दिग्विजय सिंह के ऐलान से बीजेपी में घबराहट, MP की राजनीति बढ़ी सरगर्मी

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय आंदोलन की समिति के प्रमुख दिग्विजय सिंह इन दिनों राज्य में अपनी सियासी जमीन को पुख्ता करने में जुटे है। एक तरफ वे जहां जनजागरण के नाम पर यात्राएं कर रहे है तो वहीं उन्होंने भोपाल के हुजूर क्षेत्र के विधायक रामेश्वर शर्मा के कथित बयान के विरोध में 24 नवम्बर को पदयात्रा निकालकर रामधुन करने का ऐलान किया है तो वहीं भाजपा विधायक शर्मा भी उन पर हमलावर है।

राज्यसभा सांसद सिंह इन दिनों राज्य में खासे सक्रिय है। बीते कुछ दिनों से वे जनजागरण यात्रा में लगे है, अलग-अलग हिस्सों में जाकर वे लोगों से संवाद कर रहे है तो केंद्र व राज्य सरकार पर तीखे हमले बोल रहे है। महंगाई से लेकर स्थानीय समस्याओं पर खुलकर चर्चा कर रहे है। इसी दौरान भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का एक कथित वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे कांग्रेसियों के पैर तोड़ने की बात कह रहे हैं।

भाजपा विधायक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया है, मैं कांग्रेसी हूँ जिसमें ताकत हो तो मेरे घुटने तोड़ दे। मैं गांधीवादी हूँ। हिंसा का जवाब अहिंसा से दूँगा। 24 नवंबर को मैं महात्मा गांधी की मूर्ति से रामेश्वर शर्मा के घर जाउंगा। उनके घर जा कर प्रभु से उन्हें सदबुद्धि देने के लिए एक घंटे तक रामधुन करूँगा।

दिग्विजय के इस बयान के बाद रामेश्वर शर्मा ने ट्वीट कर कहा, मैं तो धन्य हो गया कि मेरी वजह से आप (दिग्विजय सिंह) प्रभु श्रीराम का भजन करेंगे, 24 की श्रीराम धुन इतिहास के पन्नो में दर्ज होगी, मैं आपको श्रीरामचरित मानस भेंट करूँगा । स्वल्पाहार के लिए आपके साथ आने वाले श्रीराम भक्तों की संख्या एवं समय बताने का कष्ट करें ।

एक अन्य ट्वीट में शर्मा ने कहा, कौन है कलखेड़ा का इसरार खान ? जिसके लिए दिग्विजय सिंह को याद आये प्रभु श्रीराम।

भाजपा विधायक के साथ कई नेता भी आ खड़े हुए। पार्टी के राष्टीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा, अपनी वृद्धावस्था का सकारात्मक उपयोग। भगवान श्रीराम सबका भला करें। एक घंटे रामधुन करने के बाद आपको तो सद्बुद्धि आ ही जाएगी।

राज्य की सियासत एक बार फिर गरमा रही है, कांग्रेस की ओर से जमीनी मोर्चा पूरी तरह दिग्विजय सिंह ने संभाल रखा है। कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि दिग्विजय सिंह सियासी मैदान में बड़े खिलाड़ी हैं। जब कोई नेता सड़क पर उतरने को तैयार नहीं है तब दिग्विजय सिंह मैदान में आकर पार्टी की अपरोक्ष रुप से कमान संभाले नजर आना चाह रहे है। साथ ही वे राज्य की सियासत में अपने प्रभाव को किसी भी कीमत पर कम नहीं हेाने देना चाहते।

ऐसे में बीजेपी जिस तरह से दिग्विजय के ऐलान के बाद दिग्विजय पर हमलावर है वो बीजेपी में घबराहट दिख रहा है क्योंकी 2018 के चुनाव से पहले दिग्विजय के नर्मदा पदयात्रा ने बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

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