नई दिल्ली।  क्या सरकार मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने के अपने वादे से पीछे हट रही है?

यह सवाल संसद में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिए गए उस लिखित उत्तर के बाद खड़ा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

इस मुद्दे को सबसे मुखरता से उठाते हुए अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने केंद्र सरकार के रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि राष्ट्रीय स्मारक बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, तो वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मानगढ़ धाम से किए गए सार्वजनिक वादे का क्या हुआ?

आदिवासियों के ‘जलियांवाला बाग’ को अब भी इंतजार

मानगढ़ धाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे लंबे समय तक मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिला। 17 नवंबर 1913 को समाज सुधारक गोविंद गुरु के नेतृत्व में हजारों भील आदिवासी यहां एकत्र हुए थे। ब्रिटिश सेना ने सभा पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिसमें विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार बड़ी संख्या में आदिवासी शहीद हुए। आदिवासी समाज इस संख्या को लगभग 1,500 मानता है। इसी वजह से मानगढ़ धाम को “आदिवासियों का जलियांवाला बाग” कहा जाता है।

2022 का वादा, 2026 का जवाब

एक नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानगढ़ धाम पहुंचकर कहा था कि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें मिलकर इस ऐतिहासिक स्थल का विकास करेंगी तथा इसे राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने की दिशा में कार्य करेंगी।

लेकिन अब संसद में सरकार का यह कहना कि राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या सरकार ने अपना रुख बदल लिया है? यदि नहीं, तो प्रक्रिया कहां अटकी हुई है?

डॉ. विक्रांत भूरिया बोले— “यह केवल स्मारक का नहीं, सम्मान का सवाल है”

डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देना किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के इतिहास और आदिवासी योगदान को सम्मान देने का विषय है।

उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और वर्ष 2022 में किए गए सार्वजनिक आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की।

अब सरकार के सामने जवाबदेही का सवाल

मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग वर्षों से उठती रही है। संसद में आए ताज़ा जवाब ने इस मांग को फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मानगढ़ धाम को केवल भाषणों में सम्मान मिलेगा, या देश के आदिवासी इतिहास को वह संवैधानिक और राष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी, जिसका वादा किया गया था?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here