CWC बैठक में बोली सोनिया गांधी, पार्टी के कर्ज को चुकाने का आ गया है समय

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की अध्यक्षता की। इस मीटिंग में सोनिया गांधी के अलावा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कई अन्य नेता शामिल हुए।

आपको बता दें कि यह मीटिंग राजस्थान के उदयपुर में 13 मई से लेकर 15 मई तक होने वाले विचारमंथन शिविर को लेकर की गई।

इस बैठक में सोनिया गांधी ने विचारमंथन शिविर के एजेंडे के बारे में पार्टी के नेताओं को बताया। CWC की बैठक को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि आपको याद होगा कि मैंने पिछली सीडब्ल्यूसी मीटिंग में कहा था कि हम जल्‍द ही एक चिंतन शिविर का आयोजन करेंगे तो यह चिंतन शिविर 13 मई से उदयपुर में होगा, जो 15 मई तक चलेगा। इस शिविर में हमारे करीब 400 सहयोगी शामिल होंगे। इसमें अधिकतर वो लोग शामिल हैं, जो संगठन या फिर पूर्व की सरकारों में किसी पद पर रहे हैं।

सोनिया गांधी ने चिंतन शिविर के एजेंडे के बारे में बताते हुए कहा कि हमारा विचार विर्मश छह समूहों में होगा जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक न्‍याय, किसानों, युवाओं और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। सोनिया गांधी ने कहा कि सीडब्‍ल्‍यूसी से मंजूरी मिलने के बाद हम उदयपुर नसंकल्‍प को अपनाएंगे। उदयपुर से पार्टी के त्‍वरित पुनरुद्धार, एकजुटता, संकल्‍प और प्रतिबद्धता का संदेश स्‍पष्‍ट रूप से सामने आए, यह सुनिश्‍चित करने के लिए मैं आप सभी से पूर्ण सहयोग का आग्रह करती हूं। सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी सभी के लिए अच्छी रही है और यह वक्त है कि पार्टी के उस कर्ज को चुकाया जाए।

CWC की मीटिंग में सोनिया गांधी ने आगे कहा कि पार्टी की स्थिति को सुधारने के लिए कोई जादू की छड़ी नहीं है, जो घुमाया और स्थिति ठीक हो जाएगी, इसके लिए निस्‍वार्थ कार्य, अनुशासन और सामूहिक उद्देश्‍य की भावना होनी चाहिए। साथ ही अच्छा प्रदर्शन भी पार्टी को सक्षम बनाएगा। सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी फोरम पर आत्‍म आलोचना की जरूरत है लेकिन यह इस तरह से नहीं हो कि आत्‍मविश्‍वास और मनोबल गिरे और निराशा का माहौल व्‍याप्‍त हो जाए। सोनिया गांधी ने कहा कि चिंतन शिविर एक कर्मकांड नहीं बनना चाहिए जिससे गुजरना पड़ता है।

आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने इस तरह के चिंतन शिविर को आखिरी बार 2013 में आयोजित किया था। इससे पहले 1998 और 2003 में भी यह शिविर आयोजित हुआ था। इनमें 2003 का चिंतन शिविर शिमला में आयोजित हुआ था, जिसका फायदा भी देखने को मिला था। 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को सत्ता से बाहर कर यूपीए की सरकार बनी थी। फिर अगले 10 साल तक देश में यूपीए की ही सरकार रही।

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