उत्तराखंड में बीजेपी को एक और झटका देने की तैयारी में कांग्रेस, एक और कैबिनेट मंत्री के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा तेज

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उत्तराखंड में 2022 के शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।


कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे संजीव आर्य के कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही कांग्रेस का दलबदल का खाता खुल गया है। कांग्रेस ने भाजपा की हैट्रिक का बड़ा जबाव कैबिनेट मंत्री के साथ विधायक को अपने पाले में लाकर सिक्‍सर से दिया है।

जो कि आगे भी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में यशपाल आर्य की घर वापसी के कार्यक्रम में हरीश रावत ने भी इसके संकेत दिए हैं। साफ है कि कांग्रेस और भाजपा आने वाले दिनों में सियासी पिच पर बड़ा उलटफेर करने की तैयारी में हैं।

राजनैतिक दल दलबदल के जरिए बड़े चेहरों को अपने पाले में लाकर पार्टी का कद बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। भाजपा ने खेल की शुरूआत की तो कांग्रेस पर दबाव नजर आने लगा। कांग्रेस ने भी 15 दिन का समय मांगा और दावा किया कि भाजपा के बड़े चेहरे उनके संपर्क में हैं।

आखिरकार कांग्रेस ने उत्तराखंड में अपने वादे के अनुरूप भाजपा के खेमे में बड़ी सेंधमारी करते हुए यशपाल आर्य और संजीव आर्य को कांग्रेस ज्वाइन करा दी ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दो और बड़े चेहरे दीपावली से पहले कांग्रेस को ज्वाइन कर सकते हैं। इसमें एक और कैबिनेट मंत्री भी शाामिल हो सकता है। जिन नामों पर सबसे ज्यादा कयास लगाए जा रहे हैं, उनमें रायपुर से विधायक उमेश शर्मा काऊ और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का नाम तेजी से लिया जा रहा है। काऊ और हरक सिंह के कांग्रेस में जाने की चर्चांए लंबे समय से चल रही है। जब से रायपुर विधायक का भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ विवाद का वीडियो वायरल हुआ तबसे काऊ के कांग्रेस में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

जब यशपाल आर्य दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे तो विधायक काऊ के भी कांग्रेस ज्वाइन करने की खबरें आई। लेकिन बाद में काऊ को लेकर फिलहाल मामला रूकने की चर्चा शुरू हो गई। इतना ही नहीं काऊ को रोकने में अनिल बलूनी का दांव बताया जा रहा है। इधर हरक सिंह के चुनाव से पहले कांग्रेस में जाने के भी कयास तेजी से सामने आ रहे हैं।

भाजपा खेमे में भी कांग्रेस के एक कुमाऊं के बड़े चेहरे और कांग्रेस नेता हरीश रावत के करीबी विधायक के नाम को लेकर खासा चर्चा हो रही है। जिनमें हरीश धामी और करन माहरा का नाम सियासी गलियारों में तेजी से उछला है। कांग्रेस के दोनों विधायक हरीश रावत के करीबी माने जाते हैं। लेकिन लंबे समय से दोनों की हरीश रावत से दूरियां सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर इनमें से एक भी कांग्रेसी विधायक को भाजपा तोड़ने में कामयाब हुई तो कांग्रेस और हरीश रावत के लिए ये बड़ा झटका होगा। हालांकि कांग्रेस सूत्री इन खबरों का खंडन कर रहे हैं।

भाजपा अब तक तीन विधायकों को अपने पाले में लाने में कामयाब हुई है। जिनमें दो निर्दलीय प्रीतम पंवार, राम सिंह कैड़ा और एक कांग्रेस विधायक राजकुमार शामिल हैं। इस तरह से भाजपा दलबदल में हैट्रिक लगा चुकी है। अब भाजपा कांग्रेस के एक और विधायक को अपने पाले में लाने का दावा कर रही है। जिससे कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके।

लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने यशपाल आर्य और उनके बेटे की घर वापसी कराई, उससे भाजपा को कांग्रेस काफी हद तक जबाव देने में कामयाब हुई है। कांग्रेस अब भाजपा के एक कैबिनेट मंत्री को अपने पाले में लाने को अपनी जीत बता रही है। साथ ही मंत्री के साथ एक विधायक को भी बोनस के तौर पर अपने पाले में लाकर कांग्रेस को संजीवनी मिल गई है। जिससे चुनाव से पहले कांग्रेसियों में नया उत्साह नजर आना तय है।

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