भोपाल। अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों को PPP मॉडल पर दिए जाने के मुद्दे पर सरकार से सीधा सवाल किया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ किसी एक मेडिकल कॉलेज या एक जिले का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, मेडिकल शिक्षा और आम जनता के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है।
डॉ. भूरिया ने कहा कि जब किसी मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन सरकार की, पैसा जनता का और संसाधन सरकारी हैं, तो फिर उसके संचालन में निजी भागीदारी की जरूरत क्यों पड़ रही है? सरकार को जनता के सामने इस फैसले का पूरा कारण और उसका असर स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि PPP मॉडल लागू होने के बाद मेडिकल शिक्षा की फीस कितनी होगी? मरीजों के इलाज का खर्च कितना बढ़ेगा? गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को क्या सुविधाएं मिलेंगी? सरकारी हिस्सेदारी क्या होगी और निजी भागीदार की भूमिका क्या होगी?
भूरिया ने कहा कि इन सवालों के स्पष्ट जवाब के बिना जनता के संसाधनों से खड़ी की जा रही स्वास्थ्य संस्थाओं को PPP मॉडल पर सौंपने का फैसला कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्वास्थ्य सेवा मुनाफे का मॉडल नहीं, जनसेवा की जिम्मेदारी
डॉ. भूरिया ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों का मूल उद्देश्य सिर्फ मेडिकल डिग्री देना या अस्पताल चलाना नहीं है। इन संस्थानों से गरीब, मध्यम वर्ग, ग्रामीण और जरूरतमंद परिवारों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं।
उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा और इलाज आम आदमी की जरूरत हैं, सिर्फ बाजार की वस्तु नहीं। इसलिए किसी भी मॉडल को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका सबसे बड़ा लाभ आम जनता को मिले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग इलाज और शिक्षा से बाहर न हो।
सरकार जनता के सामने रखे पूरा हिसाब
भूरिया ने सरकार से मांग की कि PPP मॉडल को लेकर पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी सार्वजनिक की जाए। सरकार बताए कि इस मॉडल की जरूरत क्यों पड़ी, इससे सरकारी खजाने पर क्या प्रभाव पड़ेगा, निजी भागीदार को क्या अधिकार मिलेंगे और आम मरीज तथा मेडिकल छात्रों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जनता की जमीन और जनता के पैसे से खड़ी होने वाली संस्थाओं में सबसे पहली प्राथमिकता भी जनता का हित और उसकी पहुंच होनी चाहिए।
“यह हमारे-आपके भविष्य का सवाल है”
डॉ. भूरिया ने कहा कि यह केवल आज का सवाल नहीं है। आज सरकारी संस्थाओं के संचालन का जो मॉडल तय होगा, उसका असर आने वाले वर्षों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए और यदि PPP मॉडल से आम लोगों की पहुंच, इलाज की लागत या मेडिकल शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, तो सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
भूरिया ने कहा, “मैं डॉक्टर होने के नाते इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाता रहूंगा। स्वास्थ्य व्यवस्था का सीधा संबंध आम आदमी की जिंदगी से है। इसलिए जनता के संसाधनों से तैयार होने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं में सबसे पहले जनता का हित सुनिश्चित होना चाहिए।

























