Tuesday, September 15, 2026
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भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी सत्ता से रह जाएगी दूर! कांग्रेस और JDS साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार, कुमार स्वामी होंगे CM!

कर्नाटक चुनाव के रुझानों में बीजेपी की सीटें बहुमत के आंकड़े से कम हो गई हैं। बहुमत के लिए बीजेपी को 112 सीटें चाहिए, लेकिन रुझानों के अनुसार, बीजेपी को 106, कांग्रेस को 73 और जेडीएस को 41 सीटें मिल रही हैं।
कर्नाटक चुनाव के रुझानों में त्रिशंकु विधानसभा के आसार के बीच राज्य की अगली सरकार को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। इस बीच केरल के सीएम पिन्नारई विजयन ने कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस को साथ आकर सरकार बनाने की सलाह दी है। मीडिया से बात करते हुए विजयन ने कहा कि बीजेपी को सत्ता से रोकने के लिए जेडीएस और कांग्रेस को एक साथ आकर सरकार बनाना चाहिए।
कर्नाटक चुनाव के रुझानों में बीजेपी की सीटें बहुमत के आंकड़े से कम हो गई हैं। बहुमत के लिए बीजेपी को 112 सीटें चाहिए, लेकिन रुझानों के अनुसार, बीजेपी को 106, कांग्रेस को 73 और जेडीएस को 41 सीटें मिल रही हैं।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के ताजा नतीजों और रुझानों से राज्य में त्रिशंकु विधानसभा के आसार नजर आ रहे हैं। रुझान अगर नतीजों में बदलते हैं तो राज्य में बीजेपी या कांग्रेस दोनों को ही सरकार बनाने के लिए जेडीएस के समर्थन की जरूरत होगी। हालांकि, जेडीएस सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और उनके बेटे एचडी कुमारास्वामी की तरफ से अभी कोई बयान नहीं आया है। लेकिन बताया जा रहा है कि दोनों ही अपने घर पर पार्टी नेताओं के साथ बैठकर चुनाव नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं। कहा जा रहा है कि देवगौड़ा अंतिम नतीजों के बाद ही इस परिणाम और अपनी पार्टी के रुख पर कोई बात करेंगे।
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमारी एचडी देवगौड़ा और कुमारस्वामी से फोन पर बातचीत हुई है और उन्होंने हमारे प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
कर्नाटक चुनाव के नतीजों के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान किया है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मीडिया से बात करते हुए इस बात की जानकारी दी। बहुमत से कुछ कदम दूर खड़ी भाजपा के लिए सबसे बड़ा सदमा होगा कि जेडीएस और कांग्रेस मिलकर साथ में सरकार बना लें। पिछले चुनावों से सबक लेते हुए कांग्रेस ने पहले से ही इसकी तैयारी कर ली थी और दिल्ली से गुलाम नबी आजाद को भेज कर जेडीएस से संपर्क साधा। गुलाम नबी आजाद ने जेडीएस के साथ हालांकि बड़ी संभावना जताई जा रही है कि जेडीएस सिर्फ इस शर्त पर मानी है कि कुमार स्वामी मुख्यमंत्री होंगे। भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस संभवतः इस शर्त को भी स्वीकार रही है। मिलकर सरकार बनाने का ऑफर किया है। वर्तमान स्थिति में कांग्रेस और जेडीएस मिलने पर 114 सीटें हो जाएंगी जो बहुमत के आंकड़े 112 से ज्यादा है। आपको बता दें कि भले ही अब तक के मजगणना में भारतीय जनता पार्टी वोटों हासिल करने में सबसे आगे चल रही है लेकिन कांग्रेस का वोट प्रतिशत बीजेपी से आगे चल रहा है। इसके बाद ही जो अब ताजा जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक जेडीएस ने भी कांग्रेस पार्टी का गठबंधन करने का यह ऑफर स्वीकार कर लिया है। जिसके साथ ही अब देखना दिलचस्प होने वाला है कि बहुमत न मिलने पर तो बीजेपी का सरकार बनाना पूरी तरह से असंभव है।
जेडीएस प्रवक्ता दानिश अली ने कहा है कि कांग्रेस ने एचडी कुमारास्वामी को सीएम बनाने की पेशकश की थी, जिसे जेडीएस ने मंजूर कर लिया है। इसके बाद जेडीएस ने कांग्रेस के साथ राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने का फैसला किया है।

✍ सिंह शिल्पी

15 को आयेगा कर्नाटक का नतीजा मगर कर्नाटक से राहुल का हुआ उदय :

कर्नाटक चुनाव हो गए। 2600 से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत EVM में कैद हो गई और अब सिर्फ कर्नाटक ही नहीं, पूरे देश को इन चुनावों के नतीजों का इंतजार है। वैसे तो 15 मई को होने वाली मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठा है, लेकिन कर्नाटक वासियों और राजनीतिक-चुनावी विश्लेषकों से बातचीत से जो निचोड़ निकल रहा है, वह यह है कि इस चुनाव में कांग्रेस का पलड़ा बीजेपी के मुकाबले भारी रहा है। लेकिन, कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि कांग्रेस नंबर एक पार्टी बनकर तो उभरेगी, लेकिन पूर्ण बहुमत से दूर रहेगी। दरअसल वे यह कह रहे हैं कि इन चुनावों में किसी को बहुमत नहीं मिलेगा। ऐसी सूरत में देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाएगी। मगर सबका यही कहना है कि देवेगौड़ा की डील अमित शाह के साथ हो चुकी है, और जरूरत पड़ने पर वे बीजेपी की ही मदद करेंगे लेकिन JDS के प्रवक्ता और देवगौड़ा ने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस के तरफ अपना झुकाव बताया है और कहा है कि फल कांग्रेस को ही करनी पड़ेगी।

सबसे पहली बात यह कि इस चुनाव से साबित हो गया कि मोदी का जादू अब टूट चुका है। 2018 के मोदी वह नहीं रहे जो 2014 में नजर आते थे। 2014 में तो हालत यह थी कि अगर वे पत्थर भी छू लें, तो सोना हो जाए। वह लोगों के खाते में 15 लाख देने की बात करते थे, और लोग आंख बंद करके उन पर विश्वास कर रहे थे। वह हर साल दो करोड़ नौकरियां देना का ऐलान करते, तो युवा खुशी से झूमने लगते थे। मोदी स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन और भी जाने क्या-क्या सपने बेचते, और देश के लोग इस सपने में झूम-झूम उठते मोदी को अपनी भाषण कला पर बड़ा गर्व हुआ करता था, और भक्त भी वाह-वाह करते नहीं थकते थे। इसमें संदेह नहीं कि हाथ घुमा-घुमाकर वह शब्दों का जादू चला लेते हैं। लेकिन कर्नाटक उनका हर भाषण झूठे तथ्य और विरोधियों पर हमलों के पुलिंदे के अलावा कुछ दिखा ही नहीं। जब तक मोदी की साख रही, उनके भाषणों का जादू भी चलता रहा, लेकिन अब साख भी जा रही है, और साथ ही जा रहा है भाषणों का जादू।

2018 में राहुल गांधी एक बेदाग चेहरे के तौर पर सामने आए हैं। वह एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो सच्ची और सीधी बात करता है। मोदी रेडियो पर मन की बात करते हैं, लेकिन राहुल गांधी के भाषणों में दिल की बात होती है। राहुल खुले दिल से और खुलेआम संघ और बीजेपी की आलोचना करते हैं। देश में आज जो माहौल है, उसमें खुलेआम संघ की आलोचना करने की हिम्मत राहुल गांधी ने दिखाई है, कि यह लड़ाई विचारधारा की है, जिसमें क तरफ संघ की संकीर्ण विचारधारा है तो दूसरी तरफ कांग्रेस की सेक्युलर विचारधारा। और अपने वैचारिक विरोधी और प्रतिद्वंदी को खुलेआम चुनौती देने की हिम्मत भी अकेले राहुल गांधी ने ही दिखाई है।पुरानी कहावत है कि अगर नेता ही हिम्मत वाला न हो तो, वह नेता कैसा? संघ और बीजेपी की विचारधारा पर तीखे हमले करते हुए खुलेआम उन्हें चुनौती देकर राहुल गांधी ने अपनी दादी इंदिरा गांधी के साहस की याद दिला दी है।

2018 के राहुल गांधी भी 2014 के राहुल गांधी नहीं रहे। वह एक परिपक्व और समझदार नेता के तौर पर उभरे। उन्हें भाषण देना भी आ गया है। उनकी राजनीतिक सूझबूझ से आम देशवासी प्रभावित हो रहे हैं। अब राहुल गांधी घबराते नहीं हैं। बड़े से बड़े राजनीतिक मुद्दे को वह आसानी से बखूबी हल कर लेते हैं। बेंग्लुरु में 10 मई को हुई उनकी प्रेस कांफ्रेंस इसकी मिसाल है कि वे मुश्किल स्थितियों का सामना भी खुलकर करते हैं। नतीजे 15 मई को आ जाएंगे, इस दौरान कयासों का दौर जारी रहेगा, लेकिन बीते करीब दो पखवाड़े में मोदी का ऊंट राहुल के पहाड़ के नीचे आता दिखा। तो क्या 2019 में सेक्युलर धड़े के नेता राहुल गांधी होगे।

✍ सिंह शिल्पी

एक राहुल गाँधी से लड़ता आरएसएस, बीजेपी और गोदी मीडिया :

वैसे तो इतिहास गवाह है आरएसएस और उसकी राजनितिक संगठन बीजेपी सदैव गाँधी परिवार के नेताओ पर तथ्यहीन हमला करने में आगे रही है और उनके खिलाफ एक लम्बी लड़ाई लड़ी है जिसमे अंततः सदैव उसे हार ही मिली है।

चाहे वो पंडित नेहरू के बारे में झूठ बोलकर, फेक फोटो डालकर या इतिहास को तोड़मरोड़ कर उनका चरित्रहनन करने की कोशिश हो।

या चाहे वो इंदिरा गाँधी के राजनीती में आने पर उन्हें गूंगी गुड़िया कहकर राजनीती में अपरिपक्व बताकर उनका विरोध करना हो या फिर राजीव गाँधी को राजनितिक तौर पर अज्ञानी कहना हो हर जगह आरएसएस ने अपना घिनौनापन दिखाया है।

आरएसएस का विरोध करने का सबसे घिनौना तरीका सोनिया गाँधी जी के खिलाफ रहा जब आरएसएस के लोगो ने फेक फोटोशॉप और झूठी कहानी की रचना करके लोगो में विद्वेष पैदा करने की कोशिश की।

जब से राहुल गाँधी ने राजनीती में कदम रखा है तब से ही आरएसएस उन्हें बच्चा कहकर तथ्यहीन चुटकुला, पप्पू जैसा शब्द दिया लेकिन उनपर कभी तथ्य के साथ कोई आरोप नही लगा पाई आरएसएस की राहुल के खिलाफ लड़ाई थोड़ी लंबी और मजबूती तौर पर है क्योंकि अन्य नेता जहाँ सिर्फ गरीबो का कल्याण और देश के विकास पर ही ध्यान देते थे।

वही राहुल गरीबो और किसानों के कल्याण तथा देश के विकास के साथ-साथ आरएसएस के जडो पर हमला करके आरएसएस को बेनकाब कर रहे हैं ।
जिस कारण आरएसएस बौखला गई है तभी तो प्रधानमंत्री जैसे पद पर रहने के बाबजूद भी मोदी दिन-रात सिर्फ राहुल गाँधी की मजाक उड़ाने और तथ्यहीन बात कर उनकी व्यक्तित्व को नीचा दिखाने में लगे रहते हैं।

✍ सिंह शिल्पी

कर्नाटक के एग्जिट पोल में किसी को बहुमत नही मगर भाजपा को कम सीट मिला तो मोदी का तस्वीर हुआ गायब :

कर्नाटक में मतदान थम चुका है और इसी के साथ शुरू हो चुका है चैनलों का एग्जिट पोल। जो ये बता रहा है की कौन सी पार्टी कर्नाटक में सरकार बनाने जा रही है। किसी एग्जिट पोल में कांग्रेस को आगे बताया जा रहा है तो किसी में बीजेपी। इसे लेकर टाइम्स नाउ ने अपना एग्जिट पोल नतीजा बता दिया है इसी के साथ कर्नाटक चुनाव में बीजेपी का चेहरा पीएम मोदी स्क्रीन से धीरे से हटा लिए गए है। बीजेपी कर्नाटक चुनाव पीएम मोदी के चेहरे पर लड़ रही थी ऐसा खुद बीजेपी ने अपने हर रैली में कहा मगर गोदी मीडिया के लोग पीएम मोदी की नाराज़गी का इतना ध्यान रखते है की शुरूआती रुझाने में जब बीजेपी को कम सीटें मिलनी शुरू हुई तो पीएम मोदी की तस्वीर हटा ली गई।

बता दें कि कर्नाटक में 2,600 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। 4.96 करोड़ से अधिक मतदाता उनका फैसला करेंगे। इन मतदाताओं में 2.52 करोड़ से अधिक पुरुष, करीब 2.44 करोड़ महिलाएं और 4,552 ट्रांसजेंडर शामिल हैं। राज्य में 55,600 से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर ने चुनाव परिणाम आने से पहला अपना शुरुआती स्टैंड साफ कर दिया है। दरअसल जिस ढंग से एक्जिट पोल के नतीजे आ रहे हैं और उसमें कर्नाटक में इस बार त्रिशुंक विधानसभा रहने की बात कही जा रही, जिससे जेडीएस खुद को संभावित किंग मेकर की भूमिका में मानकर चल रही है। अटकलें लगतीं रहीं कि जेडीएस बीजेपी को समर्थन देकर गठबंधन सरकार बनवा सकती है मगर जेडीएस ने ऐसी किसी भी अटकलों को खारिज कर दिया है। एनडीटीवी से बातचीत में पार्टी के प्रवक्ता दानिश अली ने कहा कहा कि बीजेपी के साथ जाने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस सौ से कम सीट पाती है तो उसकी जिम्मेदारी है कि वह समर्थन के लिए संवाद करे। बता दें कि कर्नाटक में अब तक नौ एक्जिट पोल हुए हैं। सभी पोल राज्य में त्रिशुंक विधानसभा होने के संकेत दे रहे हैं। किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 122 सीट जरूरी है। एक्जिट पोल्स में कांग्रेस भले ही बड़ी पार्टी के रूप में उभरती दिख रही है मगर उसे बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। दरअसल चुनावी नतीजों को लेकर अटकलें पहले से ही लगाई जाने लगी है।

मगर इस बीच सबसे ज्यादा चालाकी का काम किया है टाइम्स नाउ जिसने कम सीट होने चलते पीएम मोदी की तस्वीर हटा दी है। बीजेपी कर्नाटक चुनाव पीएम मोदी के चेहरे पर लड़ रही थी ऐसा खुद बीजेपी ने अपने हर रैली में कहा मगर गोदी मीडिया के लोग पीएम मोदी की नाराज़गी का इतना ध्यान रखते है की शुरूआती रुझाने में जब बीजेपी को कम सीटें मिलनी शुरू हुई तो पीएम मोदी की तस्वीर हटा ली गई। फैसला 15 मई को आएगा लेकिन बीजेपी की हताशा अभी से ही आने वाले परिणाम की झलक दिखा रही है। दरअसल आज सुबह जब बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बी एस येदियुरप्‍पा वोट देकर बाहर आ रहे थें तब उनके चहरे पर गहरी हताशा नजर आयी। ऐसा लग रहा था मानों उनके अंदर की उम्मीद ने दम तोड़ दिया हो।

✍ शिल्पी सिंह

जेल में भगत सिंह से नेहरू की मुलाकात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने झूठ बोला?

9 मई को कर्नाटक के बिदर में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘जब शहीद भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर देश की आजादी के लिए जेल में लड़ रहे थे. क्या कोई कांग्रेस नेता उनसे मिलने गया था?’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन, कांग्रेस नेता जेल में बंद भ्रष्ट लोगों से मिलते हैं.’ जाहिर है कि प्रधानमंत्री का इशारा दिल्ली स्थित एम्स में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव की मुलाकात की ओर था.

ये दस्तावेजों में दर्ज है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लाहौर जेल में 8 अगस्त, 1929 को भगत सिंह और उनके साथियों से मुलाकात की थी, जो प्रशासन के दुर्व्यवहार के खिलाफ जेल में भूख हड़ताल कर रहे थे. लाहौर से प्रकाशित ट्रिब्यून अखबार के सायंकालीन संस्करण के पहले पन्ने पर पंडित जवाहर लाल नेहरू, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की मुलाकात की खबर प्रकाशित की है. खबर की हेडलाइन, “Pt. Jawaharlal Interviews Hunger Strikes” है. खबर की तस्वीर यहां देखी जा सकती है, जिसे पढ़ा जा सकता है. खबर कहती है, “पंडित जवाहर लाल नेहरू एमएलसी डॉक्टर गोपीचंद के साथ लाहौर जेल गए और बोर्स्टल जेल में लाहौर षड्यंत्र केस में भूख हड़ताल कर रहे सत्याग्रहियों से मुलाकात की और उनका साक्षात्कार किया.” पंडित जवाहर लाल पहले सेंट्रल जेल गए जहां उन्होंने सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त से मुलाकात की और भूख हड़ताल के बारे में उनसे बातचीत की.” इस बातचीत के बारे में नेहरू ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में लिखा है और ये बताया है कि वे भगत सिंह से किस तरह प्रभावित थे. नेहरू ने लिखा, ‘मैं उस समय लाहौर में था, जब भूख हड़ताल को एक महीने हो गए थे. मुझे जेल में बंद कैदियों से मुलाकात की परमिशन दी गई और मैंने इसका लाभ उठाया.’ उन्होंने लिखा, “मैंने पहली बार भगत सिंह, जतींद्र दास और अन्य लोगों को पहली बार देखा.” उन्होंने कहा, ‘निश्चित रूप से क्रांतिकारियों और गांधी के सिद्धांतों को मानने वाले कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेद थे. लेकिन वे एक दूसरे के प्रति बहुत सम्मान रखते थे. खासतौर पर पंडित जवाहर लाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस का क्रांतिकारी बहुत सम्मान करते थे।

प्रधानमंत्री मोदी के लिए चुनाव जीतना बड़ी बात नहीं है। वे जितने चुनाव जीत चुके हैं या जीता चुके हैं यह रिकार्ड भी लंबे समय तक रहेगा। कर्नाटक की जीत कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी को अपनी हार देखनी चाहिए। वे किस तरह अपने भाषणों में हारते जा रहे हैं। आपको यह हार चुनावी नतीजों में नहीं दिखेगी। वहां दिखेगी जहां उनके भाषणों का झूठ पकड़ा जा रहा होता है। उनके बोले गए तथ्यों की जांच हो रही होती है। इतिहास की दहलीज़ पर खड़े होकर झूठ के सहारे प्रधानमंत्री इतिहास का मज़ाक उड़ा रहे हैं। इतिहास उनके इस दुस्साहस को नोट कर रहा है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी के लिए नेहरू चुनौती बन गए हैं। उन्होंने खुद नेहरू को चुनौती मान लिया है। वे लगातार नेहरू को खंडित करते रहते हैं। उनके समर्थकों की सेना व्हाट्स अप नाम की झूठी यूनिवर्सिटी में नेहरू को लेकर लगातार झूठ फैला रही है। नेहरू के सामने झूठ से गढ़ा गया एक नेहरू खड़ा किया जा रहा है। अब लड़ाई मोदी और नेहरू की नहीं रह गई है। अब लड़ाई हो गई है असली नेहरू और झूठ से गढ़े गए नेहरू की। आप जानते हैं इस लड़ाई में जीत असली नेहरू की होगी। नेहरू से लड़ते लड़ते प्रधानमंत्री मोदी के चारों तरफ नेहरू का भूत खड़ा हो गया। नेहरू का अपना इतिहास है। वो किताबों को जला देने और तीन मूर्ति भवन के ढहा देने से नहीं मिटेगा। यह ग़लती खुद मोदी कर रहे हैं। नेहरू नेहरू करते करते वे चारों तरफ नेहरू को खड़ा कर रहे हैं। मोदी के आस-पास अब नेहरू दिखाई देने लगे हैं। उनके समर्थक भी कुछ दिन में नेहरू के विशेषज्ञ हो जाएंगे, मोदी के नहीं। भले ही उनके पास झूठ से गढ़ा गया नेहरू होगा मगर होगा तो नेहरू ही। भगत सिंह और नेहरू को लेकर प्रधानमंत्री ने जो ग़लत बोला है, वो ग़लत नहीं बल्कि झूठ है। नेहरू और फील्ड मार्शल करियप्पा, जनरल थिम्मैया को लेकर जो ग़लत बोला है वो भी झूठ था। कई लोग इस ग़लतफ़हमी में रहते हैं कि प्रधानमंत्री की रिसर्च टीम की ग़लती है। आप ग़ौर से उनके बयानों को देखिए। जब आप एक शब्दों के साथ पूरे बयान को देखेंगे तो उसमें एक डिज़ाइन दिखेगा। भगत सिंह वाले बयान में ही सबसे पहले वे खुद को अलग करते हैं। कहते हैं कि उन्हें इतिहास की जानकारी नहीं है और फिर अगले वाक्यों में विश्वास के साथ यह कहते हुए सवालों के अंदाज़ में बात रखते हैं कि उस वक्त जब भगत सिंह जेल में थे तब कोई कांग्रेसी नेता नहीं मिलने गया। अगर आप गुजरात चुनावों में मणिशंकर अय्यर के घर हुए बैठक पर उनके बयान को इसी तरह देखेंगे तो एक डिज़ाइन नज़र आएगा। प्रधानमंत्री के चुनावी भाषणों को सुनकर लगता है कि नेहरू का यही योगदान है कि उन्होंने कभी बोस का, कभी पटेल का तो कभी भगत सिंह का अपमान किया। वे आज़ादी की लड़ाई में नहीं थे, वे कुछ नेताओं को अपमानित करने के लिए लड़ रहे थे। क्या नेहरू इन लोगों का अपमान करते हुए ब्रिटिश हुकूमत की जेलों में 9 साल रहे थे? इन नेताओं के बीच वैचारिक दूरी, अंतर्विरोध और अलग अलग रास्ते पर चलने की धुन को हम कब तक अपमान के फ्रेम में देखेंगे। इस हिसाब से तो उस दौर में हर कोई एक दूसरे का अपमान ही कर रहा था। राष्ट्रीय आंदोलन की यही खूबी थी कि अलग अलग विचारों वाले एक से एक कद्दावर नेता थे। ये खूबी गांधी की थी। उनके बनाए दौर की थी जिसके कारण कांग्रेस और कांग्रेस से बाहर नेताओं से भरा आकाश दिखाई देता था। गांधी को भी यह अवसर उनसे पहले के नेताओं और समाज सुधारकों ने उपलब्ध कराया था। मोदी के ही शब्दों में यह भगत सिंह का भी अपमान है कि उनकी सारी कुर्बानी को नेहरू के लिए रचे गए एक झूठ से जोड़ा जा रहा है। नेहरु तो भगत सिंह से मिलने गए थे , इसके सबूत हैं . अखबार की कतरनें हैं . किताबें हैं . जेल के पन्ने हैं लेकिन संघ से संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार भगत सिंह से मिलने गए थे क्या ? 1925 में संघ की स्थापना हो गई . 1929-1930 में भगत सिंह दो साल तक लाहौर जेल में रहे . हो सकता है इन दो सालों संघ प्रमुख भगत सिंह से कई बार मिले हों । किसी के पास ऐसी कोई जानकारी है तो बताएं कि कितनी बार और कब -कब संघ प्रमुख हेडगेवार उनसे मिलने गए थे ? संघ प्रमुख की तरफ से भगत सिंह को बचाने के लिए किन -किन शहरों में आंदोलन किया गया था ? लाहौर जेल से लौटने के बाद हेडगेवार ने भगत सिंह और उनके साथियों को बचाने के लिए कहां शाखा लगाई थी ? आपके हिसाब से हो सकता है कि लाहौर सेंट्रल जेल में नेहरु और भगत सिंह की मुलाकात का इतिहास लिखने वाले सारे इतिहासकार ‘वामपंथी’ हों और उन्होंने इतिहास के साथ छेड़छाड़ की हो . हो सकता है कि नेहरु ने भी अपनी किताब में भगत सिंह के से अपनी मुलाकात के बारे में झूठ लिख दिया हो लेकिन 1929 के ट्रिब्यून अखबार के रिपोर्टर ने तो सच ही लिखा होगा। लाहौर जेल में बंद भगत सिंह और उनके साथियों के प्रति कांग्रेस नेताओं की बेरुखी की इमोशनल कथा बांचने से पहले मोदीजी इस बार ये कहकर डिस्क्लेमर लगा दिया था कि ‘अगर आपमें से किसी को जानकारी है तो जरुर बताना. मुझे नहीं है .मैंने जितना इतिहास पढ़ा है , मेरे ध्यान में नहीं आया. फिर भी आपमें से किसी को जानकारी हो तो मैं सुधार करने के लिए तैयार हूं। अब जिन्हें लाहौर जेल में बंद वीर भगत सिंह और उनके साथियों से नेहरु की मुलाकात की जानकारी थी , उन्होंने तो इतिहास और अखबार के पन्ने निकालकर खिदमत में पेश कर दिया है . नेहरु की लिखी किताब में भगत सिंह और उनके साथियों से मुलाकात का विस्तार से जिक्र तो है ही , उस समय के अखबार में खबर भी है . तो क्या पीएम मोदी अब अपने इतिहास ज्ञान को सुधारेंगे ? कहेंगे कि मैंने गलत इतिहास पढ़ लिया ?

शिल्पी सिंह

नरेन्द्र मोदी जी ने कभी कहा है कि उनके पिता पक्के कांग्रेसी थे और कांग्रेस ने उनके परिवार को सम्भाला था :

नरेन्द्र मोदी जी ने कभी कहा है कि उनके पिता पक्के कांग्रेसी थे और कांग्रेस ने उनके परिवार को सम्भाला था

एक हकिकत और सच्चाई शायद देश के प्रधान मन्त्री ने आज तक अपने मूंह से न कहा होगा कि उनके पिता स्व. दामोदरदास मोदी कांग्रेस के एक सक्रिय कार्यकर्ता और उनका कांग्रेस से वास्ता 1970 से 1980 तक रहा।

1973 मे जब गुजरात के वाडनगर के रेलवे स्टेशन का निर्माण हुआ तो नरेन्द्र मोदी के पिता का इन्दिरा गांधी के समीप होने के कारण उन्हे उक्त रेलवे स्टेशन के टी स्टाल का ठेका आसानी से मिल गया बाद मे कांग्रेस के साथ सक्रियता के कारण उनके दुसरे बेटे प्रहलाद मोदी को सस्ते गल्ले के दुकान का भी लाइसेन्स मिल गया था।

ठीक इसी ढंग से दामोदारदास मोदी ने कांग्रेस के साथ सक्रियता बनाते हुए वे अपने बडे पुत्र सोमा भाई और छोटे बेटे पंकज मोदी को गुजरात के प्रदेश सरकार की नौकरी दिलाने मे सफल रहे और ध्यान रहे कि उस समय इंदिरा गाँधी का बोल बाला चरम पर रहा I
क्या कारण रहा कि दामोदारदास मोदी ने नरेन्द्र मोदी के लिये कोई सिफारिस कांग्रेस से क्यों नही की, सुत्रो की माने तो दामोदारदास मोदी के साथ किन्ही कारणो से नरेन्द्र मोदी के साथ पटती नही थी I
अगर देखा जाये तो दामोदारदास मोदी के परिवार का भरण पोषण 1970-1980 के बीच इन्दिरा कांग्रेस के बदौलत हो पाई जब कि नरेन्द्र मोदी प्रधान मन्त्री बनने के बाद यह पूछते रहे कि कांग्रेस ने पिछले 60 वर्षो मे क्या किया, जब कि वे अपने को एक चाय वाला इन्ही कांग्रेस के देन के कारण कहते फिरते है, हालांकि पिता के साथ पटरी न खाने की वजह से नरेन्द्र मोदी ने कभी भी वाडनगर स्टेशन पर चाय नही बेची थी।

जो व्यक्ती अपनी शुरुवाती जीवन से ही अपने परिवार के किसी काम मे न आया हो और सारा जीवन अपने परिवार से दूरी बना के चला हो ऐसे व्यक्ती देश का भला क्या कर सकता है, सिवाय अपने भले को, आज जो बातो-बातो मे नरेन्द्र मोदी कांग्रेस को गाली देने का काम कर रहे है असल मे वो सब गाली अपने पिता को ही दे रहे है।

नोट : ऊपर दी गई सभी जानकारी www.dailyo.in से लिया गया है।

शिल्पी सिंह

मोदी प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव प्रचार और विदेश यात्रा के लिये ही बने हैं :

अब ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री का दो ही काम है एक चुनाव के लिए प्रचार करना और दूसरा विदेश यात्रा करना विदेश से आओ चुनाव का प्रचार करो चुनाव प्रचार खत्म करो विदेश जाओ बस यही दो काम नरेंद्र मोदी को आता है इसके अलावा उन्हें देश के किसी भी समस्याओं को लेकर कोई भी काम करने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं है।

नरेंद्र मोदी ऐसे PM बन गए हैं जिनके बारे में देश ही नहीं बल्कि विश्व भर में यह कहा जाने लगा है कि यह PM सिर्फ विदेश यात्रा और भाजपा का चुनाव प्रचार के लिए ही है। कई लोग तो अब PM का मतलब प्रधानमंत्री के जगह प्रचार मंत्री कहते हैं। आखिर कोई PM इस तरह देश को अनेकों समस्याओं में छोड़कर विदेश यात्रा और प्रचार के लिए कैसे जा सकता है कई लोग इस पर टिप्पणी करते हैं कई जानकार लोग इसको लेकर सवाल उठाते हैं लेकिन भाजपा के द्वारा बनाई गई एक ट्रोल आर्मी जो सोशल मीडिया पर उन लोगों चरित्र हनन करती है उन लोगों को गाली गलौज देती है जो मोदी और मोदी सरकार के कामों पर सवाल उठाते हैं वो उनको गाली देकर, धमकी देकर या सरकारी संस्थानों से दबाब दिलवाकर चुप करवा देते हैं।

कर्नाटक चुनाव से पहले ही नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा से वापस आए थे वह यात्रा में उस समय थे जब देश महिला सुरक्षा को लेकर चिंतित था उत्तर प्रदेश से लेकर कश्मीर गुजरात से लेकर आसाम और बिहार से लेकर मध्य प्रदेश तक में हर तरफ छोटी-छोटी बच्चों के साथ बलात्कार की घटनाओं को लेकर पूरा देश चिंतित था और उस को लेकर प्रदर्शन कर रहा था तब हमारे प्रधानमंत्री विदेशों में भाषण दे रहे थे और वह लच्छेदार भाषण से लोगों को 2019 में वोट करने के लिए कह रहे थे देश के महापुरुषों को आपस में लड़ा रहे थे झूठा इतिहास बता रहे थे नेहरू को कोस रहे थे कांग्रेस के 70 सालों पर सवाल उठा रहे थे लेकिन वह एक बार भी महिला सुरक्षा को लेकर चिंतित देश के सवालों का जवाब देना मुनासिब नहीं समझ रहे थे और फिर कर्नाटक चुनाव में जिस तरह से उन्होंने बाकी कामों को छोड़ अपना पूरा समय प्रचार में दिया वह भाजपा का प्रचार मंत्री ही कर सकता है भारत का प्रधानमंत्री नहीं और और इस दौरान जिस तरह से उन्होंने शब्दों का उपयोग किया वह कहीं ना कहीं भारतीय प्रधानमंत्री पद के लिए शोभा नहीं देता है देश के पूर्व स्वर्गीय प्रधानमंत्री की पत्नी देश की सबसे पुरानी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और विपक्ष की सबसे बड़ी नेता पर बार-बार टिप्पणी करना देश के प्रमुख विपक्षी दल के अध्यक्ष प्रदेश के विपक्ष के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी पर बेवजह और बेतुका बयान बाजी करना और नेहरू जी को लेकर झूठ बोलना जिससे नेहरु जी का कोई संबंध नहीं रहा हो ऐसी बातों को करना देश के पूर्व सेना अध्यक्ष और सेना से जुड़े लोगों को लेकर झूठ बोलना और देश के सबसे बड़े वीर भगत सिंह को लेकर झूठ कह के लोगों को भड़काना ऐसा काम करना पीएम पद के व्यक्ति को शोभा नहीं देता है मगर शायद भूल गए हैं कि वह RSS के प्रचार मंत्री नहीं प्रधानमंत्री हैं।

अब कर्नाटक चुनाव प्रचार खत्म हो गया है 12 मई को वोटिंग होगी और 10 मई के रात के बाद प्रचार प्रसार के लिए अनुमति नहीं मिल सकती थी इसलिए उन्होंने अपना रास्ता कर्नाटक से सीधे एक नए देश की तरफ से अर्थात नेपाल की तरफ बढ़ा लिया है दिल्ली में देश के कामों का जायजा लेने के जगह वो विदेश निकल गए। लगातार रुपया का अवमूल्यन होना,पेट्रोलियम पदार्थ के महंगाई से देश का परेशान होना, युवाओं को रोजगार नहीं मिलना शिक्षा व्यवस्था में तरह तरह के घोटालों का सामने आना के बावजूद भी मंत्रालय से जुड़ी रिपोर्टों को देखने के बजाए नरेंद्र मोदी प्रचार के तुरंत बाद एक नए देश के भ्रमण के लिए निकल जाते हैं और सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें कर्नाटक चुनाव में नेपाल में प्रचार करने से फायदा हो सकता है और नेपाल से जुड़े हुए लोग कर्नाटक में अधिक रहते हैं और हर बार चुनाव में कोई न कोई कनेक्शन निकलता है भारत के पड़ोसी देश नेपाल गए हैं।

अब नेपाल में जुमलेबाजी कर जब Pm लौटेंगे तब या तो नई देश की यात्रा का प्लान बनायेंगे या फिर चुनाव अभियान में लग जायेंगे।

✍ शिल्पी सिंह

जुमलो की खुलती पोल से बौखलाए मोदी, राहुल पर कर रहे बेतुका हमला :

एक आदमी लाखों का सूट बूट पहनकर कहता है की मैं गरीब हूँ,और हम उसे गरीब मान लेते है। सीबीआई, एन आइ ए जैसी एजेंसियां जिस आदमी के हाथों की कठपुतली हैं वह आदमी कह रहा है की मुझे सताया जा रहा है। और हम मान लेते हैं जो संसद मे पूर्ण बहुमत मे है बीस से ज्यादा राज्यों मे सरकार है वह कहता है मुझे काम नही करने दिया जा रहा है
और हम मान लेते हैं। जो भ्रष्टाचार मे जेल मे रह चुके लोगों को टिकट देता है फिर कहता है मै भ्रषटाचार के खिलाफ लड़ रहा हूं। और हम मान लेते हैं जिसके शासन मे सबसे ज्यादा हमारे सैनिक शहीद हुए हैं वह कहता है दुश्मन हमसे कांप रहा है और हम मान लेते हैं। जिसके राज मे सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है और वह कहता है हमने किसानों की आय दुगुना कर दी है। और हम मान लेते हैं जो आदमी ग्रेजुएट युवाओं के पकौड़ा तलने को रोजगार कहता है और हम मान लेते हैं। जिसके राज्य मे सबसे ज्यादा बलात्कार हो रहे हैं और वह कहता है हम बेटी बचाव अभियान.चला रहे हैं और हम मान लेते हैं। जो सुंदर भविष्य का सपना दिखाकर सत्ता मे आया हो और चार सौ साल पहले के भूतकाल मे हमे घुमा रहा हो और हम उसकी बातों में फंस जाते हैं।

मोदीजी आप 15 मिनट भारतीय गणराज्य के प्रधान मंत्री की तरह बोल कर दिखाओ। जैसी सभ्य और शालीन भाषा में आपके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री बोला करते थे।
दरअसल आपके ये बचकाने चैलेंज उन गंभीर सवालों के जवाब हैं जो राहुल ने उठाए थे. राहुल गांधी ने कहा था कि मुझे 15 मिनट राफेल और नीरव पर बोलने दो तो प्रधानमंत्री सामने खड़े नहीं रह पाएंगे।
मगर आपने राफेल और नीरव को इग्नोर कर के 15 मिनट को पकड़ लिया। बैसे आपके भक्तों को आपकी यही अदा पसंद है। और आप भी जानते हो किन बेतुकी बातों पर भक्त ज्यादा तालियां बजाते हैं। अपने भक्तों की खुद से अपेक्षाओं को भगवन खूब समझते हैं। आपको पता है कि भक्तगण आपसे राहुल के सबालों का जबाब नहीं एंटरटेनमेंट चाहते हैं तो वही आप करते हैं।

राहुल गांधी कागज़ देखकर पढ़ते हैं या नहीं मुझे जानकारी नहीं है परन्तु मैं इतना कह सकती हूँ कि मोदीजी अगर आप कागज देख कर पढते तो भारत के प्रधानमंत्री के पद की गरिमा बनी रहती क्योंकि तब आप तक्षशिला को पाकिस्तान की जगह भारत में बताने से बच सकते थे, चंद्रगुप्त को मौर्य की जगह गुप्त वंश की वंशावली में जोड़ने से बच सकते थे ,श्यामा प्रसाद मुखर्जी को इंग्लैंड में मरवाने की बेवकूफी से बच सकते थे , उनकी अस्थियां न लाने का इल्जाम नेहरूजी पर लगाने से बच सकते थे। आज़ादी के वक्त डॉलर और रुपये की वैल्यू एक बताकर लोगों को गुमराह करने से भी बच सकते हैं। भारतीय मतदाताओं की संख्या 600 करोड़ बताने से बच सकते थे। एक हफ्ते में 8 लाख 50 हजार शौचालय बनाने से बच सकते थे। और तो और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मोहनलाल कहने से बच सकते थे।
खुद ही सोचिए मोदीजी, कागज़ में कुछ लिखकर लाने के कितने लाभ हैं!!
दरअसल जबसे गुजरात में 99 के फैरे में फंसे हैं तब से साहेब टेंशन में है ऊपर से गोरखपुर की हार ने हिला दिया है। मोदीजी अब हल्की फुल्की कॉमेडी करके भक्तों को बहलाए रखना ही आपके पास एकमात्र ऑप्शन है। सो करते रहिए।

मोदी जी,
कैसा भाषण है आपका ?
राहुल जी ऐसे है,वैसे है !
कॉंग्रेस ने यह किया,वो किया!
यह सब कहने के लिए 15 से 21
रैलियाँ बढ़ाईं ?
अपने MLAs के बारे मे भी कुछ कहो जो सब बलात्कारी,भ्रष्टाचारी है!
कभी अपनी भी कुछ उपलब्धियाँ गिनवाओ ?
विपक्ष की बुराइयाँ गिनवाने को ही आप भाषण कहते है ? आइए मोदी जी के डिजिटल इंडिया में घूमते हैं, जगह जगह देखते हैं!
बच्चे भुखमरी से परेशान हैं!
युवा रोजगार के लिए तड़प रहा है!
किसान भाव के लिए आत्महत्या कर रहा है!
मध्यमवर्गीय प्राणी का जीवन यापन दुर्लभ हो गया है!
दलित रोजाना मारा जा रहा है!
छोटा दुकानदार सबसे ज्यादा परेशान हैं! सरकार चलाने के लिये दिमाग चाहिये होता है, मुँह नही और मोदी जी के पास दिमाग हे नही सिर्फ़ मुँह है ! कोई शक ??

मोदी जी तो अब मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघने पर आमादा हैं.।
और तो और, अब तो वो सड़क छाप गुंडों की तरह उस कांग्रेस को धमकी देने पर आमादा हो गया जिसकी शालीनता के आगे अंग्रेज हमारे गुलाम देश को आज़ाद कर हिंदुस्तान से ही भागने पर मजबूर हुए।
होश में आइये मोदीजी, “कांग्रेस और कांग्रेसियों को धमकाना बंद करिये, जिनके पूर्वज अंग्रेजों के आगे मिमिया चुके हो आज उसका वंशज कांग्रेस को धमका रहा हैं ये बड़ी शर्म की बात हैं।

मोदी कहते है कि देश में सबसे ज्यादा युवा है लेकिन वो ये कभी नहीं कहते की सबसे ज्यादा युवा बेरोजगार हमारे देश में हीं है! जबरदस्ती कब तक कहलवाओगे अच्छे दिन का जुमला मोदीजी ..देश की जनता आप के जुमलो को समझ गयी ..भाजपा का असली चेहरा और नीयत दोनो को पहचान गयी अच्छे दिन कहाँ है।
मित्रों,
कर्नाटक में धुँआधार चुनाव प्रचार के दौरान…
क्या नरेन्द्र मोदी ने एक बार भी पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों का ज़िक्र किया?
नहीं…!
क्या मोदी ने एक बार भी ‘नोटबंदी’ और ‘जीएसटी’ का ज़िक्र किया?
नहीं…!
क्या एक बार भी हरेक को 15-15 लाख रुपये देने की बात की?
नहीं…!
क्या एक बार भी बताया कि चार साल में कितना काला धन वापस आ चुका है?
नहीं!
क्या एक बार भी बताया कि सालाना दो करोड़ रोज़गार का क्या हुआ?
नहीं…!
क्या एक बार भी बताया कि उनकी नीतियों की वजह से अर्थव्यवस्था का सत्यानाश हो चुका है?
नहीं…!

क्यों कुछ भी नहीं बताया भाई? इन सभी मोर्चों पर तो आपकी सरकार ने शानदार उपलब्धियाँ हासिल की हैं! फिर मुँह से बोल क्यों नहीं फूटे!
अरे, आपका तो सारा ध्यान ही राहुल गाँधी का चरित्रहनन करके उनका प्रचार करने पर था! क्या जनता ने आपको सिर्फ़ राहुल गाँधी के बारे में बात करने के लिए सत्ता तक पहुँचाया था? अंग्रेजो की गुलामी करने वालो संघियो तुम लोगो को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटना चाहिए।
नफरत तुम लोग फैलातें हो और भुगतना बेचारे गरीबो को पड़ता है,जो राजनीति से कोसों दूर होते है।राष्ट्र निर्माण नही तुम लोग राष्ट्र को खतरे में डाल रहे है।तुम सब अंग्रेजो के वफादार कुत्ते थे,और रहोगे।

✍ शिल्पी सिंह

राहुल ने कहा, मेरी माँ ने इटली से आकर भारतीयता को अपनाया है,भरतीय होने पर गर्व करती है :

राहुल गाँधी ने आज कहा मैं नरेंद्र मोदी की तरह नहीं हूं जिन्होंने 4 साल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। मोदी की तरह मैं पत्रकारों के सवालों से डरता नहीं हूँ।

कर्नाटक में 224 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं। 12 मई को मतदान होगा, जबकि 15 मई को नतीजे आएंगे। गुरुवार शाम के बाद यहां चुनाव प्रचार थम जाएगा। ऐसे में प्रचार के अंतिम दिन राहुल बेंगलुरू में प्रेस कॉन्फेंस कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि पीएम ने कर्नाटक के लिए कुछ भी नहीं किया। राहुल गांधी ने कर्नाटक बीजेपी के द्वारा उनकी मां और पूर्व कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को उनके इटली वाले नाम से पुकारे जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा को करारा जवाब दिया है। मंगलवार (8 मई) को बीजेपी कर्नाटक के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सोनिया गांधी को ‘मिस एंटोनियो माइनो’ लिखकर संबोधित किया गया था। ट्वीट में लिखा गया था कि आज मिस एंटोनियो माइनो यहां कर्नाटक में आखिरी किला बचाने के लिए हैं। मैडम माइनो, कर्नाटक को ऐसे शख्स से सीखने की जरूर नहीं है जो देश के 10 कीमती वर्ष बर्बाद करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार है। इस पर राहुल गांधी ने कहा-

मेरी मां इटैलियन हैं, उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा भारत में भी जिया है। मैं देखता हूं कि वह कई भारतीयों से ज्यादा भारतीय हैं। मेरी मां ने इस देश के लिए बलिदान दिया है, वह इसकी पीड़ा से गुजरी हैं। यह प्रधानमंत्री की क्वॉलिटी बताता है जब वह इस तरह की टिप्पणियां करते हैं।”

राहुल गांधी ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए बीजेपी और पीएम मोदी पर और भी हमले बोले। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री वही बोलते हैं जो उनके दिल में होता है। बेशक वह अब आश्वस्त हैं और वह सही हैं कि वह कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और 2019 हारने जा रहे हैं।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी अपने अंदर से गुस्सा हैं। वह उनसे ही नहीं, सबसे गुस्सा हैं। उन्हें कहा कि यह उनकी समस्या नहीं है।कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है, “पीएम देश में दलितों का मुद्दा नहीं उठा रहे हैं। वह इसके बजाय हमारी (कांग्रेस की) बात कर रहे हैं। लेकिन हम तो दलितों की ही बात करेंगे।” उन्होंने इस पर जवाब दिया, “पीएम मोदी ने मुद्दा भटकाने की कोशिश हर बार करते है।” ऐसे में प्रचार के अंतिम दिन राहुल बेंगलुरू में प्रेस कॉन्फेंस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पीएम ने कर्नाटक के लिए कुछ भी नहीं किया। वह भ्रष्टाचार की बात करते हैं, जबकि येदियुरप्पा भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके हैं। रेड्डी बंधुओं ने यहां के लोगों का खूब पैसा लूटा है।

राहुल बोले, “पीएम मुद्दा भटका रहे हैं। राहुल यहीं नहीं रुके। वह बोले, “बीजेपी हिंदू का मतलब नहीं जानती। मैं मंदिर-मस्जिद जाता रहा हूं। वह हिंदू शब्द से वाकिफ नहीं है, इसलिए मुझे चुनावी हिंदू कहती है।

पीएम चीन गए लेकिन डोकलाम पर एक लफ्ज नहीं बोले। वह बिना एजेंडा के वहां गए थे, जबकि असल एजेंडा डोकलाम था। उनके मुताबिक, वह आगे बोले निजी हमले करके बीजेपी ने दिखा दिया कि उनमें गंभीरता नहीं है।

राहुल गांधी ने पत्रकारों से सवाल किया क्या प्रधानमंत्री का निजी हमले करना ठीक है? ये चुनाव मेरे पीएम बनने के लिए नहीं है। बीजेपी 2019 का चुनाव हार जाएगी। कर्नाटक में कांग्रेस ही बाजी मारेगी। ये कर्नाटक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा के बीच की जंग है। असलियत है कि वे बुरी तरह से घबरा चुके हैं और उन्हें अपनी हार का अहसास हो गया है।

पीएम ने कहा था- मातृ भाषा में कर्नाटक की उपलब्धि बताएं बता दें कि एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी से कहा था कि वो बिना कागज देखे 15 मिनट कर्नाटक सरकार की उपलब्धियां बताएं. वो चाहें तो अपनी मातृभाषा में भी बोल सकते हैं। राहुल गांधी,ने बोला कि ‘मोदी जी में भी गुस्सा है, हर किसी के लिए गुस्सा है. वो मुझे चुनौती के तौर पर देखते हैं इसलिए मुझ पर ज्यादा गुस्सा करते हैं।उनका गुस्सा उनकी अपनी समस्या है, वो मेरी समस्या नहीं है. मेरी समस्या है कि कैसे इस देश के लोगों के लिए काम किया जाए।

राहुल ने कहा बीजेपी में गंभीरता नहीं है।

राहुल गांधी ने कहा, ”मुझे पर, सिद्धारमैया जी पर और खड़गे जी पर निजी हमले करके बीजेपी ने दिखा दिया है कि कर्नाटक के लिए उनमें गंभीरता नहीं है. वीरप्पा मोइली जी ने पूरे राज्य में घूमकर कांग्रेस का घोषणापत्र तैयार किया वहीं बीजेपी ने बंद कमरे में घोषणापत्र बनाया और आधा हमारा कॉपी कर लिया.

राहुल ने कहा मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस इस चुनाव को जीतने जा रही है। राहुल ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार निश्चित तौर पर राजनीतिक मुद्दा है।क्या देश की महिलाओं से बलात्कार होता रहे और वो चाहते हैं कि राजनीतिक दल इस पर चुप रहें?

ध्यान रहे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रेप जैसे मसलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि रेड्डी ब्रदर्स ने 35000 रुपये कर्नाटक की जनता से चोरी किये हैं. एक तरफ ईमानदार सिद्धारमैया जी हैं और दूसरी तरफ जेल से निकले हुए लोग हैं। जहाँ तक मेरा मानना है कि यह तो जनता को अहसास करना चाहिए।देश के लिए मर मिटनेवाले गांधी परिवार से देशभक्ति का सबूत मागा जा रहा है। राहुल गाँधी ने बेंगलुरु में सिद्धारमैया और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रेस कांफ्रेंस की. कांफ्रेस में उन्होनें भाजपा पर मैनिफेस्टो की नक़ल करने जैसे कई संगीन आरोप लगाए हैं।

साथ ही में राहुल ने प्रधानमंत्री पर चुटकी लेते हुए ट्वीट किया ‘माफ कीजिएगा, समय की कमी के चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस में हर किसी को सवाल पूछने का मौका नहीं मिला। लेकिन मैं पीएम मोदी की तरह नहीं हूं जिन्होंने चार साल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। मैं ऐसे प्रेस कॉन्फ्रेंस करता रहूंगा’

✍ शिल्पी सिंह

चुनाव में प्राधनमंत्री पद की गरिमा तार-तार,‘झूठ’ बोलने वाला हमारा ‘प्रधानमंत्री’ है

नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं उनके मुंह से निकला झूठ देश की छवि को धूमिल करता है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री पद की गरिमा को भी तार-तार कर देता है।

कर्नाटक चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के झूठ बोलने पर सियासी घमासान मचा हुआ है। राजनीति में जनता को गुमराह करने का खेल लोगों के समझ में नहीं आ रहा है। ऐसा कई बार हुआ है जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पद का ख्याल नहीं रखा है। वह चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री पद की गरिमा को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कह चुके हैं।

दरअसल 2014 आम चुनाव के बाद लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक होते हैं। वह प्रधानमंत्री कम भाजपा राजनीति की ज्यादा भाषा इस्तेमाल करते हैं। जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण होती है। भारत के राजनीतिक इतिहास में शायद ही कोई प्रधानमंत्री ऐसा रहा होगा जिसको चुनावी भाषणों में इस तरह झूठ का प्रचार प्रसार करते हुए पाया गया हो। और विपक्ष का कोई नेता झूठ बोलने के लिए मानहानि का केस दर्ज किया हो। मोदी सरकार रोज़गार के मुद्दे पर पूरी तरह नाकामयाब दिखाई दे रही है। इस संबंध में सरकार की अपनी योजनाएं भी कामयाब नहीं हो पाई है। सरकार की कौशल विकास योजना भी रोज़गार को लेकर बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। बता दें कि 2014 लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कहा था कि वो यहां से चुनाव इसलिए लड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। वो गंगा और धार्मिक मान्यताओं वाले वाराणसी शहर की सफाई करना चाहते हैं। ये भी उनका एक झूठ निकला आज गंगा की औऱ बनारस की हालत बद से बदतर हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह वाराणसी को क्योटो जैसा बनाना चाहते हैं। हालांकि पीएम मोदी के शासनकाल के 4 साल बीतने के बाद भी इनमें से कोई वादा पूरा नहीं हो सका है

एक बार फिर से ये बात साबित हो गई है कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों से देश को नुकसान हुआ है। देश की गिरती जीडीपीपर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और बढ़ते बैंक घोटालों का असर पड़ा है। ये बात संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अपनी एक रिपोर्ट में कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में एक जुलाई 2017 को लागू जीएसटी और कंपनियों एवं बैंकों की कमजोर बैलेंस शीट के चलते आर्थिक वृद्धि कमजोर हुई। लेकिन कंपनियों के जीएसटी व्यवस्था के साथ बेहतर तालमेल होने पर निजी निवेश में वृद्धि , बुनियादी ढांचे पर खर्च में तेजी और सरकार के सहयोग से कंपनियों और बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार से वृद्धि दर में धीरे धीरे सुधार की उम्मीद है। इससे पहले मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिन-रात जिस तरह से अपने विरोधियों को निशाना बना रहे हैं, देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। उनकी भाषा का स्तर रात दिन गिरता जा रहा है। पहली बार है जब कोई प्रधानमंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री के पद की गरिमा कभी इतनी नहीं गिरी। सोनिया गांधी ने कहा कि, कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने कर्नाटक को नंबर एक बना दिया है। प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर सवाल उठाते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि, मोदी जी चुनावों में लगातार झूठ बोलते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार पर प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी बड़ी बड़ी बातें किया करते थे लेकिन प्रधानमंत्री बनने के 4 साल बाद भी कुछ नहीं किया। अभी तक लोकपाल तक नहीं ला पाए हैं। सोनिया गांधी ने आगे कहा कि, मोदी जी महापुरुषों का अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं, क्या एक प्रधानमंत्री को ऐसा शोभा देता है ? दरअसल प्रधानमंत्री मोदी के कई झूठ बेनकाब हो चुके हैं। जो काफी चिंताजनक बताए जा रहे हैं। मोदीजी बोलते है कि कांग्रेस ने 70 साल करप्शन किया है।

मोदजी जिन राज्यों में आपकी सरकार पिछले दस साल से ज्यादा है वो भ्रष्टाचार में सबसे ऊपर हैं। गुजरात नं 1 पर है।
70 सालो में पी एम की गरिमा का अपमान इसी व्यक्ति ने किया है पढ़े लिखे होते तो एक पी एम की गरिमा क्या होती है वो भली भांति समझते। साहब कांग्रेस की 60 साल की नाकामियों को गिना रहो हो….
हिम्मत है तो कम से कम 4 साल में अपनी एक उपलब्धिया ही गिना दो ? मोदी ने अपने कारनामों से देश में अपने प्रति कभी ना कम होने वाली नफ़रत पैदा कर ली है । आने वाले समय में लोग गाली देने लगेंगे । मैं अंधभक्तों की आंख तो नहीं खोल सकती लेकिन चाहती हूं कि वे थोड़ी तर्क शक्ति और विवके का इस्तेमाल करे।
“डिजिटल इंडिया” का अगुवा रिलायंस – “जियो” बना, जबकि मौका सरकारी कंपनी बीएसएनएल / एमटीएनएल को दिया जाना चाहिए था कैशलेस इकोनॉमी का अवतार भारतीय एनपीसीआई के “रुपए” को बनना चाहिए था… लेकिन बाज़ी सीधे-सीधे “पे-टीएम” के हाथ लगने दी गई…!
फ्राँस के रफेल फ़ाइटर जेट का भारतीय पार्टनर सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनौटिक्स लिमिटेड को होना चाहिए… लेकिन ऑर्डर मिला रिलायंस – “पिपावा डिफेंस”…!
भारतीय रेल को डीज़ल सप्लाई का ठेका सरकारी उपक्रम इंडियन ऑइल कार्पोरेशन से छीन कर रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स को दे दिया गया!
ऑस्ट्रेलिया की खानों के टेंडर में सरकार चाहती तो “एमएमटीसी” की बेंक गारंटी एसबीआई के जरिये दे सकती थी… लेकिन मिला अडानी ग्रुप को…!
सरदार पटेल की मूर्ति भारत में बन सकती थी पर आर्डर चीन को दिया गया.

रेलवे के सबसे विकसित स्टेशन जान बूझ कर प्राइवेट कंपनियों को बेचे जा रहे हैं.सरकारी संस्थानों को जान-बूझकर प्राइवेट कंपनियों का पिछलग्गू बनाकर किसे फ़ायदा पहुँचाया जा रहा है…?
जानबूझ कर घाटा दिखा कर एयर इंडिया को निजी हाथों में बेचने की तैयारी हो रही है। मोदजी ने 4 साल में सिवा झूट औऱ जुमले के कुछ नही किया।

✍ शिल्पी सिंह

दम हो तो संविधान को हाथ लगाकर दिखाए बीजेपी और आरएसएस: राहुल गांधी

नरेन्द्र मोदी जी या आरएसएस कोई भी हो, हम हिन्दुस्तान के संविधान को छूने नहीं देंगे। दम है तो छू कर दिखाओ विधानसभा चुनाव के आखिरी दिनों में चुनाव प्रचार में राज्य की राजधानी बेंगलुरु में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को चुनौती देते हुए कहा कि दम हो तो बीजेपी और आरएसएस देश के संविधान को हाथ लगाकर दिखाए।

जब हिन्दुस्तान में हमारी सरकार थी तब हमने बेंगलुरु को विकास के लिये 10 हजार करोड़ रुपया दिया था, लेकिन PM मोदी जी ने बेंगलुरु को सिर्फ 550 करोड़ रुपया दिया; शर्म की बात है! राहुल ने कहा, ‘मोदी जी इस तरह बोलते हैं जैसे सबकुछ उन्होंने ही किया है। आप बताइए कि क्या मोदी जी के आने से पहले किसी ने काम नहीं किया? इस शहर को आपने नहीं बनाया? बेंगलुरु आईटी कैपिटल मोदी जी के आने से बना क्या? आपने पूरी दुनिया में देश का नाम किया है। इसे मोदी जी ने 2 मिनट में नहीं किया है।

जब मोदी जी ऐसा कहते हैं तो वे बेंगलुरु के इतिहास का और आपके पूर्वजों का अपमान करते हैं। कांग्रेस ने तो सिर्फ मदद की लेकिन बेंगलुरु को यहां के किसानों और लोगों ने बनाया है।’ उन्होंने कहा कि में मोदीजी के बारे में कुछ भी गलत नही कहूंगा।
मोदी द्वारा की गई टिप्पणी के बारे में राहुल ने कहा, ‘मोदी जी मेरे बारे में, सिद्धारमैया जी और खड़गे जी के बारे में गलत बातें बोलते हैं और उनको लगता है कि इससे उन्हें फायदा होगा लेकिन इससे सिर्फ प्रधानमंत्री पद अपमानति होता है और कुछ नहीं। में प्रधानमंत्री पद की गरिमा को समझता हूं ,मैं फिर से दोहराता हूं कि हम मोदीजी से लड़ेंगे लेकिन प्रधानमंत्री पर कभी व्यक्तिगत हमले नहीं करेंगे।’

राहुल ने राफेल के बारे में बोलते हुए कहा, ’70 सालों से काम कर रही एचएएल से काम छीनकर मोदी ने अपने ऐसे दोस्त को राफेल बनाने का जिम्मा दिया है, जिसके ऊपर कर्ज बकाया है और उसने आजतक एक हवाई जहाज नहीं बनाया है।’ अभी कुछ समय पहले बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल ने कहा, मैं क्यों पीएम नहीं बनूंगा, अगर 2019 का चुनाव जीते तो जरूर पीएम बन सकता हूं. अपने इस बयान में राहुल गांधी ने भरोसा जताया है कि कांग्रेस ही 2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।

उन्होंने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि मैं बार-बार पीएम मोदी से यह पूछ रहा हूं कि उन्होंने सीएम कैंडिडेट के रूप में एक भ्रष्ट आदमी को क्यों चुना, जो जेल भी जा चुका है. राहुल ने यह बात कर्नाटक में बीजेपी के सीएम पद के उम्मीदवार येदियुरप्पा के संदर्भ में कही. बता दें कि येदियुरप्पा को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाना पड़ा था। राहुल ने कहा, ‘वह दलितों के बारे में नहीं बोल सकते, क्योंकि रोहित वेमुला (हैदराबाद का दलित छात्र जिसने आत्महत्या की थी) को उनके लोगों ने मारा था. ऊना में दलितों को उनके लोगों ने मारा. अब बच क्या जाता है? राहुल गांधी, सिद्धारमैया और (मल्लिकार्जुन) खड़गे के बारे में खराब बोलो. वह यही कर रहे हैं।

कर्नाटक को विकास की ऊंचाइयों तक जनता के साथ कांधे से कांधा मिलाकर पहुचाने मैं कांग्रेस पार्टी ने कोई कमी नही छोड़ी है इस बार भी पिछले कार्यकाल के भाती रोजगार के नए आयाम खड़ा करने को कांग्रेस संकल्पित है आये इस बार फिर कर्नाटक मैं कांग्रेस का हाथ फिर से ओर ज्यादा मजबूत करे। जीत का दावा

राहुल ने कर्नाटक में कांग्रेस की जीत का दावा करते हुए कहा, ’10 दिन बाद कर्नाटक की जनता मोदी जी को बताएगी कि मोदी जी हमने आपको पांच साल दिए, उसमें से 4 खत्म हो गए। हम आपको हटाना चाहते हैं, पहले कर्नाटक से हटाएंगे और फिर देश से हटाएंगे।’ कांग्रेस ने हमेशा धर्म के नाम पर लोगों मैं भाईचारा बढ़ाने का काम किया है 4 साल में भाजपा ने हमारे इस प्रयास को विफल कर दिया हर समाज और धर्म में दरार पैदा कर दी। मोदीजी आये दिन कुछ भी बोलते है मोदीजी सोचते हैं कि गलत शब्द बोलने से उनको फायदा होता है, मगर उनको समझ नहीं आता कि इससे प्रधानमंत्री के पद का नुकसान होता है।

मोदजी हमेशा 70 साल का रोना रोते है।बेंगलुरु मोदी जी के आने से पहले क्या आईटी कैपिटल नहीं बना क्या? और मोदी जी कहते हैं 70 साल में क्या हुआ। साथ ही राहुल गांधी जी ने बड़े प्यार से बोला सिद्धरमैया जी के दिल में कमजोर लोगों के लिये जगह है। आपकी मांगों को हम पूरा करके देंगे। आप घबराएं नहीं!

शिल्पी सिंह

सिद्धारमैया ने मोदी और भाजपा को घेरा, मोदी फंसे मुसीबत में

कर्नाटक चुनाव काफी दिलचस्प बनता जा रहा है जहां एक तरफ राहुल और मोदी का वार पलटवार चल ही रह था तो अब उस में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी कूद गए हैं।

मोदी की ‘चौकीदारी’ पर सवाल उठाते हुए कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया ने पूछा कि उन्होनें माल्या और नीरव मोदी को देश से कैसे भागने दिया।

साथ ही ये भी पूछा कि अच्छे दिन कहाँ है। सिद्धारमैया ने सवाल किया कि ‘खुद को मोदीजी चौकीदार कहते हैं तो माल्या और नीरव मोदी को कैसे भाग जाने दिया ? अच्छे दिन का वादा करने वाले मोदी बताएं कहाँ हैं अच्छे दिन ?

कांग्रेस का आखिरी बड़ा किला ढहाने के लिए कर्नाटक गए मोदी और शाह मुसीबत में फंस गए हैं। भाजपा को जिताने और येदुरप्पा को सीएम बनाने के चक्कर में वहां के CM सिद्धरमैया पर अनाप-शनाप आरोप लगाते हुए जमकर भाषणबाजी कर रहे हैं। इसी से नाराज़ सिद्धरमैया ने कानूनी नोटिस भेज दिया। नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा के सीएम उम्मीदवार येदुरप्पा को न सिर्फ कानूनी नोटिस भेजी गई है बल्कि सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए भी कहा गया है। इसके साथ ही 100 करोड़ की मानहानि का केस भी ठोका है।

भारत के राजनीतिक इतिहास में शायद ही कोई प्रधानमंत्री ऐसा रहा होगा जिसको चुनावी भाषणों में इस तरह झूठ का प्रचार प्रसार करते हुए पाया गया हो। और विपक्ष का कोई नेता झूठ बोलने के लिए मानहानि का केस दर्ज किया हो। अगर कानूनी कार्रवाई तेज हुई तो कर्नाटक चुनाव में बड़बोलापन पीएम मोदी और अमित शाह को भारी पड़ सकता है।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने भाजपा को पहले ही झटका दे दिया है। CNN News के मुताबिक, कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदुरप्पा के खिलाफ एक अवैध भूमि आवंटन का मामला कार्रवाई के लिए आदेश दिए है। कोर्ट ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने जनार्दन रेड्डी को अपने भाई और भाजपा उम्मीदवार जी. सोमशेखर रेड्डी के लिए चुनाव प्रचार करने के लिए बेल्लारी जाने की इजाजत नहीं दी थी।

भ्रष्टाचार मुक्त का नारा लगाने वाली भाजपा को लगातार उसके नेताओं के भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़े रहने के चलते सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
पीएम मोदी ने कहा था कि सिद्धारमैया सरकार राज्य में किसी भी काम के लिए 10% कमिशन लेती है.इस नोटिस में उनसे बिना शर्त माफी मांगने या 100 करोड़ रुपये के मानहानि मामले का सामना करने को कहा गया है.

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने में अब सिर्फ 3 दिन बचे हैं. वहां सियासी पारा भी लगातार चढ़ता जा रहा है.कर्नाटक के रण को जीतने के लिए भारतीय जतना पार्टी से लेकर कांग्रेस तक ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. कर्नाटक की जनता को लुभाने के लिए दोनों तरफ से ताबड़तोड़ रैलियां हो रही हैं। भ्रष्टाचार पर हमला बोलने वाले पीएम मोदी से सिद्धारमैया कर्नाटक चुनाव में भ्रष्टाचारियों टिकट दिए जाने के मामले पर सवाल किया और कहा कि ‘पीएम ने अपने दोस्तों और परिवारवालों को 8 टिकट दिए हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि इससे उन्हें 10-15 सीटें मिल जाएंगे।

दूसरे सवाल में उन्होंने बीजेपी के दागी मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा का ज़िक्र करते हुए कहा कि बीजेपी ने पहले तो पार्टी ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं बनाया था।
सिद्धारमैया ने पूछा कि कर्नाटक के लोग जानना चाहते है कि क्या येदियुरप्पा अब बीजेपी के सीएम उम्मीदवार है। कर्नाटक में बीजेपी रेप उन आरोपियों को टिकट दिया है, जो विधानसभा में बैठकर पोर्न देखते है।

उन्होंने अगला सवाल 15 लाख वाले सवाल पूछा और पकौड़े का नाम लेकर मजाक भी उड़ाया। सिद्धारमैया ने कहा कि पीएम कहते है 15 लाख देंगें फिर पार्टी अध्यक्ष कहते है वो तो जुमला था इसके बाद वो युवाओं के कहते है पकौड़ा बेचो।

शिल्पी सिंह

27 माह बाद चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए सोनिया गांधी ने भाजपा और मोदी पर किया पलटवार :

27 माह बाद चुनावी रण में उतरी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में UPA चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने मोर्चा संभालते उन्होंने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि भाषणों से देश का पेट नहीं भरता है और न ही बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलता है।

सोनिया गाँधी ने कर्णाटक के बीजापुर में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी पर कांग्रेस मुक्त भारत का जुनून है, उन्हें इसका भूत लगा है, कांग्रेस मुक्त भारत तो छोड़िये, वो अपने सामने किसी को बर्दाश्त नहीं कर सकते.

सोनिया गांधी ने आगे मोदी पर हमला करते हुए कहा, ”मोदी जी को इस बात का गर्व है कि वह बहुत अच्छा भाषण देते हैं. वे अभिनेता की तरह भाषण देते हैं. अगर उनके भाषण से देश का पेट भर सकता है तो वो और भी भाषण दें. लेकिन केवल भाषण से तो पेट नहीं भर सकता. किसानों को राहत और सुविधाएं नहीं मिल सकती, युवाओं को रोज़गार नहीं मिल सकता.”

सोनिया ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘‘सबका साथ , सबका विकास’’ नारे पर सवाल उठाया और उन पर कर्नाटक की उपेक्षा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ”मोदी सरकार कांग्रेस शासित कर्नाटक के साथ भेदभाव कर रही है.” कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”दुःख की बात ये है कि कांग्रेस के विरोधी इन असरदार योजनाओं का बार-बार विरोध करते हैं. जब हमने रोजगार के लिये मनरेगा योजना लागू की थी तब भी बीजेपी जैसे दलों ने और नरेन्द्र मोदी जी ने इसका मजाक उड़ाया.”

सोनिया गांधी ने कहा कि एक तरफ कांग्रेस विकास के काम कर रही है वहीं मोदी जी चार साल से एक ही काम कर रहे हैं कि कांग्रेस ने जो अच्छा काम किया उसको खत्म करना।

सोनिया गांधी ने भ्रष्टाचार समाप्त करने के वादे को लेकर मोदी से सवाल किया. उन्होंने कहा, ”भ्रष्टाचार पर आपके वादे का क्या हुआ? लोकपाल का क्या हुआ ? मोदी जी क्या आपके सबसे भरोसेमंद साथी के बेटे का मॉडल अपनायेंगे?”

सोनिया गांधी ने कहा कि देश ये देखकर हैरत में है कि प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं गलत ही बोलते हैं और हमारे महान् स्वतंत्रता सेनानियों का शतरंज के मोहरों की तरह इस्तेमाल करते हैं।

सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी जी आते हैं और नफरत फैलाकर चले जाते हैं. लेकिन मैं जानती हूं कि इस बार आप इनके एक-एक जुमले का खुलासा करके कांग्रेस को जिताएंगे.

✍ शिल्पी सिंह

राहुल की सौम्यता और आक्रमकता मोदी को हराने के लिये काफी है :

राहुल गाँधी की छवि सौम्य और शांत नेता के रूप में है जो अपने विरोधियों से भी प्रेम से बात करते है मगर राहुल इस छवि से आगे बढ़ रहे हैं।

राहुल की आक्रमकता और कटाक्ष भरे ट्वीटों से सरकार के मंत्री और सांसद की बौखलाहट बता रहा है कि राहुल का तीर निशाने पर लग रहा है।

जहाँ एक तरफ राहुल देश की सुरक्षा, युवाओ को रोजगार, महंगाई और गरीबी से जुड़े मुद्दे को उठाकर जनता की पसन्द बन रहे हैं वही दूसरी तरफ सरकार, पैड मीडिया और सरकार समर्थक राहुल-राहुल की जाप के कारण मीडिया और नेता जनता के बीच मजाक का पात्र बन रहे हैं।

देखा जाए तो ये राहुल की सबसे बड़ी जीत ये है कि वो लगातार मीडिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं और सरकार के नेता उन पर हमला कर रहे हैं।
राहुल बीजेपी के हर राज्य सरकार के कमजोरियों को जनता के सामने पहुंचाने में नहीं रुक रहे हैं वह बीजेपी के हर उस कमजोरी को जनता तक पहुंचा रहे हैं जिससे कहीं ना कहीं कांग्रेस को आगामी चुनाव में फायदा होगा इसलिए भी भाजपा खास तौर पर तिलमिलाई हुई है।
अपने सिद्धांत और विचारधारा के लिए स्पष्ट माने जाने वाले राहुल गांधी गांधीवाद को जिस तरह से आगे बढ़ा रहे हैं और नेहरूवियन सोच के तहत देश को आधुनिक और विकसित बनाने की रूपरेखा वह रख रहे हैं कहीं ना कहीं भाजपा को इससे काफी नुकसान होने जा रहा है।
राहुल की सबसे खास बात अभी जो जनता को पसंद आ रही है वह जनता से उनका अपनापन और मिलनसार स्वभाव है जहां एक तरफ नरेंद्र मोदी बड़े बड़े उद्योगपतियों से घिरे होने के कारण आम जनता और खास तौर पर कमजोर वर्ग तक नहीं पहुंच पा रहे हैं तो वहीं राहुल गांधी अपनी यात्राओं में खास तौर पर यह ध्यान दे रहे हैं वह कमजोर तबका और गरीब लोगों से मिलकर उनकी मन की दिल की बात जरूर जान रहे हैं।

राहुल अपने भाषणों के अलावा हर जगह संवाद कार्यक्रम जरूर रख रहे हैं जिसमें युवा आमजन और वहां के व्यवसायी सहित क्षेत्र के गणमान्य लोगों से बात कर उनकी समस्याओं उनकी मानसिक स्थिति और उस क्षेत्र के विकास की बातों को समझ रहे हैं राहुल का लोगों से जुड़ना भी भाजपा को काफी नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि कांग्रेस जब भी कमजोर हुई है वह जनता के बीच जाकर ही मजबूत हुई है।

कांग्रेस ने कभी झूठे प्रचार या प्रोपगेंडा का इस्तेमाल नहीं किया है उन्होंने बस जनता के बीच जाकर सच्चाई बताई है जिसके बाद जनता ने उन्हें पुनः अपनी सेवा का मौका दिया है।

राहुल जिस आक्रमकता और सौम्यता के मिश्रण के साथ आगे बढ़ रहे हैं कहीं ना कहीं भाजपा के लिए एक चुनौती है उन्हें कैसे रोका जाए।

हर दिन एक नया ट्वीट में भाजपा और मोदी पर हमला, भाजपा भी समझ नही पा रही है कि आखिर राहुल में ये बड़ा बदलाव कैसे हो गया है।
राहुल जहां एक तरफ सरकार के खिलाफ हर दिन एक नया मुद्दा रखकर चर्चा का विषय बने हुए हैं तो वही दूसरे तरफ वो हर प्रदेश के नेताओ के साथ चर्चा करके जनता के मुद्दों को जान रहे हैं ताकि आने वाले चुनावों में भाजपा को पटखनी देने में आसानी हो।

ऐसा लगता है राहुल गाँधी अब 2019 के चुनाव के लिये तैयार हो चुके हैं।

✍ शिल्पी सिंह

कर्नाटक चुनाव प्रचार में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी पर जमकर किया हमला :

कर्नाटक चुनाव प्रचार के लिये कर्नाटक पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भाजपा और मोदी पर जमकर हमला बोला।

केंद्र सरकार पर उसकी ‘विनाशकारी नीतियों’ और ‘आर्थिक कुप्रबंधन’ को लेकर तीखा हमला बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि देश इस वक्त जिन संकटों का सामना कर रहा है उनसे बचा जा सकता था लेकिन वर्तमान सरकार के पास इसको लेकर कोई रूपरेखा नही है।

मनमोहन सिंह ने बैंकिंग क्षेत्र में हुए फर्जीवाड़ों के सिलसिले के लिये भी मनमोहन सिंह ने हमला बोलते हुए कहा कि ठगी लगभग चौगुनी हो गई जो सितंबर 2013 में 28,416 करोड़ रुपये और सितंबर 2017 में 1.11 लाख करोड़ रुपये थी।

उन्होंने कहा, “इस बीच, इन धोखाधड़ी के अपराधी सजा से बच निकलने में कामयाब रहे। मैं बहुत ध्यानपूर्वक और जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि मोदी सरकार का आर्थिक कुप्रबंधन बैंकिंग क्षेत्र में आम लोगों के विश्वास को धीरे-धीरे खत्म कर रहा है।”

इसके आगे मोदी सरकार के नाकामयाबी पर बोलते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, “हमारा देश फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रहा है। हमारे किसान गहरे संकट का सामना कर रहे हैं, आकांक्षाओं से भरे हमारे युवाओं को अवसर नहीं मिल रहे और हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर उसकी सामर्थ्य से कम है।”

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण सच यह है कि इन सभी संकटों से पूरी तरह बचा जा सकता था लेकिन सरकार सिर्फ प्रचार में और विपक्षी को कुचलने में ही व्यस्त रही।

पूर्व प्रधानमंत्री के मुताबिक, मोदी सरकार की दो बड़ी भूल नोटबंदी और जीएसटी को जल्दबाजी में लागू करना है, जिनसे बचा सकता था। उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर दुख होता है कि जब कमियों पर ध्यान दिलाया जाता है तो कैसे इन सभी चुनौतियों से निपटने की बजाए सरकार का रवैया मतभेदों को दबाने का रहता है।”

आर्थिक नीतियों का लोगों के जीवन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि जिनको निर्णय लेने का काम सौंपा गया है वह नीतियों और योजनाओं पर खास ध्यान दें और केवल कल्पना के आधार पर काम न करें।

उन्होंने स्पष्ट तौर पर मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि भारत एक जटिल और विविधता से भरा देश है और कोई एक व्यक्ति सारी अक्लमंदी का भंडार नहीं हो सकता। मनमोहन सिंह ने कहा कि हर बार जब भाजपा सरकार की किसी विनाशकारी नीति के बारे में सवाल पूछा जाता है तो हमें हर बार सुनने को मिलता है कि उनके इरादे नेक हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अपने इरादे नेक होने का दावा करती है लेकिन उनके इरादों से देश को भारी नुकसान हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “विश्लेषण का अभाव भारत और हमारे सामूहिक भविष्य पर भारी पड़ रहा है।”

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के कार्यकाल में वृद्धि दर औसतन सात फीसदी थी। एक समय तो वैश्विक हालात में उतार चढ़ाव के बावजूद यह आठ फीसदी थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान अंतरराष्ट्रीय माहौल अनुकूल है ओर तेल की कीमतें कम हैं फिर भी सब कुछ उलट है और जनता को लगातार नुकसान हो रहा है इसके बाबजूद भी सरकार इस पर ध्यान देना ही नही चाहती।

उन्होंने मोदी सरकार को हर मोर्चे पर फैल बताया और कहा कि कांग्रेस पुनः देश को पटरी पर ला सकती है।

✍ शिल्पी सिंह

60 साल में कांग्रेस ने ही देश को जीरो से हीरो बनाया :

हमारे मोदी जी हमेशा एक ही बात का रोना रोते है कि कांग्रेस ने 60 में क्या किया। आइये हम आपको बताते हैं कि कांग्रेस ने 60 में क्या किया है।

300 साल गुलामी की मार झेल रहा था हमारा भारत सब कुछ लूट कर अंग्रेजों ने देश कांग्रेस के हाथ मे दिया था। देश 1947 में आजाद हुआ तो इस देश में निर्माण के नाम पर सुई तक नहीं बनायीं जाती थी ! देश राजा-रजवाड़ों के झगडे झेल रहा था ! देश में बस गिने चुने गाँव थे जहाँ बिजली उपलब्ध थी !देश का खजाना खाली था और ऐसी बदतर हालत में कांग्रेस ने देश की सत्ता अपने हाथ में ली ! जिस 60 साल का रोना मोदी रोते रहते हैं उन 60 सालों में कांग्रेस ने हिंदुस्तान में विश्व की सबसे ताकत वाली सैन्य शक्ति तैयार की ! हजारों विमान लाखों टैंक और लाखों फैक्ट्रियां तथा लाखों गाँवों तक बिजली पहुंचाई !
इन्हीं 60 सालों में भारत दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संविधान बनाया। भारत एशियाई खेलों की मेजबानी कर चुका था ! भारत में भाखड़ा और रिहंद जैसे बाँध बन चुके थे ! देश भामा न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर का उद्घाटन कर चुका था ! देश में तारापुर परमाणु बिज़ली घर शुरू हो चुका था ! देश में कई दर्जन AIIMS, IIT, IIMS और सैकड़ों विश्वविद्यालय खुल चुके थे ! आजादी से पहले भारत मे बहुत कुछ नही था।
पूरे राजस्थान में मात्र 20 महलों में फोन हुआ करता था ! किसी गाँव में नल नही थे और पूरे देश में सिर्फ 10 बाँध थे ! सेना की हालत भी ऐसे थी कि सीमा पर गिने चुने सैनिक थे और बस 4 विमान और 20 टैंक थे ! देश की सीमाओ का हाल ये था कि वो चारों दिशाओ से असुरक्षित और खुली थी ! शिक्षा और डिजिटल इंडियाः स्वतंत्रता के बाद से भारत अपने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विकास कर रहा है। भारत की वर्तमान साक्षरता दर 74.04% है। स्वतंत्रता के समय यह मात्र 12% थी। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% और महिलाओं की साक्षरता दर 65.46% है। इससे हमारे देश में हरित क्रांति आई, जिसके परिणामस्वरूप हमारे खाद्यान्न उत्पाद में चार गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई, हमने अपने दम पर अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सफलता अर्जित की, महामरियों का उन्मूलन किया और आईटी क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की।भारतीय इतिहास में महिलाओं की शक्तिः महिला राजनीतिज्ञों की सबसे अधिक संख्या भारत में है और यह दुनिया का ऐसा पहला देश बना जिसकी प्रमुख एक महिला रहीं – श्रीमति इंदिरा गांधी। यहाँ की पंचायतों में सबसे अधिक महिलाएं भी निर्वाचित हुईं। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता विपक्ष समेत भारत में महिलाओं ने कई उच्च सरकारी पदों पर काम किया है। पांच प्रमुख राज्यों में महिलाएं मुख्यमंत्री के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकीं है। मतदान का अधिकारः भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जिसने अपनी स्वतंत्रता के बाद से ही अपने प्रत्येक व्यस्क नागरिक को मतदान का अधिकार दिया था।
प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के विविध कार्यक्रमः रक्षा तकनीक और अंतरिक्ष तकनीक पर करीब– करीब शून्य आत्मनिर्भरता के बावजूद, आज हम इस क्षेत्र के सबसे उन्नत राष्ट्रों में से एक हैं। वर्ष 1975 में भारत ने पहले अंतरिक्ष उपग्रह का डिजाइन तैयार किया था। इस उपग्रह का नाम महान भारतीय ज्योतिषाचार्य और गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। इसके अलावा मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला भारत दुनिया का चौथा देश और अपने पहले ही प्रयास में सफल रहने वाला पहला देश बन चुका है। भारत ने अपने पहले ही प्रयास में चंद्रमा की पड़ताल के लिए भेजे जाने वाले चंद्रयान को लॉन्च करने में सफलता अर्जित की। भारतीय सशस्त्र बलः दुनिया में आज भारत चार बड़ी सैन्य शक्तियों में से एक है और इसके पास दनिया के अत्याधुनिक मिसाइल हैं।

आजादी के साथ-साथ हमारे देश को बंटवारे का दंश भी झेलना पड़ा जिसमें भारत का पूर्वी क्षेत्र का एक हिस्सा पाकिस्‍तान नाम से एक अलग देश बन गया. आजादी के इस यज्ञ में जिन महापूरुषों ने अपने प्राणों कृी आहुति दी वे इस बंटवारे से दुखी तो निश्‍चित होते होंगे तथा पुन: जन्‍म लेकर एक भारत की कल्‍पना करते होंगे क्‍योंकि जिस लाहौर की जेल में शहीद-ए-आजम भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे बलिदानियों को फांसी दी गई वह लाहौर अब पाकिस्‍तान में है। अब इन दोनों देशों को आजाद हुए सात दशक हो चले हैं और भारत विकास के कई पड़ाव पार कर चुका है. इसमें भारत ने बैलगाड़ी से लेकर एयर इंडिया तक का सफर तय किया है. नए नए आविष्‍कारों और तकनीकी विकास से भारत विश्‍व में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल रहा है. भारत ने अपनी आजादी के उन मूल्‍यों को संजोये रखा है जिन मूल्‍यों से इसे स्‍वतंत्रता प्राप्‍त हुई है. इसीलिए आजादी का यह पावन दिन हर भारतीय के ह्रदय को राष्‍ट्र के प्रति अपार प्रेम बलिदान और शौर्यपूर्ण भावनाओं से भर देता है। आजादी के 70 साल बाद भी हमारे देश का नागरिक आजाद नहीं है। देश आजाद हो गया, लेकिन देशवासी अभी भी बेड़ियों के बन्धन में बन्धे हैं। ये बेड़ियां हैं अज्ञानता की, जातिवाद की, धर्म की,आरक्षण की, गरीबी की, सहनशीलता की,मिथ्या अवधारणाओं की आदि आदि। हर काम के एक नियम सिद्धांत और अधिकार अधिमान व्यवस्था होते हैं इन सब बातों के संबंध में जो निर्णय हो वह देश की जनता के स्वीकार्य हो और यह कांग्रेस ने समय समय पर हर समय अपने शासन में करके दिखाया है जिस में ना ही क्रोध था ना जथा ना ही धरम की राजनीति थी ना ही एक दुसरे से नफरत का व्यव्हार था ना ही मंहगाई ना ही विभीन्न तरह का टैक्स जैसे जी एस टी बैंक टैक्स ईत्यादी ना ही जुम्लेबाजी थी लोग संतुष्ट थे पवित्र लोकतंत्र गणतंत्र एकता और अखंड्ता थी यह सब कुछ कांग्रेस ने किया था।

✍ शिल्पी सिंह

कर्नाटक में सिद्धरमैया दूसरी बार बना सकते हैं रिकॉर्ड भाजपा को डरा रहा हार का खतरा :

कर्नाटक का चुनाव ऐसे दौर में पहुंच गया है जहां पर हर राजनीतिक दल अपने जीत के लिए एड़ी-चोटी का प्रयास कर रही है।

जहां कांग्रेस अपने अंतिम कुछ प्रदेश सरकार में से एक मजबूत प्रदेश सरकार को बचाने के लिए मेहनत कर रही है तो वहीं भाजपा अपने नारा कांग्रेस मुक्त भारत को साकार करने के लिए प्रयास में है।

कांग्रेस की तरफ से जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मल्लिकार्जुन खड़गे प्रदेश अध्यक्ष जी परमेश्वर राम जी के शिवकुमार कांग्रेस के स्टार प्रचारक ज्योतिरादित्य सिंधिया राज बब्बर सहित कई दिग्गज नेता मैदान में हैं तो वहीं भाजपा के तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह येदुरप्पा रेडी ब्रदर्स सहित कई केंद्रीय मंत्री और अन्य प्रदेश सरकारों के मुख्यमंत्री जैसे योगी आदित्यनाथ आदि शामिल हैं।

यह चुनाव जैसे लग रहा है कि 2019 का दिशा तय करेगा उसी अंदाज में चुनाव लड़ा जा रहा है वैसे पिछले कुछ समय से देखा भी जा रहा है कि पिछले कई चुनाव से हर चुनाव को दोनों दल एकदम एड़ी चोटी का जोर लगा कर लड़ रही है।

बिहार दिल्ली और पंजाब के बाद शायद यह पहला ऐसा राज्य होगा जहां भाजपा पहले से उपस्थिति दर्ज कराने के बावजूद कांग्रेस से हार का खतरा को भाप रही है क्योंकि जिस तरह से सिद्धरमैया ने अपने 5 सालों का काम जनता के सामने रखा है और भाजपा नेताओं का जवाब आक्रमकता के साथ दिया है कहीं ना कहीं भाजपा को भी इससे हार का खतरा दिख रहा है।

नरेंद्र मोदी के हर जुमलों का जवाब जिस तरह सिद्धरमैया खुद सामने आकर दे रहे हैं उससे कहीं ना कहीं सिद्धरमैया अपना कर्नाटक का रिकॉर्ड सुधारना चाहते हैं जहां पर आज तक 40 सालों से कोई भी मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल दोहरा नहीं पाया है सिद्धारमैया जिस जोश के साथ और जिस आक्रमकता के साथ आगे बढ़ रहे हैं उससे तो यही लगता है कि कर्नाटक का पिछले 40 सालों का रिकॉर्ड टूटेगा और सिद्धारमैया ऐसे मुख्यमंत्री बनेंगे 40 साल के बाद लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बन सकते हैं। जिस तरह से उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर आक्रमण किया है और उन्हें वापस यूपी जाने के लिये मजबूर दिया है वो उनकी राजनीतिक कौशल को बताता है। वही अमित शाह सिद्धारमैया के सवालों का जवाब देने में भी लाचार और बेबस नजर आ रहे हैं। नरेंद्र मोदी का सिद्धारमैया के पास पहले से ही जवाब तैयार है उससे तो यही लग रहा है कि मानो भाजपा मैया के जाल में पूरी तरह से फंस चुकी है और इन सबके बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का कर्नाटक का 8 चरणों में आशीर्वाद यात्रा कहीं ना कहीं कांग्रेस को काफी फायदा दिला रहा है उन्होंने जिस तरह से क्षेत्र की जनता से खुद जाकर मिला है और किसानों और युवाओं को जिस ने विश्वास दिलाया है कि सरकार जो भारत में रोजगार देने के मामले में एक नंबर पर है वह अगले 5 सालों में और भी अधिक रोजगार आएगी तू ही उन्होंने किसानों से वादा किया है किसानों के लिए एक नया प्लान तैयार होगा जिससे पहले से किसानों को जो कांग्रेस की सरकार ने फायदा दिया है उसे और अधिक फायदा देखकर प्रदेश के किसानों को और मजबूत बनाया जाएगा महिला की सुरक्षा पर पहले से काम कर रहे कर्नाटक सरकार की नई मेनिफेस्टो में भी महिला सुरक्षा को लेकर काफी सतर्कता देखी गई है और उन्होंने लगभग योजना में महिलाओं को आगे किया है टिकट बंटवारे में भी जहां भाजपा ने महिलाओं को नजर अंदाज किया है वहीं कांग्रेस ने टिकट में भी महिलाओं को तरजीह अगर हम देखें तो कांग्रेस ने हर क्षेत्र में हर जाति के अनुसार अपने नेताओं को तैयार किया है वह कहीं ना कहीं कर्नाटक में कांग्रेस की मजबूती का एक रुप है भाजपा ने जिस तरह से दागी उम्मीदवारों को टिकट दिया है इसका खुलासा राहुल गांधी ने अपने ट्वीट के जरिए किया उसके बाद भाजपा काफी बैकफुट पर नजर आ रही है पहले ही यदुरप्पा जैसे भ्रष्ट नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने से राज्य भर में फजीहत झेल रही भाजपा रेडी ब्रदर्स जैसे प्रदेश के सबसे भ्रष्ट और गुंडा तत्व को टिकट देकर भाजपा ने अपने लिए गड्ढा खोद दिया है और जिससे यदुरप्पा ने सारा इल्जाम अमित शाह पर लगा दिया है इससे यह साफ है कि यदुरप्पा भी कहीं ना कहीं इन भ्रष्टाचारियों और गुंडाराज जो उन्होंने 2008 से 2013 में फैलाई थी उससे कहीं ना कहीं वह डरे हुए हैं। भाजपा द्वारा जारी घोषणा पत्र में जिस तरह से कांग्रेस के घोषणा पत्रों का ही कॉपी किया गया है उससे भाजपा ने कांग्रेस द्वारा जारी किए गए घोषणा पत्र को एकदम सही ठहराया है उस पर भी राहुल गांधी ने भाजपा के घोषणापत्र का मजाक बनाते हुए इसे बकवास करार दिया और कहा इसमें ऐसे घोषणा किए गए हैं जो भाजपा ने केंद्र में भी किया था मगर उसे अब तक पूरा नहीं कर पाया है 12 मई को जब कर्नाटक की जनता मतदान करेगी तो वह कहीं ना कहीं इन बातों को जरूर ध्यान रखेगी कि कैसे 2008 से 13 के बीच प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हुई थी और एक के बाद एक भाजपा का भ्रष्ट नेता जेल गया था और बार बार मुख्यमंत्री को बदलना पड़ा था वही 2013 से 2018 के बीच कैसे सिद्धरमैया ने प्रदेश को एक मजबूत सरकार दिया और मजबूत नेतृत्व में प्रदेश भर का विकास किया युवाओं को रोजगार दी महिलाओं को सुरक्षा दिया और शिक्षा की सबसे अच्छा व्यवस्था प्रदान किया वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जिस तरह से प्रदेश की जनता को पुरानी बातों को भी याद दिलाया और बताया कि कैसे नरेंद्र मोदी झूठा आरोप लगाकर कहीं ना कहीं नाटक के गौरव को धूमिल करने के लिए और कांग्रेस पार्टी को बदनाम करने के लिए झूठ बोल रहे हैं

✍ शिल्पी सिंह

जिन्ना की तस्वीर से लेके तारीफ तक पर हुआ विवाद :

आज का ब्लॉग मेरा मोहम्मद अली जिन्ना के ऊपर है,जो इस वक़्त बड़ी चर्चा में हैं :

सात दशक पहले मोहम्मद अली जिन्ना ने हमारे देश को दो टुकड़ों में बाट दिया था मगर उनके नाम पर मतों का विभाजन अब भी जारी है, कभी उनकी तारिफ के बहाने तो कभी तस्वीर के।

ताजा मामला तस्वीर से जुड़ा है जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय में लगा हुआ है जिसे भाजापा,अखिल भरतीय विद्यार्थी परिषद वा हिन्दू संघटन हटाने की मांग कर रहे है।

जिन्ना पर ये ताजा विवाद एक पत्र के बाद गहराया था। वह पत्र जो अलीगढ़ के ही विधायक सतीश गौतम ने यूनिवर्सिटी के वाईस चासंलर तारिक मंसूर को लिखा था।

इस पत्र में उन्होंने लिखा, आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधी औऱ नेहरू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वालों में जिन्ना का नाम भी था। बीजेपी विधायक ने कहा, ‘जिन्ना को आतंकी नहीं कहूंगा लेकिन राष्ट्रविरोधी चिंतन का व्यक्ति जरूर कहूंगा। आतंकी इसलिए नहीं कहूंगा क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में जिन्ना भी एक सहभागी के रूप में थे। जिन्ना बाद में पाकिस्तान चले गए। उन्होंने भारत को कभी अपना राष्ट्र नहीं माना। पाकिस्तान परस्त लोगों को भारत की धरती पर सम्मान नहीं मिलना चाहिए।’

ये बताना ज़रूरी है बंटवारे के बाद पाकिस्तान ने अपने पहले दो स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को ही मनाया था, लेकिन जिन्ना की मौत के बाद इसे 14 अगस्त को मनाया जाने लगा।

जिन्ना ने अपने इस भाषण के पहले हिस्से में उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने देश बनाने में बड़ी क़ुर्बानियां दीं और कहा कि पाकिस्तान हमेशा उनका एहसानमंद रहेगा।
मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा कि भारत के मुसलमानों ने दुनिया को बता दिया है कि वे एक राष्ट्र हैं और उनकी मांग बिल्कुल जायज़ है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है.
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा कि हमें अपने व्यवहार और विचार से अल्पसंख्यकों को ये जता देना चाहिए कि जब तक वह वफादार नागरिकों की तरह अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान की सीमाओं में रहने वाले आज़ादी पसंद कबायलियों को भरोसा दिलाते हैं कि पाकिस्तान उनकी हिफ़ाज़त करेगा।
जिन्ना ने कहा कि हम गरिमा से जीना चाहते हैं और हमारी ख़्वाहिश है कि दूसरे भी ऐसे ही जियें।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सपा के नव निर्वाचित सांसद ने कहा कि बीजेपी जिन्ना के नाम पर राजनीति कर रही है। सपा सांसद निषाद ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर राजनीतिकरण कर रही है, और यह बेहद निंदाजनक है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की तरह, जिन्ना ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया।” उन्होंने कहा कि, “हिंदुओं की तरह, मुस्लिमों ने भी स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और उनका योगदान अच्छी तरह से प्रलेखित है। बीजेपी ऐसे मुद्दों को उठाकर जाति और धर्म के आधार पर लोगों को विभाजित कर रही है। जब हम शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के बारे में बात करते हैं, तो हमें अशफाकुल्ला खान और वीर अब्दुल हमीद भी याद करते हैं जिन्होंने देश के लिए अपनी जान गवा दी। बीजेपी चाहती है कि लोग इस कारण में इनका योगदान भूल जाएं।”ऐसा करना गलत है बीजेपी हमेशा देश मे धर्म को लेके राजनीति करती है।

देश में सबसे पहले जिन्ना को जिस नेता ने मान्यता दी और उनकी कब्र पर फूल चढ़ाया, वे भारतीय जनता पार्टी के नेता और तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी थे इसलिये पहले उनसे सवाल पूछा जाना चाहिये।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लगे जिन्ना की तस्वीर को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। यूनिवर्सिटी का माहौल खराब होते देख प्रसाशन ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कैंपस की सारी इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। इसे फिलहाल 5 मई तक बंद करने के आदेश दिए गए हैं।

जहाँ तक जिन्ना की तस्वीर का सवाल है तो पहली बात यह है कि जो मुसलमान जिन्ना को अपना नेता मानते थे वे 1947 में ही भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए। फिर आज मुसलमानों से पाकिस्तान और जिन्ना का हिसाब माँगना गलत है।

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि सावरकर के चेले जिन्ना के बहाने हिंदू-मुस्लिम के बँटवारे का खेल खेलना चाहते हैं। सावरकर और जिन्ना, दोनों नास्तिक थे और दोनों ने भारत के बँटवारे का समर्थन किया था। आज फिर सावरकर को मानने वाले लोग 1938 में लगी तस्वीर के नाम पर एएमयू और देश को बाँटना चाहते हैं। जिन्ना की तस्वीर एएमयू और आडवाणी का दिल, इन दोनों जगहों से हटनी चाहिए।

वैसे सावरकर की तस्वीर संसद के सेंट्रल हॉल में क्यों लगाई गई?

भाजपा ने जनता को डर दिखाया पाकिस्तान का और निशाना साधा अपने ही देश के कैंपसों पर। जेएनयू, बीएचयू, एचसीयू आदि पर हो रहे हमलों के बाद अब एएमयू के साथियों को लगातार परेशान करने की कोशिशें की जा रही हैं। अगर उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे कैंपसों को चुप करा देंगे वो बहुत ग़लत सोच रहे हैं।
बात अगर केवल जिन्ना की तस्वीर की होती तो लोग उसे उठा कर कूड़ेदान में डाल देते किसी को आपत्ति नहीं होती मगर बात सिर्फ तस्वीर की नही है।

वैसे जिन्ना का तस्वीर हटाने के मांग करने वाले वही लोग है जो गांधी की हत्या करने वाली विचारधारा के नायक सावरकर को पूजता है और उसकी तस्वीर लोकतंत्र के मंदिर में लगाता है। गांधी के हत्यारों की पूजा करता है।

हम लोग न तो जिन्ना को स्वीकार सकते हैं और ना ही सावरकर को ये देश गांधी, पटेल,नेहरू,बोस,भगत,आजाद, कलाम और असफाकउल्लाह खान जैसे वीरो का है।

✍ शिल्पी सिंह

सिंधिया के नाम से भाजपा भयभीत, शिवराज को डराने लगा हार का खतरा :

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के द्वारा नई समीकरण के साथ जिस तरह से कमलनाथ को अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रचार समिति का अध्यक्ष और 4 नए कार्यकारी अध्यक्ष जिसमें जीतू पटवारी जैसे नाम शामिल हो जब से बनाया गया है तब से शायद भाजपा में एक नया हड़कंप मच गया है।

जिस कारण से कर्नाटक प्रचार छोड़ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी मध्य प्रदेश का दौरा करना पड़ा क्योंकि कहीं ना कहीं पार्टी में भी बगावत शुरू हो चुकी थी और शिवराज सरकार के मंत्री, विधायक और पार्टी के आला नेताओं में कहीं न कहीं मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे जिसके बाद अमित शाह खुद मोर्चा संभालने मध्य प्रदेश पहुंचे जहां पर उन्होंने फिर से कांग्रेस पर झूठा आरोप प्रत्यारोप तो लगाया ही लेकिन साथ-साथ जिस तरह से उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने भाषणों में निशाने पर लिया उसने यह बात साफ कर दी कि इस बार भाजपा ने शिवराज बनाम सिंधिया की लड़ाई को मान लिया है और कहीं ना कहीं भाजपा को भी यह लग रहा है कि अगर कांग्रेस ने सिंधिया को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस की जीत संभव हो सकती है।

जबसे ज्योतिरादित्य प्रचार समिति के अध्यक्ष बने हैं उनका तेवर भी कुछ अलग सा ही दिखने लगा है पहले अफवाह उड़ी कि वह पार्टी से नाराज चल रहे हैं लेकिन जिस तरह से उन्होंने कार्यभार संभालने के दिन भोपाल में रोड शो और उसके बाद अपने भाषण में अपना दमखम दिखाया उसके बाद से यह साफ हो गया कि ज्योतिरादित्य नाराज नहीं है बल्कि वह अपने इस नई जिम्मेदारी से काफी उत्साहित और काफी उर्जा पूर्ण है उन्होंने शिवराज सिंह को ट्विटर पर भी जवाब दिया और शिवराज सिंह के लगातार जवाब दे रहे हैं उसके बाद आखिरकार शिवराज सिंह को भी अपने ट्वीट के जरिए उनको हमला करना पड़ा और इसके बाद सिंधिया के समर्थकों ने जिस तरह से उनकी खिंचाई की और सिंधिया के जमीनी नेता होने का प्रमाण दिया उसके बाद शिवराज को भी कहीं ना कहीं अहसास हो गया है कि वह जो चौथी बार CM बनने का सपना देख रहे हैं वह सपना उनका पूरा नहीं हो सकेगा।

इसलिए आज से 2 दिन पहले एक सम्मेलन में शिवराज सिंह ने कहा भी था कि मैं तो इस कुर्सी से जा रहा हूं अब ना जाने कौन संभालेगा ये उनका मजाकिया अंदाज नहीं था बल्कि आगमी विधानसभा चुनाव के लिए मध्यप्रदेश में जो उन्होंने कांग्रेस की लहर देखी है उसको देखते हुए उन्होंने कहा है।

सिंधिया के नाम से भाजपा में भय होना भी लाजमी है क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसे नेता माने जाते हैं जिनका मध्य प्रदेश के सभी भागों में प्रभाव है खास करके उनका गुना लोकसभा क्षेत्र के आसपास का क्षेत्र की जनता हमेशा समर्पित रहते हैं उससे जो हवा बनता है वह पूरे मध्यप्रदेश में सिंधिया को फायदा दे सकता है जिस कारण से सिंधिया ने मुंगावली और कोलारस में शिवराज को मात दी थी यही कारण है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अपना सारा मशीनरी सिंधिया को कहीं ना कहीं टारगेट करने के लिए लगा दिया है इसलिए अब भाजपा के सोशल मीडिया और भाजपा सरकार की गोदी मीडिया ज्योतिराज सिंधिया पर हमला करने में लग चुकी है।

भोपाल में किया गया विशाल रोड से उत्साहित कांग्रेस के नए अध्यक्ष माननीय कमलनाथ ने भी ऐलान कर दिया है शिवराज की सत्ता को फेकेंगे। उन्होंने कहा उनका सपना किसी पद पर आने का नहीं है बल्कि उनका एक ही लक्ष्य है कि वह शिवराज को सत्ता से उखाड़ देंगे क्योंकि शिवराज ने किसानों पर गोलियां चलाई नौजवानों की नौकरियां खाई और माताओं पर लाठी बरसाई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता ऊर्जावान हैं और प्रदेश की जनता उनके साथ संकल्पित है। उन्होंने कहा प्रदेश की जनता का मन से स्पष्ट है कि आगमी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 150 सीटों के साथ जीतकर मध्यप्रदेश में एक नया सरकार बनाएगी जो सरकार युवाओं और किसानों की होगी।

अमित शाह के द्वारा जिस तरह से मध्यप्रदेश में जुमलेबाजी की गई और कहा गया कि प्रदेश में वह चौथी बार सरकार बनाने जा रहे हैं इसको कांग्रेस के दिग्गज नेता और विधानसभा के विपक्ष नेता अजय सिंह ने कोरी कल्पना कहा है और कहा है कि अमित शाह जी सपना देखना अब छोड़ दीजिए क्योंकि जनता जाग चुकी है युवाओं ने आप लोगों की जुमलेबाजी हवाबाजी और वादों का पुल देख लिया है अब वादों का पुल नहीं चलेगा अजय सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि इस बार किसी व्यक्ति की नहीं किसी जाती कि नहीं किसी पार्टी की नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की सरकार बनेगी जो मध्य प्रदेश की जनता की सरकार होगी जिसका नेतृत्व कांग्रेस करेगा और यह मध्य प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं का सरकार होगा।

शिवराज को अगर किसी नाम से अभी सबसे ज्यादा डर लग रहा है तो वह कहीं ना कहीं सिंधिया का नाम है इसलिए वह अन्य नेताओं पर हमलावर ना होकर अधिकांश समय सिंधिया पर ही लगा रहे हैं और नरेंद्र मोदी ने भी ऐसा लगता है उन्हें साफ संदेश भिजवाया हो कि वह अन्य अन्य नेताओं पर समय ना बर्बाद कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीछे दिमाग लगाएं और किसी न किसी तरह उनके बढ़ते कद को छोटा करने की कोशिश करें लेकिन सिंधिया अपने ही उमंग में अपने ही मस्त चाल में आगे बढ़ते जा रहे हैं कर्नाटक चुनाव के प्रचार में भी गरज कर आए है और फिर वह अब फिर मध्य प्रदेश के दौरे पर निकल रहे हैं और यह दौरा उनका धीरे-धीरे पूरे मध्यप्रदेश में फैलेगा और उन्होंने कहा है कि पार्टी चाहे CM उम्मीदवार किसी को भी बना दें लेकिन हमारा एक ही लक्ष्य होगा की मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार का निर्माण।

✍ शिल्पी सिंह

कर्नाटक चुनाव : राहुल और सिद्धारमैया के सामने पस्त हुए मोदी

आज का ब्लॉग मेरा कर्नाटका चुनाव।

कर्नाटक विधानसभा के सभी 224 निर्वाचन क्षेत्रों में 12 मई 2018 को कर्नाटक में एक चुनाव आयोजित किया जाएगा। वोटों की गिनती और परिणाम की घोषणा 15 मई 2018 को होगी। कर्नाटक का चुनाव हमारे देश की राजनीति का वो मोड़ या बिंदु बनता जा रहा है जहां से एक नए परिवर्तन की शुरूआत होती है।परिवर्तन की ये प्रक्रिया साल 2013 में ही शुरू हो चुकी थी जहां पर दोबारा उठ खड़े होने की कोशिश करने वाली कांग्रेस पार्टी और जिद्दी व उद्दंड बन चुकी, किसी की भी बात को न सुनने वाली बीजेपी का एक मोड़ पर मिलान हो रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों जोर-शोर से कर्नाटक विधान सभा चुनाव के प्रचार में लगे हुए हैं। शुक्रवार 04 मई को उन्होंने गुलबर्गा के कलगी में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले साल यानी 2019 में जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी तो देशभर के किसानों का कर्जा 10 दिनों के अंदर माफ कर दिया जाएगा। उन्होंने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसानों के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी जी ने कर्नाटक के किसानों को एक रुपये की भी मदद नहीं की, जबकि कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक के किसानों का करीब 8000 करोड़ रुपया कर्जा माफ किया था। राहुल गांधी ने कहा कि हमारी लड़ाई कर्नाटक की जनता का पैसा दिलवाने की लड़ाई है. बीजेपी के लोग आपका पैसा छीनते हैं नीरव मोदी, रेड्डी ब्रदर्स को देते हैं. 4 साल में मोदी जी ने किसानों का एक रुपया माफ नहीं किया, अब एक साल बचा है और वो एक रुपया माफ नहीं करेंगे। राहुल ने कहा कि पूरे देश के बिजनेस बंद हो गये लेकिन अमित शाह का पुत्र 50 हजार को तीन महीने में 80 करोड़ रुपये में बदल देता है, नाक के सामने चोरी हो रही है लेकिन मोदी जी एक शब्द नहीं कहते. उनके मंत्री पीयूष गोयल देश को नहीं बताते कि उनकी कंपनी है, छुपाते हैं और फिर उसको बेच देते हैं; करोड़ों रुपया कमाते हैं लेकिन नरेन्द्र मोदी जी एक शब्द नहीं कहते। जब मोदीजी बौखला जाते है तो दूसरों पे हमला करते है ।

पीएम और यूपी सीएम के हमलों के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये. सिद्धारमैया ने मोदी पर हमला करते हुए कहा कि पीएम को यह शोभा नहीं देता कि सिर्फ चुनाव जीतने के लिए वह बेंगलुरु और उसकी जनता का अपमान करें।

पीएम मोदी ने कर्नाटक में अपनी चुनाव रैलियों के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष पर जोरदार हमला बोला था। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ उन्हें मेरे बारे में जो बोलना है, बोलने दें, चाहे वह गलत हों या सही, उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राहुल गांधी ने 12 मई को होने वाले प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रचार तेज करते हुए कहा, ‘‘ वह भारत के प्रधानमंत्री हैं और मैं उन पर व्यक्तिगत हमले नहीं करूंगा. मैं भारत में रहता हूं और वह भारत के प्रधानमंत्री हैं, इसलिए मैं उन पर कभी भी व्यक्तिगत हमला नहीं करूंगा।

दरअसल, नरेंद्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव में वादा किया था कि अगर वो सत्ता में आए तो किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के मुताबिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से 50% बढ़ाकर देंगे। लेकिन सत्ता में आए प्रधानमंत्री मोदी को चार साल से ज़्यादा हो गए हैं लेकिन वो अभी भी अपना वादा पूरा नहीं कर पाए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर चुनाव के लिए अपनी पद की गरीमा का ध्यान ना रखते हुए लोगों के सामने झूठ बोल दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और पूर्व रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने जनरल थिमाय्या का 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने का बाद अपमान किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्नाटक बहादुरी का पर्याय बन गया है। लेकिन, कांग्रेस सरकार ने फील्ड मार्शल करिप्पा और जनरल थिमाय्या से किस प्रकार का बर्ताव करते थे? प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास इसका सबूत है। 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने के बाद भी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और पूर्व रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने जनरल थिमाय्या का अपमान किया। अब लोग सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को झूठ ना बोलने और गलत जानकारी देने कि सलाह दे रहे हैं। दरअसल, कृष्णा मेनन 1958 में रक्षा मंत्री बने थे और पीएम मोदी ने 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने के बाद अपमान की बात कही।

दूसरी तरफ राज्य चुनाव के लिये प्रचार करने आए यूपी के मुख्यमंत्री अदित्यनाथ पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस तरह से ट्वीटों के माध्यम से वार किया उसके बाद तिलमिलाए आदित्यनाथ कर्नाटक छोड़ यूपी भाग आए।

वही कांग्रेस के स्टार प्रचार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने Pm मोदी को सलाह देते हुए कहा कि अगर किसानों का ऋण माफ करना सीखना है तो वो सोनिया गाँधी और सिद्धारमैया जी से सीखें। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राजब्बर ने भी कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में बड़ा रोड-शो किया।

ब्लॉग काफी बड़ा हो गया इसलिये बाकी बाते अगले ब्लॉग में बताऊंगी।

✍शिल्पी सिंह

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