सिवान गोलीकांड: न्याय की तलाश में पीड़ित छात्रों के बीच पहुँची कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम
बिहार के सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में छात्रों के घायल होने की घटना ने कानून-व्यवस्था, पुलिस बल के प्रयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि इस कार्रवाई में AK-47 और पिस्टल जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए।
घटना की सच्चाई जानने और पीड़ित परिवारों की बात सुनने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की फैक्ट फाइंडिंग टीम सिवान पहुँची। टीम में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, अल्पसंख्यक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ शामिल थे।
घायल छात्रों से मुलाकात
प्रतिनिधिमंडल ने घायल छात्रों और उनके परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस घटना में 21 वर्षीय आकाश, 15 वर्षीय आरिफ और अग्निवीर की तैयारी कर रहे बुलेट कुमार गौड़ घायल हुए।

टीम ने उनके इलाज, परिवारों की पीड़ा और घटना के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में जानकारी जुटाई। कांग्रेस नेताओं ने आश्वासन दिया कि पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी।
बुलेट कुमार गौड़ की आपबीती
बुलेट कुमार गौड़, जो अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे थे, अपने दोस्तों के साथ छात्र आंदोलन में शामिल होने सिवान पहुँचे थे। परिजनों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके पैर में गोली लगी। परिवार का आरोप है कि घायल होने के बाद भी उनके घायल पैर पर लाठियां बरसाई गईं।

बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ तीन दिनों तक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही का विषय बताया।
प्रशासन से मुलाकात के बाद कांग्रेस ने उठाए सवाल
घायलों और उनके परिवारों से मिलने के बाद फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जिला प्रशासन, एसपी और कलेक्टर से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने घटना के दौरान पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग और गोली चलाने की परिस्थितियों पर विस्तृत जानकारी मांगी।
मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप था कि अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं थे और उन्हें घटना के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं दी। कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि न्यायिक या आधिकारिक जांच के निष्कर्षों से होना शेष है।
लोकतंत्र में विरोध का जवाब गोली नहीं
डॉ. विक्रांत भूरिया, इमरान प्रतापगढ़ी और विनोद जाखड़ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और हिंसा से नहीं दिया जा सकता। उनका कहना था कि यदि कहीं कानून-व्यवस्था की चुनौती थी तो उसका समाधान संवैधानिक और मानवीय तरीके से किया जाना चाहिए था।
सिवान की यह घटना अब केवल तीन छात्रों के घायल होने तक सीमित नहीं है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों, पुलिस की जवाबदेही और प्रशासनिक संवेदनशीलता की भी परीक्षा बन गई है। अब पूरे देश की निगाह इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या पीड़ित छात्रों को समयबद्ध न्याय मिल पाता है।































































