अमित शाह के बिहार दौरे से पहले भाजपा को बड़ा झटका, चार बार के विधायक जनार्दन यादव ने छोड़ी पार्टी

बिहार की राजनीति में इन दिनों सियासी हलचल तेज़ है। गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित बिहार दौरे से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और चार बार के विधायक जनार्दन यादव ने भाजपा से इस्तीफा देकर राजनीतिक समीकरणों में हलचल मचा दी है।

कौन हैं जनार्दन यादव?

जनार्दन यादव बिहार के अररिया ज़िले के नरपतगंज विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने लंबे समय तक भाजपा में रहते हुए संगठन और जनता के बीच मजबूत पहचान बनाई थी। ऐसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता का पार्टी से अलग होना भाजपा के लिए एक करारा झटका है।

इस्तीफे की वजहें क्या हैं?

इस्तीफा देते समय जनार्दन यादव ने साफ कहा कि बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है।

👉 “थाना हो, प्रखंड कार्यालय हो या कोई भी सरकारी विभाग, बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता।” — जनार्दन यादव

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के वर्तमान विधायक और संगठन जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे। पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है और पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक माहौल खत्म हो चुका है।

भाजपा के लिए चुनौती क्यों बढ़ी?

गृहमंत्री अमित शाह का यह दौरा भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा था। लेकिन दौरे से ठीक पहले जनार्दन यादव जैसे वरिष्ठ नेता का पार्टी छोड़ना भाजपा की छवि और संगठन दोनों के लिए चिंता का विषय है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि —

भाजपा को वरिष्ठ नेताओं को साधने में नाकामयाबी भारी पड़ सकती है।

यह इस्तीफा पार्टी के अंदरूनी असंतोष और गुटबाज़ी को उजागर करता है।

विपक्ष को भाजपा के खिलाफ और हमलावर होने का मौका मिल गया है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

राजद, कांग्रेस और जद(यू) ने जनार्दन यादव के इस्तीफे को भाजपा की असफलता करार दिया है।

राजद नेताओं ने कहा कि —
👉 “भाजपा में सिर्फ नेताओं की उपेक्षा ही नहीं, जनता की समस्याओं की भी अनदेखी हो रही है। इसलिए लोग पार्टी छोड़ने को मजबूर हैं।”

वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा अब न तो संगठन को संभाल पा रही है और न ही जनता का भरोसा।

जनता और स्थानीय समीकरणों पर असर

नरपतगंज विधानसभा क्षेत्र में जनार्दन यादव का अच्छा जनाधार रहा है। ऐसे में उनके पार्टी छोड़ने से भाजपा को जमीनी स्तर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह बदलाव न सिर्फ स्थानीय समीकरण बिगाड़ेगा, बल्कि चुनावी गणित पर भी असर डालेगा।

निष्कर्ष

अमित शाह के बिहार दौरे से पहले भाजपा को लगा यह झटका बताता है कि पार्टी के भीतर असंतोष और अव्यवस्था गहराती जा रही है। विपक्ष इसे पूरी तरह भुनाने की कोशिश करेगा और भाजपा को अब संगठनात्मक मजबूती और पुराने नेताओं को साधने पर फोकस करना होगा।

आगामी बिहार चुनाव में यह घटना कितना असर डालेगी, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल भाजपा की मुश्किलें बढ़ना तय है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here