भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने ‘क्लीन स्वीप’ करते हुए तीनों सीटों पर कब्जा जमा लिया है। बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया है और विधानसभा सचिवालय ने उन्हें जीत का सर्टिफिकेट भी सौंप दिया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को एक ‘संवैधानिक साजिश’ बताया है और इसके खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां इस पर कल एक बेहद अहम सुनवाई होनी है।
राज्यसभा पहुंचने वाले बीजेपी के तीन चेहरे कौन हैं?
बीजेपी ने इस बार मध्य प्रदेश से जिन तीन चेहरों को मैदान में उतारा था, वे अब निर्विरोध चुनकर संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा जा रहे हैं:
तरुण चुघ
रजनीश अग्रवाल
महेश केवट
आखिर पूरा खेल कैसे पलटा?
अगर विधानसभा के आंकड़ों और संख्या बल को देखें, तो बीजेपी के खाते में दो सीटें बड़े आराम से आ रही थीं। वहीं, तीसरी सीट पर कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी, जिसके लिए कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन पासा तब पलट गया जब बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट और प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर एक गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उनका आरोप था कि मीनाक्षी ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना में चल रहे एक लंबित मामले की जानकारी छुपाई है। इसी शिकायत को सही मानते हुए 9 जून को रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया। इसके बाद बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार की जीत का रास्ता बिल्कुल साफ हो गया।
चुनाव आयोग से मायूसी के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने दिल्ली से लेकर भोपाल तक चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर जमकर हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया। जब चुनाव आयोग की तरफ से कोई राहत नहीं मिली, तो मीनाक्षी नटराजन ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कांग्रेस की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि, रिटर्निंग ऑफिसर का यह फैसला पूरी तरह से गैर-कानूनी है। जिस मामले को बहाना बनाकर नामांकन रद्द किया गया है, उस पर तो अभी तक कोर्ट ने संज्ञान तक नहीं लिया है। हमने सुप्रीम कोर्ट से चुनावी नतीजों की घोषणा पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
गुरुवार को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की बेंच के सामने इस मामले को अर्जेंट सुनवाई के लिए मेंशन किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल चुनावी प्रक्रिया या नतीजों पर कोई भी अंतरिम रोक लगाने से साफ मना कर दिया। कोर्ट का कहना था कि तय नियमों के मुताबिक, एक बार जब चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो अदालतें आमतौर पर बीच में दखल नहीं देतीं। फिर भी, सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस की इस याचिका पर विस्तार से सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है और इस मामले को शुक्रवार, 12 जून के लिए लिस्ट किया गया है।
वार-पलटवार – इस पूरे विवाद पर दोनों पार्टियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है:
कांग्रेस का आरोप – मीनाक्षी नटराजन ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, बीजेपी के पास तीसरी सीट जीतने के लिए जरूरी वोट नहीं थे, इसलिए उन्होंने साजिश के तहत हमारा नामांकन रद्द करवाया। यह सीधे-सीधे लोकतंत्र की हत्या है और हम इसके खिलाफ आखिरी दम तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
बीजेपी का जवाब – दूसरी तरफ, बीजेपी का साफ कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने सिर्फ चुनाव कानून और सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस का पालन किया है। हलफनामे में कोई भी जानकारी छुपाना नामांकन खारिज करने का बिल्कुल सही और पुख्ता आधार है।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें कल यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोर्ट इस निर्विरोध निर्वाचन पर कोई रोक लगाता है या फिर बीजेपी की यह तिकड़ी जीत बरकरार रखती है।
























































