विश्व आदिवासी दिवस पर BJP पर विक्रांत भूरिया का हमला, बोले- ‘आदिवासी सिर्फ चुनाव में याद आते हैं?’

भाजपा नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल, बोले- आदिवासी समाज को भाषण नहीं, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों पर चाहिए ठोस काम

भोपाल/दिल्ली। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर आदिवासी समाज की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या भाजपा को आदिवासी समाज सिर्फ चुनाव के समय ही याद आता है?

डॉ. भूरिया ने कहा कि 9 अगस्त आदिवासी समाज के लिए महज एक तारीख नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व, संस्कृति, अधिकार और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन है। ऐसे मौके पर देश के नेतृत्व से आदिवासी समाज के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की उम्मीद रहती है।

भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल

भूरिया ने कहा कि उन्होंने यह देखने की कोशिश की कि विश्व आदिवासी दिवस पर देश के बड़े नेताओं ने आदिवासी समाज को किस तरह याद किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी ओर से आदिवासी समाज के लिए अपेक्षित संदेश दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम और गुजरात समेत भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर भी सवाल उठाए। भूरिया का आरोप है कि आदिवासी बहुल राज्यों में भी विश्व आदिवासी दिवस को लेकर वैसी संवेदनशीलता नजर नहीं आई, जिसकी समाज को उम्मीद थी।

‘चुनाव के समय याद आते हैं आदिवासी’

डॉ. भूरिया ने कहा कि चुनाव आते ही भाजपा नेता आदिवासी समाज के बीच पहुंचते हैं। आदिवासी महापुरुषों को याद किया जाता है और उनके सम्मान में कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। लेकिन जब आदिवासी समाज के अधिकारों की बात आती है तो यही नेता चुप नजर आते हैं।

उन्होंने सवाल किया, “क्या भाजपा के लिए आदिवासी समाज को याद करने की तारीख 9 अगस्त नहीं, सिर्फ चुनाव की तारीख है?”

‘भाषण नहीं, अधिकारों पर चाहिए काम’

भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल भाषणों, तस्वीरों और चुनावी वादों से सम्मान नहीं चाहिए। समाज की असली जरूरत जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सरल जरूर है, लेकिन अब वह पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है। वह देख रहा है कि कौन उसके साथ खड़ा है और कौन सिर्फ चुनाव के समय उसके बीच पहुंचता है।

‘चुप्पी भी याद रखी जाएगी’

डॉ. भूरिया ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर जो लोग चुप रहे, उनकी यह चुप्पी भी आदिवासी समाज याद रखेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी कांग्रेस समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को आगे भी मजबूती से उठाती रहेगी।

भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक समझने वालों को यह समझना होगा कि आदिवासी समाज सब देख रहा है, सब समझ रहा है और सब याद रखेगा।

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