ED ने स्वीकारा सोनिया गांधी का अनुरोध, पूछताछ में शामिल होने के लिए मिला समय !

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ई़डी) को पत्र लिखा है। उन्होंने ईडी से पेशी के लिए कुछ समय मांगा है।

कोविड-19 और फेफड़ों के संक्रमण से पूरी तरह से ठीक होने तक ईडी के सामने पेश होने के लिए कुछ हफ्तों का समय मांगा है। सोनिया गांधी ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए तबीयत ठीक होने तक कुछ समय की मांग की है। कहा कि जब पूरी तरह से ठीक हो जाऊंगी तो ईडी के सामने पेश हो जाऊंगी।

प्रवर्तन निदेशालय ने सोनिया गांधी के लिखित अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी खिलाफ समन को टाल दिया गया है। एजेंसी ने उन्हें नए समन की अगली तारीख अभी तय नहीं की है। तारीख तय होने के बाद सोनिया गांधी ईडी के सामने पेश होंगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया कि सोनिया गांधी को कोविड और फेफड़ों के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के बाद घर पर आराम करने की सख्त सलाह दी गई है। इसलिए उन्होंने आज ईडी को पत्र लिखकर पेशी के लिए कुछ हफ्तों तक स्थगित करने की मांग की है। बता दें कि सोनिया गांधी को ईडी ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलब किया है।

वहीं, इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से पांचवें दिन भी पूछताछ हुई। राहुल गांधी देर रात ईडी के दफ्तर से निकले। मंगलवार को भी उनसे ईडी के अधिकारियों ने करीब 12 घंटे तक पूछताछ की। मंगलवार को पूछताछ के दौरान राहुल गांधी को रात आठ बजे के करीब उन्हें सिर्फ आधा घंटे का ब्रेक दिया गया था। ब्रेक खत्म होने के बाद राहुल गांधी फिर से ईडी कार्यालय पहुंच गए थे। केंद्रीय जांच एजेंसी अभी तक राहुल गांधी से करीब 50 घंटे की पूछताछ कर चुकी है। राहुल गांधी से सोमवार को भी करीब 10 घंटे की पूछताछ की गई थी। पिछले हफ्ते उनसे करीब 30 घंटे की पूछताछ हुई थी।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार की भूमिका की जांच कर रही है। इसमें यंग इंडियन का एजेएल (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) का अधिग्रहण शामिल है, जो कंपनी नेशनल हेराल्ड अखबार चलाती है, जो एक कांग्रेस का मुखपत्र है। यंग इंडियन ने एजेएल की संपत्ति में ₹800 करोड़ से अधिक ले लिया है। आयकर विभाग के अनुसार, इसे यंग इंडियन के शेयरधारकों सोनिया गांधी और राहुल गांधी की संपत्ति माना जाना चाहिए, जिसके लिए उन्हें कर का भुगतान करना चाहिए।

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