हेलमेट न पहनकर इस खिलाड़ी ने कर दी थी बड़ी भूल , क्रिकेट मैदान में गेंद लगने के बाद हो गई थी मौत

क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ी की मौत होना कम ही देखा जाता है। मगर कभी-कभी सुरक्षा को नजरअंदाज करना खिलाड़ी के लिए खतरनाक हो जाता है और गेंद से किसी नाजुक स्थान पर चोट लगने से उसकी मौत हो जाती है।

ऐसा ही एक घटना भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज रमन लांबा कि साथ हुआ जहां उनकी एक चूक के बाद क्रिकेट गेंद से चोट लगने से उनकी मौत हो गई।

दरसल क्रिकेट मैदान में कदम रखते ही ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़ने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेटर रमन लांबा ने उस दिन साथी खिलाडिय़ों की हेलमेट पहनने की सलाह को अनदेखा कर दिया था जिसके बाद सिर पर गेंद लगने की वजह से उनकी मौत हो गई।

1998 में क्लब मैच के दौरान ढाका में फील्डिंग करते हुए ये दुखद घटना घटी थी। अबाहानी के कप्तान खालिद मसूद ने लांबा को शॉर्ट लेग पर लगाया था। ओवर की तीन गेंद बची थी और कप्तान ने लांबा से हेलमेट पहनने के लिए कहा, लेकिन लांबा ने यह कहते हुए हेलमेट पहनने से मना किया कि ओवर में तीन ही गेंद बची हैं।

गेंदबाज सैफुल्लाह खान ने गेंद डाली जो शॉर्ट थी और बल्लेबाज मेहराब हुसैन ने उस पर तगड़ा शॉट लगाया। गेंद पास खड़े लांबा के सिर पर लगी और फिर विकेटकीपर मसूद के पास चली गई।

सिर पर गेंद लगने से लांबा को ड्रेसिंग रूम में ले जाया गया। लांबा की तबीयत बिगडऩे लगी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहां वह तीन दिन तक बेहोश रहे और 23 फरवरी को ढाका के पोस्ट ग्रेजुएट अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

बेशक लांबा ने देश के लिए कम क्रिकेट खेली हो, लेकिन वह अपने छोटे से करियर में ख्याति जरूर पा गए। लांबा को उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता था। उन्होंने भारत के पूर्व कप्तान कृष्णमचारी श्रीकांत के साथ सलामी बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाली थी। लांबा ने पदार्पण मैच से ही सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था।

लांबा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला एकदिवसीय मैच 7 सितंबर 1986 को खेला। ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए 250 रन बनाते हुए भारत के सामने 251 रनों का लक्ष्य रखा। भारत ने यह मुकाबला 36 गेंद रहते ही जीत लिया था। लांबा ने इस मैच में 64 रन बनाए जिसमें 8 चौके और क्रेग मैकडरमॉट की गेंद पर लगाया गया छक्का भी शामिल था। अपनी इस पारी से लांबा ने फैन्स की संख्या दोगुनी कर ली।

इसी सीरीज के चौथे मुकाबले में एक बार फिर से उनका बल्ला चमका और इस बार उन्होंने अपने पिछले स्कोर को पीछे छोड़ते हुए 68 गेंदों पर 74 रनों की पारी खेल कर भारत को फिर से जीत दिलाई। सीरीज के अंतिम मुकाबले में लांबा ने अपने इंटरनेशनल करियर का पहला शतक जड़ते हुए मैन ऑफ द सीरीज खिताब पर अपना कब्जा जमाया। अपनी पहली ही सीरीज में लांबा ने मैन ऑफ द टूर्नामेंट बने। जिसके बाद उनकी हर तरफ चर्चा होने लगी।

लेकिन लांबा ने अपनी पहली सीरीज में जो प्रदर्शन किया उसे वह आगे कायम नहीं रख पाए।
उन्होंने भारत के लिए कुल 32 एकदिवसीय मैच खेले और 27 की औसत से 783 रन बनाए, जिसमें एक शतक और छह अर्धशतक शामिल हैं।

वहीं अगर उनके अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट करियर पर नजर डालें तो उन्होंने मात्र 4 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें 102 रन जोड़े। इस दौरान उन्होंने एक अर्धशतक भी जड़ा है।

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