Saturday, August 15, 2026
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संघ के मंच से प्रणव दा ने सिखाई देशभक्ति :

देश की नज़र नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय पर इसलिए रही क्योंकि वहां पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। आरएसएस के मंच पर प्रणब का पहुंचना सबके लिए चौंकाने वाला था। मीडिया से लेकर सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि इस मंच से प्रणब दा क्या बोलेंगे। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि मैं यहां देश और देशभक्ति समझाने आया हूं। मैं यहां देश की बात करने आया हूं।

आरएसएस के मंच से अपने संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, “मैं यहां देश और देशभक्ति समझाने आया हूं। मैं यहां देश की बात करने आया हूं।”उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान है। देशभक्ति का मतलब देश की प्रगति में आस्था है। भेदभाव और नफरत से हमारी पहचान को खतरा है। सहिष्णुता ही हमारी ताकत है। धर्म कभी भारत की पहचान नहीं बन सकता, नफरत से देश को सिर्फ नुकसान है। भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हैं।प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत की आत्मा सहिष्णुता में बसती है। यह देश अपने अलग-अलग रंगों, भाषाओं की वजह से बना है, यही इसकी पहचान हैं।

उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसा गांधी जी ने समझाया था कि भारतीय राष्ट्रवाद कोई भिन्न नहीं, न ही आक्रामक और न ही विनाशकारी है।पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि पंडित नेहरू ने ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में साफ लिखा है कि, “मुझे विश्वास है कि राष्ट्रवाद केवल हिंदू, मुसलमानों, सिखों और भारत के अन्य समूहों के विचारधारात्मक एकता से ही बाहर आ सकता है। भेदभाव और नफरत से भारत की पहचान को खतरा है।”

उन्होंने कहा कि विजेता होने के बावजूद सम्राट अशोक शांति का पुजारी था। 1800 साल तक भारत दुनिया के ज्ञान का केंद्र रहा है। भारत के द्वार सभी के लिए खुले हैं।प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सहनशीलता ही हमारे समाज का आधार है। हमारी सबकी एक ही पहचान ‘भारतीयता’ है। हम विविधता में एकता को देखते हैं।उन्होंने कहा कि समाज के अंदर हर विषय पर चर्चा होनी चाहिए। हम किसी विचार से सहमत हो भी सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं, लेकिन चर्चा होनी चाहिए।पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि विचारों में समानता के लिए संवाद होना बेहद जरूरी है। बातचीत से हर समस्या का समाधान संभव है। शांति से ही समृद्धि मिलेगी।प्रणब मुखर्जी ने कहा कि बहुत पहले कौटिल्य ने कहा था कि प्रजा की खुशी में ही राजा की खुशी निहित होती है। प्रजा का हित ही राजा का हित होता है। अब इस बात में कोई शक नहीं रह गया है कि आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को संघ के प्रचार के लिए ही बुलाया गया था।

लगातार कांग्रेस के नेताओं आर अपनी बेटी तक की तरफ से नसीहत के बावजूद आखिरकार पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस के कार्यक्रम में हिस्सा लिया, राष्ट्रवाद की क्लास भी ली, लेकिन कई सवाल फिर भी बचे रहे. प्रणब मुखर्जी ने ध्यान दिलाया कि सदियों से भारत में लोग आते रहे हैं- लेकिन वो यहीं के हो जाते रहे. हालांकि ये सवाल उठ सकता है कि प्रणब ने प्राचीन भारत का जितना ज़िक्र किया, मध्यकाल को उतना याद नहीं किया, मुगल काल का नाम नहीं लिया और छह सौ साल के मुस्लिम आक्रमण की बात की।

काँग्रेस ने किसी घसियारे को राष्ट्रपति नहीं बनाया था…प्रणव दा…आपका ह्रदय से आभार…आपने उन मानदंडो को पुनः जीवंत किया है जिन पर हम गर्व करते आये हैं… आप समस्त उपमाओं… प्रशंसाओं से परे हैं…आप महान हैं और हम भाग्यशाली… इससे अधिक और क्या कहूँ…भावुक हूँ…विव्हल हूँ…गर्वित हूँ…मैं काँग्रेसी हूँ।

✍ शिल्पी सिंह

किसान रैली में मोदी-शिवराज पर बरसे राहुल, कहा सरकार बनी तो 10 दिनों में करूँगा किसानों का कर्ज माफ :

मंदसौर में किसान आंदोलन की पहली बरसी पर बुधवार को यहां पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जिस दिन एमपी में कांग्रेस की सरकार आएगी, उसके 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ हो जाएगा।

राज्य में इसी नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राहुल गांधी की यह घोषणा कांग्रेस के लिए टर्निंग प्वॉइंट भी हो सकती है।

राहुल ने कहा कि 1 साल पहले एमपी की सरकार ने किसानों पर गोली चलवाई। उन्होंने कहा कि पूरे देश में किसान अपना हक मांग रहा है, चिल्ला रहा है और आत्महत्या कर रहा है। राहुल ने कहा कि चाहे वह पीएम मोदी की सरकार हो या फिर किसी भी राज्य में बीजेपी की सरकार को इनके दिलों में किसानों के लिए जगह नहीं है। पिछले साल मंदसौर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 6 लोगों को मौत हो गई थी। आज इसी की बरसी है। रैली में शामिल होने से पहले राहुल गांधी ने मंदसौर घटना के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।

मंदसौर में राहुल गांधी के पहुंचने से पहले प्रशासन ने पिछले साल किसान आंदोलन में मारे गए परिवार वालों को राहुल गांधी से मिलने के रोकने के प्रयास तेज कर दिए थे।

गोली कांड में मारे गए अभिषेक के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि प्रशासन उन्हें धमकी दे रहा है कि राहुल गांधी से नहीं मिले। अभिषेक की मौत के बाद सरकार ने उसके भाई संदीप पाटीदार को नागपुर में चतुर्थ वर्ग की नौकरी दी है। उसे फोन पर बारे के एडीएम आर के वर्मा ने धमकी दी है तुम सरकारी नौकरी में हो और अगर तुम्हारे माता-पिता राहुल गांधी से मिलने गए तो तुम्हारी नौकरी भी जा सकती है।

राहुल की रैली से पहले ही कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि लोगों को वहां पर आने से रोका जा रहा है। राहुल के साथ इस रैली में मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई बड़े नेता मौजूद हैं। रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि आज सिर्फ किसान नहीं बल्कि समाज का हर व्यक्ति परेशान है।

उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान खुद को किसान का बेटा कहते हैं, लेकिन किसानों पर ही गोली चलवाते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार में समर्थन मूल्य बढ़ता था, लेकिन आज बीजेपी की सरकार में किसान समर्थन मूल्य के लिए ही तरस रहा है।ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि किसानों को हत्या का बदला नवंबर में लिया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में किसान परेशान है और मुख्यमंत्री आराम से मज़े में बैठा हुआ है।

✍ शिल्पी सिंह

राहुल गांधी ने ट्वीटर पर प्रधानमंत्री का एक वीडियो शेयर कर उन पर जबरदस्त हमला बोला है :

राहुल गांधी ने सिंगापुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया कार्यक्रम को लेकर उन पर कटाक्ष किया और कहा कि अच्छा है कि उनके कार्यक्रम के सवाल-जवाब पहले से तय होते हैं क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो ‘हम सभी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा हो जाती। ’’

राहुल ने मोदी के इस कार्यक्रम का एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट करते हुए कहा

‘(मोदी) ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जो बिना पहले से तैयारी किए सवालों का जवाब देते हैं, लेकिन उनके ट्रांसलेटर के पास वो सवाल और उनके जवाब पहले से मौजूद होते हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अच्छा है कि वो वास्तविक प्रश्नों का सामना नहीं करते. अगर ऐसा होता तो हम सभी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा हो जाती.’’

राहुल गांधी ने जो ट्वीट किया है उसमें मोदी की ट्रांसलेटर मोदी के जवाब को अंग्रेजी में बता रही हैं. लेकिन वो ऐसी जानकारी देती हैं जो मोदी ने जवाब में नहीं बोली थीं. दावा किया जा रहा है कि एक प्रश्न के जवाब में प्रधानमंत्री ने जो जवाब दिया और उनकी ट्रांसलेटर ने वहां मौजूद दर्शकों के सामने जो कहा, उनमें अंतर था. पीएम मोदी के जवाब की तुलना में ट्रांसलेटर का जवाब काफी लंबा था. कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री का जो वीडियो पोस्ट किया है वो सिंगापुर के नानयांग टेक्नॉलजी यूनिवर्सिटी (एनटीयू) में हुई बातचीत के कार्यक्रम का है।

दावा किया जा रहा है कि एक प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री ने जो जवाब दिया और वो उनकी ट्रांसलेटर ने वहां मौजूद दर्शकों के सामने जो कहा, उससे अलग था। दरअसल, राहुल गांधी पिछले दिनों पीएम मोदी की सिंगापुर यात्रा के दौरान वहां की नान्यांग टेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट और छात्रों से हुए उनकी बातचीत की तरफ इशारा कर रहे थे। बातचीत में पीएम मोदी सवालों के जवाब हिंदी में दे रहे थे और एक महिला अनुवादक उनके जवाबों का अनुवाद कर रही थी। राहुल गांधी ने उसी का वीडियो शेयर किया है। जिसमे मोदी ने इस कार्यक्रम में एक सवाल के जवाब में जो कहा और उसके बाद अनुवादक ने उसका जो अनुवाद किया, उसे सुनकर ज्यादातर लोगों का कहना है कि सवाल-जवाब पहले से तय थे।

पीएम मोदी ने एक सवाल का संक्षिप्त जवाब दिया था, लेकिन अनुवादक ने उस जवाब का लंबा अनुवाद कर दिया और कई ऐसी चीजें भी कह डालीं जो पीएम मोदी ने कहा भी नहीं था।
जिस तरह से अनुवादक ने जवाब दिया, उसे देखकर ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने ऐसा भूलवश किया था। सबसे दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी ने अनुवादक को रोका तक नहीं।
एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि भारतीय प्रधानमंत्री के वक्तव्य का इतने अलग तरीके से अनुवाद होने पर भी भारतीय दल ने ना कोई स्पष्टीकरण दिया और न ही कोई कार्रवाई की।

✍ शिल्पी सिंह

सामने आया स्मृति ईरानी का घोटाला, कांग्रेस ने किया सरकार पर हमला :

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर सांसद निधि के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। गुजरात के आणंद के डीएम ने ठेकेदार को 4.8 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया है। रकम के साथ 18 फीसदी सालाना ब्याज भी लिया जाएगा।

स्मृति ईरानी पर गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और आणंद जिले की आंकलव सीट से विधायक अमित चावड़ा ने आरोप लगाए हैं। अमित चावड़ा ने एक के बाद एक कई सिलसिलेवार ट्वीट कर स्मृति ईरानी पर आरोप लगाए।

अमित चावड़ा ने ट्वीट में लिखा- ”स्मृति ईरानी ने आणंद जिले के माघरोल को मॉडल विलेज बनाने के लिए गोद लिया और उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और शक्ति का स्पष्ट दुरुपयोग करने का मॉडल बानाने के लिए शानदार काम किया। उन्होंने अपने एमपीएलएडी योजना (सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना) के तहत प्राप्त निधि का दुरुपयोग किया।”

चावड़ा ने दूसरे ट्वीट में लिखा- ”स्मृति ईरानी ने दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से सांसद निधि का इस्तेमाल किया। इसके अतिरिक्त स्मृति ईरानी ने और उनके स्टाफ ने अधिकारी को शारदा मजूर कामदार सहकारी मंडली को कॉन्ट्रेक्ट देने लिए मजबूर किया।”

चावड़ा ने इसके बाद लिखा- ”इस मानदंड का भी उल्लंघन किया गया कि पीएमएलएडी योजना के तहत एक समूह को 50 लाख रुपये से ज्यादा के कॉन्ट्रेक्ट नहीं दिए जा सकते हैं। इस सहकारी को निर्धारित सीमा से ऊपर कई बार काम का कॉन्ट्रेक्ट मिला। जून 2017 के महीने में निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया था कि काम उम्मीद के मुताबिक नहीं किया गया और आनुमानित और वास्तविक लागत के बीच विसंगति मिली थी। यह भी कि यद्यपि कई मामलों में परियोजनाओं को कभी पूरा नहीं किया गया लेकिन इस संदेहपूर्ण सहकारी को पूरा पैसा दिया गया और पैसा उन्हें मिलता रहा।”

चावड़ा ने एक ट्वीट में बताया- ”मैंने गुजरात हाईकोर्ट में 2017 में एक जनहित याचिका दायर की थी और शक्ति और धन के भारी दुरुपयोग को प्रकाश में लाया था।”

एक और ट्वीट में चावड़ा ने लिखा- ”आज मैं यह देखकर खुश हूं कि आणंद के जिला कलेक्टर ने स्मृति ईरानी के प्रतिनिधि, शारदा मजूर कामदार सहकारी मंडली तो 18 फीसदी सालाना ब्याज के साथ 4.8 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया है।”

इस तरह के घोटाले सामने आने के बाद कांग्रेस और पूरा विपक्ष सरकार और स्मृति ईरानी पर हमलावर हो गई है। चुकी स्मृति ईरानी PM मोदी की करीबी हैं इसलिये मीडिया इस पर रिपोर्टिंग करने से बचती नजर आई है।

✍ शिल्पी सिंह

राहुल गाँधी के मंदिर जाने पर शोर करने वाले मोदी के मस्जिद जाने पर गूंगे हो गए हैं :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी सिंगापुर दौरे पर गये थे,इस मौके पर वो भारत की धर्मनिरपेक्षता का जमकर प्रचार करते हुए नज़र आ रहे हैं। वो मंदिर भी जा रहे है और मस्जिद भी। सिंगापुर के प्रसिद्ध चुलिआ मस्जिद चले गए। मगर आजतक जामा मस्जिद में या फिर नाज़मुद्दीन दरगाह उन्हें जाते नहीं देखा गया। सवाल उठता है आखिर विदेश में जब धर्मनिरपेक्षता का प्रचार इतने अच्छे से हो सकता है तो अपने देश में क्यों नहीं? प्रधानमंत्री मोदी सिंगापुर की मस्जिद में हरे रंग का साफा भी पहना है और अच्छे से मस्जिद का मुआयना करते हुए नज़र आ रहे है। पीएम के साथ सिंगापुर के संस्कृति मंत्री Grace Yien भी मौजूद थे। मगर कितनी बार देश ऐसा होता है की प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ साथ ज्ञानवापी मस्जिद में कदम नहीं रखते है। अजमेर और निजामुद्दीन दरगाह के लिए चादर भेंट करने के लिए नरेंद्र मोदी आजतक वक़्त नहीं निकल पाए। सिंगापुर के प्रसिद्ध चुलिआ मस्जिद से प्रधानमंत्री के घर की दूरी करीब 6 हज़ार किलोमीटर है तब रास्ता तलाश लेते है, मगर 6 किलोमीटर के अंदर आने वाली मस्जिदों में जाते नज़र नहीं आते है। अजमेर और निजामुद्दीन दरगाह के लिए चादर भेंट करने के लिए नरेंद्र मोदी आजतक वक़्त नहीं निकल पाए। सिंगापुर के प्रसिद्ध चुलिआ मस्जिद से प्रधानमंत्री के ये सवाल उठाना लाज़मी है कि पिछले प्रधानमंत्री में से किसी का ज़िक्र क्यो नहीं होता तो सिर्फ मोदी ही क्यों निशाने पर लिए जाते है? ऐसा इसलिए क्योंकि वो मोदी ही थे जिन्हें साल 2011 सद्भावना उपवास के दूसरे दिन एक मजार के ट्रस्टी सैयद इमाम शाही ने मुस्लिम टोपी पहनानी चाही तो उन्होंने इंकार कर दिया। आज 7 साल गुजर जाने के बाद भी पीएम मोदी में कुछ बदला नहीं है। बदला है तो सिर्फ ये कि वो विदेश में बनी मस्जिदों में जाकर धर्मनिरपेक्षता की सीख दे सकते हैं मगर अपने ही घर से कुछ दूर चलकर उनके जख्मों पर मरहम नहीं लगा सकते जो उन्ही के प्रधानमंत्री रहते कभी अख़लाक़ की शक्ल में आया तो कभी पहलू खान की शक्ल में। पीएम मोदी ने देश के लिए नारा गढ़ा था- ‘सबका साथ सबका विकास’ ये कितना सफल हो पाया इसका पता अगले साल लोकसभा चुनाव में लगेगा। बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राज्य में जनता से सीधे संपर्क के लिए तीन दिन का सद्भावना उपवास रखा था। लेकिन जब 18 सितंबर, 2011 यानी सद्भावना उपवास के दूसरे दिन एक मजार के ट्रस्टी सैयद इमाम शाही ने नरेंद्र मोदी को मुस्लिम टोपी पहनानी चाही तो उन्होंने इंकार कर दिया। उसके बाद नरेंद्र मोदी की ऐसी हिंदूवादी छवि बनी को सीधे भारत के प्रधानमंत्री ही बन गए। देश में आज भी धर्म की राजनीति जारी है। नरेंद्र मोदी इसके अग्रणी पुरोधा हैं। लेकिन दुनिया के सामने पीएम मोदी अपनी इस छवि को उजागर नहीं होने देते। पीएम के मस्जिद जाने की चर्चा ज्यादा हो रही है। ऐसे में अब न्यूज 24 की तेज तर्रार एंकर साक्षी जोशी ने पीएम मोदी के मस्जिद जाने को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘यहाँ इनके भक्त मुल्ला, देशद्रोही, पाकिस्तानी, आतंकी न जाने क्या क्या कहते हैं और प्रधानसेवक बाहर जाकर मुसलमानों को रमज़ान की मुबारक देते हैं. राहुल हिंदू होकर अपने ही देश में मंदिर जाएँ तो हो हल्ला मचाएंगे, ये बाहर मस्जिद जाएँ तो कोई शोर न मचाए. दरअसल शोर दोनों ही समय नहीं मचना चाहिए। जिसे जहाँ जाना है जाए, हर किसी को उसके त्योहार की मुबारकबाद देनी चाहिए। पर ये नहीं कि यहाँ दिन भर गरियाते रहो, नमाज़ पढ़ने पर उन्हें भगा दो, उनकी बच्ची का रेप हो तो धर्म देखकर बलात्कारी को बचाने में जुट जाओ और बाहर जाकर मुस्लिम देश को कहो रमज़ान मुबारक, देखो हम कितने अच्छे हैं! अब भारत में ये सवाल उठने लगा है कि पीएम अपने देश में तो धर्म की राजनीतिक करते हैं। मंदिर-मस्जिद, कब्रगाह-श्मशान और दिवाली-ईद के नाम पर वोट मांगते हैं और विदेशों में जाकर धर्मनिरपेक्ष होने का ढ़ोंग करते हैं!

✍ शिल्पी सिंह

फर्जी वोटर को लेकर चुनाव आयोग से मिल कांग्रेस नेताओं ने की शिकायत, हार के डर से MP में भाजपा कर रही फर्जीवाड़ा :

मध्य प्रदेश में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य में कथित फर्जी वोटरों के मामले ने तूल पकड़ लिया है।

इस मामले में रविवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से शिकायत की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार की मिलीभगत से राज्य में 60 लाख से भी अधिक फर्जी मतदाता तैयार किए गए हैं।

मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा,
‘यह सब बीजेपी का किया धरा है। यह कैसे संभव है कि 10 वर्षों में जनसंख्या 24 फीसदी बढ़ी लेकिन वोटरों की संख्या 40 फीसदी बढ़ गई? हमने हर विधानसभा की मतदाता सूची की जांच की। 1 वोटर का नाम 26 सूचियों में है और इसी तौर के मामले अन्य जगहों पर भी हैं।’

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा,
‘हमने चुनाव आयोग को तकरीबन 60 लाख फर्जी वोटरों के मामले में सबूत सौंप दिए हैं। वोटर लिस्ट में इन नामों को जानबूझकर जोड़ा गया है। यह प्रशासनिक लापहवाही नहीं बल्कि प्रशासनिक दुरुपयोग है।’

कांग्रेस का कहना है कि नए वोटरों के कारण भाजपा ने सत्ता हासिल की थी और वह एक बार फिर वहीं कोशिश कर रही है।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार का कार्यकाल इसी साल अंत में खत्म हो रहा है और इससे पहले यहां चुनाव होने हैं। राज्य में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। भाजपा के सबसे मजबूत माने जाने वाले इस राज्य में शिवराज अपने चौथे कार्यकाल के लिए चुनावी मैदान में होंगे। इस बार किसान आंदोलन, महिलाओ के खिलाफ अपराध और भ्रष्टाचार के करण प्रदेश के लोगो मे सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है।

✍ शिल्पी सिंह

यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने दिया ‘दिव्य’ ज्ञान, बोले- टेस्ट ट्यूब से हुआ सीता जी का जन्म :

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा का रामायण काल का ज़िक्र करना और सीता को टेस्ट ट्यूब बेबी बताने के बाद अब उनपर चारों तरफ से आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया है। दरअसल डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने बेतुके बयान देने वालों में अपना नाम शामिल करवा लिया है। उन्होंने रामायण काल का ज़िक्र करते हुए सीता को टेस्ट ट्यूब बेबी करार दिया है। उनका कहना है कि सीता का जन्म मिट्टी के घड़े से हुआ था, यानी उस समय भी टेस्ट ट्यूब से बच्चों के पैदा होने की तकनीक मौजूद थी। उपचुनाव में हार के बाद उम्मीद की जा रही थी बीजेपी के नेताओं में संजीदगी आएगी मगर ऐसा हुआ नहीं। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने बेतुके बयान देने वालों में अपना नाम शामिल करवा लिया है। उन्होंने रामायण काल का ज़िक्र करते हुए सीता को टेस्ट ट्यूब बेबी करार दिया है। उनका कहना है कि सीता का जन्म मिट्टी के घड़े से हुआ था, यानी उस समय भी टेस्ट ट्यूब से बच्चों के पैदा होने की तकनीक मौजूद थी।
बात यहीं नहीं रुकी। उन्होंने नारद मुनी को दुनिया का पहला पत्रकार भी ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता कोई आधुनिककाल से शुरू नहीं हुई थी, ये महाभारत काल से चली आ रही है। उन्होंने आगे कहा, “आपका गूगल तो अभी शुरू हुआ है, लेकिन हमारा गूगल बहुत पहले ही शुरू हो गया था। नारद मुनि ज्ञान के भंडार थे। वह तीन बार नारायण कह कर कहीं भी पहुंच सकते थे और किसी को भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर संदेश पहुंचा सकते थे।” उन्होंने कहा कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन, प्लास्टिक सर्जरी, गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत, परमाणु परीक्षण और इंटरनेट जैसी तमाम आधुनिक प्रक्रियाएं पौराणिक काल में ही शुरू हो गई थीं। इससे पहले बीजेपी के कई नेता रामायण और महाभारत को लेकर विवादित बयान देकर पार्टी की कई बार फजीहत करा चुके हैं। 18 अप्रैल को त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देब ने अगरतला में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि देश में महाभारत युग में भी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध थीं, जिनमें इंटरनेट और सैटेलाइट भी शामिल थे। उन्होंने कहा था कि महाभारत के दौरान संजय ने हस्तिनापुर में बैठकर धृतराष्ट्र को बताया था कि कुरुक्षेत्र के मैदान में युद्ध के दौरान क्या-क्या हो रहा है। इसका मतलब यह है कि उस समय भी इंटरनेट और सैटेलाइट थे। डिप्टी सीएम ने कहा कि आज जिस गूगल को आप लोग हर विषय के जानकार के रूप में जानते हैं, महाभारत काल में एक विशेष चरित्र हुआ करता थे ‘नारद’ मुनि जो कभी भी, कहीं भी पहुंच जाते थे और हर समस्या का निदान सुझा देते थे। वह भी केवल तीन बार नारायण-नारायण बोलकर। पल भर में कोई भी संदेश कहीं भी पहुंचा देते थे।” उन्होंने कहा, हमें अपने गौरवशाली अतीत को कभी नहीं भूलना चाहिए। इस बीच बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व राजद नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा पर करारा तंज कसा है। तेजस्वी यादव ने दिनेश शर्मा के ‘महाभारत काल से ही शुरू हो गई थी पत्रकारिता’ वाले खबर को शेयर करते हुए लिखा है, “और 2014 से 2017 के दौरान पत्रकारिता समाप्त हो गई।” साथ ही उन्होंने डिप्टी सीएम को धन्यवाद भी दिया है। सोशल मीडिया पर एक कार्यक्रम का वीडियो वायरल हुआ है जिसमें शर्मा को कहते सुना जा सकता है, ‘हमें यह पता लगता है कि राम चन्द्र जी जब (लंका से) लौटे तो पुष्पक विमान से वापस आए। उस समय भी विमान था। हम हर टेक्नोलॉजी को, जैसे कहते हैं कि सीता जी का जन्म हुआ तो घड़े से हुआ, तो उस समय टेस्ट ट्यूब बेबी का कोई ना कोई प्रोजेक्ट रहा होगा।
उन्होंने कहा, ‘जनक जी ने जो हल चलाया और घड़े के अंदर से निकली बेबी सीता जी बन गई, ये कोई ना कोई टेक्नोलॉजी, जैसे आजकल का टेस्ट ट्यूब बेबी है, वैसा कुछ रहा होगा।’ ऐसे बिना पढ़े लिखे लोग नेता हो जाते है सिर्फ पैसे के दम पर सत्ता में आते है जनता को डरा धमका कर।

शिल्पी सिंह

यूक्रेन से रक्षा सौदे में मोदी सरकार के घूसखोरी पर राहुल ने किया सरकार पर हमला :

यूक्रेन के साथ रक्षा सौदे में घूसखोरी के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. राहुल ने पीएम मोदी से कथित घूसखोरी मामले में लिप्त रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है. इससे पहले कांग्रेस पार्टी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

राहुल गाँधी का ट्वीट

राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों पर लाखों डॉलर की घूस लेने का आरोप है, मोदी जी आप खुद को चौकीदार बताते है, मेरी अपील है कि आप अपने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें।

इस मामले पर कांग्रेस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह काफी गंभीर मसला है और इसके लिए एनडीए सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है. पार्टी नेता मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार ने गोपनीयता कानून का दुरुपयोग कर इस मसले को दबाने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि हम बीजेपी सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या यह बात सही है कि जो करार की शर्तें थीं, वह पूरा न होने के बावजूद रक्षा मंत्रालय ने सौदे को आगे बढ़ाने की इजाजत दी और इसमें 17.5 करोड़ की घूस का पैसा एक ग्लोबल कंसल्टेंट के खाते में जमा हुआ।

यूक्रेन सरकार ने भारत से हुए एक रक्षा विमान सौदे में घूसखोरी की जांच शुरू की है. यूक्रेन के एंटी करप्शन ब्यूरो ने आरोप लगाया है कि एएन-32 विमानों के स्पेयर्स की खरीद में भारत के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को 17.55 करोड़ रुपये का घूस दिया गया।

गौरतलब है कि यूक्रेन की सरकारी कंपनी स्पेट्सटेक्नो एक्सपोर्ट ने भारत के रक्षा मंत्रालय के साथ 26 नवंबर, 2014 को एक समझौता किया था, जिसके तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को स्पेयर्स की आपूर्ति की जानी थी. इसके बाद स्पेट्सटेक्नो एक्सपोर्ट ने एक गुमनाम-सी कंपनी ग्लोबल मार्केटिंग एसपी लिमिटेड के साथ इस सौदे को लागू करने के लिए समझौता किया. इसकी वजह से ही यूक्रेन के नेशनल एंटी करप्शन ब्यूरो को इस सौदे पर संदेह हुआ.
यूक्रेन का आरोप है कि रक्षा सौदा हासिल करने में मदद के लिए भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को 17.5 करोड़ रुपये का घूस दिया गया. यूक्रेन के एनएबी ने इस सौदे में ग्लोबल मार्केटिंग की भूमिका के बारे में जानकारी मांगी है. एनएबी ने दुबई के नूर इस्लामिक बैंक से भी लेनदेन की जानकारी मांगी है.

✍ शिल्पी सिंह

लोकसभा विधानसभा उपचुनाव में देश भर में BJP को सूपड़ा साफ, विपक्ष की जीत :


देश की 4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे साफ हो चुके हैं। उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड में विपक्षी दलों के महागठबंधन ने भाजपा को करारी मात दी है। उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट और नुरपूर विधानसभा सीट पर अखिलेश-मायावती-अजीत चौधरी की तिकड़ी मोदी और योगी पर हावी रही है। कैराना में लोकदल की प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने भाजपा उम्मीदवार मृगांका सिंह को हराया। वहीं सपा प्रत्याशी नईमुल हसन ने भाजपा की अवनी सिंह को 6211 वोटों से हराया। वहीं बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने जेडीयू-भाजपा गठबंधन से जोकीहाट विधानसभा सीट छीन ली। झारखंड में विपक्षी दलों की एकजुटता के आगे सत्तारूढ़ दल भाजपा की एक न चली और वह झारखंड मुक्ति मोर्चा से सिल्ली और गोमिया विधानसभा की सीटें छीनने में नाकाम रही। उधर, कर्नाटक की राजराजेश्वरी नगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने अपना वजूद बरकरार रखा। यहां कांग्रेस प्रत्याशी मुनिरत्ना ने 41,162 वोटों से जीत हासिल की है। महाराष्ट्र की पालघर लोकसभा सीट भाजपा ने 29, 572 वोटों से जीत ली है। वहीं, भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर एनसीपी ने हासिल की। बिहार की जोकीहाट विधानसभा सीट पर लालू यादव की राष्टीय जनता दल ने जीत दर्ज की है। पंजाब की शाहकोट विधानसभा सीट कांग्रेस ने जीत ली है। जबकि पश्चिम बंगाल की मेहेशतला से टीएमसी आगे चल रही है। झारखंड की गोमिया और सिल्ली विधानसभा सीट से जेएमएम को जीत मिली है। उत्तराखंड की थराली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की, तो पंजाब की शाहकोट विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया ने जीत ली। वहीं, केरल की चेंगानूर विधानसभा सीट सीपीआईएम ने जीत ली, तो महाराष्ट्र की पलूस कडेगाव सीट कांग्रेस ने जीती है। निर्विरोध जीत दर्ज की।

4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों के नतीजें:

लोकसभा:

कैराना (यूपी) – लोकदल (जीत) , पालघर (महाराष्ट्र)- भाजपा (जीत), गोंदिया (महाराष्ट्र) – एनसीपी (जीत), नगालैंड -एनडीपीपी (जीत)

विधानसभा :

नूरपुर (उप्र) समाजवादी पार्टी, थराली (उत्तराखंड) भाजपा, शाहकोट (पंजाब) कांग्रेस, जोकीहाट (बिहार) राष्ट्रीय जनता दल, गोमिया (झारखंड) झारखंड मुक्ति मोर्चा, महेशतला (पं. बंगाल) टीएमसी, आरआर नगर (तमिलनाडु) कांग्रेस, सिल्ली (झारखंड) झारखंड मुक्ति मोर्चा, चेंगन्नूर (केरल) सीपीआईएम, अंपाती (मेघालय) कांग्रेस, पलूस कडेगाव (महाराष्ट्र) कांग्रेस

✍ शिल्पी सिंह

आरएसएस को राष्ट्रवाद सिखाने और कांग्रेस का योगदान बताने जायेंगे प्रणव मुखर्जी :

भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 7 जून को नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में आयोजित संघ के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस खबर के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गयी है। बता दें कि प्रणब मुखर्जी ने इस कार्यक्रम में शामिल होने की पुष्टी कर दी है और सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि मुखर्जी इस कार्यक्रम में राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपने विचार रखेंगे और आरएसएस को आईना दिखाएंगे।

इस मामले को लेकर एक बड़ी सियासी बहस शुरू हो गया है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस पर कोई बड़ा आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन दिल्ली से पूर्व लोकसभा सांसद संदीप दीक्षित ने प्रणब मुखर्जी के इस दौरे को लेकर कुछ सवाल जरूर उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रणब मुखर्जी सांप्रदायिकता और हिंसा के मामले को लेकर आरएसएस की भूमिका पर पहले सवाल उठा चुके हैं और ये बातें आरएसएस को भी पता होंगी।

प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि “आरएसएस जैसा कोई देश विरोधी संगठन नहीं है। इसे इस देश में नहीं होना चाहिए।” संदीप दीक्षित ने सवाल उठाया कि “ऐसा शख्स जो आरएसएस को सांप से भी जहरीला मानता है, उसे कार्यक्रम में बुलाया जा रहा है, तो क्या प्रणब मुखर्जी ने अपना विचार बदल लिया है या फिर आरएसएस में कोई अभिमानी ही नहीं बचा है।”

‘‘प्रणब दादा के संघ के बारे में लगभग वही विचार रहे हैं जो कांग्रेस के रहे हैं कि आरएसएस एक फासीवादी संगठन है. आरएसएस की मूल विचाराधारा ही कांग्रेस के खिलाफ है. मुझे यह अटपटा लग रहा है कि आखिर वह उनके कार्यक्रम में क्यों शामिल होने जा रहे हैं?’’ यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार किया है, पूर्व सांसद दीक्षित ने कहा, ‘‘मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगता है कि पार्टी को बुरा जरूर लगा होगा। ’’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार करने के मुद्दे पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री सीके जाफर शरीफ ने पूर्व राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उनके इस कदम पर आश्चर्य व्यक्ति किया और कहा कि आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने के बारे में जानबूझकर वह अन्य धर्मनिरपेक्ष लोगों की भांति ही स्तब्ध हैं।

शरीफ ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उनका मानना है कि जो व्यक्ति दशकों तक राजनीति में धर्मनिरपेक्ष रहा, विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं, जिसमें राष्ट्रपति जैसे उच्च पद भी शामिल है, उनका संसदीय चुनाव से पहले संघ परिवार के कार्यक्रम में जाना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपसे इस पर फिर से विचार करने और धर्मनिरपेक्षता तथा देश हित में संघ परिवार के कार्यक्रम में जाने से बचने का अनुरोध करता हूं.’’

देश के पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी जल्द ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आरएसएस ने सात जून को अंतिम वर्ष के स्वयंसेवकों के विदाई संबोधन के लिए पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी को आमंत्रित किया है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से 45 साल से कम उम्र के करीब 800 कार्यकर्ता आरएसएस हेडक्वार्टर कैंप में शामिल होंगे।

बता दें कि 82 साल के प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के दिग्गज नेता रह चुके हैं। कांग्रेस से उनका जुड़ाव 1969 से रहा है। प्रणब मुखर्जी जल्द ही इंदिरा गांधी विश्वासपात्रों की सूची में आ गये। वह उनके विश्वसनीय नेताओं में से एक थे। वे 1982-84 के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री बने। वह कांग्रेस के हमेशा संकटमोचक रहे है। मुखर्जी 2012 से लेकर 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे।

✍ शिल्पी सिंह

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