एमपी में कांग्रेस को लगा 440 वोल्ट का ‘झटका’, मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म रिजेक्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्यसभा चुनाव की स्क्रूटनी के दौरान कांग्रेस को ऐसा झटका लगा है जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई देगी। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म तकनीकी खामियों के चलते रद्द कर दिया गया है। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद कांग्रेस मैदान से पूरी तरह बाहर हो गई है, जिसके चलते भाजपा के तीनों दिग्गजों की निर्विरोध जीत तय हो गई है।

एक छिपी जानकारीऔर कांग्रेस का खेल खत्म
आज जब विधानसभा सचिवालय में राज्यसभा चुनाव के नामांकन की स्क्रूटनी शुरू हुई, तब कांग्रेस के खेमे में किसी ने इस अनहोनी की कल्पना भी नहीं की थी। दरअसल, मीनाक्षी नटराजन पर तेलंगाना चुनाव के दौरान कुछ आपराधिक मामले दर्ज हुए थे और इसी बात को भाजपा ने आधार बनाकर आपत्ति दर्ज कराई। नटराजन ने अपने ताजा चुनावी शपथ पत्र में इन मुकदमों की जानकारी साझा नहीं की थी। नियमों के मुताबिक, यह जानकारी छिपाना नामांकन रद्द होने का पुख्ता आधार बन गया।

विधानसभा में हाई-वोल्टेज ड्रामा: भिड़े बीजेपीकांग्रेस कार्यकर्ता

जैसे ही भाजपा के रणनीतिकारों को इस चूक की भनक लगी, उन्होंने तुरंत साक्ष्यों के साथ विधानसभा सचिवालय में आपत्ति दर्ज करा दी। खबर फैलते ही कांग्रेस के बड़े नेता बदहवास हालत में विधानसभा पहुंचे। दूसरी तरफ बीजेपी कार्यकर्ता भी भारी संख्या में वहां जमा हो गए। सचिवालय परिसर में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते हल्की धक्का-मुक्की और हंगामे में बदल गई। बीजेपी कार्यकर्ता लगातार नटराजन का पर्चा खारिज करने की मांग पर अड़े रहे।

सचिवालय का बड़ा फैसला: नटराजन का पर्चा खारिज
घंटों चली खींचतान और कानूनी बारीकियों को परखने के बाद विधानसभा सचिवालय ने बड़ा फैसला सुनाया। शपथ पत्र में विसंगति पाए जाने के कारण मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म अमान्य घोषित कर दिया गया। इस इकलौते फैसले ने कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब मैदान में कोई दूसरा विपक्षी उम्मीदवार न होने के चलते भाजपा प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत का एलान कर दिया गया है।

राज्यसभा जाने वाले बीजेपी के तीन चेहरे:
रजनीश अग्रवाल (निर्विरोध निर्वाचित)
तरुण चुघ (निर्विरोध निर्वाचित)
महेश केवट (निर्विरोध निर्वाचित)

कांग्रेस की लीगल टीम की इस इतनी बड़ी लापरवाही ने बिना चुनाव हुए ही बाजी भाजपा की झोली में डाल दी है। जहां कांग्रेस खेमे में इस वक्त सन्नाटा और सिर-फुटौव्वल की स्थिति है, वहीं भाजपा कार्यालयों में जश्न शुरू हो चुका है।

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