आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करे सरकार: डॉ. विक्रांत भूरिया

आदिवासी युवाओं के संवैधानिक अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं

भोपाल। मध्य प्रदेश में समूह-2, उपसमूह-1 अंतर्गत कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा-2026 को लेकर गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े हो गए हैं। भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण के पालन को लेकर व्यापक आशंकाएं सामने आई हैं। ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संपूर्ण आरक्षण रोस्टर एवं संबंधित अभिलेख तत्काल सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मांग की है कि भर्ती का विभागवार एवं श्रेणीवार आरक्षण रोस्टर, रोस्टर रजिस्टर, बैकलॉग रिक्तियों का विवरण तथा यदि किसी न्यायालयीन आदेश अथवा वैधानिक कारण से पदों में परिवर्तन किया गया है, तो उसका स्पष्ट आधार सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और समीक्षा पूर्ण होने तक भर्ती को अंतिम रूप न दिया जाए।

डॉ. विक्रांत भूरिया द्वारा लिखा गया आधिकारिक पत्र

यह मुद्दा किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना से जुड़ा हुआ है। यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है, तो सरकार को पारदर्शिता दिखाते हुए सभी तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। इससे आदिवासी युवाओं के मन में उत्पन्न भ्रम और असंतोष समाप्त होगा तथा भर्ती प्रक्रिया पर जनविश्वास भी मजबूत होगा।

आदिवासी समाज किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहा है। उसकी मांग केवल इतनी है कि संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था का पूर्ण एवं निष्पक्ष पालन हो तथा प्रत्येक पात्र अभ्यर्थी को उसका संवैधानिक अधिकार मिले। सरकार से अपेक्षा है कि वह इस गंभीर विषय पर शीघ्र निर्णय लेते हुए आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि भर्ती प्रक्रिया संविधान की भावना, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों तथा पारदर्शी प्रशासन के अनुरूप संचालित हो।

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