Monday, August 31, 2026
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बालाघाट में 26 आदिवासी बच्चों की मौत पर सियासत गरम, डॉ. विक्रांत भूरिया ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की

भोपाल। बालाघाट में बैगा समाज के 26 आदिवासी बच्चों की मौत के मामले ने मध्य प्रदेश की सियासत गरमा दी है। कांग्रेस ने इस घटना को लेकर सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।

डॉ. भूरिया ने आरोप लगाया कि कुपोषण, मलेरिया और खसरा जैसी बीमारियों के कारण बच्चों की मौत प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत को महज एक घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

निष्पक्ष जांच और मेडिकल ऑडिट की मांग

कांग्रेस नेता ने बालाघाट मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की बात कही।

डॉ. भूरिया ने सभी 26 मौतों का मेडिकल और प्रशासनिक ऑडिट कराने की मांग भी की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चों को समय पर इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मिली थीं या नहीं।

बैगा क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य अभियान की मांग

डॉ. भूरिया ने प्रभावित बैगा इलाकों में विशेष स्वास्थ्य और पोषण अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कुपोषण और संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि 26 बच्चों की मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि 26 परिवारों की अपूरणीय क्षति है।

‘दौरे और संवेदना से काम नहीं चलेगा’

डॉ. भूरिया ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब सिर्फ अधिकारियों के दौरे और संवेदना व्यक्त करने से काम नहीं चलेगा। इस मामले में जिम्मेदारी तय कर निर्णायक कार्रवाई करना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे के साथ-साथ पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

ओरछा में बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का पहला दिन, विकसित एमपी से बुंदेलखंड के विकास तक मंथन

ओरछा। मध्यप्रदेश के ओरछा में बीजेपी की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक रविवार को शुरू हुई। श्रीराम राजा सरकार की पावन नगरी में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत पार्टी के कई बड़े नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और राष्ट्रीय प्रकोष्ठ संयोजक विष्णुदत्त शर्मा भी बैठक में मौजूद रहे।

बैठक के उद्घाटन सत्र की शुरुआत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। पहले दिन संगठन को मजबूत करने, विकसित मध्यप्रदेश के रोडमैप और बुंदेलखंड के विकास समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

विकसित मध्यप्रदेश के विजन पर फोकस

बैठक के बाद बीजेपी प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने प्रेसवार्ता कर पहले दिन हुई चर्चाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार विकास और विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश कार्यसमिति की यह बैठक विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।

बैठक स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें विकसित मध्यप्रदेश के विजन को प्रमुखता से दिखाया गया है। साथ ही ओरछा लोक का मॉडल भी तैयार किया गया है, जो बैठक में आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यकर्ताओं ने सुनी ‘मन की बात’

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को भी एक साथ सुना। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं से संगठन और सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत के पुनरुत्थान के लिए किए जा रहे कार्यों और देश के विकास की दिशा पर चर्चा की। इसके साथ ही बैठक में राजनीतिक प्रस्तावों पर भी मंथन किया गया।

बुंदेलखंड के विकास पर बीजेपी का विशेष फोकस

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बुंदेलखंड के विकास का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बीजेपी ने केन-बेतवा लिंक परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए बड़ा कदम बताया। प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड को नई दिशा और नई ताकत मिलेगी।

बीजेपी ने बैठक में केन-बेतवा परियोजना को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों की भी निंदा की। पार्टी का कहना है कि परियोजना के पूरा होने से बुंदेलखंड के विकास को बड़ा फायदा मिलेगा और क्षेत्र की तस्वीर बदलने में मदद मिलेगी।

सेवा संकल्प के तहत सामाजिक कार्यों पर भी जोर

बीजेपी का बुंदेलखंड को लेकर फोकस केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है। बैठक में सेवा संकल्प के तहत क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक गतिविधियां और जनसेवा से जुड़े कार्य करने पर भी चर्चा हुई। संगठन के स्तर पर इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार किया गया।

दूसरे दिन भी जारी रहेगा मंथन

बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक दो दिन तक चलेगी। पहले दिन संगठन, विकसित मध्यप्रदेश के विजन और बुंदेलखंड के विकास जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक के कई सत्र अभी जारी हैं। दूसरे दिन संगठन को और मजबूत करने के साथ प्रदेश के विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होगी।

 

 

बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में एमपी के 6 चेहरे, टीम नितिन में मध्यप्रदेश का दबदबा

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया। लंबे समय से चल रही संगठनात्मक कवायद के बाद घोषित की गई इस टीम में मध्यप्रदेश के छह नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। एमपी के नेताओं को मिली जगह को प्रदेश के लिहाज से बड़ी राजनीतिक और संगठनात्मक उपलब्धि माना जा रहा है।

नई टीम में मध्यप्रदेश से लाल सिंह आर्य, विष्णु दत्त शर्मा, गजेंद्र सिंह पटेल, बंसीलाल गुर्जर, कविता पाटीदार और आशीष अग्रवाल को जगह मिली है। इनमें अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश दिखाई दे रही है।

किस नेता को मिली कौन सी जिम्मेदारी?

लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन में लंबे अनुभव वाले आर्य की राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विष्णुदत्त शर्मा को सभी मोर्चों का संयोजक बनाया गया है। खजुराहो से लोकसभा सांसद शर्मा इससे पहले मध्यप्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

गजेंद्र सिंह पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। निमाड़ क्षेत्र से आने वाले पटेल लगातार दूसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं और आदिवासी क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है।

बंसीलाल गुर्जर को बीजेपी किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। किसान राजनीति में सक्रिय गुर्जर को मिली यह जिम्मेदारी मध्यप्रदेश के ग्रामीण और किसान वोट बैंक के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

कविता पाटीदार को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। राज्यसभा सांसद पाटीदार को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने से महिला नेतृत्व और मध्यप्रदेश के सामाजिक समीकरणों को भी प्रतिनिधित्व मिला है।

वहीं आशीष ऊषा अग्रवाल को मीडिया विभाग का सह-संयोजक बनाया गया है। संगठन और मीडिया के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभाने में उनकी भूमिका अहम होगी। अभी वे मप्र बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। पार्टी के मुताबिक नई टीम में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रतिनिधित्व मिला है। टीम में 10 महिलाओं और छह अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं को भी शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश की बात करें तो नई टीम में मालवा-निमाड़, ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड जैसे अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है। सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी पार्टी ने विभिन्न वर्गों को राष्ट्रीय संगठन में जगह दी है।

‘टीम नितिन’ में अनुभव और नए चेहरों का मेल

नितिन नबीन की नई टीम में कई पुराने और अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को भी जगह दी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर स्मृति ईरानी को महासचिव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। वहीं राम माधव की भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर वापसी हुई है।ऐसे में मध्यप्रदेश से छह नेताओं को शामिल किया जाना प्रदेश बीजेपी के संगठनात्मक महत्व को भी दर्शाता है। खासतौर पर गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री और लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारियां मिलना प्रदेश के लिए बड़ी बात है।

आने वाले चुनावों के लिहाज से अहम बदलाव

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब पार्टी के सामने आने वाले विधानसभा चुनावों की बड़ी चुनौती है। नई टीम में संगठनात्मक अनुभव, युवा नेतृत्व, महिला प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर दिया गया है।

मध्यप्रदेश के छह नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने से प्रदेश बीजेपी के नेताओं की भूमिका अब राज्य से आगे राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ गई है। ऐसे में इन नियुक्तियों का असर आने वाले समय में पार्टी की संगठनात्मक रणनीति और चुनावी तैयारियों में भी देखने को मिल सकता है।

विश्व आदिवासी दिवस पर BJP पर विक्रांत भूरिया का हमला, बोले- ‘आदिवासी सिर्फ चुनाव में याद आते हैं?’

भोपाल/दिल्ली। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर आदिवासी समाज की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या भाजपा को आदिवासी समाज सिर्फ चुनाव के समय ही याद आता है?

डॉ. भूरिया ने कहा कि 9 अगस्त आदिवासी समाज के लिए महज एक तारीख नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व, संस्कृति, अधिकार और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन है। ऐसे मौके पर देश के नेतृत्व से आदिवासी समाज के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की उम्मीद रहती है।

भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल

भूरिया ने कहा कि उन्होंने यह देखने की कोशिश की कि विश्व आदिवासी दिवस पर देश के बड़े नेताओं ने आदिवासी समाज को किस तरह याद किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी ओर से आदिवासी समाज के लिए अपेक्षित संदेश दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम और गुजरात समेत भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर भी सवाल उठाए। भूरिया का आरोप है कि आदिवासी बहुल राज्यों में भी विश्व आदिवासी दिवस को लेकर वैसी संवेदनशीलता नजर नहीं आई, जिसकी समाज को उम्मीद थी।

‘चुनाव के समय याद आते हैं आदिवासी’

डॉ. भूरिया ने कहा कि चुनाव आते ही भाजपा नेता आदिवासी समाज के बीच पहुंचते हैं। आदिवासी महापुरुषों को याद किया जाता है और उनके सम्मान में कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। लेकिन जब आदिवासी समाज के अधिकारों की बात आती है तो यही नेता चुप नजर आते हैं।

उन्होंने सवाल किया, “क्या भाजपा के लिए आदिवासी समाज को याद करने की तारीख 9 अगस्त नहीं, सिर्फ चुनाव की तारीख है?”

‘भाषण नहीं, अधिकारों पर चाहिए काम’

भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल भाषणों, तस्वीरों और चुनावी वादों से सम्मान नहीं चाहिए। समाज की असली जरूरत जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सरल जरूर है, लेकिन अब वह पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है। वह देख रहा है कि कौन उसके साथ खड़ा है और कौन सिर्फ चुनाव के समय उसके बीच पहुंचता है।

‘चुप्पी भी याद रखी जाएगी’

डॉ. भूरिया ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर जो लोग चुप रहे, उनकी यह चुप्पी भी आदिवासी समाज याद रखेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी कांग्रेस समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को आगे भी मजबूती से उठाती रहेगी।

भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक समझने वालों को यह समझना होगा कि आदिवासी समाज सब देख रहा है, सब समझ रहा है और सब याद रखेगा।

मानगढ़ धाम पर सरकार का यू-टर्न? संसद के जवाब पर डॉ. विक्रांत भूरिया ने उठाए बड़े सवाल

नई दिल्ली।  क्या सरकार मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने के अपने वादे से पीछे हट रही है?

यह सवाल संसद में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिए गए उस लिखित उत्तर के बाद खड़ा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

इस मुद्दे को सबसे मुखरता से उठाते हुए अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने केंद्र सरकार के रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि राष्ट्रीय स्मारक बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, तो वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मानगढ़ धाम से किए गए सार्वजनिक वादे का क्या हुआ?

आदिवासियों के ‘जलियांवाला बाग’ को अब भी इंतजार

मानगढ़ धाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे लंबे समय तक मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिला। 17 नवंबर 1913 को समाज सुधारक गोविंद गुरु के नेतृत्व में हजारों भील आदिवासी यहां एकत्र हुए थे। ब्रिटिश सेना ने सभा पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिसमें विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार बड़ी संख्या में आदिवासी शहीद हुए। आदिवासी समाज इस संख्या को लगभग 1,500 मानता है। इसी वजह से मानगढ़ धाम को “आदिवासियों का जलियांवाला बाग” कहा जाता है।

2022 का वादा, 2026 का जवाब

एक नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानगढ़ धाम पहुंचकर कहा था कि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें मिलकर इस ऐतिहासिक स्थल का विकास करेंगी तथा इसे राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने की दिशा में कार्य करेंगी।

लेकिन अब संसद में सरकार का यह कहना कि राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या सरकार ने अपना रुख बदल लिया है? यदि नहीं, तो प्रक्रिया कहां अटकी हुई है?

डॉ. विक्रांत भूरिया बोले— “यह केवल स्मारक का नहीं, सम्मान का सवाल है”

डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देना किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के इतिहास और आदिवासी योगदान को सम्मान देने का विषय है।

उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और वर्ष 2022 में किए गए सार्वजनिक आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की।

अब सरकार के सामने जवाबदेही का सवाल

मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग वर्षों से उठती रही है। संसद में आए ताज़ा जवाब ने इस मांग को फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मानगढ़ धाम को केवल भाषणों में सम्मान मिलेगा, या देश के आदिवासी इतिहास को वह संवैधानिक और राष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी, जिसका वादा किया गया था?

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस का परचम, घनश्याम सिंह ने 6,016 वोटों से दर्ज की जीत

भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों के अंतर से हराकर सीट पर कब्जा जमा लिया। इस जीत को कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।

मतगणना के दौरान शुरुआती राउंड में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन समय बीतने के साथ कांग्रेस ने बढ़त मजबूत कर ली। हर राउंड के बाद बढ़ता अंतर आखिरकार जीत में बदल गया। परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने मिठाइयां बांटी, ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और एक-दूसरे को जीत की बधाई दी।

दतिया उपचुनाव इस बार दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ था। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी थी। वरिष्ठ नेताओं ने लगातार सभाएं कीं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की हर संभव कोशिश की।

कांग्रेस ने इस जीत को जनता का भरोसा और अपने संगठन की मेहनत का परिणाम बताया है। वहीं भाजपा ने हार को स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी चुनाव परिणाम की समीक्षा करेगी और भविष्य की रणनीति पर काम करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया का यह जनादेश आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। फिलहाल कांग्रेस इस जीत से उत्साहित है, जबकि भाजपा के सामने संगठन और रणनीति को लेकर नए सिरे से मंथन की चुनौती है।

सिवान गोलीकांड: घायल छात्रों से मिले डॉ. विक्रांत भूरिया और कांग्रेस फैक्ट फाइंडिंग टीम

सिवान गोलीकांड: न्याय की तलाश में पीड़ित छात्रों के बीच पहुँची कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम


बिहार के सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में छात्रों के घायल होने की घटना ने कानून-व्यवस्था, पुलिस बल के प्रयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि इस कार्रवाई में AK-47 और पिस्टल जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए।

घटना की सच्चाई जानने और पीड़ित परिवारों की बात सुनने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की फैक्ट फाइंडिंग टीम सिवान पहुँची। टीम में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, अल्पसंख्यक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ शामिल थे।

घायल छात्रों से मुलाकात

प्रतिनिधिमंडल ने घायल छात्रों और उनके परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस घटना में 21 वर्षीय आकाश, 15 वर्षीय आरिफ और अग्निवीर की तैयारी कर रहे बुलेट कुमार गौड़ घायल हुए।

घायल छात्रों से मुलाकात करता कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल

टीम ने उनके इलाज, परिवारों की पीड़ा और घटना के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में जानकारी जुटाई। कांग्रेस नेताओं ने आश्वासन दिया कि पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी।

बुलेट कुमार गौड़ की आपबीती

बुलेट कुमार गौड़, जो अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे थे, अपने दोस्तों के साथ छात्र आंदोलन में शामिल होने सिवान पहुँचे थे। परिजनों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके पैर में गोली लगी। परिवार का आरोप है कि घायल होने के बाद भी उनके घायल पैर पर लाठियां बरसाई गईं।

बुलेट कुमार गोंड से चर्चा करते हुए।

बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ तीन दिनों तक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही का विषय बताया।

प्रशासन से मुलाकात के बाद कांग्रेस ने उठाए सवाल

घायलों और उनके परिवारों से मिलने के बाद फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जिला प्रशासन, एसपी और कलेक्टर से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने घटना के दौरान पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग और गोली चलाने की परिस्थितियों पर विस्तृत जानकारी मांगी।
मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप था कि अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं थे और उन्हें घटना के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं दी। कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि न्यायिक या आधिकारिक जांच के निष्कर्षों से होना शेष है।

लोकतंत्र में विरोध का जवाब गोली नहीं

डॉ. विक्रांत भूरिया, इमरान प्रतापगढ़ी और विनोद जाखड़ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और हिंसा से नहीं दिया जा सकता। उनका कहना था कि यदि कहीं कानून-व्यवस्था की चुनौती थी तो उसका समाधान संवैधानिक और मानवीय तरीके से किया जाना चाहिए था।
सिवान की यह घटना अब केवल तीन छात्रों के घायल होने तक सीमित नहीं है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों, पुलिस की जवाबदेही और प्रशासनिक संवेदनशीलता की भी परीक्षा बन गई है। अब पूरे देश की निगाह इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या पीड़ित छात्रों को समयबद्ध न्याय मिल पाता है।

Tribal Protest: नानेघाट इलाके में अडानी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का आदिवासियों ने कड़ा विरोध किया; पेसा ग्राम सभा के ज़रिए टकराव की चेतावनी दी

जुन्नार: जुन्नार के नानेघाट में आदिवासियों का गुस्सा अब उबाल पर है।

अंजनावाले और घाटघर में प्रस्तावित अडानी के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासी समाज ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि यह परियोजना विकास नहीं, बल्कि जल, जंगल, ज़मीन पर कब्ज़े की साज़िश है। यह प्रोजेक्ट आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी ज़मीन से बेदखल कर उन्हें बेघर करने की कोशिश है। PESA ग्राम सभाओं ने साफ़ चेतावनी दी है—आदिवासी अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा, अडानी वापस जाओ!

नानेघाट के आदिवासी इलाकों पर कॉर्पोरेट कब्ज़े की आशंका गहराती जा रही है। अडानी रिन्यूएबल एनर्जी फिफ्टी-टू लिमिटेड ने अंजनावाले और भोरंडे में 1,500 मेगावाट पंप स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया है। इस परियोजना को लेकर 21 अगस्त को अंजनावाले के शासकीय माध्यमिक आश्रम विद्यालय में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जहां प्रभावित ग्रामीण, संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कर सकेंगे।

लेकिन आदिवासी समाज का साफ़ कहना है कि ग्राम सभाओं की सहमति के बिना यह परियोजना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। सरकार द्वारा इको-सेंसिटिव घोषित इस क्षेत्र में खुदाई पर पहले से रोक है, फिर भी आदिवासियों की जल, जंगल और ज़मीन पर खतरा मंडरा रहा है। अंजनावाले, घाटघर और आसपास के कई गांवों की पुश्तैनी ज़मीन प्रभावित होने की आशंका से लोगों में भारी आक्रोश है।

पूर्व विधायक अतुल बेनके ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी अधिकारों की अनदेखी कर यह परियोजना थोपी गई, तो नानेघाट से एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा होगा और हर लोकतांत्रिक तरीके से इसका पुरज़ोर विरोध किया जाएगा।

बेनके ने यह भी अपील की है कि PESA एक्ट के अनुसार ग्राम सभा के प्रस्ताव का कानूनी महत्व है और आदिवासी इलाकों की सभी ग्राम पंचायतों को 21 अगस्त से पहले एक खास ग्राम सभा करनी चाहिए और प्रस्तावित प्रोजेक्ट के पर्यावरण पर असर, ज़मीन को होने वाले नुकसान और स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले असर के बारे में प्रस्ताव पास करने चाहिए।

इस बीच, सुकलवेधे के सरपंच दत्ता गवारी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के बनने से आदिवासी इलाकों के लोगों में नाराज़गी है, क्योंकि इससे भविष्य में आदिवासी इलाकों के किसानों के ज़मीन से हाथ धोने का खतरा हो सकता है, पर्यावरण, बायोडायवर्सिटी को भारी नुकसान हो सकता है और मानिकडोह डैम के पानी के लेवल पर असर पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रोजेक्ट के लिए चुनी गई जगह पेसा और अनुसूचित इलाकों में आती है। इसलिए, राज्य सरकार, केंद्र सरकार या प्राइवेट बिजनेसमैन इस जगह को नहीं ले पाएंगे। ग्राम सभा ही सरकार है। इसलिए, गवारी ने इस गांव के लोगों से भी अपील की है कि वे ग्राम सभा करें और इस प्रोजेक्ट के विरोध में प्रस्ताव पास करें।

असल में यह प्रोजेक्ट क्या है

फरवरी 2022 में, अडानी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट का प्रपोज़ल राज्य सरकार के एनर्जी डिपार्टमेंट को दिया था। इस प्रपोज़ल को लेकर एनर्जी डिपार्टमेंट और कंपनी के बीच 28 जून, 2022 को एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग साइन हुआ था। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 7048 करोड़ रुपये है। इस प्रोजेक्ट में, ऊपरी जलाशय अंजनावाले (अदोशी) में प्रस्तावित है, जबकि निचला जलाशय ठाणे जिले के भोरंडे में प्रस्तावित है। ऊपरी जलाशय में पानी टर्बाइन के ज़रिए छोड़ा जाएगा ताकि बिजली बनाई जा सके, जिसके लिए एक अंडरग्राउंड पावर हाउस, पंप-टरबाइन सिस्टम और दोनों जलाशयों को जोड़ने वाली सुरंगें बनाई जाएंगी। प्रोजेक्ट के लिए लगभग 166 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत है, जिसमें 105 हेक्टेयर नॉन-फ़ॉरेस्ट ज़मीन और 60 हेक्टेयर फ़ॉरेस्ट ज़मीन शामिल है। अदोशी में लगभग 30 मीटर और भोरंडे में 64 मीटर का डैम बनाने का प्रस्ताव है।

इन ग्राम पंचायतों को पब्लिक हियरिंग के लिए नोटिस दिए गए थे: तालेरन, घाटघर, अंजनावाले, देओले, खटकले, नीमगिरी, अंबोली, जलवंडी, केवडी, चावंड, पुर, भिवड़े बुद्रुक, उछिल, भिवड़े खुर्द, हतविज, इंग्लुएन, अंबे, सोनावाले।

मूंग खरीदी पर कक्का जी का सरकार को अल्टीमेटम, बोले- आज फैसला करें, वरना कल से सत्याग्रह

किसान नेता शिवकुमार शर्मा कक्का जी ने भोपाल में प्रेसवार्ता

भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी और ई-टोकन प्रणाली को लेकर किसानों का आंदोलन अब और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। किसान नेता शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो गुरुवार से प्रदेशव्यापी किसान सत्याग्रह शुरू किया जाएगा।

भोपाल स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कक्का जी ने कहा कि सरकार किसानों के साथ भेदभाव कर रही है और यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसान सरकार के साथ होने वाली वार्ता का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यदि बातचीत में किसानों की मांगों पर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन का नया चरण शुरू होगा।

कक्का जी ने कहा, “आज अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो कल का दिन सरकार का नहीं, किसानों का होगा। हमने अपनी पूरी रणनीति तैयार कर ली है।”

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सत्याग्रह की शुरुआत धार जिले के खलघाट से होगी। इसके बाद आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा। कक्का जी ने दावा किया कि इस संबंध में मध्य प्रदेश के सभी जिलों के किसान संगठनों से चर्चा हो चुकी है और बड़ी संख्या में किसान इस आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं।

किसान नेता ने कहा कि यदि सरकार किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लेती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन यदि जवाब नकारात्मक रहा तो गुरुवार से प्रदेशभर में सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

मूंग खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था को लेकर किसानों और सरकार के बीच जारी गतिरोध के बीच कक्का जी के इस ऐलान ने प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।

मूंग खरीदी पर किसानों का हल्ला बोल: भोपाल पहुंचे हजारों किसान, होशंगाबाद रोड पर रोके गए

आर-पार के मूड में किसान पहुंचे राजधानी भोपाल, पुलिस ने रोका

भोपाल। मूंग की 100 प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई जिलों से किसान मंगलवार को राजधानी भोपाल पहुंचे। उनका इरादा मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का था, लेकिन पुलिस ने उन्हें होशंगाबाद रोड पर ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

पुलिस के रोकने के बाद किसान वहीं सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। लंबे आंदोलन की तैयारी के साथ आए किसानों ने मौके पर ही चूल्हे जलाए और दाल-बाटी बनाना शुरू कर दिया। आंदोलन स्थल पर भोजन बनाते किसानों की तस्वीरें पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रहीं। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, वे वापस नहीं लौटेंगे।

 

पूरी तैयारी में आए किसान, सड़क किनारे बनाई दाल-बाटी

प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि सरकार ने मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदने का भरोसा दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं हो रहा। उनका कहना है कि खरीदी सीमित होने से बड़ी मात्रा में मूंग किसानों के पास पड़ी है और उन्हें मजबूरी में फसल कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आंदोलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

किसानों ने साफ कहा है कि यह आंदोलन केवल मूंग खरीदी का नहीं, बल्कि सरकार से किए गए वादे को पूरा कराने की लड़ाई है। उनका कहना है कि जब तक 100 प्रतिशत खरीदी का स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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