
राफेल डील को लेकर एचएएल के चेयरमैन आर. माधवन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले राफेल सौदे को रद्द कर मोदी सरकार ने कब नया सौदा कर लिया इस बात की एचएएल को कोई जानकारी नहीं थी।
एचएएल के चेयरमैन आर. माधवन ने कहा, ‘हमें पिछले सौदे को रद्द किए जाने की जानकारी नहीं थी। हम राफेल पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकि हम अब इस सौदे का हिस्सा नहीं है।’ कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली यूपीए सरकार ने फ्रांस की एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी डेसॉ ऐविएशन के साथ 125 राफेल विमानों का सौदा किया था, जिसमें से 108 विमानों का निर्माण लाइसेंस्ड प्रॉडक्शन के तहत एचएएल द्वारा किया जाता और 18 विमानों का निर्माण फ्रांस में कर उसे भारत लाया जाता। ये विमान भारतीय वायु सेना के लिए खरीदे जाने थे।
सरकार की एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को खबर नहीं थी कि पिछले राफेल सौदे को बीजेपी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार रद्द कर चुकी है और नया राफेल सौदा किया गया। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। एचएएल के चेयरमैन आर. माधवन ने बताया, “हमें पिछले सौदे को रद्द किए जाने की जानकारी नहीं थी। हम राफेल पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकि हम अब इस सौदे का हिस्सा नहीं है।”
नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने 2015 में फ्रांस की सरकार के साथ दूसरा सौदा कर लिया, जिसमें 125 के बजाय सिर्फ 36 राफेल विमानों की खरीद की गई और इन सबका निर्माण फ्रांस में ही कर उसे भारत लाया जाएगा। इसकी अनुमानित कीमत 54 अरब डॉलर है।

































































