भोपाल। बीते दिन मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस की निर्वाचित इकाई से प्रदेश स्तर के 35 पदाधिकारियों और 3 जिलाध्यक्षों को होल्ड पर दाल दिया गया। जैसे ही कार्यवाही की सूचना प्रदेश मे पहुँची तो कार्यकर्ताओं मे खलबली मच गयी। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले इन 38 पदाधिकारियों को होल्ड पर डालने का कारण जारी सूचना मे बताया गया है कि “WITH IYC” ऐप मे इन सभी का काम कमजोर दिखाई दिया है। यह बात स्पष्ट है कि युवा कांग्रेस मे चुनाव से लेकर कार्य मूल्यांकन के लिए इस एप्लिकेशन की निर्भरता बेहद बड़ी है। हालहिं दिल्ली मे AI समिट मे प्रदर्शन के बाद लगातार कानूनी कार्यवाही और दबाव संगठन ने झेला था। जिसमे युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब भी जेल मे रहे। सारे घटनाक्रम के दौरान इन सभी 38 लोगों की दिल्ली के क्रियाकलपों से बेरुखी और संगठन को मजबूत करने मे नीरसता इस सारी कार्यवाही की वजह नज़र आती है।

 

कुल मिलकर वर्तमान स्तिथि मे संगठन के ऊपर दिल्ली का दबाव ज्यादा दिखाई पड़ रहा है और प्रदेश इकाई इस वक़्त लाचार नज़र आ रही है।

फ़ाइल फोटो। अभिषेक परमार, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, मप्र युवा कांग्रेस।

प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिषेक परमार से चर्चा मे उन्होने कहा कि “इस बार के संगठनात्मक चुनाव मे जो टीम निकलकर आई है उसमे अधिकांश युवा साथी हैं जो 25 से 30 की उम्र के बीच हैं। इसमे कोई दो राय नहीं है कि प्रत्येक साथी ऊर्जा से सराबोर है और उनके हौंसले बेहद मजबूत हैं। लेकिन युवा जोश होने के बावजूद अभी साथियों को अनुभव की आवश्यकता है। जिसके लिए संगठन को चाहिए कि जिन साथियों के पास पिछले समय मे संगठन मे भूमिका निभाने का अनुभव रहा हो उसका फायदा लें और संगठन को मजबूती देने का काम किया जाए।”

फ़ाइल फोटो। प्रशांत पाराशर, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष एवं संगठन प्रभारी, मप्र युवा कांग्रेस।

पूर्व संगठन प्रभारी और प्रदेश उपाध्यक्ष रहे प्रशांत पाराशर से हमने बात की तो उनका कहना है कि “संगठन ने कोई कमी नहीं है। जीतने भी साथी जीतकर पधाधिकारी बने सब के सब मजबूत हैं और जो दूसरे स्थान पर रहे वे भी संगठन मे उतना ही महत्व रखते हैं जितना जीतने वाले। कार्यवाही की यदि बात की जाए तो संगठन की अपेक्षाओं पर खरे ना उतर पाने से ऐसे हालात निर्मित होते हैं। मैंने संगठन प्रभारी के तौर पर लगभग 3 साल काम किया है और प्रदेश के लगभग 1200 ब्लॉक और सभी 230 विधानसभाओं के कार्यकर्ता से सीधा संवाद स्थापित करना प्रदेश अध्यक्ष के लिए थोड़ा मुश्किल तो होता ही है और यहीं संगठन महामंत्री या संगठन प्रभारी का काम सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है। संवाद को लेकर एक स्पष्टता होना बेहद जरूरी है। पिछले निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के कार्यकाल मे हमने संवाद को हमारा सबसे मजबूत यंत्र बनाया और जो वैक्युम बन सकता था उसको हमेशा तरजीह देते हुए उस पर काम किया है। यश घंघोरिया बेहद शांत और शालीन युवा अध्यक्ष हैं। निश्चित रूप से वह भविष्य मे एक अच्छे नेत्रत्वकर्ता साबित होंगे। लेकिन एक अच्छे नेता के पीछे के अच्छी बॅकएंड टीम होती है। यश घंघोरिया को अपनी उस टीम को मजबूत करने की आवश्यकता है। आज एक वातावरण निर्मित हो रहा है जिसमे जब किसी भी पदाधिकारी को कोई जिम्मेदारी मिलती है तो बधाई और शुभकामनाओं की बाढ़ आ जाती है। लेकिन उसी दायित्व को निभाने मे गंभीरता नहीं दिखाई जाती। संगठन मे सुधार की गुंजाइश हमेशा ही रहती है इसमे कोई शक नहीं परंतु उस सुधार को कागज़ी सुधार से ज्यादा जमीनी हक़ीक़त बनाना बेहद जरूरी है। जिनको नोटिस मिले हैं उनको अपनी ऊर्जा सही दिशा मे लगाने की जरूरत है। संगठन कभी भी किसी को अपमानित करने की मंशा से नोटिस नहीं देता। वह तो बस सुधार की उम्मीद करता है।”

गौरतलब है कि दिल्ली से ये चाबुक चलायी गयी है और वक़्त की मांग है कि जिनको होल्ड किया गया है वे सभी अपनी कार्यशैली पर ध्यान दें क्यूंकि पद रहे या ना रहे। किसी भी नेत्रत्वकर्ता को ज़मीन पर अपनी मजबूती ही नेता के रूप मे स्थापित करती है। आगे कितने सुधार होंगे यह तो वक़्त ही बताएगा।

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