Tuesday, September 15, 2026
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जीतू पटवारी और डॉ. विक्रांत भूरिया फिर बालाघाट में: बच्चों की मौत पर सरकार की चुप्पी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई

मध्य प्रदेश के बालाघाट में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। एक तरफ मासूम बच्चों की जान जा रही है, आदिवासी परिवार अपने बच्चों को खोने के दर्द से गुजर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार इस गंभीर संकट का समाधान करने के बजाय पूरे मामले को दबाने और जनता का ध्यान भटकाने में जुटी दिखाई दे रही है।

इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया आज पुनः बालाघाट पहुंचे हैं। दोनों नेताओं का बालाघाट पहुंचना स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस अब इस मुद्दे पर सरकार को चैन से बैठने नहीं देगी।

यह सिर्फ बच्चों की मौत का मामला नहीं है। यह सवाल है कि क्या मध्य प्रदेश सरकार अपने सबसे कमजोर और वंचित नागरिकों के जीवन की कोई कीमत समझती है?

बच्चों की मौत पर सरकार का ध्यान राहत पर नहीं, कहानी बदलने पर है?

बालाघाट में लगातार बच्चों की मौतों के बाद सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वास्तविक समस्याओं को सामने लाने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि सरकार समर्थित फर्जी या तथाकथित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को मैदान में उतारकर जनता के बीच एक अलग नैरेटिव बनाने का प्रयास किया गया।

सवाल सीधा है—अगर सरकार के पास बच्चों की मौतों का सच है, अगर व्यवस्था सही थी और अगर कोई लापरवाही नहीं हुई, तो फिर सच्चाई को छिपाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

सरकार को सोशल मीडिया प्रचारकों की जरूरत नहीं है। उसे स्वतंत्र जांच की जरूरत है। उसे जवाबदेही की जरूरत है। उसे उन परिवारों के सामने खड़ा होना चाहिए जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है।

मौतों के बाद प्रचार नहीं, इंसाफ चाहिए।

देश की विशेष रूप से कमजोर जनजाति बैगा के 27 हजार बच्चे कुपोषित

बालाघाट का संकट केवल हालिया मौतों तक सीमित नहीं है। यह उस गहरे सरकारी संकट की तस्वीर है जिसमें आदिवासी समुदाय वर्षों से जी रहा है।

बैगा जनजाति देश की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) में शामिल है। इन समुदायों के लिए केंद्र और राज्य सरकार विशेष योजनाएं और भारी बजट निर्धारित करती हैं ताकि उनके स्वास्थ्य, पोषण और जीवन स्तर में सुधार हो सके।

लेकिन जमीनी हकीकत क्या है?

लगभग 27 हजार बैगा बच्चे कुपोषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। उनकी जिंदगी खतरे में है। उनके परिवार गरीबी और बीमारी के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

फिर सवाल उठता है कि आदिवासी विकास और पोषण के नाम पर आने वाला भारी बजट आखिर कहां जा रहा है?

कौन जिम्मेदार है?

किस अधिकारी ने निगरानी नहीं की?

किस मंत्री ने जवाबदेही तय नहीं की?

और सबसे बड़ा सवाल—क्या सरकार को इन बच्चों की जान जाने का इंतजार है?

सरकार के बजट भाषणों में आदिवासी कल्याण प्राथमिकता हो सकता है, लेकिन बालाघाट और बैगा बस्तियों की हकीकत बताती है कि जमीन पर आदिवासी बच्चे अब भी सरकारी उपेक्षा के शिकार हैं।

स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की जवाबदेही तय होनी चाहिए

डॉ. विक्रांत भूरिया ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई किसी एक जिले या एक घटना तक सीमित नहीं है।

रीवा में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग को लेकर पांच दिनों तक न्याय सत्याग्रह किया। यह सत्याग्रह उन परिवारों की आवाज था जिनके बच्चों की मौत सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलताओं के बीच हुई।

बालाघाट के बच्चों की मौतें हों, रीवा में स्वास्थ्य संकट हो, सतना में बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का मामला हो या इंदौर में नवजात बच्चों के साथ हुई भयावह लापरवाही—हर घटना मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी क्या है?

क्या केवल अधिकारियों के बयान जारी कर देने से जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है?

क्या मृत बच्चों के परिवारों को न्याय मांगने के लिए धरना देना पड़ेगा?

क्या सरकार तब तक इंतजार करेगी जब तक यह संकट और बड़ा न हो जाए?

डॉ. विक्रांत भूरिया और कांग्रेस की मांग स्पष्ट है—जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और स्वास्थ्य मंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।

मृतक बच्चों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और रोजगार की मांग

न्याय सत्याग्रह के दौरान आदिवासी कांग्रेस ने मृत बच्चों के परिवारों के लिए ठोस और स्पष्ट मांगें रखी थीं।

प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

प्रभावित परिवार के एक सदस्य को स्थायी प्रकृति की नौकरी उपलब्ध कराई जाए।

स्वास्थ्य व्यवस्था की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

आदिवासी क्षेत्रों में पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं के बजट का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

ये मांगें किसी राजनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा नहीं हैं। ये उन परिवारों के अधिकार हैं जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है।

एक परिवार जिसने अपना बच्चा खो दिया, उसके लिए कोई भी मुआवजा पर्याप्त नहीं हो सकता। लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि वह परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा दे।

जीतू पटवारी और विक्रांत भूरिया का बालाघाट पहुंचना सरकार के लिए चेतावनी

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया का पुनः बालाघाट पहुंचना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक और जनआंदोलन के स्तर पर आगे ले जाने के लिए तैयार है।

यह लड़ाई केवल विपक्ष बनाम सरकार की लड़ाई नहीं है।

यह लड़ाई उन बच्चों के लिए है जिनकी आवाज अब नहीं रही।

यह लड़ाई उन आदिवासी परिवारों के लिए है जो आज भी अपने बच्चों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटते हैं।

यह लड़ाई उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद बच्चे कुपोषण से मर रहे हैं।

सरकार को समझना होगा कि जनता अब केवल आश्वासन सुनने के लिए तैयार नहीं है।

सरकार को अब प्रचार नहीं, जवाब देना होगा

मध्य प्रदेश सरकार के सामने आज कई गंभीर सवाल खड़े हैं।

बालाघाट में बच्चों की मौतों की स्वतंत्र जांच कब होगी?

27 हजार कुपोषित बैगा बच्चों की स्थिति सुधारने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए जाएंगे?

आदिवासी पोषण योजनाओं का बजट कहां खर्च हुआ?

मृत बच्चों के परिवारों को न्याय और मुआवजा कब मिलेगा?

स्वास्थ्य मंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी कब स्वीकार करेंगे?

और क्या सरकार उन लोगों पर कार्रवाई करेगी जो वास्तविक मुद्दों को दबाने के लिए कथित रूप से फर्जी नैरेटिव फैलाने का काम कर रहे हैं?

इन सवालों से भागकर कोई सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती।

यह लड़ाई अब रुकेगी नहीं

बालाघाट की घटनाएं मध्य प्रदेश के लिए एक चेतावनी हैं। अगर सरकार ने अब भी आंखें बंद रखीं, अगर बच्चों की मौतों को आंकड़ों में दबाने की कोशिश की गई, अगर आदिवासी परिवारों की आवाज को नजरअंदाज किया गया, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि मानवीय संवेदनहीनता का उदाहरण होगा।

जीतू पटवारी और डॉ. विक्रांत भूरिया का संघर्ष यह स्पष्ट करता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को दबने नहीं देगी।

रीवा का न्याय सत्याग्रह हो या बालाघाट में बच्चों की मौतों का मामला—आदिवासी कांग्रेस और मध्य प्रदेश कांग्रेस की मांग एक ही है:

बच्चों की मौत पर जवाबदेही तय हो। दोषियों पर कार्रवाई हो। पीड़ित परिवारों को न्याय मिले और स्वास्थ्य मंत्री इस्तीफा दें।

क्योंकि सरकारें प्रचार से नहीं, अपने सबसे कमजोर नागरिकों की सुरक्षा से पहचानी जाती हैं।

और बालाघाट के बच्चे आज मध्य प्रदेश सरकार से यही सवाल पूछ रहे हैं—हमारी मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

न्याय सत्याग्रह में सरकार पर जमकर गरजे डॉ. विक्रांत भरिया, एमपी में बीजेपी नहीं, तालिबानी राज

रीवा। बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में सरकार की जवाबदेही तय करने और स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग को लेकर रीवा में चल रहा अनिश्चितकालीन न्याय सत्याग्रह पांचवें दिन समाप्त हो गया। पांचवें दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी धरना स्थल पहुंचे।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया को धरना स्थल से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर वाटर कैनन और अश्रुगैस का इस्तेमाल किया गया।

‘एमपी में बीजेपी नहीं, तालिबान का राज’- भूरिया

कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि “मध्य प्रदेश में अब भाजपा का नहीं, तालिबान का राज चल रहा है।” कांग्रेस ने कहा कि पुलिस कार्रवाई से आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता।

डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि न्याय सत्याग्रह का यह अंत नहीं है और आंदोलन को अगले चरण में भोपाल ले जाया जाएगा।

भूरिया ने कहा कि “राजेंद्र शुक्ला, कान खोलकर सुन लो, हम आपकी पुलिस से डरने वाले नहीं हैं। जब तक आदिवासी बच्चों को न्याय नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा।”

उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल करते हुए कहा कि जब प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं तो ऐसे व्यक्ति को स्वास्थ्य मंत्री क्यों बनाए रखा गया है। कांग्रेस ने राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग दोहराई।

भोपाल घेराव का ऐलान

डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि आंदोलन का अगला चरण भोपाल में होगा। कांग्रेस मुख्यमंत्री मोहन यादव का घेराव कर स्वास्थ्य व्यवस्था और बालाघाट में हुई मौतों को लेकर जवाब मांगेगी।

जीतू पटवारी ने भी मांगा स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना उसका मौलिक अधिकार है, लेकिन प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी गंभीर घटनाएं सामने आ रही हैं।

पटवारी ने राजेंद्र शुक्ला से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा कि अगर स्वास्थ्य मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो उन्हें बर्खास्त किया जाए।

कांग्रेस ने चेतावनी दी कि सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनाव में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।

सागर जहरीली शराबकांड पर उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले- ‘जिम्मेदार कौन, नेटवर्क किसके संरक्षण में?’

भोपाल। मध्यप्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। इस मामले को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सागर में हुई मौतों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और जहरीली शराब की सप्लाई का नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा था।

सिंघार ने दावा किया कि जहरीली शराब मध्यप्रदेश के बाहर से नहीं, बल्कि प्रदेश के अंदर से ही सागर पहुंची थी। उन्होंने यूपी से शराब आने की बात को गलत बताते हुए आरोप लगाया कि शराब धार से सागर तक पहुंची थी।

आबकारी विभाग और सागर एसपी पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने शराबकांड में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ सागर एसपी अनुराग सुजानिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। सिंघार का दावा है कि जिन-जिन स्थानों पर एसपी अनुराग सुजानिया की पोस्टिंग रही, वहां जहरीली शराब से जुड़े मामले सामने आए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जिला संगठन ने पहले ही जहरीली शराब को लेकर शिकायत की थी, लेकिन शिकायत के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। सिंघार ने सवाल किया कि आखिर मिथेनॉल डिस्टलरी तक कैसे पहुंचा और शराब में इसकी मिलावट कैसे हुई?

‘सागर गोल्ड को कुछ घंटों में क्लीन चिट कैसे?’

उमंग सिंघार ने रॉयल ब्रांड और सागर गोल्ड शराब को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौतों के बाद कुछ ही घंटों में सागर गोल्ड को क्लीन चिट दे दी गई। सिंघार ने कहा कि पहले शराब पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी हुआ और बाद में उसे वापस ले लिया गया। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को सवालों के घेरे में बताया।

प्रह्लाद पटेल और उमा भारती पर भी साधा निशाना

सिंघार ने सागर शराबकांड को लेकर वीएचपी और आरएसएस के नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रह्लाद पटेल और उमा भारती का नाम लेते हुए कहा कि सागर में बड़ी संख्या में लोधी समाज के लोगों की मौत हुई है, लेकिन उनकी ओर से इस मामले में आवाज क्यों नहीं उठाई गई।

25 लाख रुपये मुआवजे की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मृतकों के परिवारों को दिया जा रहा चार लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

हिंदू-मुस्लिम राजनीति का भी लगाया आरोप

उमंग सिंघार ने सरकार पर हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार मुसलमानों का डर दिखाकर हिंदुओं का वोट हासिल करना चाहती है। सिंघार ने इंदौर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मुरैना और अब सागर की घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रदेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए।

 

30 बैगा आदिवासियों की मौत के खिलाफ रीवा में अनिश्चितकालीन ‘न्याय सत्याग्रह’, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

रीवा। मध्यप्रदेश के बालाघाट में 30 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत और रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत को लेकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी के विरोध में आदिवासी कांग्रेस का अनिश्चितकालीन ‘न्याय सत्याग्रह’ दूसरे दिन भी जारी रहा। अग्रसेन चौक स्थित कमिश्नर कार्यालय के सामने चल रहे इस आंदोलन में स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में चल रहे धरने में सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं विधायक अजय सिंह और पूर्व मंत्री एवं विधायक ओमकार मरकाम भी शामिल हुए।

पीड़ित परिवारों ने सुनाई अपनी पीड़ा

धरने में बालाघाट से पहुंचे पीड़ित परिवारों ने अपने बच्चों की मौत का दर्द साझा किया। तीन बच्चों के पिता राकेश मरकाम की चार वर्षीय बेटी माही, मंगलू कुसरे की डेढ़ वर्षीय बेटी गोरी और बरन सिंह मरकाम के आठ वर्षीय बेटे रोनू की मौत का जिक्र करते हुए परिजनों ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। पीड़ित परिवारों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा ही उनके बच्चों को अंतिम श्रद्धांजलि होगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मौत, छिंदवाड़ा का कफ सिरप मामला, इंदौर में नवजातों को चूहों द्वारा कुतरे जाने की घटना, सतना में HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला और रीवा अस्पताल में कल्पना मिश्रा की मौत के साथ ही जीवित गिरिजा प्रसाद गुप्ता को मृत घोषित किए जाने की घटना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था ICU में पड़ी है और इसका इलाज स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे के बिना संभव नहीं है।

आदिवासी कांग्रेस ने आंदोलन के दौरान सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—

– स्वास्थ्य मंत्री का तत्काल इस्तीफा लिया जाए।

– बालाघाट में तत्काल Health Emergency लागू की जाए।

– बालाघाट के प्रत्येक पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

आदिवासी कांग्रेस ने कहा है कि जब तक इन मांगों पर सरकार ठोस कार्रवाई नहीं करती, तब तक ‘न्याय सत्याग्रह’ जारी रहेगा।

कार्यक्रम का संचालन आदिवासी कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक अर्चना पोर्ते और विजय कोल ने किया। आंदोलन की अध्यक्षता मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष रामू टेकाम कर रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर रीवा में आदिवासी कांग्रेस का अनिश्चितकालीन धरना

रीवा। मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में सामने आ रही कथित लापरवाही के विरोध में आदिवासी कांग्रेस ने रीवा में स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। आंदोलन का नेतृत्व मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया कर रहे हैं। वहीं, धरना में आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम और स्थानीय नेताओं के अलावा आदिवासी विधायक भी शामिल हैं।

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ से कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने धरना स्थल पर पहुंचने से पहले रीवा आदिवासी कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष रहे दिवंगत अमित कोल के परिजनों से उनके निवास पर मुलाकात की।

इन घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना

आदिवासी कांग्रेस ने बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत, इंदौर के सरकारी अस्पताल में नवजात बच्चों को चूहों द्वारा कुतरे जाने की घटना, सतना में कथित तौर पर एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले और छिंदवाड़ा के कफ सिरप प्रकरण को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लगातार गंभीर लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं और इसके बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

आदिवासी कांग्रेस ने इन घटनाओं की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के कारण किसी परिवार को अपने बच्चों की जान नहीं गंवानी चाहिए।

मृत बच्चों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग

आंदोलनकारियों ने बालाघाट में जान गंवाने वाले आदिवासी बच्चों के प्रत्येक परिवार को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों में कम से कम एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने की मांग भी रखी गई है।

आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाने की भी मांग की गई है। संगठन ने अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग और मेडिकल स्टाफ, जरूरी दवाइयां, जांच सुविधाएं, ब्लड बैंक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग

आदिवासी कांग्रेस का कहना है कि केवल जांच की घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को घटनाओं की जिम्मेदारी तय करने के साथ प्रभावित परिवारों को न्याय और उचित मुआवजा देना होगा। साथ ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करती, तब तक रीवा में अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।

क्या एमपी में गरीब के घर पैदा होना हुआ गुनाह?छिंदवाड़ा, इंदौर और बालाघाट के बाद अब रीवा में बच्चों की मौत का मातम

भोपाल। मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत के मामले लगातार सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। छिंदवाड़ा, इंदौर और बालाघाट के बाद अब रीवा में जच्चा-बच्चा की मौत ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक के बाद एक सामने आ रही इन घटनाओं से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। तो, बच्चों की लगातार मौतों के कारण प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग ने जोर पकड़ लिया है।

दरअसल, रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में डिलीवरी के दौरान महिला कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए। मामले में अधीक्षक और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, कार्रवाई के बावजूद सवाल यह है कि आखिर अस्पताल में ऐसी स्थिति क्यों बनी और क्या सिर्फ कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां दूर हो जाएंगी? ये कोई पहला मामला नहीं है जब लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते किसी मासूम की जान चली गई हो। इससे पहले छिंदवाड़ा, इंदौर और बालाघाट की घटनाओं ने भी आत्मा को झंझोर कर रख दिया था। सवाल सिर्फ एक है कि, क्या मप्र में गरीब के घर में पैदा होना गुनाह है ?

क्या कहती है भारत सरकार की रिपोर्ट

भारत सरकार की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में जन्म लेने वाले 1 हजार बच्चों में 35 बच्चे अपना पहला जन्मदिन ही नहीं मना पाते। शिशु मृत्यु दर के मामले में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर हैं। जहां नवजात बच्चों की सबसे ज्यादा मौत होती है। मध्य प्रदेश में 28 बच्चों की मौत शुरूआत के 28 दिनों के अंदर ही हो जाती है। हालांकि पिछले 5 सालों में इन आंकड़ों में 11 अंकों का सुधार हुआ है, लेकिन इसके बाद भी मध्य प्रदेश राष्ट्रीय औसत से 11 अंक पीछे हैं।

छिंदवाड़ा, इंदौर, सतना और बालाघाट में बच्चों की मौत ने मचाया हड़कंप

इससे पहले बालाघाट में बैगा समाज के 26 आदिवासी बच्चों की मौत ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया था। बच्चों की मौत के बाद कांग्रेस ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हालांकि, मामले में सरकार ने छूटपुट कार्यवाही कर इतिश्री कर ली थी।

इंदौर में 2 मासूमों की चूहों के कुतरने से मौत के मामले ने भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। प्रदेश के बड़े मेडिकल हब में शामिल इंदौर में ऐसी घटनाओं को लेकर अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग पर सवाल उठे। सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में गरीब परिवारों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है। अगर बड़े शहरों के अस्पतालों में भी मरीजों की सुरक्षा और इलाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

छिंदवाड़ा में नकली सिरप से बच्चों की मौत का मामला भी पहले काफी विवादों में रहा था। घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज को लेकर सवाल उठे थे। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए थे। अब रीवा की घटना के बाद विपक्ष इन तमाम मामलों को जोड़कर सरकार से जवाब मांग रहा है।

सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित मासूम बच्चों को कथित तौर पर एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का गंभीर मामला सामने आया। मामला दिसंबर 2025 में सामने आया था, जहां जिला अस्पताल में थैलेसीमिया का इलाज करा रहे बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव रक्त चढ़ाया गया था। इस लापरवाही के कारण कई मासूम बच्चे एचआईवी से संक्रमित हो गए। इन बच्चों को बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है।

एमपी के भविष्य की मौत का जिम्मेदार कौन?

प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। हर घटना के बाद जांच और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर किसी दूसरे जिले से ऐसी ही घटना सामने आ जाती है। ऐसे में सरकार की मंशा पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि, आखिर इन घटनाओं की स्थायी रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित है या अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही की कोई मजबूत व्यवस्था भी है? लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है।

सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर

सरकार की ओर से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने के दावे किए जाते हैं। लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जहां लगातार अलग-अलग जिलों से बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं। जो सरकार के तमाम दावों की पोल खोल रही हैं। अगर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी मजबूत है, तो गरीब परिवारों को इलाज के दौरान बार-बार ऐसे दर्द से क्यों गुजरना पड़ रहा है?

सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, व्यवस्था बदलने का है

रीवा में अधीक्षक और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई हुई है, लेकिन सवाल यही है कि क्या इससे पूरी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता, इमरजेंसी व्यवस्था, दवाओं और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता, मरीजों की निगरानी और इलाज में प्रोटोकॉल का पालन, इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। क्योंकि अगर व्यवस्था में कमी है तो केवल एक कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

गरीब के बच्चे की जिंदगी की कीमत क्या कम है?

इन घटनाओं का सबसे बड़ा असर उन गरीब परिवारों पर पड़ता है, जिनके पास महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने का विकल्प नहीं होता। उनके लिए सरकारी अस्पताल ही सबसे बड़ी उम्मीद हैं। ऐसे में जब सरकारी अस्पताल में ही इलाज के दौरान किसी बच्चे या जच्चा-बच्चा की मौत हो जाती है, तो परिवार सिर्फ अपने किसी सदस्य को नहीं खोता, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उसका भरोसा भी टूटता है। यही वजह है कि अब लगातार सरकार से जवाबदेही की मांग की जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

बच्चों से जुड़े तमाम मामलों और स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के लिए विपक्ष ने मप्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को जिम्मेदार बताया है। ऐसे में अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मप्र सरकार को पत्र लिखकर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

छिंदवाड़ा, इंदौर, बालाघाट और अब रीवा… मौत की इन घटनाओं ने सवाल एक ही खड़ा किया है—क्या मध्य प्रदेश में गरीब के घर पैदा होना ही गुनाह है?

सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सामने अब चुनौती सिर्फ इन मामलों में कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की है।

बालाघाट में 26 आदिवासी बच्चों की मौत पर सियासत गरम, डॉ. विक्रांत भूरिया ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की

भोपाल। बालाघाट में बैगा समाज के 26 आदिवासी बच्चों की मौत के मामले ने मध्य प्रदेश की सियासत गरमा दी है। कांग्रेस ने इस घटना को लेकर सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।

डॉ. भूरिया ने आरोप लगाया कि कुपोषण, मलेरिया और खसरा जैसी बीमारियों के कारण बच्चों की मौत प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत को महज एक घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

निष्पक्ष जांच और मेडिकल ऑडिट की मांग

कांग्रेस नेता ने बालाघाट मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की बात कही।

डॉ. भूरिया ने सभी 26 मौतों का मेडिकल और प्रशासनिक ऑडिट कराने की मांग भी की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चों को समय पर इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मिली थीं या नहीं।

बैगा क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य अभियान की मांग

डॉ. भूरिया ने प्रभावित बैगा इलाकों में विशेष स्वास्थ्य और पोषण अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कुपोषण और संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि 26 बच्चों की मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि 26 परिवारों की अपूरणीय क्षति है।

‘दौरे और संवेदना से काम नहीं चलेगा’

डॉ. भूरिया ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब सिर्फ अधिकारियों के दौरे और संवेदना व्यक्त करने से काम नहीं चलेगा। इस मामले में जिम्मेदारी तय कर निर्णायक कार्रवाई करना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे के साथ-साथ पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

ओरछा में बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का पहला दिन, विकसित एमपी से बुंदेलखंड के विकास तक मंथन

ओरछा। मध्यप्रदेश के ओरछा में बीजेपी की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक रविवार को शुरू हुई। श्रीराम राजा सरकार की पावन नगरी में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत पार्टी के कई बड़े नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और राष्ट्रीय प्रकोष्ठ संयोजक विष्णुदत्त शर्मा भी बैठक में मौजूद रहे।

बैठक के उद्घाटन सत्र की शुरुआत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। पहले दिन संगठन को मजबूत करने, विकसित मध्यप्रदेश के रोडमैप और बुंदेलखंड के विकास समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

विकसित मध्यप्रदेश के विजन पर फोकस

बैठक के बाद बीजेपी प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने प्रेसवार्ता कर पहले दिन हुई चर्चाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार विकास और विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश कार्यसमिति की यह बैठक विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।

बैठक स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें विकसित मध्यप्रदेश के विजन को प्रमुखता से दिखाया गया है। साथ ही ओरछा लोक का मॉडल भी तैयार किया गया है, जो बैठक में आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यकर्ताओं ने सुनी ‘मन की बात’

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को भी एक साथ सुना। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं से संगठन और सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत के पुनरुत्थान के लिए किए जा रहे कार्यों और देश के विकास की दिशा पर चर्चा की। इसके साथ ही बैठक में राजनीतिक प्रस्तावों पर भी मंथन किया गया।

बुंदेलखंड के विकास पर बीजेपी का विशेष फोकस

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बुंदेलखंड के विकास का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बीजेपी ने केन-बेतवा लिंक परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए बड़ा कदम बताया। प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड को नई दिशा और नई ताकत मिलेगी।

बीजेपी ने बैठक में केन-बेतवा परियोजना को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों की भी निंदा की। पार्टी का कहना है कि परियोजना के पूरा होने से बुंदेलखंड के विकास को बड़ा फायदा मिलेगा और क्षेत्र की तस्वीर बदलने में मदद मिलेगी।

सेवा संकल्प के तहत सामाजिक कार्यों पर भी जोर

बीजेपी का बुंदेलखंड को लेकर फोकस केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है। बैठक में सेवा संकल्प के तहत क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक गतिविधियां और जनसेवा से जुड़े कार्य करने पर भी चर्चा हुई। संगठन के स्तर पर इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार किया गया।

दूसरे दिन भी जारी रहेगा मंथन

बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक दो दिन तक चलेगी। पहले दिन संगठन, विकसित मध्यप्रदेश के विजन और बुंदेलखंड के विकास जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक के कई सत्र अभी जारी हैं। दूसरे दिन संगठन को और मजबूत करने के साथ प्रदेश के विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होगी।

 

 

बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में एमपी के 6 चेहरे, टीम नितिन में मध्यप्रदेश का दबदबा

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया। लंबे समय से चल रही संगठनात्मक कवायद के बाद घोषित की गई इस टीम में मध्यप्रदेश के छह नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। एमपी के नेताओं को मिली जगह को प्रदेश के लिहाज से बड़ी राजनीतिक और संगठनात्मक उपलब्धि माना जा रहा है।

नई टीम में मध्यप्रदेश से लाल सिंह आर्य, विष्णु दत्त शर्मा, गजेंद्र सिंह पटेल, बंसीलाल गुर्जर, कविता पाटीदार और आशीष अग्रवाल को जगह मिली है। इनमें अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश दिखाई दे रही है।

किस नेता को मिली कौन सी जिम्मेदारी?

लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन में लंबे अनुभव वाले आर्य की राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विष्णुदत्त शर्मा को सभी मोर्चों का संयोजक बनाया गया है। खजुराहो से लोकसभा सांसद शर्मा इससे पहले मध्यप्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

गजेंद्र सिंह पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। निमाड़ क्षेत्र से आने वाले पटेल लगातार दूसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं और आदिवासी क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है।

बंसीलाल गुर्जर को बीजेपी किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। किसान राजनीति में सक्रिय गुर्जर को मिली यह जिम्मेदारी मध्यप्रदेश के ग्रामीण और किसान वोट बैंक के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

कविता पाटीदार को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। राज्यसभा सांसद पाटीदार को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने से महिला नेतृत्व और मध्यप्रदेश के सामाजिक समीकरणों को भी प्रतिनिधित्व मिला है।

वहीं आशीष ऊषा अग्रवाल को मीडिया विभाग का सह-संयोजक बनाया गया है। संगठन और मीडिया के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभाने में उनकी भूमिका अहम होगी। अभी वे मप्र बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। पार्टी के मुताबिक नई टीम में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रतिनिधित्व मिला है। टीम में 10 महिलाओं और छह अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं को भी शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश की बात करें तो नई टीम में मालवा-निमाड़, ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड जैसे अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है। सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी पार्टी ने विभिन्न वर्गों को राष्ट्रीय संगठन में जगह दी है।

‘टीम नितिन’ में अनुभव और नए चेहरों का मेल

नितिन नबीन की नई टीम में कई पुराने और अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को भी जगह दी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर स्मृति ईरानी को महासचिव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। वहीं राम माधव की भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर वापसी हुई है।ऐसे में मध्यप्रदेश से छह नेताओं को शामिल किया जाना प्रदेश बीजेपी के संगठनात्मक महत्व को भी दर्शाता है। खासतौर पर गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री और लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारियां मिलना प्रदेश के लिए बड़ी बात है।

आने वाले चुनावों के लिहाज से अहम बदलाव

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब पार्टी के सामने आने वाले विधानसभा चुनावों की बड़ी चुनौती है। नई टीम में संगठनात्मक अनुभव, युवा नेतृत्व, महिला प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर दिया गया है।

मध्यप्रदेश के छह नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने से प्रदेश बीजेपी के नेताओं की भूमिका अब राज्य से आगे राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ गई है। ऐसे में इन नियुक्तियों का असर आने वाले समय में पार्टी की संगठनात्मक रणनीति और चुनावी तैयारियों में भी देखने को मिल सकता है।

विश्व आदिवासी दिवस पर BJP पर विक्रांत भूरिया का हमला, बोले- ‘आदिवासी सिर्फ चुनाव में याद आते हैं?’

भोपाल/दिल्ली। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर आदिवासी समाज की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या भाजपा को आदिवासी समाज सिर्फ चुनाव के समय ही याद आता है?

डॉ. भूरिया ने कहा कि 9 अगस्त आदिवासी समाज के लिए महज एक तारीख नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व, संस्कृति, अधिकार और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन है। ऐसे मौके पर देश के नेतृत्व से आदिवासी समाज के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की उम्मीद रहती है।

भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल

भूरिया ने कहा कि उन्होंने यह देखने की कोशिश की कि विश्व आदिवासी दिवस पर देश के बड़े नेताओं ने आदिवासी समाज को किस तरह याद किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी ओर से आदिवासी समाज के लिए अपेक्षित संदेश दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम और गुजरात समेत भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर भी सवाल उठाए। भूरिया का आरोप है कि आदिवासी बहुल राज्यों में भी विश्व आदिवासी दिवस को लेकर वैसी संवेदनशीलता नजर नहीं आई, जिसकी समाज को उम्मीद थी।

‘चुनाव के समय याद आते हैं आदिवासी’

डॉ. भूरिया ने कहा कि चुनाव आते ही भाजपा नेता आदिवासी समाज के बीच पहुंचते हैं। आदिवासी महापुरुषों को याद किया जाता है और उनके सम्मान में कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। लेकिन जब आदिवासी समाज के अधिकारों की बात आती है तो यही नेता चुप नजर आते हैं।

उन्होंने सवाल किया, “क्या भाजपा के लिए आदिवासी समाज को याद करने की तारीख 9 अगस्त नहीं, सिर्फ चुनाव की तारीख है?”

‘भाषण नहीं, अधिकारों पर चाहिए काम’

भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल भाषणों, तस्वीरों और चुनावी वादों से सम्मान नहीं चाहिए। समाज की असली जरूरत जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सरल जरूर है, लेकिन अब वह पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है। वह देख रहा है कि कौन उसके साथ खड़ा है और कौन सिर्फ चुनाव के समय उसके बीच पहुंचता है।

‘चुप्पी भी याद रखी जाएगी’

डॉ. भूरिया ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर जो लोग चुप रहे, उनकी यह चुप्पी भी आदिवासी समाज याद रखेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी कांग्रेस समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को आगे भी मजबूती से उठाती रहेगी।

भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक समझने वालों को यह समझना होगा कि आदिवासी समाज सब देख रहा है, सब समझ रहा है और सब याद रखेगा।

मानगढ़ धाम पर सरकार का यू-टर्न? संसद के जवाब पर डॉ. विक्रांत भूरिया ने उठाए बड़े सवाल

नई दिल्ली।  क्या सरकार मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने के अपने वादे से पीछे हट रही है?

यह सवाल संसद में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिए गए उस लिखित उत्तर के बाद खड़ा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

इस मुद्दे को सबसे मुखरता से उठाते हुए अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने केंद्र सरकार के रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि राष्ट्रीय स्मारक बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, तो वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मानगढ़ धाम से किए गए सार्वजनिक वादे का क्या हुआ?

आदिवासियों के ‘जलियांवाला बाग’ को अब भी इंतजार

मानगढ़ धाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे लंबे समय तक मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिला। 17 नवंबर 1913 को समाज सुधारक गोविंद गुरु के नेतृत्व में हजारों भील आदिवासी यहां एकत्र हुए थे। ब्रिटिश सेना ने सभा पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिसमें विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार बड़ी संख्या में आदिवासी शहीद हुए। आदिवासी समाज इस संख्या को लगभग 1,500 मानता है। इसी वजह से मानगढ़ धाम को “आदिवासियों का जलियांवाला बाग” कहा जाता है।

2022 का वादा, 2026 का जवाब

एक नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानगढ़ धाम पहुंचकर कहा था कि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें मिलकर इस ऐतिहासिक स्थल का विकास करेंगी तथा इसे राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने की दिशा में कार्य करेंगी।

लेकिन अब संसद में सरकार का यह कहना कि राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या सरकार ने अपना रुख बदल लिया है? यदि नहीं, तो प्रक्रिया कहां अटकी हुई है?

डॉ. विक्रांत भूरिया बोले— “यह केवल स्मारक का नहीं, सम्मान का सवाल है”

डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देना किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के इतिहास और आदिवासी योगदान को सम्मान देने का विषय है।

उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और वर्ष 2022 में किए गए सार्वजनिक आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की।

अब सरकार के सामने जवाबदेही का सवाल

मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग वर्षों से उठती रही है। संसद में आए ताज़ा जवाब ने इस मांग को फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मानगढ़ धाम को केवल भाषणों में सम्मान मिलेगा, या देश के आदिवासी इतिहास को वह संवैधानिक और राष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी, जिसका वादा किया गया था?

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस का परचम, घनश्याम सिंह ने 6,016 वोटों से दर्ज की जीत

भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों के अंतर से हराकर सीट पर कब्जा जमा लिया। इस जीत को कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।

मतगणना के दौरान शुरुआती राउंड में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन समय बीतने के साथ कांग्रेस ने बढ़त मजबूत कर ली। हर राउंड के बाद बढ़ता अंतर आखिरकार जीत में बदल गया। परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने मिठाइयां बांटी, ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और एक-दूसरे को जीत की बधाई दी।

दतिया उपचुनाव इस बार दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ था। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी थी। वरिष्ठ नेताओं ने लगातार सभाएं कीं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की हर संभव कोशिश की।

कांग्रेस ने इस जीत को जनता का भरोसा और अपने संगठन की मेहनत का परिणाम बताया है। वहीं भाजपा ने हार को स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी चुनाव परिणाम की समीक्षा करेगी और भविष्य की रणनीति पर काम करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया का यह जनादेश आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। फिलहाल कांग्रेस इस जीत से उत्साहित है, जबकि भाजपा के सामने संगठन और रणनीति को लेकर नए सिरे से मंथन की चुनौती है।

सिवान गोलीकांड: घायल छात्रों से मिले डॉ. विक्रांत भूरिया और कांग्रेस फैक्ट फाइंडिंग टीम

सिवान गोलीकांड: न्याय की तलाश में पीड़ित छात्रों के बीच पहुँची कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम


बिहार के सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में छात्रों के घायल होने की घटना ने कानून-व्यवस्था, पुलिस बल के प्रयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि इस कार्रवाई में AK-47 और पिस्टल जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए।

घटना की सच्चाई जानने और पीड़ित परिवारों की बात सुनने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की फैक्ट फाइंडिंग टीम सिवान पहुँची। टीम में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, अल्पसंख्यक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ शामिल थे।

घायल छात्रों से मुलाकात

प्रतिनिधिमंडल ने घायल छात्रों और उनके परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस घटना में 21 वर्षीय आकाश, 15 वर्षीय आरिफ और अग्निवीर की तैयारी कर रहे बुलेट कुमार गौड़ घायल हुए।

घायल छात्रों से मुलाकात करता कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल

टीम ने उनके इलाज, परिवारों की पीड़ा और घटना के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में जानकारी जुटाई। कांग्रेस नेताओं ने आश्वासन दिया कि पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी।

बुलेट कुमार गौड़ की आपबीती

बुलेट कुमार गौड़, जो अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे थे, अपने दोस्तों के साथ छात्र आंदोलन में शामिल होने सिवान पहुँचे थे। परिजनों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके पैर में गोली लगी। परिवार का आरोप है कि घायल होने के बाद भी उनके घायल पैर पर लाठियां बरसाई गईं।

बुलेट कुमार गोंड से चर्चा करते हुए।

बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ तीन दिनों तक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही का विषय बताया।

प्रशासन से मुलाकात के बाद कांग्रेस ने उठाए सवाल

घायलों और उनके परिवारों से मिलने के बाद फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जिला प्रशासन, एसपी और कलेक्टर से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने घटना के दौरान पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग और गोली चलाने की परिस्थितियों पर विस्तृत जानकारी मांगी।
मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप था कि अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं थे और उन्हें घटना के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं दी। कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि न्यायिक या आधिकारिक जांच के निष्कर्षों से होना शेष है।

लोकतंत्र में विरोध का जवाब गोली नहीं

डॉ. विक्रांत भूरिया, इमरान प्रतापगढ़ी और विनोद जाखड़ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और हिंसा से नहीं दिया जा सकता। उनका कहना था कि यदि कहीं कानून-व्यवस्था की चुनौती थी तो उसका समाधान संवैधानिक और मानवीय तरीके से किया जाना चाहिए था।
सिवान की यह घटना अब केवल तीन छात्रों के घायल होने तक सीमित नहीं है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों, पुलिस की जवाबदेही और प्रशासनिक संवेदनशीलता की भी परीक्षा बन गई है। अब पूरे देश की निगाह इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या पीड़ित छात्रों को समयबद्ध न्याय मिल पाता है।

Tribal Protest: नानेघाट इलाके में अडानी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का आदिवासियों ने कड़ा विरोध किया; पेसा ग्राम सभा के ज़रिए टकराव की चेतावनी दी

जुन्नार: जुन्नार के नानेघाट में आदिवासियों का गुस्सा अब उबाल पर है।

अंजनावाले और घाटघर में प्रस्तावित अडानी के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासी समाज ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि यह परियोजना विकास नहीं, बल्कि जल, जंगल, ज़मीन पर कब्ज़े की साज़िश है। यह प्रोजेक्ट आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी ज़मीन से बेदखल कर उन्हें बेघर करने की कोशिश है। PESA ग्राम सभाओं ने साफ़ चेतावनी दी है—आदिवासी अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा, अडानी वापस जाओ!

नानेघाट के आदिवासी इलाकों पर कॉर्पोरेट कब्ज़े की आशंका गहराती जा रही है। अडानी रिन्यूएबल एनर्जी फिफ्टी-टू लिमिटेड ने अंजनावाले और भोरंडे में 1,500 मेगावाट पंप स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया है। इस परियोजना को लेकर 21 अगस्त को अंजनावाले के शासकीय माध्यमिक आश्रम विद्यालय में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जहां प्रभावित ग्रामीण, संगठन और पर्यावरण कार्यकर्ता अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कर सकेंगे।

लेकिन आदिवासी समाज का साफ़ कहना है कि ग्राम सभाओं की सहमति के बिना यह परियोजना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। सरकार द्वारा इको-सेंसिटिव घोषित इस क्षेत्र में खुदाई पर पहले से रोक है, फिर भी आदिवासियों की जल, जंगल और ज़मीन पर खतरा मंडरा रहा है। अंजनावाले, घाटघर और आसपास के कई गांवों की पुश्तैनी ज़मीन प्रभावित होने की आशंका से लोगों में भारी आक्रोश है।

पूर्व विधायक अतुल बेनके ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी अधिकारों की अनदेखी कर यह परियोजना थोपी गई, तो नानेघाट से एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा होगा और हर लोकतांत्रिक तरीके से इसका पुरज़ोर विरोध किया जाएगा।

बेनके ने यह भी अपील की है कि PESA एक्ट के अनुसार ग्राम सभा के प्रस्ताव का कानूनी महत्व है और आदिवासी इलाकों की सभी ग्राम पंचायतों को 21 अगस्त से पहले एक खास ग्राम सभा करनी चाहिए और प्रस्तावित प्रोजेक्ट के पर्यावरण पर असर, ज़मीन को होने वाले नुकसान और स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले असर के बारे में प्रस्ताव पास करने चाहिए।

इस बीच, सुकलवेधे के सरपंच दत्ता गवारी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के बनने से आदिवासी इलाकों के लोगों में नाराज़गी है, क्योंकि इससे भविष्य में आदिवासी इलाकों के किसानों के ज़मीन से हाथ धोने का खतरा हो सकता है, पर्यावरण, बायोडायवर्सिटी को भारी नुकसान हो सकता है और मानिकडोह डैम के पानी के लेवल पर असर पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रोजेक्ट के लिए चुनी गई जगह पेसा और अनुसूचित इलाकों में आती है। इसलिए, राज्य सरकार, केंद्र सरकार या प्राइवेट बिजनेसमैन इस जगह को नहीं ले पाएंगे। ग्राम सभा ही सरकार है। इसलिए, गवारी ने इस गांव के लोगों से भी अपील की है कि वे ग्राम सभा करें और इस प्रोजेक्ट के विरोध में प्रस्ताव पास करें।

असल में यह प्रोजेक्ट क्या है

फरवरी 2022 में, अडानी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट का प्रपोज़ल राज्य सरकार के एनर्जी डिपार्टमेंट को दिया था। इस प्रपोज़ल को लेकर एनर्जी डिपार्टमेंट और कंपनी के बीच 28 जून, 2022 को एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग साइन हुआ था। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 7048 करोड़ रुपये है। इस प्रोजेक्ट में, ऊपरी जलाशय अंजनावाले (अदोशी) में प्रस्तावित है, जबकि निचला जलाशय ठाणे जिले के भोरंडे में प्रस्तावित है। ऊपरी जलाशय में पानी टर्बाइन के ज़रिए छोड़ा जाएगा ताकि बिजली बनाई जा सके, जिसके लिए एक अंडरग्राउंड पावर हाउस, पंप-टरबाइन सिस्टम और दोनों जलाशयों को जोड़ने वाली सुरंगें बनाई जाएंगी। प्रोजेक्ट के लिए लगभग 166 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत है, जिसमें 105 हेक्टेयर नॉन-फ़ॉरेस्ट ज़मीन और 60 हेक्टेयर फ़ॉरेस्ट ज़मीन शामिल है। अदोशी में लगभग 30 मीटर और भोरंडे में 64 मीटर का डैम बनाने का प्रस्ताव है।

इन ग्राम पंचायतों को पब्लिक हियरिंग के लिए नोटिस दिए गए थे: तालेरन, घाटघर, अंजनावाले, देओले, खटकले, नीमगिरी, अंबोली, जलवंडी, केवडी, चावंड, पुर, भिवड़े बुद्रुक, उछिल, भिवड़े खुर्द, हतविज, इंग्लुएन, अंबे, सोनावाले।

मूंग खरीदी पर कक्का जी का सरकार को अल्टीमेटम, बोले- आज फैसला करें, वरना कल से सत्याग्रह

किसान नेता शिवकुमार शर्मा कक्का जी ने भोपाल में प्रेसवार्ता

भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी और ई-टोकन प्रणाली को लेकर किसानों का आंदोलन अब और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। किसान नेता शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो गुरुवार से प्रदेशव्यापी किसान सत्याग्रह शुरू किया जाएगा।

भोपाल स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कक्का जी ने कहा कि सरकार किसानों के साथ भेदभाव कर रही है और यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसान सरकार के साथ होने वाली वार्ता का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यदि बातचीत में किसानों की मांगों पर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन का नया चरण शुरू होगा।

कक्का जी ने कहा, “आज अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो कल का दिन सरकार का नहीं, किसानों का होगा। हमने अपनी पूरी रणनीति तैयार कर ली है।”

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सत्याग्रह की शुरुआत धार जिले के खलघाट से होगी। इसके बाद आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा। कक्का जी ने दावा किया कि इस संबंध में मध्य प्रदेश के सभी जिलों के किसान संगठनों से चर्चा हो चुकी है और बड़ी संख्या में किसान इस आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं।

किसान नेता ने कहा कि यदि सरकार किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लेती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन यदि जवाब नकारात्मक रहा तो गुरुवार से प्रदेशभर में सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

मूंग खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था को लेकर किसानों और सरकार के बीच जारी गतिरोध के बीच कक्का जी के इस ऐलान ने प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।

मूंग खरीदी पर किसानों का हल्ला बोल: भोपाल पहुंचे हजारों किसान, होशंगाबाद रोड पर रोके गए

आर-पार के मूड में किसान पहुंचे राजधानी भोपाल, पुलिस ने रोका

भोपाल। मूंग की 100 प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई जिलों से किसान मंगलवार को राजधानी भोपाल पहुंचे। उनका इरादा मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का था, लेकिन पुलिस ने उन्हें होशंगाबाद रोड पर ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

पुलिस के रोकने के बाद किसान वहीं सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। लंबे आंदोलन की तैयारी के साथ आए किसानों ने मौके पर ही चूल्हे जलाए और दाल-बाटी बनाना शुरू कर दिया। आंदोलन स्थल पर भोजन बनाते किसानों की तस्वीरें पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रहीं। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, वे वापस नहीं लौटेंगे।

 

पूरी तैयारी में आए किसान, सड़क किनारे बनाई दाल-बाटी

प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि सरकार ने मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदने का भरोसा दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं हो रहा। उनका कहना है कि खरीदी सीमित होने से बड़ी मात्रा में मूंग किसानों के पास पड़ी है और उन्हें मजबूरी में फसल कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आंदोलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

किसानों ने साफ कहा है कि यह आंदोलन केवल मूंग खरीदी का नहीं, बल्कि सरकार से किए गए वादे को पूरा कराने की लड़ाई है। उनका कहना है कि जब तक 100 प्रतिशत खरीदी का स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

एमपी में गुरु पूर्णिमा से शुरू होगी ‘भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना’, 102 छात्रों को मिलेगा ₹1-1 लाख का सम्मान

भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई छात्रवृत्ति योजना शुरू करने जा रही है। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ‘भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना’ का शुभारंभ किया जाएगा। योजना के तहत राज्य के 102 मेधावी विद्यार्थियों को एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति देकर सम्मानित किया जाएगा।

भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने इसकी जानकारी मीडिया से साझा की है।  बताया कि योजना का संचालन संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के माध्यम से किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत 51 विद्यार्थियों का चयन उच्च शिक्षा विभाग और 51 विद्यार्थियों का चयन स्कूल शिक्षा विभाग से किया जाएगा। सभी चयनित विद्यार्थियों को ₹1-1 लाख की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।

श्रीराम तिवारी के अनुसार, योजना की औपचारिक शुरुआत गुरु पूर्णिमा के दिन होगी, जबकि छात्रवृत्ति की राशि और सम्मान मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों प्रदान किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश के होनहार विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप पहचान दिलाने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी। योजना के माध्यम से मेधावी छात्रों को आर्थिक सहयोग मिलने के साथ उन्हें समाज के सामने सम्मानित भी किया जाएगा, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलेगी।

अलीराजपुर दरिंदगी:’मप्र में आदिवासियों की सुरक्षा भगवान भरोसे’, पीड़िता से मिलकर सरकार पर बरसे डॉ. विक्रांत भूरिया

इंदौर के एमटीएच अस्पताल पहुंचे डॉ. विक्रांत भूरिया

इंदौर। मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में एक आदिवासी विधवा महिला के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म और बर्बरता की घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर अब राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। झाबुआ विधायक और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने इंदौर के एमटीएच अस्पताल पहुंचकर पीड़िता का हाल जाना। भूरिया ने पीड़िता के परिजनों और डॉक्टरों से मुलाकात के बाद प्रदेश की मोहन यादव सरकार को आड़े हाथों लिया और राज्य को अपराधियों का ‘सुरक्षित ठिकाना’ करार दिया।

पीड़िता की हालत गंभीर, डॉक्टरों ने की इमरजेंसी सर्जरी
अस्पताल के डॉक्टरों से जानकारी लेने के बाद विक्रांत भूरिया ने बताया कि पीड़िता को अत्यंत नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। उसके शरीर और गुप्त अंगों पर गंभीर आंतरिक चोटें थीं, जिसके कारण डॉक्टरों को तत्काल उसकी मेजर सर्जरी करनी पड़ी। फिलहाल महिला डॉक्टरों की देखरेख में है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।

जब गृह मंत्री ही नाकाम हों, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होना लाजिमी है
अस्पताल परिसर में मीडिया से बात करते हुए विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, यह सिर्फ एक महिला पर अत्याचार नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता को कुचलने की कोशिश है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास ही गृह विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन वे प्रदेश की जनता को सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल रहे हैं। एनसीआरबी  के आंकड़े साफ बताते हैं कि मध्य प्रदेश दलितों और आदिवासियों के लिए देश का सबसे असुरक्षित राज्य बनता जा रहा है। भूरिया ने खंडवा की हालिया आपराधिक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन में स्टाफ और संसाधनों की भारी कमी है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

कांग्रेस ने उठाई SIT जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग
विपक्षी दल ने सरकार के सामने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रमुख शर्तें रखी हैं।

उच्च स्तरीय जांच: इस पूरे अमानवीय कृत्य की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया जाए।
त्वरित न्याय: आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाई जाए, ताकि उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
मदद और पुनर्वास: पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से पर्याप्त आर्थिक सहायता, पुख्ता सुरक्षा और पुनर्वास की सुविधा दी जाए।
पुलिस भर्ती: आदिवासी और संवेदनशील अंचलों में खाली पड़े पुलिस के पदों पर तुरंत नियुक्तियां की जाएं।

विधानसभा घेराव की तैयारी, पटवारी ने बनाई जांच कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 5 सदस्यीय एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में पूर्व मंत्री बाला बच्चन, डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ, विधायक झूमा सोलंकी, विधायक सेना पटेल और खुद विक्रांत भूरिया शामिल हैं। यह कमेटी घटनास्थल का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। विक्रांत भूरिया ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में इस वीभत्स घटना और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों के मुद्दे पर सरकार को सदन के भीतर घेरा जाएगा। इस दौरान अस्पताल में कांग्रेस संगठन प्रभारी अमन बजाज, प्रवक्ता अमित चौरसिया, ब्लॉक अध्यक्ष निलेश सेलू सेन सहित कई स्थानीय नेता मौजूद रहे।

 

आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करे सरकार: डॉ. विक्रांत भूरिया

भोपाल। मध्य प्रदेश में समूह-2, उपसमूह-1 अंतर्गत कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा-2026 को लेकर गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े हो गए हैं। भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण के पालन को लेकर व्यापक आशंकाएं सामने आई हैं। ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संपूर्ण आरक्षण रोस्टर एवं संबंधित अभिलेख तत्काल सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मांग की है कि भर्ती का विभागवार एवं श्रेणीवार आरक्षण रोस्टर, रोस्टर रजिस्टर, बैकलॉग रिक्तियों का विवरण तथा यदि किसी न्यायालयीन आदेश अथवा वैधानिक कारण से पदों में परिवर्तन किया गया है, तो उसका स्पष्ट आधार सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और समीक्षा पूर्ण होने तक भर्ती को अंतिम रूप न दिया जाए।

डॉ. विक्रांत भूरिया द्वारा लिखा गया आधिकारिक पत्र

यह मुद्दा किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना से जुड़ा हुआ है। यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है, तो सरकार को पारदर्शिता दिखाते हुए सभी तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। इससे आदिवासी युवाओं के मन में उत्पन्न भ्रम और असंतोष समाप्त होगा तथा भर्ती प्रक्रिया पर जनविश्वास भी मजबूत होगा।

आदिवासी समाज किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहा है। उसकी मांग केवल इतनी है कि संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था का पूर्ण एवं निष्पक्ष पालन हो तथा प्रत्येक पात्र अभ्यर्थी को उसका संवैधानिक अधिकार मिले। सरकार से अपेक्षा है कि वह इस गंभीर विषय पर शीघ्र निर्णय लेते हुए आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि भर्ती प्रक्रिया संविधान की भावना, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों तथा पारदर्शी प्रशासन के अनुरूप संचालित हो।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़: एमपी बना पेपर लीक का गढ़!

कांग्रेस की प्रेसवार्ता की फोटो

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह और विधायक जयवर्धन सिंह ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और ‘नीट’ घोटाले को लेकर केंद्र सरकार को जमकर घेरा। नेताओं ने साफ कहा कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों बच्चों और उनके माता-पिता के भविष्य की है।

सबसे बड़ा दर्द: नीट घोटाला और मासूमों की आत्महत्या
कांग्रेस ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की लापरवाही को बच्चों की मौत का जिम्मेदार ठहराया। नीट पेपर लीक से निराश होकर देश के 17 होनहार छात्रों को आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाना पड़ा। इनमें मध्य प्रदेश की आकांक्षा चतुर्वेदी और अवंतिका मौर्य समेत राजस्थान, यूपी और तमिलनाडु के बच्चे शामिल हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के रहते हुए जमकर धांधली हुई। पिछले 10 सालों में देश में 85 बार अलग-अलग परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। नीट का पेपर ही 4 बार लीक हुआ और एक-एक पेपर 30-30 लाख रुपये में बेचा गया, जिससे 2 करोड़ से ज्यादा छात्र परेशान हुए।

“घोटालों की नर्सरी बन चुका है मध्य प्रदेश-जीतू पटवारी”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि राज्य में व्यापम से लेकर पटवारी भर्ती तक, हर परीक्षा में घोटाला हुआ है। साल 2013 का व्यापम कांड हो, पटवारी भर्ती हो, कृषि अधिकारी या नर्सिंग घोटाला—एमपी में हर जगह धांधली की जड़ें हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने व्यापम के बड़े आरोपियों (जैसे अजय गोयनका और सुधीर शर्मा) को बचाने का काम किया और उनके खिलाफ कोर्ट भी नहीं गई। व्यापम के पूर्व एग्जाम कंट्रोलर और मुख्य आरोपी सुधीर भदौरिया को सजा मिलने के बजाय आरजीपीवी का प्रमुख बना दिया गया। वहीं विवादित राजेश लाल मेहरा को MPPSC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

ऐसे कम की जा रही है बेरोजगारी!
कांग्रेस ने सरकार के रोजगार के दावों को पूरी तरह झूठा बताया कि, प्रदेश में पढ़े-लिखे बेरोजगारों की संख्या 1 करोड़ से ऊपर निकल चुकी है। सरकार युवाओं को असलियत में नौकरी देने के बजाय, केवल सरकारी पोर्टल और कागजों से उनके नाम काटकर आंकड़े कम दिखा रही है।

कांग्रेस की बड़ी मांग: सबको मिले KG to PG मुफ्त शिक्षा
बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए केजी से लेकर पीजी तक की पूरी शिक्षा को हर नागरिक के लिए बिल्कुल मुफ्त किया जाए।

मैदान में उतरेगी कांग्रेस: ‘GENZ CYCLOTHON’ की शुरुआत
युवाओं को जागरूक करने और शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह ने एक बड़े अभियान का ऐलान किया। नई पीढ़ी को उनके हक के प्रति जगाने के लिए GENZ CYCLOTHON निकाली जाएगी।
यह यात्रा 14 और 15 जुलाई को होगी। इसकी शुरुआत इंदौर से होगी, जो देवास, आष्टा और सीहोर से गुजरते हुए भोपाल में खत्म होगी।

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