Saturday, August 15, 2026
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विश्व आदिवासी दिवस पर BJP पर विक्रांत भूरिया का हमला, बोले- ‘आदिवासी सिर्फ चुनाव में याद आते हैं?’

भोपाल/दिल्ली। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर आदिवासी समाज की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या भाजपा को आदिवासी समाज सिर्फ चुनाव के समय ही याद आता है?

डॉ. भूरिया ने कहा कि 9 अगस्त आदिवासी समाज के लिए महज एक तारीख नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व, संस्कृति, अधिकार और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन है। ऐसे मौके पर देश के नेतृत्व से आदिवासी समाज के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की उम्मीद रहती है।

भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल

भूरिया ने कहा कि उन्होंने यह देखने की कोशिश की कि विश्व आदिवासी दिवस पर देश के बड़े नेताओं ने आदिवासी समाज को किस तरह याद किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी ओर से आदिवासी समाज के लिए अपेक्षित संदेश दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम और गुजरात समेत भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर भी सवाल उठाए। भूरिया का आरोप है कि आदिवासी बहुल राज्यों में भी विश्व आदिवासी दिवस को लेकर वैसी संवेदनशीलता नजर नहीं आई, जिसकी समाज को उम्मीद थी।

‘चुनाव के समय याद आते हैं आदिवासी’

डॉ. भूरिया ने कहा कि चुनाव आते ही भाजपा नेता आदिवासी समाज के बीच पहुंचते हैं। आदिवासी महापुरुषों को याद किया जाता है और उनके सम्मान में कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। लेकिन जब आदिवासी समाज के अधिकारों की बात आती है तो यही नेता चुप नजर आते हैं।

उन्होंने सवाल किया, “क्या भाजपा के लिए आदिवासी समाज को याद करने की तारीख 9 अगस्त नहीं, सिर्फ चुनाव की तारीख है?”

‘भाषण नहीं, अधिकारों पर चाहिए काम’

भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल भाषणों, तस्वीरों और चुनावी वादों से सम्मान नहीं चाहिए। समाज की असली जरूरत जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सरल जरूर है, लेकिन अब वह पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है। वह देख रहा है कि कौन उसके साथ खड़ा है और कौन सिर्फ चुनाव के समय उसके बीच पहुंचता है।

‘चुप्पी भी याद रखी जाएगी’

डॉ. भूरिया ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर जो लोग चुप रहे, उनकी यह चुप्पी भी आदिवासी समाज याद रखेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी कांग्रेस समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को आगे भी मजबूती से उठाती रहेगी।

भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक समझने वालों को यह समझना होगा कि आदिवासी समाज सब देख रहा है, सब समझ रहा है और सब याद रखेगा।

मानगढ़ धाम पर सरकार का यू-टर्न? संसद के जवाब पर डॉ. विक्रांत भूरिया ने उठाए बड़े सवाल

नई दिल्ली।  क्या सरकार मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने के अपने वादे से पीछे हट रही है?

यह सवाल संसद में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिए गए उस लिखित उत्तर के बाद खड़ा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

इस मुद्दे को सबसे मुखरता से उठाते हुए अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने केंद्र सरकार के रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि राष्ट्रीय स्मारक बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, तो वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मानगढ़ धाम से किए गए सार्वजनिक वादे का क्या हुआ?

आदिवासियों के ‘जलियांवाला बाग’ को अब भी इंतजार

मानगढ़ धाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे लंबे समय तक मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिला। 17 नवंबर 1913 को समाज सुधारक गोविंद गुरु के नेतृत्व में हजारों भील आदिवासी यहां एकत्र हुए थे। ब्रिटिश सेना ने सभा पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिसमें विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार बड़ी संख्या में आदिवासी शहीद हुए। आदिवासी समाज इस संख्या को लगभग 1,500 मानता है। इसी वजह से मानगढ़ धाम को “आदिवासियों का जलियांवाला बाग” कहा जाता है।

2022 का वादा, 2026 का जवाब

एक नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानगढ़ धाम पहुंचकर कहा था कि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें मिलकर इस ऐतिहासिक स्थल का विकास करेंगी तथा इसे राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने की दिशा में कार्य करेंगी।

लेकिन अब संसद में सरकार का यह कहना कि राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या सरकार ने अपना रुख बदल लिया है? यदि नहीं, तो प्रक्रिया कहां अटकी हुई है?

डॉ. विक्रांत भूरिया बोले— “यह केवल स्मारक का नहीं, सम्मान का सवाल है”

डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देना किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के इतिहास और आदिवासी योगदान को सम्मान देने का विषय है।

उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और वर्ष 2022 में किए गए सार्वजनिक आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की।

अब सरकार के सामने जवाबदेही का सवाल

मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग वर्षों से उठती रही है। संसद में आए ताज़ा जवाब ने इस मांग को फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मानगढ़ धाम को केवल भाषणों में सम्मान मिलेगा, या देश के आदिवासी इतिहास को वह संवैधानिक और राष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी, जिसका वादा किया गया था?

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस का परचम, घनश्याम सिंह ने 6,016 वोटों से दर्ज की जीत

भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों के अंतर से हराकर सीट पर कब्जा जमा लिया। इस जीत को कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।

मतगणना के दौरान शुरुआती राउंड में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन समय बीतने के साथ कांग्रेस ने बढ़त मजबूत कर ली। हर राउंड के बाद बढ़ता अंतर आखिरकार जीत में बदल गया। परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने मिठाइयां बांटी, ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और एक-दूसरे को जीत की बधाई दी।

दतिया उपचुनाव इस बार दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ था। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी थी। वरिष्ठ नेताओं ने लगातार सभाएं कीं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की हर संभव कोशिश की।

कांग्रेस ने इस जीत को जनता का भरोसा और अपने संगठन की मेहनत का परिणाम बताया है। वहीं भाजपा ने हार को स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी चुनाव परिणाम की समीक्षा करेगी और भविष्य की रणनीति पर काम करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया का यह जनादेश आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। फिलहाल कांग्रेस इस जीत से उत्साहित है, जबकि भाजपा के सामने संगठन और रणनीति को लेकर नए सिरे से मंथन की चुनौती है।

सिवान गोलीकांड: घायल छात्रों से मिले डॉ. विक्रांत भूरिया और कांग्रेस फैक्ट फाइंडिंग टीम

सिवान गोलीकांड: न्याय की तलाश में पीड़ित छात्रों के बीच पहुँची कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम


बिहार के सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में छात्रों के घायल होने की घटना ने कानून-व्यवस्था, पुलिस बल के प्रयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि इस कार्रवाई में AK-47 और पिस्टल जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए।

घटना की सच्चाई जानने और पीड़ित परिवारों की बात सुनने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की फैक्ट फाइंडिंग टीम सिवान पहुँची। टीम में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, अल्पसंख्यक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ शामिल थे।

घायल छात्रों से मुलाकात

प्रतिनिधिमंडल ने घायल छात्रों और उनके परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस घटना में 21 वर्षीय आकाश, 15 वर्षीय आरिफ और अग्निवीर की तैयारी कर रहे बुलेट कुमार गौड़ घायल हुए।

घायल छात्रों से मुलाकात करता कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल

टीम ने उनके इलाज, परिवारों की पीड़ा और घटना के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में जानकारी जुटाई। कांग्रेस नेताओं ने आश्वासन दिया कि पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी।

बुलेट कुमार गौड़ की आपबीती

बुलेट कुमार गौड़, जो अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे थे, अपने दोस्तों के साथ छात्र आंदोलन में शामिल होने सिवान पहुँचे थे। परिजनों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके पैर में गोली लगी। परिवार का आरोप है कि घायल होने के बाद भी उनके घायल पैर पर लाठियां बरसाई गईं।

बुलेट कुमार गोंड से चर्चा करते हुए।

बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ तीन दिनों तक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही का विषय बताया।

प्रशासन से मुलाकात के बाद कांग्रेस ने उठाए सवाल

घायलों और उनके परिवारों से मिलने के बाद फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जिला प्रशासन, एसपी और कलेक्टर से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने घटना के दौरान पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग और गोली चलाने की परिस्थितियों पर विस्तृत जानकारी मांगी।
मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप था कि अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं थे और उन्हें घटना के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं दी। कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि न्यायिक या आधिकारिक जांच के निष्कर्षों से होना शेष है।

लोकतंत्र में विरोध का जवाब गोली नहीं

डॉ. विक्रांत भूरिया, इमरान प्रतापगढ़ी और विनोद जाखड़ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और हिंसा से नहीं दिया जा सकता। उनका कहना था कि यदि कहीं कानून-व्यवस्था की चुनौती थी तो उसका समाधान संवैधानिक और मानवीय तरीके से किया जाना चाहिए था।
सिवान की यह घटना अब केवल तीन छात्रों के घायल होने तक सीमित नहीं है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों, पुलिस की जवाबदेही और प्रशासनिक संवेदनशीलता की भी परीक्षा बन गई है। अब पूरे देश की निगाह इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या पीड़ित छात्रों को समयबद्ध न्याय मिल पाता है।

Tribal Protest: नानेघाट इलाके में अडानी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का आदिवासियों ने कड़ा विरोध किया; पेसा ग्राम सभा के ज़रिए टकराव की चेतावनी दी

जुन्नार: जुन्नार के नानेघाट में आदिवासियों का गुस्सा अब उबाल पर है।

अंजनावाले और घाटघर में प्रस्तावित अडानी के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासी समाज ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि यह परियोजना विकास नहीं, बल्कि जल, जंगल, ज़मीन पर कब्ज़े की साज़िश है। यह प्रोजेक्ट आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी ज़मीन से बेदखल कर उन्हें बेघर करने की कोशिश है। PESA ग्राम सभाओं ने साफ़ चेतावनी दी है—आदिवासी अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा, अडानी वापस जाओ!

नानेघाट के आदिवासी इलाकों पर कॉर्पोरेट कब्ज़े की आशंका गहराती जा रही है। अडानी रिन्यूएबल एनर्जी फिफ्टी-टू लिमिटेड ने अंजनावाले और भोरंडे में 1,500 मेगावाट पंप स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया है। इस परियोजना को लेकर 21 अगस्त को अंजनावाले के शासकीय माध्यमिक आश्रम विद्यालय में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जहां प्रभावित ग्रामीण, संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कर सकेंगे।

लेकिन आदिवासी समाज का साफ़ कहना है कि ग्राम सभाओं की सहमति के बिना यह परियोजना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। सरकार द्वारा इको-सेंसिटिव घोषित इस क्षेत्र में खुदाई पर पहले से रोक है, फिर भी आदिवासियों की जल, जंगल और ज़मीन पर खतरा मंडरा रहा है। अंजनावाले, घाटघर और आसपास के कई गांवों की पुश्तैनी ज़मीन प्रभावित होने की आशंका से लोगों में भारी आक्रोश है।

पूर्व विधायक अतुल बेनके ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी अधिकारों की अनदेखी कर यह परियोजना थोपी गई, तो नानेघाट से एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा होगा और हर लोकतांत्रिक तरीके से इसका पुरज़ोर विरोध किया जाएगा।

बेनके ने यह भी अपील की है कि PESA एक्ट के अनुसार ग्राम सभा के प्रस्ताव का कानूनी महत्व है और आदिवासी इलाकों की सभी ग्राम पंचायतों को 21 अगस्त से पहले एक खास ग्राम सभा करनी चाहिए और प्रस्तावित प्रोजेक्ट के पर्यावरण पर असर, ज़मीन को होने वाले नुकसान और स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले असर के बारे में प्रस्ताव पास करने चाहिए।

इस बीच, सुकलवेधे के सरपंच दत्ता गवारी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के बनने से आदिवासी इलाकों के लोगों में नाराज़गी है, क्योंकि इससे भविष्य में आदिवासी इलाकों के किसानों के ज़मीन से हाथ धोने का खतरा हो सकता है, पर्यावरण, बायोडायवर्सिटी को भारी नुकसान हो सकता है और मानिकडोह डैम के पानी के लेवल पर असर पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रोजेक्ट के लिए चुनी गई जगह पेसा और अनुसूचित इलाकों में आती है। इसलिए, राज्य सरकार, केंद्र सरकार या प्राइवेट बिजनेसमैन इस जगह को नहीं ले पाएंगे। ग्राम सभा ही सरकार है। इसलिए, गवारी ने इस गांव के लोगों से भी अपील की है कि वे ग्राम सभा करें और इस प्रोजेक्ट के विरोध में प्रस्ताव पास करें।

असल में यह प्रोजेक्ट क्या है

फरवरी 2022 में, अडानी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट का प्रपोज़ल राज्य सरकार के एनर्जी डिपार्टमेंट को दिया था। इस प्रपोज़ल को लेकर एनर्जी डिपार्टमेंट और कंपनी के बीच 28 जून, 2022 को एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग साइन हुआ था। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 7048 करोड़ रुपये है। इस प्रोजेक्ट में, ऊपरी जलाशय अंजनावाले (अदोशी) में प्रस्तावित है, जबकि निचला जलाशय ठाणे जिले के भोरंडे में प्रस्तावित है। ऊपरी जलाशय में पानी टर्बाइन के ज़रिए छोड़ा जाएगा ताकि बिजली बनाई जा सके, जिसके लिए एक अंडरग्राउंड पावर हाउस, पंप-टरबाइन सिस्टम और दोनों जलाशयों को जोड़ने वाली सुरंगें बनाई जाएंगी। प्रोजेक्ट के लिए लगभग 166 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत है, जिसमें 105 हेक्टेयर नॉन-फ़ॉरेस्ट ज़मीन और 60 हेक्टेयर फ़ॉरेस्ट ज़मीन शामिल है। अदोशी में लगभग 30 मीटर और भोरंडे में 64 मीटर का डैम बनाने का प्रस्ताव है।

इन ग्राम पंचायतों को पब्लिक हियरिंग के लिए नोटिस दिए गए थे: तालेरन, घाटघर, अंजनावाले, देओले, खटकले, नीमगिरी, अंबोली, जलवंडी, केवडी, चावंड, पुर, भिवड़े बुद्रुक, उछिल, भिवड़े खुर्द, हतविज, इंग्लुएन, अंबे, सोनावाले।

मूंग खरीदी पर कक्का जी का सरकार को अल्टीमेटम, बोले- आज फैसला करें, वरना कल से सत्याग्रह

किसान नेता शिवकुमार शर्मा कक्का जी ने भोपाल में प्रेसवार्ता

भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी और ई-टोकन प्रणाली को लेकर किसानों का आंदोलन अब और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। किसान नेता शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो गुरुवार से प्रदेशव्यापी किसान सत्याग्रह शुरू किया जाएगा।

भोपाल स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कक्का जी ने कहा कि सरकार किसानों के साथ भेदभाव कर रही है और यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसान सरकार के साथ होने वाली वार्ता का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यदि बातचीत में किसानों की मांगों पर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन का नया चरण शुरू होगा।

कक्का जी ने कहा, “आज अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो कल का दिन सरकार का नहीं, किसानों का होगा। हमने अपनी पूरी रणनीति तैयार कर ली है।”

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सत्याग्रह की शुरुआत धार जिले के खलघाट से होगी। इसके बाद आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा। कक्का जी ने दावा किया कि इस संबंध में मध्य प्रदेश के सभी जिलों के किसान संगठनों से चर्चा हो चुकी है और बड़ी संख्या में किसान इस आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं।

किसान नेता ने कहा कि यदि सरकार किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लेती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन यदि जवाब नकारात्मक रहा तो गुरुवार से प्रदेशभर में सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

मूंग खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था को लेकर किसानों और सरकार के बीच जारी गतिरोध के बीच कक्का जी के इस ऐलान ने प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।

मूंग खरीदी पर किसानों का हल्ला बोल: भोपाल पहुंचे हजारों किसान, होशंगाबाद रोड पर रोके गए

आर-पार के मूड में किसान पहुंचे राजधानी भोपाल, पुलिस ने रोका

भोपाल। मूंग की 100 प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई जिलों से किसान मंगलवार को राजधानी भोपाल पहुंचे। उनका इरादा मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का था, लेकिन पुलिस ने उन्हें होशंगाबाद रोड पर ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

पुलिस के रोकने के बाद किसान वहीं सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। लंबे आंदोलन की तैयारी के साथ आए किसानों ने मौके पर ही चूल्हे जलाए और दाल-बाटी बनाना शुरू कर दिया। आंदोलन स्थल पर भोजन बनाते किसानों की तस्वीरें पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रहीं। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, वे वापस नहीं लौटेंगे।

 

पूरी तैयारी में आए किसान, सड़क किनारे बनाई दाल-बाटी

प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि सरकार ने मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदने का भरोसा दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं हो रहा। उनका कहना है कि खरीदी सीमित होने से बड़ी मात्रा में मूंग किसानों के पास पड़ी है और उन्हें मजबूरी में फसल कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आंदोलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

किसानों ने साफ कहा है कि यह आंदोलन केवल मूंग खरीदी का नहीं, बल्कि सरकार से किए गए वादे को पूरा कराने की लड़ाई है। उनका कहना है कि जब तक 100 प्रतिशत खरीदी का स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

एमपी में गुरु पूर्णिमा से शुरू होगी ‘भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना’, 102 छात्रों को मिलेगा ₹1-1 लाख का सम्मान

भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई छात्रवृत्ति योजना शुरू करने जा रही है। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ‘भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना’ का शुभारंभ किया जाएगा। योजना के तहत राज्य के 102 मेधावी विद्यार्थियों को एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति देकर सम्मानित किया जाएगा।

भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने इसकी जानकारी मीडिया से साझा की है।  बताया कि योजना का संचालन संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के माध्यम से किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत 51 विद्यार्थियों का चयन उच्च शिक्षा विभाग और 51 विद्यार्थियों का चयन स्कूल शिक्षा विभाग से किया जाएगा। सभी चयनित विद्यार्थियों को ₹1-1 लाख की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।

श्रीराम तिवारी के अनुसार, योजना की औपचारिक शुरुआत गुरु पूर्णिमा के दिन होगी, जबकि छात्रवृत्ति की राशि और सम्मान मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों प्रदान किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश के होनहार विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप पहचान दिलाने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी। योजना के माध्यम से मेधावी छात्रों को आर्थिक सहयोग मिलने के साथ उन्हें समाज के सामने सम्मानित भी किया जाएगा, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलेगी।

अलीराजपुर दरिंदगी:’मप्र में आदिवासियों की सुरक्षा भगवान भरोसे’, पीड़िता से मिलकर सरकार पर बरसे डॉ. विक्रांत भूरिया

इंदौर के एमटीएच अस्पताल पहुंचे डॉ. विक्रांत भूरिया

इंदौर। मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में एक आदिवासी विधवा महिला के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म और बर्बरता की घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर अब राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। झाबुआ विधायक और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने इंदौर के एमटीएच अस्पताल पहुंचकर पीड़िता का हाल जाना। भूरिया ने पीड़िता के परिजनों और डॉक्टरों से मुलाकात के बाद प्रदेश की मोहन यादव सरकार को आड़े हाथों लिया और राज्य को अपराधियों का ‘सुरक्षित ठिकाना’ करार दिया।

पीड़िता की हालत गंभीर, डॉक्टरों ने की इमरजेंसी सर्जरी
अस्पताल के डॉक्टरों से जानकारी लेने के बाद विक्रांत भूरिया ने बताया कि पीड़िता को अत्यंत नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। उसके शरीर और गुप्त अंगों पर गंभीर आंतरिक चोटें थीं, जिसके कारण डॉक्टरों को तत्काल उसकी मेजर सर्जरी करनी पड़ी। फिलहाल महिला डॉक्टरों की देखरेख में है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।

जब गृह मंत्री ही नाकाम हों, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होना लाजिमी है
अस्पताल परिसर में मीडिया से बात करते हुए विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, यह सिर्फ एक महिला पर अत्याचार नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता को कुचलने की कोशिश है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास ही गृह विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन वे प्रदेश की जनता को सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल रहे हैं। एनसीआरबी  के आंकड़े साफ बताते हैं कि मध्य प्रदेश दलितों और आदिवासियों के लिए देश का सबसे असुरक्षित राज्य बनता जा रहा है। भूरिया ने खंडवा की हालिया आपराधिक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन में स्टाफ और संसाधनों की भारी कमी है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

कांग्रेस ने उठाई SIT जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग
विपक्षी दल ने सरकार के सामने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रमुख शर्तें रखी हैं।

उच्च स्तरीय जांच: इस पूरे अमानवीय कृत्य की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया जाए।
त्वरित न्याय: आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाई जाए, ताकि उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
मदद और पुनर्वास: पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से पर्याप्त आर्थिक सहायता, पुख्ता सुरक्षा और पुनर्वास की सुविधा दी जाए।
पुलिस भर्ती: आदिवासी और संवेदनशील अंचलों में खाली पड़े पुलिस के पदों पर तुरंत नियुक्तियां की जाएं।

विधानसभा घेराव की तैयारी, पटवारी ने बनाई जांच कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 5 सदस्यीय एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में पूर्व मंत्री बाला बच्चन, डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ, विधायक झूमा सोलंकी, विधायक सेना पटेल और खुद विक्रांत भूरिया शामिल हैं। यह कमेटी घटनास्थल का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। विक्रांत भूरिया ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में इस वीभत्स घटना और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों के मुद्दे पर सरकार को सदन के भीतर घेरा जाएगा। इस दौरान अस्पताल में कांग्रेस संगठन प्रभारी अमन बजाज, प्रवक्ता अमित चौरसिया, ब्लॉक अध्यक्ष निलेश सेलू सेन सहित कई स्थानीय नेता मौजूद रहे।

 

आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करे सरकार: डॉ. विक्रांत भूरिया

भोपाल। मध्य प्रदेश में समूह-2, उपसमूह-1 अंतर्गत कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा-2026 को लेकर गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े हो गए हैं। भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण के पालन को लेकर व्यापक आशंकाएं सामने आई हैं। ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संपूर्ण आरक्षण रोस्टर एवं संबंधित अभिलेख तत्काल सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मांग की है कि भर्ती का विभागवार एवं श्रेणीवार आरक्षण रोस्टर, रोस्टर रजिस्टर, बैकलॉग रिक्तियों का विवरण तथा यदि किसी न्यायालयीन आदेश अथवा वैधानिक कारण से पदों में परिवर्तन किया गया है, तो उसका स्पष्ट आधार सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और समीक्षा पूर्ण होने तक भर्ती को अंतिम रूप न दिया जाए।

डॉ. विक्रांत भूरिया द्वारा लिखा गया आधिकारिक पत्र

यह मुद्दा किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना से जुड़ा हुआ है। यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है, तो सरकार को पारदर्शिता दिखाते हुए सभी तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। इससे आदिवासी युवाओं के मन में उत्पन्न भ्रम और असंतोष समाप्त होगा तथा भर्ती प्रक्रिया पर जनविश्वास भी मजबूत होगा।

आदिवासी समाज किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहा है। उसकी मांग केवल इतनी है कि संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था का पूर्ण एवं निष्पक्ष पालन हो तथा प्रत्येक पात्र अभ्यर्थी को उसका संवैधानिक अधिकार मिले। सरकार से अपेक्षा है कि वह इस गंभीर विषय पर शीघ्र निर्णय लेते हुए आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि भर्ती प्रक्रिया संविधान की भावना, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों तथा पारदर्शी प्रशासन के अनुरूप संचालित हो।

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