मुख्यमंत्री बनने का उल्लेख किया और कहा कि जब कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बारे में चन्नी को फोन पर जानकारी दी, तो वह भावुक हो गए थे। बाद में चन्नी सीडब्ल्यूसी की बैठक में भावुक हो गए और कहा कि अनुसूचित जाति समुदाय के एक व्यक्ति को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ कांग्रेस और गांधी परिवार ही दे सकता है।

राहुल गांधी ने कहा कि देश की जनता चाहती है कि कांग्रेस उनके हितों की लड़ाई लड़े।

इस बैठक में कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर अर्थव्यवस्था के ‘कुप्रबंधन’ का आरोप लगाया और कहा कि सरकार को उत्पाद शुल्क में कमी करनी चाहिए ताकि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम घट सकें। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में महंगाई और देश की आर्थिक स्थिति पर पारित प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में लगातार हो रही गिरावट चिंता का विषय है, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।

प्रस्ताव में कहा गया है, ”साल 2020-21 में अर्थव्यवस्था में गिरावट के बाद सरकार ने कहा था कि यह पटरी पर आ जाएगी। सभी संकेत इसी बात के हैं कि अर्थव्यवस्था अब भी संघर्ष कर रही है। महामारी के दौरान बड़ी संख्या में जो नौकरियां खत्म हुई थीं, वो दोबारा सृजित नहीं हुईं।”

कार्यसमिति ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार महंगाई के जरिये लोगों को ‘लूट’ रही है। उसने कहा कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर जो हालात पैदा हुए हैं वो सरकार के ‘कुप्रबंधन’ का नतीजा हैं तथा अब भी आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति दिखाई देती है। सीडब्ल्यूसी ने कहा कि सरकार को उत्पाद शुल्क में कटौती करनी चाहिए ताकि पेट्रोलियम उत्पादों के दाम कम हो सकें और लोगों को राहत मिल सके।

Cwc ने लखीमपुर हिंसा में मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा को बर्खास्त नहीं किए जाने को लेकर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि यह घटना भाजपा की ‘हठधर्मिता’ को दिखाती है।

इस बैठक में ”गंभीर कृषि संकट और भारत के किसानों पर बर्बर हमला” विषय पर प्रस्ताव पारित कर तीनों कृषि कानूनों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया। प्रस्ताव में कहा गया है, ”खेती के तीन ‘काले कानून’ मोदी सरकार द्वारा मुट्ठीभर पूंजीपति मित्रों को मुनाफा कमवाने के लिए भारत के अन्नदाता किसानों का दमन करने की एक कुत्सित साजिश की पराकाष्ठा है।

साढ़े दस महीनों से, लाखों किसान दिल्ली की सीमाओं पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अपने हक की इस लड़ाई में लगभग एक हजार किसान अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन मोदी सरकार उनकी बात तक सुनने को तैयार नहीं।” सीडब्ल्यूसी ने कहा, ”लखीमपुर खीरी में किसानों को कुचलकर मारने की घटना सरकार की हठधर्मिता प्रदर्शित करती है। यह घटना केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की ओर से सार्वजनिक रूप से धमकी दिए जाने के बाद घटित हुई। इस धमकी से उनका संदिग्ध अतीत स्पष्ट होता है।”

प्रस्ताव में कहा गया है, ”जब कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में जनता द्वारा दबाव डाले जाने पर गृह मामलों के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री के बेटे को आरोपी मानकर गिरफ्तार कर लिया गया है, तब भी प्रधानमंत्री जी ने मंत्री को बर्खास्त करने से इंकार कर दिया है। कांग्रेस कार्यसमिति राहुल गांधी द्वारा साहस व निरंतरता से किसानों के मुद्दों के लिए लड़ने और प्रियंका गांधी द्वारा दृढ़ता से उत्तर प्रदेश में किसानों की हत्या के खिलाफ लड़ाई की सराहना करती है।”

सीडब्ल्यूसी ने आरोप लगाया, ”लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला मोदी सरकार के कारनामों का एक और दुखद व लज्जाविहीन पहलू है। भारत ने लोकतंत्र के रूप अपनी मान्यता खो दी है, इसे अब निर्वाचित अधिनायकवाद के रूप में देखा जाने लगा है। संसद की तिरस्कारपूर्ण अवमानना की गई।” ”मीडिया को झूठे मामलों में फंसाकर और छापे मारकर अपने वश में करने के लिए धमकाया गया। गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को धमकाया गया और उनकी कल्याणकारी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई। लोगों की आवाज दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया गया।”

कांग्रेस की सर्वोच्च इकाई ने कहा, ”सरकार ने दुर्भावनापूर्ण स्पाइवेयर द्वारा गुप्त रूप से लोगों के व्यक्तिगत जीवन में घुसपैठ की। लोकतंत्र के हर पहलू को कमजोर किया गया।

कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार द्वारा भारत देश को ‘नागरिकों के ऊपर जासूसी और पुलिस द्वारा निगरानी तंत्र’ में बदलने के हर षडयंत्रकारी प्रयास का विरोध करेगी।” प्रस्ताव में कहा गया है, ”कांग्रेस कार्य समिति का विश्वास है कि हमारी जिम्मेदारी है, लोगों को आने वाले खतरों के प्रति आगाह करना। हम ऐसा करते हुए सभी लोकतांत्रिक दलों और शक्तियों से आह्वान करते हैं कि सभी मिलकर मोदी सरकार से उत्पन्न इन चुनौतियों का दृढ़ता से मुकाबला करें, ताकि देश के नागरिकों की बेहतरी हो सके और उन मूल्यों का संरक्षण हो, जिन पर इस देश का निर्माण हुआ था।’

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