Thursday, October 15, 2026
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दम हो तो संविधान को हाथ लगाकर दिखाए बीजेपी और आरएसएस: राहुल गांधी

नरेन्द्र मोदी जी या आरएसएस कोई भी हो, हम हिन्दुस्तान के संविधान को छूने नहीं देंगे। दम है तो छू कर दिखाओ विधानसभा चुनाव के आखिरी दिनों में चुनाव प्रचार में राज्य की राजधानी बेंगलुरु में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को चुनौती देते हुए कहा कि दम हो तो बीजेपी और आरएसएस देश के संविधान को हाथ लगाकर दिखाए।

जब हिन्दुस्तान में हमारी सरकार थी तब हमने बेंगलुरु को विकास के लिये 10 हजार करोड़ रुपया दिया था, लेकिन PM मोदी जी ने बेंगलुरु को सिर्फ 550 करोड़ रुपया दिया; शर्म की बात है! राहुल ने कहा, ‘मोदी जी इस तरह बोलते हैं जैसे सबकुछ उन्होंने ही किया है। आप बताइए कि क्या मोदी जी के आने से पहले किसी ने काम नहीं किया? इस शहर को आपने नहीं बनाया? बेंगलुरु आईटी कैपिटल मोदी जी के आने से बना क्या? आपने पूरी दुनिया में देश का नाम किया है। इसे मोदी जी ने 2 मिनट में नहीं किया है।

जब मोदी जी ऐसा कहते हैं तो वे बेंगलुरु के इतिहास का और आपके पूर्वजों का अपमान करते हैं। कांग्रेस ने तो सिर्फ मदद की लेकिन बेंगलुरु को यहां के किसानों और लोगों ने बनाया है।’ उन्होंने कहा कि में मोदीजी के बारे में कुछ भी गलत नही कहूंगा।
मोदी द्वारा की गई टिप्पणी के बारे में राहुल ने कहा, ‘मोदी जी मेरे बारे में, सिद्धारमैया जी और खड़गे जी के बारे में गलत बातें बोलते हैं और उनको लगता है कि इससे उन्हें फायदा होगा लेकिन इससे सिर्फ प्रधानमंत्री पद अपमानति होता है और कुछ नहीं। में प्रधानमंत्री पद की गरिमा को समझता हूं ,मैं फिर से दोहराता हूं कि हम मोदीजी से लड़ेंगे लेकिन प्रधानमंत्री पर कभी व्यक्तिगत हमले नहीं करेंगे।’

राहुल ने राफेल के बारे में बोलते हुए कहा, ’70 सालों से काम कर रही एचएएल से काम छीनकर मोदी ने अपने ऐसे दोस्त को राफेल बनाने का जिम्मा दिया है, जिसके ऊपर कर्ज बकाया है और उसने आजतक एक हवाई जहाज नहीं बनाया है।’ अभी कुछ समय पहले बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल ने कहा, मैं क्यों पीएम नहीं बनूंगा, अगर 2019 का चुनाव जीते तो जरूर पीएम बन सकता हूं. अपने इस बयान में राहुल गांधी ने भरोसा जताया है कि कांग्रेस ही 2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।

उन्होंने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि मैं बार-बार पीएम मोदी से यह पूछ रहा हूं कि उन्होंने सीएम कैंडिडेट के रूप में एक भ्रष्ट आदमी को क्यों चुना, जो जेल भी जा चुका है. राहुल ने यह बात कर्नाटक में बीजेपी के सीएम पद के उम्मीदवार येदियुरप्पा के संदर्भ में कही. बता दें कि येदियुरप्पा को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाना पड़ा था। राहुल ने कहा, ‘वह दलितों के बारे में नहीं बोल सकते, क्योंकि रोहित वेमुला (हैदराबाद का दलित छात्र जिसने आत्महत्या की थी) को उनके लोगों ने मारा था. ऊना में दलितों को उनके लोगों ने मारा. अब बच क्या जाता है? राहुल गांधी, सिद्धारमैया और (मल्लिकार्जुन) खड़गे के बारे में खराब बोलो. वह यही कर रहे हैं।

कर्नाटक को विकास की ऊंचाइयों तक जनता के साथ कांधे से कांधा मिलाकर पहुचाने मैं कांग्रेस पार्टी ने कोई कमी नही छोड़ी है इस बार भी पिछले कार्यकाल के भाती रोजगार के नए आयाम खड़ा करने को कांग्रेस संकल्पित है आये इस बार फिर कर्नाटक मैं कांग्रेस का हाथ फिर से ओर ज्यादा मजबूत करे। जीत का दावा

राहुल ने कर्नाटक में कांग्रेस की जीत का दावा करते हुए कहा, ’10 दिन बाद कर्नाटक की जनता मोदी जी को बताएगी कि मोदी जी हमने आपको पांच साल दिए, उसमें से 4 खत्म हो गए। हम आपको हटाना चाहते हैं, पहले कर्नाटक से हटाएंगे और फिर देश से हटाएंगे।’ कांग्रेस ने हमेशा धर्म के नाम पर लोगों मैं भाईचारा बढ़ाने का काम किया है 4 साल में भाजपा ने हमारे इस प्रयास को विफल कर दिया हर समाज और धर्म में दरार पैदा कर दी। मोदीजी आये दिन कुछ भी बोलते है मोदीजी सोचते हैं कि गलत शब्द बोलने से उनको फायदा होता है, मगर उनको समझ नहीं आता कि इससे प्रधानमंत्री के पद का नुकसान होता है।

मोदजी हमेशा 70 साल का रोना रोते है।बेंगलुरु मोदी जी के आने से पहले क्या आईटी कैपिटल नहीं बना क्या? और मोदी जी कहते हैं 70 साल में क्या हुआ। साथ ही राहुल गांधी जी ने बड़े प्यार से बोला सिद्धरमैया जी के दिल में कमजोर लोगों के लिये जगह है। आपकी मांगों को हम पूरा करके देंगे। आप घबराएं नहीं!

शिल्पी सिंह

सिद्धारमैया ने मोदी और भाजपा को घेरा, मोदी फंसे मुसीबत में

कर्नाटक चुनाव काफी दिलचस्प बनता जा रहा है जहां एक तरफ राहुल और मोदी का वार पलटवार चल ही रह था तो अब उस में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी कूद गए हैं।

मोदी की ‘चौकीदारी’ पर सवाल उठाते हुए कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया ने पूछा कि उन्होनें माल्या और नीरव मोदी को देश से कैसे भागने दिया।

साथ ही ये भी पूछा कि अच्छे दिन कहाँ है। सिद्धारमैया ने सवाल किया कि ‘खुद को मोदीजी चौकीदार कहते हैं तो माल्या और नीरव मोदी को कैसे भाग जाने दिया ? अच्छे दिन का वादा करने वाले मोदी बताएं कहाँ हैं अच्छे दिन ?

कांग्रेस का आखिरी बड़ा किला ढहाने के लिए कर्नाटक गए मोदी और शाह मुसीबत में फंस गए हैं। भाजपा को जिताने और येदुरप्पा को सीएम बनाने के चक्कर में वहां के CM सिद्धरमैया पर अनाप-शनाप आरोप लगाते हुए जमकर भाषणबाजी कर रहे हैं। इसी से नाराज़ सिद्धरमैया ने कानूनी नोटिस भेज दिया। नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा के सीएम उम्मीदवार येदुरप्पा को न सिर्फ कानूनी नोटिस भेजी गई है बल्कि सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए भी कहा गया है। इसके साथ ही 100 करोड़ की मानहानि का केस भी ठोका है।

भारत के राजनीतिक इतिहास में शायद ही कोई प्रधानमंत्री ऐसा रहा होगा जिसको चुनावी भाषणों में इस तरह झूठ का प्रचार प्रसार करते हुए पाया गया हो। और विपक्ष का कोई नेता झूठ बोलने के लिए मानहानि का केस दर्ज किया हो। अगर कानूनी कार्रवाई तेज हुई तो कर्नाटक चुनाव में बड़बोलापन पीएम मोदी और अमित शाह को भारी पड़ सकता है।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने भाजपा को पहले ही झटका दे दिया है। CNN News के मुताबिक, कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदुरप्पा के खिलाफ एक अवैध भूमि आवंटन का मामला कार्रवाई के लिए आदेश दिए है। कोर्ट ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने जनार्दन रेड्डी को अपने भाई और भाजपा उम्मीदवार जी. सोमशेखर रेड्डी के लिए चुनाव प्रचार करने के लिए बेल्लारी जाने की इजाजत नहीं दी थी।

भ्रष्टाचार मुक्त का नारा लगाने वाली भाजपा को लगातार उसके नेताओं के भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़े रहने के चलते सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
पीएम मोदी ने कहा था कि सिद्धारमैया सरकार राज्य में किसी भी काम के लिए 10% कमिशन लेती है.इस नोटिस में उनसे बिना शर्त माफी मांगने या 100 करोड़ रुपये के मानहानि मामले का सामना करने को कहा गया है.

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने में अब सिर्फ 3 दिन बचे हैं. वहां सियासी पारा भी लगातार चढ़ता जा रहा है.कर्नाटक के रण को जीतने के लिए भारतीय जतना पार्टी से लेकर कांग्रेस तक ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. कर्नाटक की जनता को लुभाने के लिए दोनों तरफ से ताबड़तोड़ रैलियां हो रही हैं। भ्रष्टाचार पर हमला बोलने वाले पीएम मोदी से सिद्धारमैया कर्नाटक चुनाव में भ्रष्टाचारियों टिकट दिए जाने के मामले पर सवाल किया और कहा कि ‘पीएम ने अपने दोस्तों और परिवारवालों को 8 टिकट दिए हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि इससे उन्हें 10-15 सीटें मिल जाएंगे।

दूसरे सवाल में उन्होंने बीजेपी के दागी मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा का ज़िक्र करते हुए कहा कि बीजेपी ने पहले तो पार्टी ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं बनाया था।
सिद्धारमैया ने पूछा कि कर्नाटक के लोग जानना चाहते है कि क्या येदियुरप्पा अब बीजेपी के सीएम उम्मीदवार है। कर्नाटक में बीजेपी रेप उन आरोपियों को टिकट दिया है, जो विधानसभा में बैठकर पोर्न देखते है।

उन्होंने अगला सवाल 15 लाख वाले सवाल पूछा और पकौड़े का नाम लेकर मजाक भी उड़ाया। सिद्धारमैया ने कहा कि पीएम कहते है 15 लाख देंगें फिर पार्टी अध्यक्ष कहते है वो तो जुमला था इसके बाद वो युवाओं के कहते है पकौड़ा बेचो।

✍शिल्पी सिंह

27 माह बाद चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए सोनिया गांधी ने भाजपा और मोदी पर किया पलटवार :

27 माह बाद चुनावी रण में उतरी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में UPA चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने मोर्चा संभालते उन्होंने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि भाषणों से देश का पेट नहीं भरता है और न ही बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलता है।

सोनिया गाँधी ने कर्णाटक के बीजापुर में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी पर कांग्रेस मुक्त भारत का जुनून है, उन्हें इसका भूत लगा है, कांग्रेस मुक्त भारत तो छोड़िये, वो अपने सामने किसी को बर्दाश्त नहीं कर सकते.

सोनिया गांधी ने आगे मोदी पर हमला करते हुए कहा, ”मोदी जी को इस बात का गर्व है कि वह बहुत अच्छा भाषण देते हैं. वे अभिनेता की तरह भाषण देते हैं. अगर उनके भाषण से देश का पेट भर सकता है तो वो और भी भाषण दें. लेकिन केवल भाषण से तो पेट नहीं भर सकता. किसानों को राहत और सुविधाएं नहीं मिल सकती, युवाओं को रोज़गार नहीं मिल सकता.”

सोनिया ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘‘सबका साथ , सबका विकास’’ नारे पर सवाल उठाया और उन पर कर्नाटक की उपेक्षा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ”मोदी सरकार कांग्रेस शासित कर्नाटक के साथ भेदभाव कर रही है.” कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”दुःख की बात ये है कि कांग्रेस के विरोधी इन असरदार योजनाओं का बार-बार विरोध करते हैं. जब हमने रोजगार के लिये मनरेगा योजना लागू की थी तब भी बीजेपी जैसे दलों ने और नरेन्द्र मोदी जी ने इसका मजाक उड़ाया.”

सोनिया गांधी ने कहा कि एक तरफ कांग्रेस विकास के काम कर रही है वहीं मोदी जी चार साल से एक ही काम कर रहे हैं कि कांग्रेस ने जो अच्छा काम किया उसको खत्म करना।

सोनिया गांधी ने भ्रष्टाचार समाप्त करने के वादे को लेकर मोदी से सवाल किया. उन्होंने कहा, ”भ्रष्टाचार पर आपके वादे का क्या हुआ? लोकपाल का क्या हुआ ? मोदी जी क्या आपके सबसे भरोसेमंद साथी के बेटे का मॉडल अपनायेंगे?”

सोनिया गांधी ने कहा कि देश ये देखकर हैरत में है कि प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं गलत ही बोलते हैं और हमारे महान् स्वतंत्रता सेनानियों का शतरंज के मोहरों की तरह इस्तेमाल करते हैं।

सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी जी आते हैं और नफरत फैलाकर चले जाते हैं. लेकिन मैं जानती हूं कि इस बार आप इनके एक-एक जुमले का खुलासा करके कांग्रेस को जिताएंगे.

✍ शिल्पी सिंह

राहुल की सौम्यता और आक्रमकता मोदी को हराने के लिये काफी है :

राहुल गाँधी की छवि सौम्य और शांत नेता के रूप में है जो अपने विरोधियों से भी प्रेम से बात करते है मगर राहुल इस छवि से आगे बढ़ रहे हैं।

राहुल की आक्रमकता और कटाक्ष भरे ट्वीटों से सरकार के मंत्री और सांसद की बौखलाहट बता रहा है कि राहुल का तीर निशाने पर लग रहा है।

जहाँ एक तरफ राहुल देश की सुरक्षा, युवाओ को रोजगार, महंगाई और गरीबी से जुड़े मुद्दे को उठाकर जनता की पसन्द बन रहे हैं वही दूसरी तरफ सरकार, पैड मीडिया और सरकार समर्थक राहुल-राहुल की जाप के कारण मीडिया और नेता जनता के बीच मजाक का पात्र बन रहे हैं।

देखा जाए तो ये राहुल की सबसे बड़ी जीत ये है कि वो लगातार मीडिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं और सरकार के नेता उन पर हमला कर रहे हैं।
राहुल बीजेपी के हर राज्य सरकार के कमजोरियों को जनता के सामने पहुंचाने में नहीं रुक रहे हैं वह बीजेपी के हर उस कमजोरी को जनता तक पहुंचा रहे हैं जिससे कहीं ना कहीं कांग्रेस को आगामी चुनाव में फायदा होगा इसलिए भी भाजपा खास तौर पर तिलमिलाई हुई है।
अपने सिद्धांत और विचारधारा के लिए स्पष्ट माने जाने वाले राहुल गांधी गांधीवाद को जिस तरह से आगे बढ़ा रहे हैं और नेहरूवियन सोच के तहत देश को आधुनिक और विकसित बनाने की रूपरेखा वह रख रहे हैं कहीं ना कहीं भाजपा को इससे काफी नुकसान होने जा रहा है।
राहुल की सबसे खास बात अभी जो जनता को पसंद आ रही है वह जनता से उनका अपनापन और मिलनसार स्वभाव है जहां एक तरफ नरेंद्र मोदी बड़े बड़े उद्योगपतियों से घिरे होने के कारण आम जनता और खास तौर पर कमजोर वर्ग तक नहीं पहुंच पा रहे हैं तो वहीं राहुल गांधी अपनी यात्राओं में खास तौर पर यह ध्यान दे रहे हैं वह कमजोर तबका और गरीब लोगों से मिलकर उनकी मन की दिल की बात जरूर जान रहे हैं।

राहुल अपने भाषणों के अलावा हर जगह संवाद कार्यक्रम जरूर रख रहे हैं जिसमें युवा आमजन और वहां के व्यवसायी सहित क्षेत्र के गणमान्य लोगों से बात कर उनकी समस्याओं उनकी मानसिक स्थिति और उस क्षेत्र के विकास की बातों को समझ रहे हैं राहुल का लोगों से जुड़ना भी भाजपा को काफी नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि कांग्रेस जब भी कमजोर हुई है वह जनता के बीच जाकर ही मजबूत हुई है।

कांग्रेस ने कभी झूठे प्रचार या प्रोपगेंडा का इस्तेमाल नहीं किया है उन्होंने बस जनता के बीच जाकर सच्चाई बताई है जिसके बाद जनता ने उन्हें पुनः अपनी सेवा का मौका दिया है।

राहुल जिस आक्रमकता और सौम्यता के मिश्रण के साथ आगे बढ़ रहे हैं कहीं ना कहीं भाजपा के लिए एक चुनौती है उन्हें कैसे रोका जाए।

हर दिन एक नया ट्वीट में भाजपा और मोदी पर हमला, भाजपा भी समझ नही पा रही है कि आखिर राहुल में ये बड़ा बदलाव कैसे हो गया है।
राहुल जहां एक तरफ सरकार के खिलाफ हर दिन एक नया मुद्दा रखकर चर्चा का विषय बने हुए हैं तो वही दूसरे तरफ वो हर प्रदेश के नेताओ के साथ चर्चा करके जनता के मुद्दों को जान रहे हैं ताकि आने वाले चुनावों में भाजपा को पटखनी देने में आसानी हो।

ऐसा लगता है राहुल गाँधी अब 2019 के चुनाव के लिये तैयार हो चुके हैं।

✍ शिल्पी सिंह

कर्नाटक चुनाव प्रचार में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी पर जमकर किया हमला :

कर्नाटक चुनाव प्रचार के लिये कर्नाटक पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भाजपा और मोदी पर जमकर हमला बोला।

केंद्र सरकार पर उसकी ‘विनाशकारी नीतियों’ और ‘आर्थिक कुप्रबंधन’ को लेकर तीखा हमला बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि देश इस वक्त जिन संकटों का सामना कर रहा है उनसे बचा जा सकता था लेकिन वर्तमान सरकार के पास इसको लेकर कोई रूपरेखा नही है।

मनमोहन सिंह ने बैंकिंग क्षेत्र में हुए फर्जीवाड़ों के सिलसिले के लिये भी मनमोहन सिंह ने हमला बोलते हुए कहा कि ठगी लगभग चौगुनी हो गई जो सितंबर 2013 में 28,416 करोड़ रुपये और सितंबर 2017 में 1.11 लाख करोड़ रुपये थी।

उन्होंने कहा, “इस बीच, इन धोखाधड़ी के अपराधी सजा से बच निकलने में कामयाब रहे। मैं बहुत ध्यानपूर्वक और जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि मोदी सरकार का आर्थिक कुप्रबंधन बैंकिंग क्षेत्र में आम लोगों के विश्वास को धीरे-धीरे खत्म कर रहा है।”

इसके आगे मोदी सरकार के नाकामयाबी पर बोलते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, “हमारा देश फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रहा है। हमारे किसान गहरे संकट का सामना कर रहे हैं, आकांक्षाओं से भरे हमारे युवाओं को अवसर नहीं मिल रहे और हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर उसकी सामर्थ्य से कम है।”

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण सच यह है कि इन सभी संकटों से पूरी तरह बचा जा सकता था लेकिन सरकार सिर्फ प्रचार में और विपक्षी को कुचलने में ही व्यस्त रही।

पूर्व प्रधानमंत्री के मुताबिक, मोदी सरकार की दो बड़ी भूल नोटबंदी और जीएसटी को जल्दबाजी में लागू करना है, जिनसे बचा सकता था। उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर दुख होता है कि जब कमियों पर ध्यान दिलाया जाता है तो कैसे इन सभी चुनौतियों से निपटने की बजाए सरकार का रवैया मतभेदों को दबाने का रहता है।”

आर्थिक नीतियों का लोगों के जीवन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि जिनको निर्णय लेने का काम सौंपा गया है वह नीतियों और योजनाओं पर खास ध्यान दें और केवल कल्पना के आधार पर काम न करें।

उन्होंने स्पष्ट तौर पर मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि भारत एक जटिल और विविधता से भरा देश है और कोई एक व्यक्ति सारी अक्लमंदी का भंडार नहीं हो सकता। मनमोहन सिंह ने कहा कि हर बार जब भाजपा सरकार की किसी विनाशकारी नीति के बारे में सवाल पूछा जाता है तो हमें हर बार सुनने को मिलता है कि उनके इरादे नेक हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अपने इरादे नेक होने का दावा करती है लेकिन उनके इरादों से देश को भारी नुकसान हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “विश्लेषण का अभाव भारत और हमारे सामूहिक भविष्य पर भारी पड़ रहा है।”

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के कार्यकाल में वृद्धि दर औसतन सात फीसदी थी। एक समय तो वैश्विक हालात में उतार चढ़ाव के बावजूद यह आठ फीसदी थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान अंतरराष्ट्रीय माहौल अनुकूल है ओर तेल की कीमतें कम हैं फिर भी सब कुछ उलट है और जनता को लगातार नुकसान हो रहा है इसके बाबजूद भी सरकार इस पर ध्यान देना ही नही चाहती।

उन्होंने मोदी सरकार को हर मोर्चे पर फैल बताया और कहा कि कांग्रेस पुनः देश को पटरी पर ला सकती है।

✍ शिल्पी सिंह

60 साल में कांग्रेस ने ही देश को जीरो से हीरो बनाया :

हमारे मोदी जी हमेशा एक ही बात का रोना रोते है कि कांग्रेस ने 60 में क्या किया। आइये हम आपको बताते हैं कि कांग्रेस ने 60 में क्या किया है।

300 साल गुलामी की मार झेल रहा था हमारा भारत सब कुछ लूट कर अंग्रेजों ने देश कांग्रेस के हाथ मे दिया था। देश 1947 में आजाद हुआ तो इस देश में निर्माण के नाम पर सुई तक नहीं बनायीं जाती थी ! देश राजा-रजवाड़ों के झगडे झेल रहा था ! देश में बस गिने चुने गाँव थे जहाँ बिजली उपलब्ध थी !देश का खजाना खाली था और ऐसी बदतर हालत में कांग्रेस ने देश की सत्ता अपने हाथ में ली ! जिस 60 साल का रोना मोदी रोते रहते हैं उन 60 सालों में कांग्रेस ने हिंदुस्तान में विश्व की सबसे ताकत वाली सैन्य शक्ति तैयार की ! हजारों विमान लाखों टैंक और लाखों फैक्ट्रियां तथा लाखों गाँवों तक बिजली पहुंचाई !
इन्हीं 60 सालों में भारत दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संविधान बनाया। भारत एशियाई खेलों की मेजबानी कर चुका था ! भारत में भाखड़ा और रिहंद जैसे बाँध बन चुके थे ! देश भामा न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर का उद्घाटन कर चुका था ! देश में तारापुर परमाणु बिज़ली घर शुरू हो चुका था ! देश में कई दर्जन AIIMS, IIT, IIMS और सैकड़ों विश्वविद्यालय खुल चुके थे ! आजादी से पहले भारत मे बहुत कुछ नही था।
पूरे राजस्थान में मात्र 20 महलों में फोन हुआ करता था ! किसी गाँव में नल नही थे और पूरे देश में सिर्फ 10 बाँध थे ! सेना की हालत भी ऐसे थी कि सीमा पर गिने चुने सैनिक थे और बस 4 विमान और 20 टैंक थे ! देश की सीमाओ का हाल ये था कि वो चारों दिशाओ से असुरक्षित और खुली थी ! शिक्षा और डिजिटल इंडियाः स्वतंत्रता के बाद से भारत अपने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विकास कर रहा है। भारत की वर्तमान साक्षरता दर 74.04% है। स्वतंत्रता के समय यह मात्र 12% थी। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% और महिलाओं की साक्षरता दर 65.46% है। इससे हमारे देश में हरित क्रांति आई, जिसके परिणामस्वरूप हमारे खाद्यान्न उत्पाद में चार गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई, हमने अपने दम पर अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सफलता अर्जित की, महामरियों का उन्मूलन किया और आईटी क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की।भारतीय इतिहास में महिलाओं की शक्तिः महिला राजनीतिज्ञों की सबसे अधिक संख्या भारत में है और यह दुनिया का ऐसा पहला देश बना जिसकी प्रमुख एक महिला रहीं – श्रीमति इंदिरा गांधी। यहाँ की पंचायतों में सबसे अधिक महिलाएं भी निर्वाचित हुईं। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता विपक्ष समेत भारत में महिलाओं ने कई उच्च सरकारी पदों पर काम किया है। पांच प्रमुख राज्यों में महिलाएं मुख्यमंत्री के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकीं है। मतदान का अधिकारः भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जिसने अपनी स्वतंत्रता के बाद से ही अपने प्रत्येक व्यस्क नागरिक को मतदान का अधिकार दिया था।
प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के विविध कार्यक्रमः रक्षा तकनीक और अंतरिक्ष तकनीक पर करीब– करीब शून्य आत्मनिर्भरता के बावजूद, आज हम इस क्षेत्र के सबसे उन्नत राष्ट्रों में से एक हैं। वर्ष 1975 में भारत ने पहले अंतरिक्ष उपग्रह का डिजाइन तैयार किया था। इस उपग्रह का नाम महान भारतीय ज्योतिषाचार्य और गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। इसके अलावा मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला भारत दुनिया का चौथा देश और अपने पहले ही प्रयास में सफल रहने वाला पहला देश बन चुका है। भारत ने अपने पहले ही प्रयास में चंद्रमा की पड़ताल के लिए भेजे जाने वाले चंद्रयान को लॉन्च करने में सफलता अर्जित की। भारतीय सशस्त्र बलः दुनिया में आज भारत चार बड़ी सैन्य शक्तियों में से एक है और इसके पास दनिया के अत्याधुनिक मिसाइल हैं।

आजादी के साथ-साथ हमारे देश को बंटवारे का दंश भी झेलना पड़ा जिसमें भारत का पूर्वी क्षेत्र का एक हिस्सा पाकिस्‍तान नाम से एक अलग देश बन गया. आजादी के इस यज्ञ में जिन महापूरुषों ने अपने प्राणों कृी आहुति दी वे इस बंटवारे से दुखी तो निश्‍चित होते होंगे तथा पुन: जन्‍म लेकर एक भारत की कल्‍पना करते होंगे क्‍योंकि जिस लाहौर की जेल में शहीद-ए-आजम भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे बलिदानियों को फांसी दी गई वह लाहौर अब पाकिस्‍तान में है। अब इन दोनों देशों को आजाद हुए सात दशक हो चले हैं और भारत विकास के कई पड़ाव पार कर चुका है. इसमें भारत ने बैलगाड़ी से लेकर एयर इंडिया तक का सफर तय किया है. नए नए आविष्‍कारों और तकनीकी विकास से भारत विश्‍व में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल रहा है. भारत ने अपनी आजादी के उन मूल्‍यों को संजोये रखा है जिन मूल्‍यों से इसे स्‍वतंत्रता प्राप्‍त हुई है. इसीलिए आजादी का यह पावन दिन हर भारतीय के ह्रदय को राष्‍ट्र के प्रति अपार प्रेम बलिदान और शौर्यपूर्ण भावनाओं से भर देता है। आजादी के 70 साल बाद भी हमारे देश का नागरिक आजाद नहीं है। देश आजाद हो गया, लेकिन देशवासी अभी भी बेड़ियों के बन्धन में बन्धे हैं। ये बेड़ियां हैं अज्ञानता की, जातिवाद की, धर्म की,आरक्षण की, गरीबी की, सहनशीलता की,मिथ्या अवधारणाओं की आदि आदि। हर काम के एक नियम सिद्धांत और अधिकार अधिमान व्यवस्था होते हैं इन सब बातों के संबंध में जो निर्णय हो वह देश की जनता के स्वीकार्य हो और यह कांग्रेस ने समय समय पर हर समय अपने शासन में करके दिखाया है जिस में ना ही क्रोध था ना जथा ना ही धरम की राजनीति थी ना ही एक दुसरे से नफरत का व्यव्हार था ना ही मंहगाई ना ही विभीन्न तरह का टैक्स जैसे जी एस टी बैंक टैक्स ईत्यादी ना ही जुम्लेबाजी थी लोग संतुष्ट थे पवित्र लोकतंत्र गणतंत्र एकता और अखंड्ता थी यह सब कुछ कांग्रेस ने किया था।

✍ शिल्पी सिंह

कर्नाटक में सिद्धरमैया दूसरी बार बना सकते हैं रिकॉर्ड भाजपा को डरा रहा हार का खतरा :

कर्नाटक का चुनाव ऐसे दौर में पहुंच गया है जहां पर हर राजनीतिक दल अपने जीत के लिए एड़ी-चोटी का प्रयास कर रही है।

जहां कांग्रेस अपने अंतिम कुछ प्रदेश सरकार में से एक मजबूत प्रदेश सरकार को बचाने के लिए मेहनत कर रही है तो वहीं भाजपा अपने नारा कांग्रेस मुक्त भारत को साकार करने के लिए प्रयास में है।

कांग्रेस की तरफ से जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मल्लिकार्जुन खड़गे प्रदेश अध्यक्ष जी परमेश्वर राम जी के शिवकुमार कांग्रेस के स्टार प्रचारक ज्योतिरादित्य सिंधिया राज बब्बर सहित कई दिग्गज नेता मैदान में हैं तो वहीं भाजपा के तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह येदुरप्पा रेडी ब्रदर्स सहित कई केंद्रीय मंत्री और अन्य प्रदेश सरकारों के मुख्यमंत्री जैसे योगी आदित्यनाथ आदि शामिल हैं।

यह चुनाव जैसे लग रहा है कि 2019 का दिशा तय करेगा उसी अंदाज में चुनाव लड़ा जा रहा है वैसे पिछले कुछ समय से देखा भी जा रहा है कि पिछले कई चुनाव से हर चुनाव को दोनों दल एकदम एड़ी चोटी का जोर लगा कर लड़ रही है।

बिहार दिल्ली और पंजाब के बाद शायद यह पहला ऐसा राज्य होगा जहां भाजपा पहले से उपस्थिति दर्ज कराने के बावजूद कांग्रेस से हार का खतरा को भाप रही है क्योंकि जिस तरह से सिद्धरमैया ने अपने 5 सालों का काम जनता के सामने रखा है और भाजपा नेताओं का जवाब आक्रमकता के साथ दिया है कहीं ना कहीं भाजपा को भी इससे हार का खतरा दिख रहा है।

नरेंद्र मोदी के हर जुमलों का जवाब जिस तरह सिद्धरमैया खुद सामने आकर दे रहे हैं उससे कहीं ना कहीं सिद्धरमैया अपना कर्नाटक का रिकॉर्ड सुधारना चाहते हैं जहां पर आज तक 40 सालों से कोई भी मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल दोहरा नहीं पाया है सिद्धारमैया जिस जोश के साथ और जिस आक्रमकता के साथ आगे बढ़ रहे हैं उससे तो यही लगता है कि कर्नाटक का पिछले 40 सालों का रिकॉर्ड टूटेगा और सिद्धारमैया ऐसे मुख्यमंत्री बनेंगे 40 साल के बाद लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बन सकते हैं। जिस तरह से उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर आक्रमण किया है और उन्हें वापस यूपी जाने के लिये मजबूर दिया है वो उनकी राजनीतिक कौशल को बताता है। वही अमित शाह सिद्धारमैया के सवालों का जवाब देने में भी लाचार और बेबस नजर आ रहे हैं। नरेंद्र मोदी का सिद्धारमैया के पास पहले से ही जवाब तैयार है उससे तो यही लग रहा है कि मानो भाजपा मैया के जाल में पूरी तरह से फंस चुकी है और इन सबके बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का कर्नाटक का 8 चरणों में आशीर्वाद यात्रा कहीं ना कहीं कांग्रेस को काफी फायदा दिला रहा है उन्होंने जिस तरह से क्षेत्र की जनता से खुद जाकर मिला है और किसानों और युवाओं को जिस ने विश्वास दिलाया है कि सरकार जो भारत में रोजगार देने के मामले में एक नंबर पर है वह अगले 5 सालों में और भी अधिक रोजगार आएगी तू ही उन्होंने किसानों से वादा किया है किसानों के लिए एक नया प्लान तैयार होगा जिससे पहले से किसानों को जो कांग्रेस की सरकार ने फायदा दिया है उसे और अधिक फायदा देखकर प्रदेश के किसानों को और मजबूत बनाया जाएगा महिला की सुरक्षा पर पहले से काम कर रहे कर्नाटक सरकार की नई मेनिफेस्टो में भी महिला सुरक्षा को लेकर काफी सतर्कता देखी गई है और उन्होंने लगभग योजना में महिलाओं को आगे किया है टिकट बंटवारे में भी जहां भाजपा ने महिलाओं को नजर अंदाज किया है वहीं कांग्रेस ने टिकट में भी महिलाओं को तरजीह अगर हम देखें तो कांग्रेस ने हर क्षेत्र में हर जाति के अनुसार अपने नेताओं को तैयार किया है वह कहीं ना कहीं कर्नाटक में कांग्रेस की मजबूती का एक रुप है भाजपा ने जिस तरह से दागी उम्मीदवारों को टिकट दिया है इसका खुलासा राहुल गांधी ने अपने ट्वीट के जरिए किया उसके बाद भाजपा काफी बैकफुट पर नजर आ रही है पहले ही यदुरप्पा जैसे भ्रष्ट नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने से राज्य भर में फजीहत झेल रही भाजपा रेडी ब्रदर्स जैसे प्रदेश के सबसे भ्रष्ट और गुंडा तत्व को टिकट देकर भाजपा ने अपने लिए गड्ढा खोद दिया है और जिससे यदुरप्पा ने सारा इल्जाम अमित शाह पर लगा दिया है इससे यह साफ है कि यदुरप्पा भी कहीं ना कहीं इन भ्रष्टाचारियों और गुंडाराज जो उन्होंने 2008 से 2013 में फैलाई थी उससे कहीं ना कहीं वह डरे हुए हैं। भाजपा द्वारा जारी घोषणा पत्र में जिस तरह से कांग्रेस के घोषणा पत्रों का ही कॉपी किया गया है उससे भाजपा ने कांग्रेस द्वारा जारी किए गए घोषणा पत्र को एकदम सही ठहराया है उस पर भी राहुल गांधी ने भाजपा के घोषणापत्र का मजाक बनाते हुए इसे बकवास करार दिया और कहा इसमें ऐसे घोषणा किए गए हैं जो भाजपा ने केंद्र में भी किया था मगर उसे अब तक पूरा नहीं कर पाया है 12 मई को जब कर्नाटक की जनता मतदान करेगी तो वह कहीं ना कहीं इन बातों को जरूर ध्यान रखेगी कि कैसे 2008 से 13 के बीच प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हुई थी और एक के बाद एक भाजपा का भ्रष्ट नेता जेल गया था और बार बार मुख्यमंत्री को बदलना पड़ा था वही 2013 से 2018 के बीच कैसे सिद्धरमैया ने प्रदेश को एक मजबूत सरकार दिया और मजबूत नेतृत्व में प्रदेश भर का विकास किया युवाओं को रोजगार दी महिलाओं को सुरक्षा दिया और शिक्षा की सबसे अच्छा व्यवस्था प्रदान किया वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जिस तरह से प्रदेश की जनता को पुरानी बातों को भी याद दिलाया और बताया कि कैसे नरेंद्र मोदी झूठा आरोप लगाकर कहीं ना कहीं नाटक के गौरव को धूमिल करने के लिए और कांग्रेस पार्टी को बदनाम करने के लिए झूठ बोल रहे हैं

✍ शिल्पी सिंह

जिन्ना की तस्वीर से लेके तारीफ तक पर हुआ विवाद :

आज का ब्लॉग मेरा मोहम्मद अली जिन्ना के ऊपर है,जो इस वक़्त बड़ी चर्चा में हैं :

सात दशक पहले मोहम्मद अली जिन्ना ने हमारे देश को दो टुकड़ों में बाट दिया था मगर उनके नाम पर मतों का विभाजन अब भी जारी है, कभी उनकी तारिफ के बहाने तो कभी तस्वीर के।

ताजा मामला तस्वीर से जुड़ा है जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय में लगा हुआ है जिसे भाजापा,अखिल भरतीय विद्यार्थी परिषद वा हिन्दू संघटन हटाने की मांग कर रहे है।

जिन्ना पर ये ताजा विवाद एक पत्र के बाद गहराया था। वह पत्र जो अलीगढ़ के ही विधायक सतीश गौतम ने यूनिवर्सिटी के वाईस चासंलर तारिक मंसूर को लिखा था।

इस पत्र में उन्होंने लिखा, आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधी औऱ नेहरू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वालों में जिन्ना का नाम भी था। बीजेपी विधायक ने कहा, ‘जिन्ना को आतंकी नहीं कहूंगा लेकिन राष्ट्रविरोधी चिंतन का व्यक्ति जरूर कहूंगा। आतंकी इसलिए नहीं कहूंगा क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में जिन्ना भी एक सहभागी के रूप में थे। जिन्ना बाद में पाकिस्तान चले गए। उन्होंने भारत को कभी अपना राष्ट्र नहीं माना। पाकिस्तान परस्त लोगों को भारत की धरती पर सम्मान नहीं मिलना चाहिए।’

ये बताना ज़रूरी है बंटवारे के बाद पाकिस्तान ने अपने पहले दो स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को ही मनाया था, लेकिन जिन्ना की मौत के बाद इसे 14 अगस्त को मनाया जाने लगा।

जिन्ना ने अपने इस भाषण के पहले हिस्से में उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने देश बनाने में बड़ी क़ुर्बानियां दीं और कहा कि पाकिस्तान हमेशा उनका एहसानमंद रहेगा।
मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा कि भारत के मुसलमानों ने दुनिया को बता दिया है कि वे एक राष्ट्र हैं और उनकी मांग बिल्कुल जायज़ है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है.
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा कि हमें अपने व्यवहार और विचार से अल्पसंख्यकों को ये जता देना चाहिए कि जब तक वह वफादार नागरिकों की तरह अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान की सीमाओं में रहने वाले आज़ादी पसंद कबायलियों को भरोसा दिलाते हैं कि पाकिस्तान उनकी हिफ़ाज़त करेगा।
जिन्ना ने कहा कि हम गरिमा से जीना चाहते हैं और हमारी ख़्वाहिश है कि दूसरे भी ऐसे ही जियें।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सपा के नव निर्वाचित सांसद ने कहा कि बीजेपी जिन्ना के नाम पर राजनीति कर रही है। सपा सांसद निषाद ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर राजनीतिकरण कर रही है, और यह बेहद निंदाजनक है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की तरह, जिन्ना ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया।” उन्होंने कहा कि, “हिंदुओं की तरह, मुस्लिमों ने भी स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और उनका योगदान अच्छी तरह से प्रलेखित है। बीजेपी ऐसे मुद्दों को उठाकर जाति और धर्म के आधार पर लोगों को विभाजित कर रही है। जब हम शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के बारे में बात करते हैं, तो हमें अशफाकुल्ला खान और वीर अब्दुल हमीद भी याद करते हैं जिन्होंने देश के लिए अपनी जान गवा दी। बीजेपी चाहती है कि लोग इस कारण में इनका योगदान भूल जाएं।”ऐसा करना गलत है बीजेपी हमेशा देश मे धर्म को लेके राजनीति करती है।

देश में सबसे पहले जिन्ना को जिस नेता ने मान्यता दी और उनकी कब्र पर फूल चढ़ाया, वे भारतीय जनता पार्टी के नेता और तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी थे इसलिये पहले उनसे सवाल पूछा जाना चाहिये।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लगे जिन्ना की तस्वीर को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। यूनिवर्सिटी का माहौल खराब होते देख प्रसाशन ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कैंपस की सारी इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। इसे फिलहाल 5 मई तक बंद करने के आदेश दिए गए हैं।

जहाँ तक जिन्ना की तस्वीर का सवाल है तो पहली बात यह है कि जो मुसलमान जिन्ना को अपना नेता मानते थे वे 1947 में ही भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए। फिर आज मुसलमानों से पाकिस्तान और जिन्ना का हिसाब माँगना गलत है।

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि सावरकर के चेले जिन्ना के बहाने हिंदू-मुस्लिम के बँटवारे का खेल खेलना चाहते हैं। सावरकर और जिन्ना, दोनों नास्तिक थे और दोनों ने भारत के बँटवारे का समर्थन किया था। आज फिर सावरकर को मानने वाले लोग 1938 में लगी तस्वीर के नाम पर एएमयू और देश को बाँटना चाहते हैं। जिन्ना की तस्वीर एएमयू और आडवाणी का दिल, इन दोनों जगहों से हटनी चाहिए।

वैसे सावरकर की तस्वीर संसद के सेंट्रल हॉल में क्यों लगाई गई?

भाजपा ने जनता को डर दिखाया पाकिस्तान का और निशाना साधा अपने ही देश के कैंपसों पर। जेएनयू, बीएचयू, एचसीयू आदि पर हो रहे हमलों के बाद अब एएमयू के साथियों को लगातार परेशान करने की कोशिशें की जा रही हैं। अगर उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे कैंपसों को चुप करा देंगे वो बहुत ग़लत सोच रहे हैं।
बात अगर केवल जिन्ना की तस्वीर की होती तो लोग उसे उठा कर कूड़ेदान में डाल देते किसी को आपत्ति नहीं होती मगर बात सिर्फ तस्वीर की नही है।

वैसे जिन्ना का तस्वीर हटाने के मांग करने वाले वही लोग है जो गांधी की हत्या करने वाली विचारधारा के नायक सावरकर को पूजता है और उसकी तस्वीर लोकतंत्र के मंदिर में लगाता है। गांधी के हत्यारों की पूजा करता है।

हम लोग न तो जिन्ना को स्वीकार सकते हैं और ना ही सावरकर को ये देश गांधी, पटेल,नेहरू,बोस,भगत,आजाद, कलाम और असफाकउल्लाह खान जैसे वीरो का है।

✍ शिल्पी सिंह

सिंधिया के नाम से भाजपा भयभीत, शिवराज को डराने लगा हार का खतरा :

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के द्वारा नई समीकरण के साथ जिस तरह से कमलनाथ को अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रचार समिति का अध्यक्ष और 4 नए कार्यकारी अध्यक्ष जिसमें जीतू पटवारी जैसे नाम शामिल हो जब से बनाया गया है तब से शायद भाजपा में एक नया हड़कंप मच गया है।

जिस कारण से कर्नाटक प्रचार छोड़ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी मध्य प्रदेश का दौरा करना पड़ा क्योंकि कहीं ना कहीं पार्टी में भी बगावत शुरू हो चुकी थी और शिवराज सरकार के मंत्री, विधायक और पार्टी के आला नेताओं में कहीं न कहीं मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे जिसके बाद अमित शाह खुद मोर्चा संभालने मध्य प्रदेश पहुंचे जहां पर उन्होंने फिर से कांग्रेस पर झूठा आरोप प्रत्यारोप तो लगाया ही लेकिन साथ-साथ जिस तरह से उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने भाषणों में निशाने पर लिया उसने यह बात साफ कर दी कि इस बार भाजपा ने शिवराज बनाम सिंधिया की लड़ाई को मान लिया है और कहीं ना कहीं भाजपा को भी यह लग रहा है कि अगर कांग्रेस ने सिंधिया को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस की जीत संभव हो सकती है।

जबसे ज्योतिरादित्य प्रचार समिति के अध्यक्ष बने हैं उनका तेवर भी कुछ अलग सा ही दिखने लगा है पहले अफवाह उड़ी कि वह पार्टी से नाराज चल रहे हैं लेकिन जिस तरह से उन्होंने कार्यभार संभालने के दिन भोपाल में रोड शो और उसके बाद अपने भाषण में अपना दमखम दिखाया उसके बाद से यह साफ हो गया कि ज्योतिरादित्य नाराज नहीं है बल्कि वह अपने इस नई जिम्मेदारी से काफी उत्साहित और काफी उर्जा पूर्ण है उन्होंने शिवराज सिंह को ट्विटर पर भी जवाब दिया और शिवराज सिंह के लगातार जवाब दे रहे हैं उसके बाद आखिरकार शिवराज सिंह को भी अपने ट्वीट के जरिए उनको हमला करना पड़ा और इसके बाद सिंधिया के समर्थकों ने जिस तरह से उनकी खिंचाई की और सिंधिया के जमीनी नेता होने का प्रमाण दिया उसके बाद शिवराज को भी कहीं ना कहीं अहसास हो गया है कि वह जो चौथी बार CM बनने का सपना देख रहे हैं वह सपना उनका पूरा नहीं हो सकेगा।

इसलिए आज से 2 दिन पहले एक सम्मेलन में शिवराज सिंह ने कहा भी था कि मैं तो इस कुर्सी से जा रहा हूं अब ना जाने कौन संभालेगा ये उनका मजाकिया अंदाज नहीं था बल्कि आगमी विधानसभा चुनाव के लिए मध्यप्रदेश में जो उन्होंने कांग्रेस की लहर देखी है उसको देखते हुए उन्होंने कहा है।

सिंधिया के नाम से भाजपा में भय होना भी लाजमी है क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसे नेता माने जाते हैं जिनका मध्य प्रदेश के सभी भागों में प्रभाव है खास करके उनका गुना लोकसभा क्षेत्र के आसपास का क्षेत्र की जनता हमेशा समर्पित रहते हैं उससे जो हवा बनता है वह पूरे मध्यप्रदेश में सिंधिया को फायदा दे सकता है जिस कारण से सिंधिया ने मुंगावली और कोलारस में शिवराज को मात दी थी यही कारण है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अपना सारा मशीनरी सिंधिया को कहीं ना कहीं टारगेट करने के लिए लगा दिया है इसलिए अब भाजपा के सोशल मीडिया और भाजपा सरकार की गोदी मीडिया ज्योतिराज सिंधिया पर हमला करने में लग चुकी है।

भोपाल में किया गया विशाल रोड से उत्साहित कांग्रेस के नए अध्यक्ष माननीय कमलनाथ ने भी ऐलान कर दिया है शिवराज की सत्ता को फेकेंगे। उन्होंने कहा उनका सपना किसी पद पर आने का नहीं है बल्कि उनका एक ही लक्ष्य है कि वह शिवराज को सत्ता से उखाड़ देंगे क्योंकि शिवराज ने किसानों पर गोलियां चलाई नौजवानों की नौकरियां खाई और माताओं पर लाठी बरसाई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता ऊर्जावान हैं और प्रदेश की जनता उनके साथ संकल्पित है। उन्होंने कहा प्रदेश की जनता का मन से स्पष्ट है कि आगमी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 150 सीटों के साथ जीतकर मध्यप्रदेश में एक नया सरकार बनाएगी जो सरकार युवाओं और किसानों की होगी।

अमित शाह के द्वारा जिस तरह से मध्यप्रदेश में जुमलेबाजी की गई और कहा गया कि प्रदेश में वह चौथी बार सरकार बनाने जा रहे हैं इसको कांग्रेस के दिग्गज नेता और विधानसभा के विपक्ष नेता अजय सिंह ने कोरी कल्पना कहा है और कहा है कि अमित शाह जी सपना देखना अब छोड़ दीजिए क्योंकि जनता जाग चुकी है युवाओं ने आप लोगों की जुमलेबाजी हवाबाजी और वादों का पुल देख लिया है अब वादों का पुल नहीं चलेगा अजय सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि इस बार किसी व्यक्ति की नहीं किसी जाती कि नहीं किसी पार्टी की नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की सरकार बनेगी जो मध्य प्रदेश की जनता की सरकार होगी जिसका नेतृत्व कांग्रेस करेगा और यह मध्य प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं का सरकार होगा।

शिवराज को अगर किसी नाम से अभी सबसे ज्यादा डर लग रहा है तो वह कहीं ना कहीं सिंधिया का नाम है इसलिए वह अन्य नेताओं पर हमलावर ना होकर अधिकांश समय सिंधिया पर ही लगा रहे हैं और नरेंद्र मोदी ने भी ऐसा लगता है उन्हें साफ संदेश भिजवाया हो कि वह अन्य अन्य नेताओं पर समय ना बर्बाद कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीछे दिमाग लगाएं और किसी न किसी तरह उनके बढ़ते कद को छोटा करने की कोशिश करें लेकिन सिंधिया अपने ही उमंग में अपने ही मस्त चाल में आगे बढ़ते जा रहे हैं कर्नाटक चुनाव के प्रचार में भी गरज कर आए है और फिर वह अब फिर मध्य प्रदेश के दौरे पर निकल रहे हैं और यह दौरा उनका धीरे-धीरे पूरे मध्यप्रदेश में फैलेगा और उन्होंने कहा है कि पार्टी चाहे CM उम्मीदवार किसी को भी बना दें लेकिन हमारा एक ही लक्ष्य होगा की मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार का निर्माण।

✍ शिल्पी सिंह

कर्नाटक चुनाव : राहुल और सिद्धारमैया के सामने पस्त हुए मोदी

आज का ब्लॉग मेरा कर्नाटका चुनाव।

कर्नाटक विधानसभा के सभी 224 निर्वाचन क्षेत्रों में 12 मई 2018 को कर्नाटक में एक चुनाव आयोजित किया जाएगा। वोटों की गिनती और परिणाम की घोषणा 15 मई 2018 को होगी। कर्नाटक का चुनाव हमारे देश की राजनीति का वो मोड़ या बिंदु बनता जा रहा है जहां से एक नए परिवर्तन की शुरूआत होती है।परिवर्तन की ये प्रक्रिया साल 2013 में ही शुरू हो चुकी थी जहां पर दोबारा उठ खड़े होने की कोशिश करने वाली कांग्रेस पार्टी और जिद्दी व उद्दंड बन चुकी, किसी की भी बात को न सुनने वाली बीजेपी का एक मोड़ पर मिलान हो रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों जोर-शोर से कर्नाटक विधान सभा चुनाव के प्रचार में लगे हुए हैं। शुक्रवार 04 मई को उन्होंने गुलबर्गा के कलगी में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले साल यानी 2019 में जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी तो देशभर के किसानों का कर्जा 10 दिनों के अंदर माफ कर दिया जाएगा। उन्होंने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसानों के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी जी ने कर्नाटक के किसानों को एक रुपये की भी मदद नहीं की, जबकि कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक के किसानों का करीब 8000 करोड़ रुपया कर्जा माफ किया था। राहुल गांधी ने कहा कि हमारी लड़ाई कर्नाटक की जनता का पैसा दिलवाने की लड़ाई है. बीजेपी के लोग आपका पैसा छीनते हैं नीरव मोदी, रेड्डी ब्रदर्स को देते हैं. 4 साल में मोदी जी ने किसानों का एक रुपया माफ नहीं किया, अब एक साल बचा है और वो एक रुपया माफ नहीं करेंगे। राहुल ने कहा कि पूरे देश के बिजनेस बंद हो गये लेकिन अमित शाह का पुत्र 50 हजार को तीन महीने में 80 करोड़ रुपये में बदल देता है, नाक के सामने चोरी हो रही है लेकिन मोदी जी एक शब्द नहीं कहते. उनके मंत्री पीयूष गोयल देश को नहीं बताते कि उनकी कंपनी है, छुपाते हैं और फिर उसको बेच देते हैं; करोड़ों रुपया कमाते हैं लेकिन नरेन्द्र मोदी जी एक शब्द नहीं कहते। जब मोदीजी बौखला जाते है तो दूसरों पे हमला करते है ।

पीएम और यूपी सीएम के हमलों के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये. सिद्धारमैया ने मोदी पर हमला करते हुए कहा कि पीएम को यह शोभा नहीं देता कि सिर्फ चुनाव जीतने के लिए वह बेंगलुरु और उसकी जनता का अपमान करें।

पीएम मोदी ने कर्नाटक में अपनी चुनाव रैलियों के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष पर जोरदार हमला बोला था। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ उन्हें मेरे बारे में जो बोलना है, बोलने दें, चाहे वह गलत हों या सही, उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राहुल गांधी ने 12 मई को होने वाले प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रचार तेज करते हुए कहा, ‘‘ वह भारत के प्रधानमंत्री हैं और मैं उन पर व्यक्तिगत हमले नहीं करूंगा. मैं भारत में रहता हूं और वह भारत के प्रधानमंत्री हैं, इसलिए मैं उन पर कभी भी व्यक्तिगत हमला नहीं करूंगा।

दरअसल, नरेंद्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव में वादा किया था कि अगर वो सत्ता में आए तो किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के मुताबिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से 50% बढ़ाकर देंगे। लेकिन सत्ता में आए प्रधानमंत्री मोदी को चार साल से ज़्यादा हो गए हैं लेकिन वो अभी भी अपना वादा पूरा नहीं कर पाए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर चुनाव के लिए अपनी पद की गरीमा का ध्यान ना रखते हुए लोगों के सामने झूठ बोल दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और पूर्व रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने जनरल थिमाय्या का 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने का बाद अपमान किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्नाटक बहादुरी का पर्याय बन गया है। लेकिन, कांग्रेस सरकार ने फील्ड मार्शल करिप्पा और जनरल थिमाय्या से किस प्रकार का बर्ताव करते थे? प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास इसका सबूत है। 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने के बाद भी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और पूर्व रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने जनरल थिमाय्या का अपमान किया। अब लोग सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को झूठ ना बोलने और गलत जानकारी देने कि सलाह दे रहे हैं। दरअसल, कृष्णा मेनन 1958 में रक्षा मंत्री बने थे और पीएम मोदी ने 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने के बाद अपमान की बात कही।

दूसरी तरफ राज्य चुनाव के लिये प्रचार करने आए यूपी के मुख्यमंत्री अदित्यनाथ पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस तरह से ट्वीटों के माध्यम से वार किया उसके बाद तिलमिलाए आदित्यनाथ कर्नाटक छोड़ यूपी भाग आए।

वही कांग्रेस के स्टार प्रचार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने Pm मोदी को सलाह देते हुए कहा कि अगर किसानों का ऋण माफ करना सीखना है तो वो सोनिया गाँधी और सिद्धारमैया जी से सीखें। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राजब्बर ने भी कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में बड़ा रोड-शो किया।

ब्लॉग काफी बड़ा हो गया इसलिये बाकी बाते अगले ब्लॉग में बताऊंगी।

✍शिल्पी सिंह

मोदीजी के कुछ बेहतरीन चुनिदा जुमले

आज का ब्लॉग मैं मोदीजी के जुमले के ऊपर से लिख रही हूँ।

मोदीजी ने सदा ही बडे-बडे जुमले दिए है जनता के बीच जाके। कुछ लोगों की टीम तैयार करती है जुमले, जो नरेंद्र मोदी की जुबां से निकलते ही हो जाते हैं मशहूर। इस टीम के मुख्य सदस्य हैं :-

1. जगदीश ठक्कर,
2. यश गांधी और नीरव के. शाह
3. हिरेन जोशी (ओएसडी-आईटी
4. प्रतीक दोषी (ओएसडी- रिसर्च एंड स्ट्रैटजी)

आइये उनके 2014 के चुनाव से अब तक मुख्य जुमलो पर नजर डालते हैं।

56इंच का सीना :

2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की एक रैली में कहा था कि उत्तर प्रदेश को गुजरात बनाने के लिए 56 इंच का सीना चाहिए। उनके इस जुमले को लेकर आज तक विपक्षी पार्टियां उससे सवाल करते है और सोशल मीडिया पर मजाक बनाया जाता है।

हर खाते में 15 लाख :

2014 के अपने चुनावी प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश से कालाधन वापस लाने का वादा किया था। साथ ही कहा था कि हर भारतीय के खाते में 15-15 लाख रुपये भी आयेंगे। पीएम के इस जुमले को लेकर विपक्ष के साथ देश की जनता भी प्रधानमंत्री से सवाल करती है।

गधे की तरह काम करने वाला पी एम और यूपी का गोद लिया बेटा :

उत्तर प्रदेश की एक रैली में मोदी ने खुद को गधे के तरह काम करने वाला Pm बताया था। जबकि एक और रैली में पीएम मोदी ने खुद को यूपी का गोद लिया बेटा बताया था। उन्होंने कहा कि यूपी ने मुझे गोद लिया है और यूपी मेरा माईबाप है। मैं माईबाप को नहीं छोड़ूगा। मैं भले ही गोद लिया हूं, लेकिन यूपी की चिंता है मुझे। प्रधानमंत्री मोदी के इस जुमले पर विपक्ष ने उन्हें जम के घेरा था।

मै बनारस का बेटा मुझे गंगा मां ने बुलाया है :

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसद क्षेत्र में जाकर कहा था कि मैं बनारस का बेटा हूं और मुझे गंगा मां ने बुलाया है। मोदजी के इस जुमले को लेकर आज भी लोग उनसे सवाल करते है।

अच्छे दिन आने वाले हैं :

यह जुमला ने मोदीजी का ही नहीं बल्कि पुरी बीजेपी पार्टी का मुख्य जुमला है। हर किसी की जुवा पे है कि अच्छे दिन आने वाले है।

बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार :

बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने के लिए बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार जुमले का जम का प्रयोग किया था। लोगो की जुबा पे भी खूब चढ़ा था ये जुमला।

सबका साथ सब का विकास :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सबसे मुख्य जुमलों में से एक जुमला रहा है। मोदीजी के इस जुमले को लेकर देश की जनता ने विश्वास दिखा।

मैं आपसे वादा करता हूं। अगर आप 12 घंटे काम करेंगे तो मैं 13 घंटे काम करुंगा। अगर आप 14 घंटे काम करेंगे तो मैं 15 घंटे काम करुंगा। क्यों? क्योंकि मैं प्रधानमंत्री नहीं बल्कि एक प्रधानसेवक हूं।” ये भी जुमला था।

इसके अलावा और मुख्य जुमले हैं :

मेरी राजनीति का एक ही रास्ता है, मेरी राजनीति का एक ही मकसद है, मेरी राजनीति का एक ही मंत्र है…और वो मंत्र है विकास।”

“हिंदुस्तान को अगर आगे बढ़ना है, तो हिंदुस्तान में गांव को आगे बढ़ाना पड़ेगा। गांव को अगर आगे बढ़ना है तो किसान को आगे बढ़ाना पड़ेगा।”

इन तमाम जुमलों में से मोदीजी का एक भी जुमला पूरा नही हुआ। जनता को आज भी इंतजार है कि कोई एक जुमला थो मोदीजी पूरा कर दे।

अब तक आपने सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारें में ही सुना है कि, नरेंद्र मोदी फेकू है। उनके भक्त भी बहुत बड़े वाले फेकू भक्त है। इस तरह के वादों से देश की जनता को दिए गए लेकिन मोदी सरकार को 4 साल हो चुके है लेकिन अभी तक मोदी जी ने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है।

अमित शाह ने तो खुलकर ऐलान भी कर दिया है कि, 15 लाख रूपये का इंतजार मत करें, क्योंकि वह तो सिर्फ एक चुनावी जुमला ही था।

जैसे-जैसे मोदी जी के वादों की पोल खुलती गई वैसे-वैसे देशभर में मोदी जी फेकू नाम से मशहूर होने लगे। गूगल पर भी फेकू नाम से बहुत सर्च किया जाता है जिसमें सर्च करने पर सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के बारें में ही आता है।

ऐसी बहुत सी बातें और जुमले है जो बता नही सकते मेरे से जितना हुआ मोदीजी के जुमले शेयर किया। अगले ब्लॉग में नया कुछ लेके आऊँगी।

✍ सिंह शिल्पी

राजीव की गाथा

श्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को बम्बई में हुआ था।

वे सिर्फ तीन वर्ष के थे जब भारत स्वतंत्र हुआ और उनके दादा स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। उनके माता-पिता लखनऊ से नई दिल्ली आकर बस गए। उनके पिता फिरोज गांधी सांसद बने एवं जिन्होंने एक निडर तथा मेहनती सांसद के रूप में ख्याति अर्जित की।

40 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाले श्री राजीव गांधी भारत के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री थे। और संभवतः दुनिया के उन युवा राजनेताओं में से एक हैं जिन्होंने सरकार का नेतृत्व किया है। उनके महान नानाजी पंडित जवाहरलाल नेहरू 58 वर्ष के थे जब उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में 17 साल की लंबी पारी शुरू की थी।

देश में पीढ़ीगत बदलाव के अग्रदूत श्री गांधी को देश के इतिहास में सबसे बड़ा जनादेश प्राप्त हुआ था। 1984अपनी मां की हत्या के शोक से उबरने के बाद उन्होंने लोकसभा के लिए चुनाव कराने का आदेश दिया। उस चुनाव में कांग्रेस को पिछले सात चुनावों की तुलना में लोकप्रिय वोट अधिक अनुपात में मिले और पार्टी ने 508 में से रिकॉर्ड 401 सीटें हासिल कीं इस तरह की शानदार शुरुआत किसी भी परिस्थिति में उल्लेखनीय मानी जाती है। यह इसलिए भी अद्भुत है क्योंकि वे उस राजनीतिक परिवार से संबंधित थे जिसकी चार पीढ़ियों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एवं इसके बाद भारत की सेवा की थी, इसके बावजूद श्री गांधी राजनीति में अपने प्रवेश को लेकर अनिच्छुक थे एवं उन्होंने राजनीति में देर से प्रवेश भी किया।
राजीव गांधी ने अपना बचपन अपने दादा के साथ तीन मूर्ति हाउस में बिताया जहाँ इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री की परिचारिका के रूप में कार्य किया। वे कुछ समय के लिए देहरादून के वेल्हम स्कूल गए लेकिन जल्द ही उन्हें हिमालय की तलहटी में स्थित आवासीय दून स्कूल में भेज दिया गया। वहां उनके कई मित्र बने जिनके साथ उनकी आजीवन दोस्ती बनी रही। बाद में उनके छोटे भाई संजय गाँधी को भी इसी स्कूल में भेजा गया जहाँ दोनों साथ रहे।
स्कूल से निकलने के बाद श्री गाँधी कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए लेकिन जल्द ही वे वहां से हटकर लन्दन के इम्पीरियल कॉलेज चले गए। उन्होंने वहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
यह तो स्पष्ट था कि राजनीति में अपना करियर बनाने में उनकी कोई रूचि नहीं थी। उनके सहपाठियों के अनुसार उनके पास दर्शन, राजनीति या इतिहास से संबंधित पुस्तकें न होकर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग की कई पुस्तकें हुआ करती थीं। हालांकि संगीत में उनकी बहुत रुचि थी। उन्हें पश्चिमी और हिन्दुस्तानी शास्त्रीय एवं आधुनिक संगीत पसंद था। उन्हें फोटोग्राफी एवं रेडियो सुनने का भी शौक था।

हवाई उड़ान उनका सबसे बड़ा जुनून था। उन्होंने दिल्ली फ्लाइंग क्लब की प्रवेश परीक्षा पास की एवं वाणिज्यिक पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया। जल्द ही वे घरेलू राष्ट्रीय जहाज कंपनी इंडियन एयरलाइंस के पायलट बन गए।

कैम्ब्रिज में उनकी मुलाकात इतालवी सोनिया मैनो से हुई थी जो उस समय वहां अंग्रेजी की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने 1968 में नई दिल्ली में शादी कर ली। वे अपने दोनों बच्चों, राहुल और प्रियंका के साथ नई दिल्ली में श्रीमती इंदिरा गांधी के निवास पर रहे। आस-पास राजनीतिक गतिविधियों की ऐसी हलचल के बावजूद वे अपना निजी जीवन जीते रहे।

लेकिन 1980 में एक विमान दुर्घटना में उनके भाई संजय गाँधी की मौत ने सारी परिस्थितियां बदल कर रख दीं। उनपर राजनीति में प्रवेश करने एवं अपनी माँ को राजनीतिक कार्यों में सहयोग करने का दवाब बन गया। ना चाहते हुए भी उनको राजनीति में आना पढ़ा अपनी माँ इंदिराजी के लिए।गांधी से ज्यादा दुखद एवं कष्टकर परिस्थिति में कोई सत्ता में क्या आ सकता है जब 31 अक्टूबर 1984 को अपनी मां की क्रूर हत्या के बाद वे कांग्रेस अध्यक्ष एवं देश के प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन व्यक्तिगत रूप से इतने दु:खी होने के बावजूद उन्होंने संतुलन, मर्यादा एवं संयम के साथ राष्ट्रीय जिम्मेदारी का अच्छे से निर्वहन किया।21 मई, 1991 की रात दस बज कर 21 मिनट पर तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में ऐसा ही हुआ. तीस साल की एक लड़की चंदन का एक हार ले कर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की तरफ़ बढ़ी. जैसे ही वो उनके पैर छूने के लिए झुकी, कानों को बहरा कर देने वाला धमाका हुआ।श्रीपेरंबदूर में उस भयंकर धमाके के समय तमिलनाडु कांग्रेस के तीनों चोटी के नेता जी के मूपनार, जयंती नटराजन और राममूर्ति मौजूद थे. जब धुआँ छटा तो राजीव गाँधी की तलाश शुरू हुई. उनके शरीर का एक हिस्सा औंधे मुंह पड़ा हुआ था।इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव रहे पीसी एलेक्ज़ेंडर ने अपनी किताब ‘माई डेज़ विद इंदिरा गांधी’ में लिखा है कि इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ घंटों के भीतर उन्होंने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट के गलियारे में सोनिया और राजीव को लड़ते हुए देखा था.सात वर्ष बाद राजीव के बोले वो शब्द सही सिद्ध हुए थे।स्वभाव से गंभीर लेकिन आधुनिक सोच एवं निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता वाले श्री गांधी देश को दुनिया की उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे और जैसा कि वे बार-बार कहते थे कि भारत की एकता को बनाये रखने के उद्देश्य के अलावा उनके अन्य प्रमुख उद्देश्यों में से एक है –इक्कीसवीं सदी के भारत का निर्माण।

महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मोदी महिलाओं का इज्जत करना सीखें

भारत की सभ्यता संस्कृति जो विश्व भर में पहचानी गई है उसमें महिलाओं का सम्मान और महिलाओं को लेकर इज्जत ऐसा माना गया है कि यह विश्व में कहीं नहीं है।

मगर नई संस्कृति जो भारत में उभर रही है जिसको कहीं ना कहीं भारतीय सरकार का समर्थन प्राप्त है वह अब महिलाओं का सम्मान इज्जत करने के बजाए उनको अपमानित करने में अधिक विश्वास रख रही है और यह हो भी क्यों ना जब देश का प्रधानमंत्री महिलाओं पर ऊंची अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी करें तो फिर उनके समर्थक उनके विधायक उनके सांसद ऐसी टिप्पणी करते हैं तो इसमें किसी को आपत्ति क्यों हो जाएगी ?

क्योंकि कहा जाता है कि देश का राष्ट्रपति प्रधानमंत्री या किसी राज्य का मुख्यमंत्री देश और राज्य को एक दिशा देता है अपने भाषणों से अपने विचारों से अपने आने वाले कार्यों से लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में लगातार महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है अभी हाल ही में कर्नाटक चुनाव के प्रचार में पहुंचे नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से सोनिया गांधी के विदेशी होने पर आपत्तिजनक टिप्पणी की वह भी उनकी मानसिकता को दर्शाता है राहुल गांधी अपने भाषणों में इस बात का जिक्र करते हैं कि rss महिला विरोधी मानसिकता को आगे बढ़ाती है और यह बात कहीं ना कहीं सच साबित होती है जब RSS की शाखा से निकले हुए विधायक और सांसद महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं यहां तक कि Rss से जुड़ी संस्था और नेतागण बलात्कार जैसे संगीन जुर्म को भी सही ठहराने में और उनके समर्थन में रैली निकालने से भी नहीं चूकते हैं चाहे वह कठुआ का मामला हो उन्नाव का मामला हो या फिर हरियाणा राजस्थान बिहार जैसी जगहों पर नेताओं का टिप्पणी हो महिलाओं को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी ने जो टिप्पणी की है उसमें अगर हम कहें तो महिलाओं का अचार बेचने वाला टिप्पणी या फिर शशि थरूर जी के दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर को 50 लाख की गर्लफ्रेंड का नाम देना या फिर अन्य जगहों पर महिलाओं को लेकर ऐसे बयान दे देना जिससे महिलाओं को कहीं न कहीं असहज महसूस होता है जैसे कुछ दिन पहले कांग्रेस के एक सांसद को पीएम ने राक्षस से तुलना किया था। नरेंद्र मोदी के साथ RSS की शाखाओं में बताए गए सिद्धांतों के कारण होता है। मगर देश और विदेश में इसका गलत संदेश जाता है कि कहीं ना कहीं भारत महिलाओं से घृणा करने वाला और महिलाओं के लिए असुरक्षित देश हो गया है। जिस देश को लक्ष्मीबाई इंदिरा गांधी सरोजिनी नायडू जैसी महिलाओं ने कहीं ना कहीं संजोया आगे बढ़ाया उसके लिए शहादत दी उस देश में महिलाओं के खिलाफ जिस तरह से एक नया विचारधारा उत्पन्न हो रहा है उसके लिए कहीं न कहीं भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेवार हैं क्योंकि जिस तरह से भाजपा के नेता लगातार विरोधी दलों के महिला नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं वह प्रधानमंत्री के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं है कहीं ना कहीं उनको उनका पूरा आशीर्वाद और सहयोग प्राप्त है।

ऐसे में अब महिलाओं को भी जो देश की आधी आबादी लोकतंत्र में आधी संख्या में मतदाता होने के कारण सोचना चाहिए कि क्या वह एक ऐसे नेता को चुनेगी या फिर ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाएगी जिस का एकमात्र काम महिलाओं का अपमान करना है महिलाओं को खुद सोचना होगा कि क्या वह एक ऐसे दल को ऐसे संस्थान को मदद करेगी जिसका प्राथमिक काम महिलाओं का अपमान करना है। RSS की विचारधारा के बारे में राहुल गांधी ने साफ कहा है कि यह महिला विरोधी संस्था है इसमें महिलाओं को कोई हक नहीं दिया जाता है आप भाजपा के नेताओं के बयान सुनिए उनके बयान में साफ झलकता है कि महिलाओं को या तो वह घरेलू कार्य करने वाली समझते हैं या फिर सिर्फ उनको पाबंदियों में जकड़ा हुआ समझते हैं उनके नजर में महिलाओं का कोई हक या कोई कार्य नहीं होता है इसलिए ऐसे में महिलाओं को आगे आकर अपने हक के लिए आवाज उठानी होगी और जो नेता उनके खिलाफ टिप्पणी करते हैं उनको सबक सिखाना होगा।

राहुल गाँधी का दो दिवसीय कर्नाटक दौरा आज से, मोदी को मिलेगा करारा जबाब

कर्नाटक चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है वैसे वैसे कर्नाटक में राष्ट्रीय नेताओं का जमावड़ा लगता जा रहा है पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कई दौरा और उसके बाद भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय प्रचार और अमित शाह का इसी बीच कई चरणों में में प्रचार करना अपने आप में कर्नाटक चुनाव के महत्व को दर्शाता है।

इसी चरण में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आज से दो दिवसीय कर्नाटक दौरे पर जन आशीर्वाद यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए जा रहे हैं यात्रा के पहले दिन वह कर्नाटक के बीदर जिला के आसपास कई जनसभाओं को संबोधित कर वोटरों को कांग्रेस के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए कहेंगे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद यह राहुल गांधी का पहला दौरा है।

राहुल गांधी को ना सिर्फ अपनी बात कहनी है बल्कि नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए सवालों का भी उन्हें जवाब देना होगा ताकि जनता को यह विश्वास रहे कि नरेंद्र मोदी जी ने जो बात कहा वह कहीं ना कहीं सिर्फ जुमला और राजनीति से प्रेरित बातें थी चाहे वह 15 मिनट बोलने की बात हो या फिर कर्नाटक सरकार के 5 साल के कार्यकाल का वर्णन करने की बात हो हर मुद्दे पर आज राहुल गांधी बोलेंगे और क्योंकि पिछले 5 सालों में कांग्रेस सरकार ने कई योजनाओं को पूरा किया है और कई नई योजना की शुरुआत की है इसलिए राहुल गांधी को कहीं दिक्कत नहीं होने जा रही है मगर सिद्धारमैया ने नरेंद्र मोदी पर वार करते हुए येदुरप्पा के शासन के 5 सालों का काम कार्य का लेखा-जोखा बताने को कहा है। वो BJP के लिए परेशानी बन रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि आज राहुल गांधी पहले दिन और कल दूसरे दिन कैसे जनता को कांग्रेस के प्रति आकर्षित करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि कांग्रेस की सरकार पुनः बनती है तो प्रदेश का विकास सतत आगे बढ़ता रहेगा।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम से भाजपा की बेचैनी बढ़ी हुई है, नए पद में नए तेवर में दिख रहे सिंधिया :

मध्यप्रदेश की राजनीति भारतीय जनता पार्टी के लिए 15 सालों से सुखद बनी हुई है। कारण चाहे कुछ भी रहा हो शायद कांग्रेस की गुटबाजी या फिर शिवराज सिंह और भाजपा का राजनीतिक प्रबंधन लेकिन भाजपा 3 बारो से जीत दर्ज करते आ रही है।

मगर 2018 का चुनाव लग रहा है भाजपा के लिए मुश्किल बन सकती है क्योंकि जिस तरह से कांग्रेस ने कमलनाथ और ज्योतिराज सिंधिया का एक नया राजनीतिक समीकरण बनाते हुए प्रदेश की बागडोर सौंपी है उससे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नया ऊर्जा आ गया है कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ जनता को भी एक उम्मीद हो गई है कि ज्योतिराज सिंधिया जैसा आक्रमक नेता जो जनता से जुड़े हुए मुद्दों पर काफी आक्रमक होकर सरकार के खिलाफ और जनता के साथ रहता है वह कहीं ना कहीं भाजपा और शिवराज सिंह की इस कुशासन को हरा सकता है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का युवाओं के साथ साथ हर वर्ग में जिस तरह से पकड़ है उसका फायदा निश्चित तौर पर कांग्रेस को होगी ज्योतिराज सिंधिया ने अटेर मुंगावली और कोलारस चुनावों में भी यह बात दिखा दिया था कि अगर ठीक ढंग से एकजुटता के साथ चुनाव लड़ते हैं न सिर्फ शिवराज सिंह की हार होगी बल्कि कांग्रेस मजबूती से पूरे प्रदेश में अपना सरकार बना सकती है मध्य प्रदेश में पिछले कई उपचुनाव और निकाय चुनाव में ज्योतिराज सिंधिया,अरुण यादव, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह की एकजुटता के कारण कांग्रेस जीत दर्ज करते जा रही है जिससे ना सिर्फ कांग्रेस का जनाधार बढ़ रहा है बल्कि भाजपा का बेचैनी भी बढ़ता चला जा रहा है।

ऐसे में ज्योतिराज सिंधिया को 2018 के चुनाव के लिए चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाना कहीं ना कहीं कांग्रेस के आने वाले रणनीति का साफ झलक है। कांग्रेस कहीं ना कहीं 2018 में ज्योतिदित्य सिंधिया के चेहरों पर चुनाव लड़ना चाह रही है।

भले कांग्रेस अभी इस बात का ऐलान नहीं कर रही हो लेकिन भाजपा अब जिस तरह से सिंधिया के खिलाफ चुनाव लड़ने जैसा माहौल बनाने लगी है और सोशल मीडिया पर वो जिस तरह से वह दिखा रही है वह बता रहा है कि वह सिंधिया के नए तेवर और नए पद से बेचैन हैं उसे कहीं ना कहीं लगने लगा है कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में अच्छा कर रही है और इसी तरह आगे बढ़ती रही तो निश्चित तौर पर 2018 में कांग्रेस सरकार बना लेगी।

सरकार की गुलामी कर देश को सत्ता का गुलाम बना रही गोदी मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ नही रही है :

एक अरब की आबादी वाले बेमिसाल मुल्क हिन्दुस्तान के ये पांच पचीस एंकर ग़ुलाम हो चुके हैं। इनकी आज़ादी की दुआ कीजिए। इनके मालिकों की आज़ादी की दुआ कीजिए। ये हाथ में तिरंगा लेकर आपसे दिन रात झूठ बोल रहे हैं। तिरंगे की शान को हर दिन कम कर रहे हैं। जिस तिरंगे को लहराने के लिए लोग सीने पर गोलियां खा गए, उस तिरंगे को हाथ में लेकर ये टीवी चैनल के एंकर सत्ता की खुशी के लिए आपसे झूठ बोल रहे हैं। भारत में मुख्यधारा की मीडिया का कभी इतना स्तर नहीं गिरा, जितना आजकल गिरा हुआ है. मीडिया लगभग समाज विरोधी हो चुका है. वह सत्ता की भाषा बोलता है. मीडिया एक तरह से सरकार-सत्ता का प्रवक्ता बन गया है. वह सत्ता की सुंदर तस्वीर गढ़ने में व्यस्त रहता है.
वक्त बदल चुका है। खबरों की दुनिया में इंटरनेट और सोशल मीडिया का इतना बोलबाला हो गया है कि यह पहचान कर पाना मुश्किल है की कौन सी खबर सच्ची है झूटी है।
पत्रकारिता जगत में एक वाक्य अक्सर सुना जाता था, ‘यह प्रोपेगंडा है, खबर नहीं’। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। खबरों की दुनिया में सोशल मीडिया ने हर किसी को जुबान दे दी है’। यह इसका लोकतांत्रिक पहलू है। लेकिन यह भी सच है कि सोशल मीडिया अफवाहों और फर्जी खबरों का वाहक बन गया है। और हर बात को बड़ा चढ़ा कर सत्ता पार्टी के पक्ष में रात-दिन झूट बोलना।ऐसा लगता है कि मीडिया, खासकर टेलीविजन झूठ को छुपाने में सरकार के लिए एक अभेद कवच का काम कर रहा है। वो सारे लोग, जिन्हें इस स्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमें कहां-कहां मात मिल रही है, इन सबको नजरअंदाज कर ऐसा माहौल बनाने में लगे हैं कि हम सर्वशक्तिमान हैं और रोज पाकिस्तान को और चीन को पीट रहे हैं। पाकिस्तान और चीन को पीटते देख आम भारतीय के मन में एक सुखद अनुभूति पैदा होती है। सरकार को भी ऐसी अनुभूति पैदा करने में कोई हिचक नहीं महसूस हो रही है। फेसबुक पर जिन्हें हम भक्तगण कहते हैं, वो तो पागलों की तरह देश को बेवकूफ बनाने के अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। शायद यही उनके लिए राष्ट्रधर्म है और यही उनका राष्ट्रप्रेम है। मानो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन्हें सीधे सारी सच्चाई बताई हो। अगर सीएजी रिपोर्ट जैसी कोई सच्चाई सामने आती है, तब ये कह देते हैं कि ये कांग्रेस ने करवाया है। इस समय भारतीय जनता पार्टी के नियंत्रण में पूरा देश है इसके बावजूद फेसबुकिये भक्त लोग अपराधियों के जरिए ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि कांग्रेस देश का मनोबल तोड़ने का काम कर रही है और कुछ पत्रकार जो सच्चाई सामने ला रहे हैं, वो देश का मनोबल तोड़ रहे हैं। सरकार उन लोगों को नहीं पकड़ पा रही है, जो देश का मनोबल तोड़ रहे हैं। हालांकि इनकम टैक्स और ईडी के छापे हर जगह पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ, आरोप लगाने में कुछ नहीं जाता, क्योंकि आरोप लगाने वाले बेहैसियत के, बेदिमाग के, बेसमझ लोग हैं, जिन्हें सिर्फ और सिर्फ देशद्रोही कहा जा सकता है। ये ऐसे देशद्रोही हैं, जो देश को कमजोर बनाने में अपनी शान समझते हैं, अपना सर्वज्ञान समझते।सचमुच फेक न्यूज हमारे दौर की एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। जाने-माने लोग भी इसके जरिए पब्लिक मूड को मनचाही दिशा में मोड़ने की कोशिश करने लगे हैं। बहरहाल,

सोशल मीडिया के प्रवाह को रोक पाना तो संभव नहीं है, पर संस्थागत मीडिया ने झूठ और सच में फर्क न किया तो वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दर्जा जरूर खो देगा।

नरेंद्र मोदी : झूठ बोलने वाला एक झूठा मशीन, देश को कर रहा बर्बाद

मोदीजी और उनकी सरकार द्वारा बोले गये झूठ पर एक मोटी किताब लिखी जा सकती है,मोदीजी का एक 15 अगस्त का भाषण बेहद प्रसिद्ध है और वो उनके बोले गये झूठो के कारण। लाल किले से जो भाषण दिया उसमें अर्थव्यवस्था पर, किसानों की जीवनस्थिति पर ग़लत तथ्य दिये गये थे; गाँवों की बिजली के बारे में जो तथ्य दिये गये थे, वे भी ग़लत थे |
मोदी सरकार आज जिन योजनाओं की उपलब्धियों के बल पर तारीफ बटोर रही है वो उनकी नहीं बल्कि पिछली सरकार की है बहरहाल मोदी जी के जिन झूठो के बारे में, पहला झूठ: “किसानों का 99 प्रतिशत गन्ना भुगतान हो चुका है।”

दूसरा झूठ: 70 साल बाद बिजली पहुंचाने का दावा!

तीसरा जूठ: 350 रुपये में मिलने वाला LED बल्ब आज 50 रुपये में।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नाम पर असम में संघ द्वारा लड़कियों की तस्करी का मामला हो या किसानों को आगे बढ़ाने की बात हो, नरेन्द्र मोदी ने अपने हर वायदे के उलट हर तरफ़ बर्बादी का जो मंज़र खड़ा किया है, उसे ढँकने के लिए झूठों का अम्बार खड़ा किया गया है और पूँजीपतियों के ग़ुलाम मीडिया के ज़रिए इन झूठों के धुुआँधार प्रचार ने लोगों को ठहरकर इस पर कभी सोचने का मौक़़ा ही नहीं दिया है।

लेकिन यह काम क्रान्तिकारी ताक़तों का है कि इस फासीवादी प्रचार का पर्दाफ़ाश किया जाये। मोदी सरकार द्वारा देशभक्ति के नाम पर जेएनयू और हैदराबाद विश्वविद्यालय में छात्रों पर पुलिसिया लाठीचार्ज और मुक़दमे दर्ज करवाये गये।

नोटबन्दी के दौर में वायदा किया कि काला धन ख़त्म होगा और आतंकवाद रुक जायेगा परन्तु यह भी कोरा झूठ निकला। मोदी जी ने बोला कि 31 मार्च तक आरबीआई की खिड़कियों पर पुराना नोट बदला जायेगा और 31 दिसम्बर तक बैंकों और पोस्ट ऑफि़सों में बदला जायेगा परन्तु सभी जानते हैं कि मोदी ने कितनी बेशर्मी से इस बात को भुला ि‍दया और दर्जनों बार नये नियम घोषित किये जिसने आम ग़रीब जनता को भयंकर परेशानी में धकेल दिया।

प्रधानमन्त्री जी की डिग्री में भी गड़बड़ी है, जिस वजह से मोदी जी ने इस पर भी मौन धारण कर रखा।

अब नरेन्द्र मोदी की प्रचार नीतियों को देखा जाये तो इनमें भयंकर समानता दिखाई देती है। सिर्फ़ रेडियो की जगह सोशल मीडिया, टीवी, रेडियो लगभग हर तकनीकी माध्यम से मोदी के नाम को लोगों तक पहुँचाया गया है। ट्विटर पर संघ के आईटी सेल द्वारा प्रचार व ज़ी न्यूज़, इण्डिया टीवी, दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी सरीखे मुख्य टीवी चैनलों द्वारा प्रचार गोएबल्स का फासीवादी एजेण्डा ही दिखाता है। वहीं यहूदियों की जगह मुस्लिम आबादी के ख़िलाफ़ चलाया जा रहा कभी खुला तो कभी छिपा प्रचार उनके ख़िलाफ़ लगातार समाज में उनकी छवि गढ़ता है।

मोदी के प्रचार में कुछ फ़िल्में भी बनी लेकिन वे बेहद खराब थीं। हर मीटिंग या सभा को आयोजित करने से पहले तमाम राज्यों से लोगों को बुलाया जाता है, सभा को बड़े से बड़ा करने की कोशिश की जाती है।औऱ साथ ही हर बार झूट की दुनिया बना देते है कांग्रेस द्वारा पिछले 60 सालों में जो प्रतीक गढ़े गये थे, उन्हें ज़रूर मोदी ने 5 साल में चुनौती दी है और असल में मोदी सरकार का मक़सद भी यही है।

हिटलर और गोएबल्स की तरह प्रधानमन्त्री मोदी भी ज़रूर शीशे के आगे अपने भाषण तैयार करते हैं बल्कि बाकायदा भाषणों की पुरानी वीडियो देखकर एक-एक शब्द पर ज़ोर और चेहरे के भाव की तैयारी करते होंगे। ऐसे कि एक झूठ को सौ बार दोहराने पर वह सच में तब्दील हो जाता है।मोदी और संघ लगातार इसी छवि को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रधानमन्त्री मोदी झूठ बोलते रहेंगे, क्योंकि वे झूठ बोलने की मशीन हैं और झूठ बोले बिना उनका काम नहीं चल सकता है।

कर्नाटक में कांग्रेस की बनती बढ़त, भाजपा के लिये परेशानी बनी हुई है :

कर्नाटक में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है यह साफ होते जा रहा है कि भाजपा इस चुनाव में काफी पिछड़ चुकी है।

सिद्धरमैया के 5 सालों के कामकाज का लेखा जोखा देखा जाए और उसके बाद जिस तरह से सिद्धरमैया आक्रमक प्रचार कर रहे हैं और उन्हें निरंतर राहुल गांधी और अन्य नेताओं का साथ मिल रहा है इससे कांग्रेस की स्थिति मजबूत होते जा रही है चाहे भाजपा कितना भी झूठा आरोप लगा ले मगर सिद्धरमैया ने अपने 5 साल के कार्यकाल में रोजगार और किसानों पर जिस तरह से ध्यान दिया वह उनको इस चुनाव में काफी फायदा पहुंचा रहा है सिद्धारमैया ने इन 5 सालों में कानून व्यवस्था को भी काफी सुधारा है। अब भी कानून व्यवस्था में सुधार की जरूरत है क्योंकि 5 साल पहले भाजपा सरकार में कानून व्यवस्था काफी लाचार थी। जिसे कई हद तक कांग्रेस सरकार ने सुधार लिया है।

अब अगर भाजपा की बात करें तो भाजपा में पहले गुटबाजी और येदुरप्पा जैसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री का चेहरा के साथ साथ रेड्डी ब्रदर्स को टिकट देना पोर्न वीडियो देखने वालों को टिकट देना और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी के अनर्गल बयानबाजी भी कर्नाटका में भाजपा के लिए मुश्किल खड़ा कर रही है। कर्नाटक के लोग काफी पढ़े लिखे और समझदार माने जाते हैं उनका राजनीतिक सोच देश से हमेशा अलग होती है क्योंकि जब 2013-14 में पूरा देश मोदी लहर में हुआ था तब भी कर्नाटक ने कांग्रेस का साथ दिया था और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि कर्नाटक देश की परिस्थितियों को देखकर सरकार में बदलाव करता है वह हमेशा अपने राज्य को और राज्य की स्थिति को देखता है इसलिए भाजपा नेता चाहे देश की अलग-अलग कोनों की स्थिति बता कर कांग्रेस को घेरने की और अपने आप को महान बनाने की कोशिश करते रहे मगर कर्नाटक की जनता उसी चीज को तवज्जो अधिक देती है जिससे कर्नाटक की जनता को अपना फायदा होता है ऐसे में अगर हम कहें कि कांग्रेस ने लिंगायत और कावेरी नदी जैसे मुद्दों को सुलझाने का जो प्रयास किया है उससे कहीं ना कहीं कांग्रेस को एक बड़ा फायदा मिलेगा वहीं कांग्रेस के सारे नेताओं का गुटबाजी छोड़ राहुल के नेतृत्व में सिद्धरमैया को समर्थन देना भी कांग्रेस के लिए एक बड़ा फायदा साबित होगा ऐसे में हम कह सकते हैं कि कांग्रेस कर्नाटका में काफी अच्छी स्थिति में है जो भाजपा के लिए चिंता का विषय अब तक बना हुआ है।

राहुल गांधी : पूंजीपतियों के षड्यंत्र के बाबजूद सत्य के लिये लड़ता योद्धा

हम ये कहें कि पूंजीपतियों के षड्यंत्र और मीडिया की चालबाजी का शिकार किसी भी भारतीय नेता बनाया गया है तो वो नाम राहुल गाँधी का है।

राहुल गाँधी के खिलाफ पूंजीवादी मीडिया ने जिस तरह से प्रोपगंडा चलाया और उनके छवि को धूमिल किया उसी का नतीजा था कि 2014 में नरेंद्र मोदी भारत के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे अन्यथा जिन्होने 2006 से 2011की राजनीति पर नजर बनाई होगी उसे अब भी याद होगा कि राहुल ने देश को उन मुद्दे को बहुत पहले उठाया था जिसके सहारे मोदी और केजरीवाल ने कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाया। अगर कहा जाए कि राहुल की योजनाओं और विचारों को चोरी करके मोदी और केजरीवाल सहित अखिलेश यादव ने अपनी राजनीति को चमकाया तो गलत नही होगा।

राहुल ने 2004 में राजनीति में आने के बाद 2 साल पहले इसे समझा और फिर 2006 से देश मे बदलाव लाने के लिये देश के हर क्षेत्र में दौरा करके उनके हालो को जाना और अपनी सरकार से बात कर कई तरह के अधिकार उन्हें दिये जिसका फायदा कांग्रेस को 2009 में हुआ और कांग्रेस 1990 के बाद पहली बार 200 से अधिक लोकसभा सीट में जीत दर्ज की।

राहुल की बढ़ती लोकप्रियता और युवाओ मे राहुल के कारण बढ़ती राजनैतिक दिलचस्पी को देखकर पूंजीपति वर्ग , आरएसएस और देशविरोधी ताकतों मे बेचैनी बढ़ने लगी जिसको धूमिल करने के लिये पूँजीवादी लोगो ने मीडिया के माध्यम से राहुल पर हमला किया और उनकी छवि को धूमिल किया इसमें कही न कही कांग्रेस के कुछ नेताओं का भी योगदान रहा जो राहुल और कांग्रेस सहित देश के बारे में अनर्गल बयानबाजी करते थे।

2014 के आमचुनाव के दौरान मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से राहुल के खिलाफ झूठा, आपत्तिजनक और अश्लीलता पूर्ण प्रचार किया गया जो आरएसएस जैसे संस्थानों की सोच थी।

2014 में कांग्रेस के हारने के बाद 3 साल तक लगातार राहुल ने सँघर्ष करते हुए पार्टी और पार्टी के बाहर लोगो के बीच कांग्रेस को स्थापित करने का प्रयास की मगर उन्हें वैसी सफलता नही मिली जैसी सफलता उन्हें गुजरात चुनाव और अध्यक्ष बनने के बाद मिल रही है।

राहुल ने बदलाव के इस दौर पर देश को नया सन्देश दिया है कि चाहे उनका विपक्ष कितना भी झूठा,चालबाज और नीच हो मगर वो सत्य और सादगी के साथ उनको हरायेंगे क्योंकि सत्य ही भारत की ताकत है। उनका हौसला लगतार बढ़ रहा है जिससे मोदी सरकार की परेशानी कही न कही बढ़ रही है जिस कारण से जो पहले कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे अब वो कांग्रेस की बातों को आगे बढ़कर सवाल-जबाब कर रहे हैं।

राहुल को इसी तरह सत्य के साथ आगे बढ़ता रहना चाहिये जिससे लोगो को एक वर्तमान सरकार से अलग एक नई उम्मीद की किरण दिखे।

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