राहुल गांधी ने मिडिल ईस्ट से भारतीय श्रमिकों को वापस लाने के लिए सरकार से की मांग

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण लॉक डाउन की अवधि को 14 अप्रैल से बढ़ाकर 3 मई तक कर दी गई है। जिसके बाद सूरत , बांद्रा , अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे कुछ जगहों पर मजदूरों की भीड़ घर आने के लिए जमा हो गई है।

जिसको देखते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।

राहुल ने मिडिल-ईस्‍ट में भारतीय श्रमिकों को वापस लाने की मांग करते हुए कहा कि कोरोना संकट और कामकाज बंद होने के कारण हजारों भारतीय श्रमिक परेशान हैं और घर वापसी को बेचैन हैं। राहुल गांधी ने कहा कि हमारे इन भाई-बहनों को घर लाने के लिए फ्लाइट की व्यवस्था की जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि क्वारंटाइन की योजना भी तैयार की जानी चाहिए। बता दें कि कोरोना वायरस के फैले संक्रमण के कारण कई देशों में भारतीय नागरिक फंसे हैं।

लॉकडाउन के कारण अभी अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवाएं पूरी तरह से स्थगित हैं, इस दौरान राहत कार्य में जुटी विमानन कंपनियां ही जरूरी उपकरणों के साथ उड़ान भर रही हैं।

इसके पहले राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत ने टेस्टिंग किट खरीदने में काफी देर की और अब उसके पास इन किट्स की काफी ज्यादा किल्लत है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रति 10 लाख की आबादी में सिर्फ 149 भारतीयों का टेस्ट किया जा रहा है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो हम लाओस(157), नाइगर (182), हॉन्ड्रस (162) जैसे देशों की कतार में खड़े हैं।

राहुल ने कहा था कि अधिक संख्या में लोगों का टेस्ट ही इस वायरस के खिलाफ बड़ा हथियार है। मौजूदा समय में हम इस लड़ाई मे कहीं नहीं टिकते हैं।

ये पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने कोरोना संकट के बीच केंद्र पर निशाना साधा है। इससे पहले, पीएम मोदी के संबोधन से पहले सोमवार को राहुल गांधी ने कहा था कि किसानों, दिहाड़ी मज़दूरों, व्यापारियों, सभी को एक पैमाने से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा था कि देश को ‘स्मॉर्ट’ समाधान की ज़रूरत है।

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