संसद के वर्तमान सत्र में विपक्षी दलों के साथ मिलकर कांग्रेस करेगी इन 4 विधेयकों का विरोध

कोरोना संक्रमण काल के बाद आज से संसद का सत्र शुरू होने जा रहा है जिसमे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल संसद के मानसून सत्र में सरकार द्वारा लाए जाने वाले 11 विधेयकों में से चार पर विरोध जताएंगे और अपनी चिंताओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगेगे। ये विधेयक पूर्व में लाए गए अध्यादेशों का स्थान लेंगे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी समान सोच वाले दलों के साथ संपर्क में है और उसने संसद के दोनों सदनों में कृषि से जुड़े तीन विधेयकों और बैंकिंग नियमन कानून का पुरजोर विरोध करने का फैसला किया है।

समान सोच वाले विपक्षी दलों ने महामारी से निपटने, अर्थव्यवस्था की स्थिति और लद्दाख में सीमा पर चीनी आक्रामकता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए साझा रणनीति बनाने का फैसला किया है।

वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयराम रमेश ने कहा, ”हम चीन के साथ सीमा पर स्थिति, अर्थव्यवस्था की हालत, कारोबार बंद होने, एमएसएमई उद्योग की दशा, कोविड-19 महामारी से निपटने, हवाई अड्डों का निजीकरण और मसौदा ईआईए अधिसूचना समेत कुछ अन्य मुद्दों पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा चाहते हैं।

रमेश ने कहा हमें उम्मीद है कि विपक्ष को बोलने का मौका मिलेगा और राष्ट्र के गंभीर मुद्दों पर चर्चा होगी । हम अपेक्षा करते हैं कि हमारे द्वारा उठाए जाने वाले सवालों पर जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित रहेंगे । प्रधानमंत्री आते नहीं हैं और हम चाहते हैं कि वह लोकसभा और राज्यसभा दोनों में मौजूद रहें।’

विपक्षी दल संयुक्त रणनीति के लिए कब बैठक करेंगे, इस बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि समान सोच वाले विभिन्न दलों के नेता ऑनलाइन तरीके से बात कर रहे हैं और इस पर रणनीति बन रही है ।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समान सोच वाले दलों ने चार अध्यादेशों का विरोध किया है, जिसे सरकार ने पूर्व में लागू किया था और अब इसके स्थान पर विधेयक लाए जाएंगे । उन्होंने कहा कि चार अध्यादेशों ने राज्यों के अधिकार ले लिए हैं और आगे इससे शक्ति का केंद्रीकरण होगा । रमेश ने कहा कि यह समान आधार है जिसके कारण हमें इन अध्यादेशों का विरोध करना चाहिए।

चीन के साथ सीमा पर गतिरोध को लेकर चर्चा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नवंबर 1962 में जब भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ तो संसद का सत्र चल रहा था और मुद्दे पर चर्चा हुई थी। रमेश ने कहा, ”तत्कालीन प्रधानमंत्री लोकसभा में बैठे थे और अटल बिहारी वाजपेयी समेत वरिष्ठ सांसदों से अपनी नीतियों की आलोचना सुन रहे थे।” उन्होंने कहा, ”यह कहना हास्यास्पद है कि चीन पर कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए । हमें चीन पर चर्चा करने की जरूरत है । हम जिम्मेदार राजनीतिक दल हैं, हम जानते हैं कि क्या कहना है और क्या नहीं।”

संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हिस्सा नहीं लेने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि केवल कांग्रेस से ही नहीं बल्कि अन्य दलों से भी कई लोगों ने स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं प्रकट की है और स्वास्थ्य कारणों से सत्र में हिस्सा नहीं लेने वालों के लिए अध्यक्ष से ऑनलाइन पहुंच देने का अनुरोध किया है।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पार्टी ने सीमा पर स्थिति और चीनी आक्रामकता के अलावा महामारी, अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी को लेकर चर्चा कराने की मांग की है, लेकिन सरकार से अब तक कोई आश्वासन नहीं मिला है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि महामारी के कारण डर के साए और असाधारण समय में मानसून सत्र का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में भारत और चीन टकराव की स्थिति में हैं, जीडीपी में गिरावट जारी है और महंगाई बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा, ”हम संसद में कई मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं, जिसके बारे में देश और इसके नागरिक सुनना चाहते हैं।”

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