
कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके राहुल गांधी का हर कोई मजाक बनाता है उन्हें सबसे अधिक ट्रोल भाजपा व आरएसएस द्वारा किया गया उन्हें मीडिया ने भारत का विफल राजनेता बताया लेकिन वो किन कारणो से पिछडे ये बहुत कम लोगो ने जानने की कोशिश की है
सबसे बडा सवाल यही है कि राहुल क्या है?
आज का हर युवा राजनीती मे आकर नाम कमाना चाहता है 18-28 वर्ष वाले आयु के युवा राजनीतिक पार्टी से जुड़कर प्रसिद्धि पाना चाहते है, बीजेपी मे जुडना तो बहुत आसान है लेकिन वहा उनका नाम ही नही बन पाता है लेकिन ऐसे भी युवा है जो राहुल गांधी को अपना आइकन मानकर सोशल मीडिया से अपनी राजनीति की शुरुआत करते हैं उन्हें लगता है कि हमारा राजनीति भविष्य राहुल गांधी के होते हुए सुरक्षित है उन्हें कांग्रेस से कोई मतलब नही है बल्कि उनको सिर्फ राहुल राजीव गांधी से मतलब है वो युवा राहुल गांधी की मासूमियत व स्पष्ट छवि के दिवाने है सोशल मीडिया पर देखने पर मिलेगा कि वो कोई पद पर नही है फिर वो गांधी नेहरु विचारधारा को राहुल गांधी को माध्यम बनाकर सोशल मीडिया से प्रसरित कर रहे है जिनसे उन्हें आम लोगो का अच्छा खासा समर्थन भी मिल रहा है कहने का मतलब है कि राहुल गांधी हजारो उन युवाओ का सहारा है जो राजनीति मे अपनी आर्थिक तंगी की वजह से नही आ सकते फिर भी वो राजनीति से जुडे है
अब सवाल है कि आखिर राहुल 2019 का चुनाव हार कैसे गये ? हारे तो वो लोकसभा चुनाव ही है ना जीते तो 13 उपचुनाव, राजस्थान मप्र व छत्तीसगढ़ जैसे तीन हिंदी शासित राज्य भी है जहा लंबे अरसे से कांग्रेस सत्ता से दूर थी?
हार का कारण स्पष्ट है राहुल गांधी पूरे चुुनाव मे सिर्फ़ रोजगार शिक्षा को महत्व देते रहे उन्होने वक्त व समय को भांपा ही नही आज समय सिर्फ नारे लगाना का है लेकिन फिर भी वो अपनी विचारधारा पर अडिग रहे है, शायद राहुल स्वामी विवेकानंद की विचारधारा पर चल रहे है विवेकानंद का मानना था कि चाहे परिस्थिति जो भी हमेशा अपनी विचारधारा पर अडिग रहना चाहिये शायद इसी कारण राहुल गांधी की पराजय हुई लेकिन राहुल गांधी को विफल राजनेता मानना एक मूर्खता होगी क्योंकि राहुल गांधी के कारण ही आज पूरी कांग्रेस एकजुट है और वो युवा भी पार्टी से जुडे है जिनका कभी राजनीति से ताल्लुक नही रहा है
बर्फ पिघलने मे थौडा तो समय लगेगा ही ये देश राहुल गांधी को पहचानने में थोडा समय लेगा लेकिन जिस दिन पहचान लिया उस दिन सबसे प्रचंड जीत कांग्रेस की होगी


























