भोपाल। मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में है। इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने शिक्षा, रोजगार और सरकारी नियुक्तियों से जुड़े सवाल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामने उठाए। इसके बाद 22 सितंबर 2026 को राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण से जुड़े लंबित मामलों और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का समाधान करने की मांग की।
राहुल गांधी ने मोहन यादव को लिखा पत्र
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में 87:13 व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पदों के लंबित रहने से चयनित अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। पत्र में कुछ अभ्यर्थियों के वर्ष 2022 से प्रतीक्षा करने का भी उल्लेख किया गया है।
2019 में कमलनाथ ने मुख्यमंत्री रहते हुए बढ़ाया था आरक्षण
27 प्रतिशत OBC आरक्षण की मौजूदा बहस की शुरुआत वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के फैसले से जुड़ी है। उस समय मध्यप्रदेश में OBC वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। कमलनाथ सरकार ने इसे बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की पहल की थी।
मार्च 2019 में सरकार ने इस संबंध में अध्यादेश जारी किया। इसके बाद जुलाई 2019 में मध्यप्रदेश विधानसभा ने OBC आरक्षण को 27 प्रतिशत करने वाला विधेयक पारित किया। इस फैसले के जरिए OBC आरक्षण में 13 प्रतिशत की वृद्धि की गई।
कोर्ट में पहुंचा मामला, भर्ती प्रक्रिया पर पड़ा असर
27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू किए जाने के बाद इसकी संवैधानिक वैधता को न्यायालय में चुनौती दी गई। इसके चलते आरक्षण के क्रियान्वयन और अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर कानूनी विवाद सामने आया।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी 2019 के संशोधन अध्यादेश और उसके बाद बने कानून के जरिए OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने का उल्लेख है। बाद में न्यायालयी कार्यवाही के दौरान भर्ती प्रक्रियाओं में 27 प्रतिशत और 14 प्रतिशत आरक्षण के बीच व्यवस्था को लेकर अंतरिम आदेशों का प्रभाव भी देखने को मिला।


























