राजस्थान में कांग्रेस ने की ऐतिहासिक मंत्रिमंडल विस्तार; दलित,आदिवासी और महिला को मिला मौका

राजस्थान में अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में बहुप्रतीक्षित फेरबदल आज को पूरा हो गया। राजभवन में राज्यपाल कलराज मिश्र ने 11 विधायकों को कैबिनेट व चार विधायकों को राज्य मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई ।

मुख्यमंत्री गहलोत ने मंत्री परिषद पुनर्गठन को सोशल इंजीनियरिंग का एक नमूना बताते हुए उम्मीद जताई कि यह कैबिनेट लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी व राज्य में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनेगी।

राज्यपाल मिश्र ने विधायक हेमाराम चौधरी, महेंद्रजीत मालवीय, रामलाल जाट, महेश जोशी, विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा, ममता भूपेश, भजनलाल जाटव, टीकाराम जूली, गोविंद राम मेघवाल व शकुंतला रावत को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई। वहीं, जाहिदा खान, बृजेंद्र ओला, राजेंद्र गुढ़ा व मुरारीलाल मीणा को राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई।

उल्लेखनीय है कि नये मंत्रियों में ममता भूपेश, भजनलाल जाटव व टीकाराम जूली को राज्यमंत्री से पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है। इस सूची में हेमाराम चौधरी, मुरारीलाल मीणा व बृजेंद्र ओला सहित पांच विधायकों को पायलट खेमे का माना जाता है।

इसके अलावा पिछले साल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावती रुख अपनाए जाने के समय पायलट के साथ साथ पद से हटाए गए विश्वेंद्र सिंह व रमेश मीणा को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से कांग्रेस में आए छह विधायकों में से राजेंद्र गुढ़ा को भी मंत्री बनाया गया है।

इस पुनर्गठन में कैबिनेट मंत्री रघु शर्मा, हरीश चौधरी और राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को हटाया गया है। इन तीनों मंत्रियों ने संगठन में काम करने की मंशा से अपने इस्तीफे पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिए थे। डोटासरा इस समय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं तो डा शर्मा को पार्टी ने हाल ही में गुजरात मामलों का व हरीश चौधरी को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है।

राज्य की कांग्रेस सरकार अगले महीने अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने जा रही है और मंत्रिमंडल में यह पहला फेरबदल है जिसे पार्टी आलाकमान द्वारा क्षेत्रीय व जातीय संतुलन के साथ साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य में 2023 के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस पुनर्गठन के जरिए क्षेत्रीय व जातीय संतुलन भी साधने की कोशिश की गई है। जिन तीन मंत्रियों को राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री बनाया गया है वे अनुसूचित जाति से हैं। नए कैबिनेट मंत्रियों में चार अनुसूचित जाति से, तीन अनुसूचित जनजाति से होंगे। अब गहलोत कैबिनेट में तीन महिलाएं मंत्री हो गई हैं। इसी कारण से इसे ऐतिहासिक मंत्रिमंडल कहा जा रहा है।

कांग्रेस सरकार का समर्थन कर रहे किसी निर्दलीय विधायक को पुनर्गठन के तहत मंत्री पद नहीं दिया गया है। राजस्थान मंत्रिपरिषद में अब मुख्यमंत्री के अलावा 19 कैबिनेट व 10 राज्यमंत्री हो गए हैं। इससे मंत्रिपरिषद अधिकतम 30 मंत्रियों का कोटा पूरा हो गया। सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राज्य में और मंत्री नहीं बन सकते और बाकी विधायकों को संसदीय सचिव सहित अन्य पदों पर लगाया जाएगा।

शपथ ग्रहण समारोह के बाद खुद मुख्यमंत्री गहलोत ने इसका संकेत दिया। उन्होंने कहा,’अभी मुख्यमंत्री के सलाहकार, संसदीय सचिव, बोर्ड व निगमों के अध्यक्ष बनने हैं, तो ज्यादातर विधायकों को समायोजित करने का हमारा प्रयास रहेगा।’

इसके साथ ही गहलोत ने कहा ‘मंत्रिपरिषद पुनर्गठन अच्छा हुआ है पूरे राज्य के लोग खुश हैं। सोशल इंजीनियरिंग हुई है जिसमें सब वर्गों व कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हुए यह नई कैबिनेट बनी है। अजा, जजा, ओबीसी, अल्पसंख्यक सबको शामिल करने का प्रयास किया है। अच्छे ढंग से हुआ है।’

राज्य में 2023 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस सरकार बनाने का विश्वास जताते हुए गहलोत ने कहा, ‘ हमारे अगले चुनाव की तैयारी आज से ही शुरू हो गई… उसी रूप से हम काम करेंगे और नए मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपेगे।

गहलोत ने कहा,’कैबिनेट को नए रूप में आप देखेंगे और हम जनता की आशाओं व अपेक्षाओं को पूरा कर दिखाएंगे। अगली बार फिर कांग्रेस की सरकार बने ये जो भावना जनता में पैदा हुई इस बार उस भावना उन अपेक्षाओं पर हम खरा उतरेंगे। और अगली बार सरकार बनाने में कामयाब होंगे।’

वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी मंत्रिपरिषद में फेरबदल पर संतोष जताते हुए कहा कि यह बदलाव बहुत बड़ा संकेत है जिसका फायदा आगे चलकर कांग्रेस को होगा और राजस्थान में 2023 में कांग्रेस फिर सरकार बनाएगी।

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