
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के राज्यसभा जाने को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चा तेज है। प्रियंका को राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के साथ-साथ बिहार से भी राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया गया है लेकिन शुरू से ही कहा जा रहा है इस पर अंतिम फैसला गांधी परिवार और पार्टी हाईकमान ही करेगी।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इटली से भारत वापस लौटने के बाद देश के राजनीतिक हालात का जायजा लिया और संसद सत्र में भी भाग लिया।
मिली जानकारी के अनुसार राहुल के विदेश दौरे से लौटने के बाद गांधी परिवार के सदस्यों ने दो बार मीटिंग की राहुल-प्रियंका और सोनिया तीनो ने मुलाकात कर कई मुद्दों पर चर्चा किया।
सूत्रों के मुताबिक इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा को राज्यसभा भेजने के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दौरान यह तय हुआ कि वह पार्टी में काम करती रहेंगी। प्रियंका आगे आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर संसदीय जिम्मेदारियों से दूर रहेंगी इसलिए फिलहाल उनकी राज्यसभा में एंट्री नहीं होगी। उनका जोर पार्टी को मजबूत बनाने और अपने भाई राहुल गांधी की मदद करने पर रहेगा।
सोनिया गांधी के खराब स्वास्थ्य और देश भर में दौरे करने में अक्षम होने के कारण पार्टी की कमान राहुल गांधी को संभालनी पड़ सकती है। इन परिस्थितियों की पृष्ठभू्मि के बीच यह दृष्टिकोण उभरा है कि कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर दबाव कम करने के लिए उन्हें काम करते रहना चाहिए।
कांग्रेस में यह मांग भी उठाई जा रही थी कि प्रियंका को राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए। सबसे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह मांग की थी। उन्होंने इस संबंध में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष को पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि प्रियंका को राजस्थान से राज्यसभा में भेजना चाहिए जहां पार्टी 2 सीटें जीतने जा रही है।
गहलोत चाहते थे कि प्रियंका गांधी की लोकप्रियता और करिश्माई व्यक्तित्व का राजस्थान में इस्तेमाल करना चाहिए। वह फिलहाल यू.पी. के पूर्वी हिस्से की महासचिव हैं। ऐसी रिपोर्ट है कि गहलोत ने इस मुद्दे को लेकर हाल ही में प्रियंका से मुलाकात भी की थी। वह चाहते हैं कि राज्यसभा में एंट्री के जरिए प्रियंका राजनीति में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं।
मगर अब मिली जानकारी के अनुसार प्रियंका गांधी राज्यसभा नही जाएंगी।

































































