हिमाचल में BJP को बड़ा झटका 3 बार के विधायक और BJP के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके कद्दावर नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ !

चुनावी साल में हिमाचल भाजपा की सियासत को उस समय झटका लगा जब प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्री खीमी राम दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला की मौजूदगी में भाजपा छोड़ कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये।

भाजपा में पनप रहे आंतरिक असंतोष का ही परिणाम है कि भाजपा के कद्दावर नेता पार्टी को छोड़ने को मजबूर हुये हैं। पार्टी टिकट को लेकर कई नेताओं पर तलवार लटकी है और उन्हें भाजपा में अपना भविष्य असुरक्षित महसूस होने लगा है। मौजूदा दौर में खासकर धूमल खेमे से जुड़े कई नेता अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। और दूसरे दलों में अपने लिये ठौर ठिकाना तलाशने लगे हैं। उनमें खीमी राम भी शामिल रहे हैं। हिमाचल भाजपा दो गुटों में बंट चुकी है। मौजूदा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जो कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल व उनके बेटे केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बीच कशमकश बढ़ने लगी है। खीमी राम शर्मा को धूमल का करीबी माना जाता है।

जिला परिषद चुनाव से राजनीति में आने वाले खीमी राम शर्मा का भाजपा संगठन में काफी अनुभव रहा है। साल 1999 में उन्होंने बतौर जिला परिषद चुनाव लड़ा। बाद में जिला परिषद अध्यक्ष भी बने। दो बार विधायक रहे खीमीराम शर्मा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं। धूमल सरकार में मंत्री पद भी संभाला है। अनुभवी राजनीतिज्ञ होने के बावजूद पार्टी में इन दिनों उनकी उपेक्षा हो रही थी, जिससे वह नाराज चल रहे थें। हालांकि कुछ दिन पहले भाजपा सह प्रभारी संजय टंडन ने कुल्लू में उनसे मिलकर नाराजगी दूर करने का प्रयास किया था। लेकिन बात नहीं बनी। 2017 के विधानसभा चुनाव के खीमी राम शर्मा का टिकट कटने के बाद से वह पूरी तरह से हाशिए पर थे। इसके बाद न तो सरकार ने पूछ की और न ही संगठन में कोई ओहदा दिया गया। कुल्लू जिला के बंजार विधानसभा क्षेत्र में खीमी राम शर्मा की अच्छी पकड़ मानी जाती है। लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से उनके रिश्तों में खास गर्मजोशी दिखाई नहीं दी। जय राम ठाकुर पर जेपी नड्डा का वरदहस्त है। जिससे पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल व उनके बेटे केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के करीबी इन दिनों हाशिये पर है। गुटबाजी के चलते धूमल गुट के साथ ताल ठोकने वाले नेताओं को टिकट कटने का खतरा है।

दरअसल, हिमाचल भाजपा के कई नेता आने वाले चुनावों में अपनी-अपनी टिकट बचाने के लिये जोड़-तोड़ करने लगे हैं। पार्टी के राष्टरीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी इस बार पुराने चेहरों के बजाये नये चेहरे मैदान में उतारेगी। और कुछ लोगों के टिकट भी कट सकते हैं। यही वजह है कि भाजपा के कुछ विधायक व टिकट के दावेदार इन दिनों अपने आपको असहज महसूस करने लगे हैं। उन्हें लगता है कि पार्टी में चल रही गुटबाजी के चलते इस बार उनका टिकट कट सकता है। उत्तर प्रदेश में भी भाजपा ने कई सिटिंग विधायकों के टिकट काट कर चौंका दिया था। कुछ ऐसा ही फार्मूला प्रदेश में भी तैयार किया जा रहा है। सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिये तैयार किये गये फार्मूले में कई नेता जद में आ सकते हैं। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा विधायकों में से 15 फीसदी विधायकों के टिकट उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की तर्ज पर कट सकते हैं। माना जा रहा है कि इसी डर के चलते आज खीमी राम ने कांग्रेस का दामन थामा।

बताया जा रहा है कि भाजपा ने दो चरणों में आंतरिक सर्वे कराया है। जिसमें स्थानीय स्तर पर कुछ विधायकों और जय राम सरकार के काबीना मंत्रियों के खिलाफ जनता में असंतोष होने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के आने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने सीएम जय राम ठाकुर से बात की है। व टिकट काटे जाने की सूरत में प्रभावित होने वाले इलाकों में नये चेहरे तलाशने को कहा गया है। इसी के चलते पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह , पार्टी के हिमाचल प्रभारी अविनाश राय खन्ना और सह प्रभारी प्रदेश के विभिन्न चुनाव क्षेत्रों का लगातार दौरा कर पार्टी की स्थिति का जायजा ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा के सर्वेक्षण में मंत्रियों के खिलाफ लोगों में गहरी नाराजगी की बात सामने आई है। पिछले दिनों चंबा में शिक्षा मंत्री गोविंद के खिलाफ तो मुर्दाबाद के नारे लगे कि कई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर पाए हैं। जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह को कुल्लू और ठियोग में विभिन्न मसलों से नाराजगी व्यक्त कर रोका गया और उनके खिलाफ नारेबाजी हुई। जनमंच के लिए जाते हुए ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी और सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी को सवर्ण आयोग ने काले झंडे दिखाए।

धर्मशाला के विधायक विशाल नैहरिया का अपनी पत्नी के बीच चल रहा विवाद उनके राजनीतिक भविष्य के लिये खतरा पैदा कर रहा है। नगरोटा बगवां के विधायक के प्रति भी लोगों में नाराजगी है। ज्वाली के विधायक अर्जुन सिंह और बैजनाथ से मुल्ख राज प्रेमी की परफॉर्मेंस से पार्टी नाखुश बताई जा रही है। वहीं ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला की संगठन मंत्री पवन राणा के खिलाफ बयानबाजी भी पार्टी को नागवार गुजरी है। इसी तरह पिछला चुनाव हार चुके 23 भाजपा नेताओं के दोबारा चुनाव मैदान में उतरने को लेकर भी संशय बना हुआ है।

पार्टी जल्द ही पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को राज्यपाल बनाने जा रही है। लिहाजा धूमल के भी बार चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। इसी तरह बार बार चुनाव हारने की वजह से पार्टी इस बार पूर्व भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती को चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है। इस साल के अंत में होने वाले चुनावों के लिये भाजपा पहले ही चुनावी मोड में आ चुकी है। भाजपा नेताओं के दौरों के चलते अब टिकट कटने के दायरे में आने वाले नेता परेशान हैं, तो दूसरी ओर टिकट के चाहवान अपनी गोटियां बिठाने में मशगूल हैं।

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